पकड़े जाने पर ननद के साथ मिल कर चुदाई

हेलो दोस्तों, मैं आपकी संगीता मेरी और एक चुदाई की दास्तान सुनने आई हू. मेरी आगे 36 साल है, और 3 बच्चे भी है. फिर भी मैं बहुत चुड़क्कड़ हू. मेरा फिगर 34-28-38 है, और हाइट 5’4” है. वैसे मेरे पति के साथ मेरे शारीरिक संबंध आचे है.

पर मुझे अब गैर मर्दों से चूड़ना अछा लगता है. आपने मेरी पिछली कहानी पढ़ी होगी, तो आपको पता होगा कैसे मेरी अपने बड़ी बेहन के दामाद परेश जी से ठुकाई हुई.

एक दिन मेरी बड़ी दीदी के घर उसके छ्होटे बेटे अरुण की वाइफ की गोध-भराई की रसम थी. मैने उस दिन येल्लो कलर की सारी पहनी थी, जिसमे मेरा भरा हुआ शरीर बहुत लोगों को मेरी चुदाई करने के लिए उत्तेजित कर रहा था. परेश जी से मैं चुड चुकी थी, तो वो मुझे छोड़ने के लिए कोई अची जगह ढूँढ रहे थे.

फंक्षन में ज़्यादा लोगों के होने से कुछ बात बनी नही, पर परेश जी की नज़र मुझ पर से हॅट नही रही थी. दोपहर को सब विधि कंप्लीट होने के बाद बहू के माइके वाले उसको उनके घर लेकर चले गये. मैने सोचा 2-4 दिन दीदी के घर रुक जाती हू, क्या पता मेरे भनजे अरुण से चूड़ने का मौका मिल जाए.

कुछ दोपहर के 3 बजे तक सारे मेहमान अपने घर जेया चुके थे. कुछ रिश्तेदार रुके थे. सब को थकान लगी थी तो वो सब आराम करने के लिए चले गये. मुझे किचन में तोड़ा काम था, वो ख़तम करने रुकी हुई थी. परेश जी ने मुझे अकेला देख कर मुझे पीछे से पकड़ लिया. मैं तो दर्र गयी. मैने उनको अपने आप से अलग किया और कहा-

मैं: अर्रे दामाद जी, क्या कर रहे हो? ये कोई जगह है ये सब करने की! कोई देख लेता तो क्या सोचता?

परेश जी: क्या मौसी जी, आप भी इतना दर्र रही हो. सब सो चुके है. मैं सब कुछ पता करके आया हू.

मैं: फिर भी यहा ठीक नही है.

अब वो मेरा हाथ पकड़ कर मुझे स्टोररूम में लेकर गये. मैं उनकी हरकतों से गरम हो चुकी थी. मैने उनको वाहा कस्स कर गले लगाया, और किस करने लगी. हम एक-दूसरे के होंठो को अची तरह चूस रहे थे. साथ में वो मेरे बूब्स दबा रहे थे.

मैं मदहोश हो रही थी. वो मेरे गले को चूम रहे थे, और मैं भी कराह रही थी. मैं उनके बालों में हाथ घुमा रही थी, और वो लगातार मेरी बॉडी को चूस रहे थे. मेरे से अब कंट्रोल नही हुआ, और मुझे लंड चूसने की तलब हुई. फिर मैं गुटनो पर बैठ गयी. परेश जी भी मेरी तड़प को अची तरह समझ गये थे. उन्होने पंत को घुटनो तक कर दिया.

मैं भी उनका मोटा लंबा लंड मूह में लेकर चूसने लगी. हम दोनो हवस की दुनिया में इतना खो गये की हम सब कुछ भूल चुके थे. अचानक से आवाज़ आई और हम दोनो चौंक गये. हमे लगा आज तो हमारी खैर नही थी. बहुत बुरी तरह पकड़े गये थे. स्टोररूम के दरवाज़े पर मेरे छ्होटे भाई की बीवी यानी की मेरी भाभी किंजल खड़ी थी. और मेरे मूह में परेश जी का लंड था.

किंजल: आप दोनो यहा क्या कर रहे है? (जब उसको पता चला की मैं लंड चूस रही थी, तो गुस्से में बोली) हे भगवान आप दोनो कैसे इंसान हो? परेश जी आप कितने गतिया इंसान हो. और दीदी आप को शरम नही आई अपनी भांजी के पति के साथ ऐसा गंदा काम करते हुए?

हम दोनो इतना दर्र गये थे की आपको कैसे बतौ? बस ऐसा लग रहा था, की आज हम दोनो की बहुत बदनामी होने वाली थी. सोच कर ही मेरी धड़कन तेज़ हो गयी. कुछ समझ ही नही आ रहा थी क्या करू. दर्र के मारे परेश जी के माथे पर पसीना छ्छूट गया था.

फिर मैने देखा की किंजल हम दोनो को दाँत रही थी. पर उसकी नज़र बार-बार परेश जी के लंड पर जेया रही थी. मैं समझ गयी की परेश जी का लंबा मोटा और बेहद खूबसूरत लंड देख कर उसका भी मॅन मचल गया था.

किंजल 32 साल की बेहद खूबसूरत दूध जैसी गोरी औरत है. उसका हाइट 5’5” और फिगर 32-27-34 है. उसका एक 8 साल का बेटा है, पर दिखने में 25-26 की लगती थी. उसने रेड कलर की सारी पहनी थी, जो उसको और खूबसूरत बना रही थी. मैने सोच लिया की अब कुछ नही किया तो बहुत देर हो जाएगी. मैने किंजल भाभी को कस्स कर पकड़ा, और धीमे से उसके कान में कहा-

मैं: भाभी परेश जी का लंड बेहद मज़ा देता है. मेरे साथ तुम भी इसका आनंद उठा लो.

मेरी बात सुन कर उसकी आँखें चमक गयी. मैने उसकी आँखों में चूड़ने की तड़प देख ली. उसकी बक-बक ख़तम हो गयी और वो बिल्कुल चुप हो गयी. मैने फिरसे कहा-

मैं: भाभी इतना मत सोचो. सही मौका है. ये बात हम तीनो के बीच ही रहेगी.

मैने किंजल भाभी को भरोसा दिया. मैं अब घुटनो पर बैठ गयी और उनका हाथ खींच कर उसको भी मेरे पास बिता दिया. किंजल परेश जी का लंड बड़े आचे से देख रही थी. उसकी साँस थम गयी थी. परेश जी समझ गये की अब उनको क्या करना था.

किंजल ने अपनी नज़रें झुका ली, और वो खामोश हो गयी. परेश जी ने उसका चेहरा उपर किया, और वो उनकी आँखों में देख रही थी. परेश जी ने मुस्कुरा कर उसको लंड चूसने के लिए इशारा किया. मैने लंड पकड़ कर उसके मूह के पास कर दिया और उसकी पीठ को सहलाते हुए कहा-

मैं: भाभी आप इसको चख कर देखो, बड़ा मज़ा आएगा. मैं दरवाज़े के पास देखती हू कोई आएगा तो इशारा कर दूँगी.

मेरे इतना कहती ही किंजल ने आँखें बढ़ कर ली और अपना तोड़ा मूह खोला. परेश जी ने लंड को उसके मूह में दिया. पहले तो उसने लिया नही, पर अब वो आँखें बंद करके उसके लंड को आचे से चूसने लगी. परेश जी अब अपनी मामी सास के मूह की चुदाई कर रहे थे. उनकी भी सिसकारी निकल रही थी.

कुछ 5 मिनिट लंड चूसने के बाद किंजल भाभी ने अपनी आँखें खोली, और लंड को बाहर निकाल कर मेरी और देख रही थी. मैने भी मुस्कुरा कर उसकी और देखा और कहा-

मैं: दामाद जी जो मज़ा मौसी सास को देते हो, वैसा मज़ा मामी सास को भी दिलाओ. आप कितने नसीब वाले है, की एक ही परिवार की खूबसूरत औरतों को छोड़ना आपके नसीब में लिखा है.

मेरी बात सुनते ही परेश जी ने भाभी के चेहरे को दोनो हाथो से पकड़ा, और उसके होंठ चूसने लगे. थोड़ी देर में भाभी भी उनका आचे से साथ देने लगी. वो उसकी गर्दन से लेकर पेट पर किस करने लगे, और साथ में पल्लू गिरा कर ब्लाउस के उपर से बूब्स पर किस कर रहे थे.

किंजल भाभी ने अपने ब्लाउस को आयेज से खोल दिया, और उसने नीचे ब्लू कलर की ब्रा पहनी थी. अब दामाद जी ने भाभी की सारी और ब्लाउस को निकाल दिया. भाभी अब ब्लू ब्रा और पेटिकोट में थी. उसका दूध जैसा बदन संगेमरमर जैसा चमक रहा था. भाभी ने अपने खुले रखे बालों का जूड़ा बनाया, और दामाद जी को धक्का देकर अनाज की बोरी पर बिता दिया.

मैने पीछे से देखा उसकी पतली कमर अंगडाया लेकर मटक रही थी. पीछे से उसकी ब्लू ब्रा की स्ट्रॅप और गोरी नंगी पीठ क्या काहु दोस्तों. मेरी भाभी की खूबसूरती की जितनी तारीफ करू उतनी कम है.

अब किंजल भाभी परेश जी की गोदी मैं बैठ गयी. परेश जी अपना हाथ उनका गोरे बदन पर घुमा रहे थे. उससे भाभी की आ निकल रही थी. सच काहु तो दोनो एक-दूसरे में खो चुके थे. मैं भी उनके एक-दूसरे की और आकर्षित होता देख मॅन ही मॅन खुश हो रही थी. क्यूंकी उस दिन तो मेरी जान बची थी.

अब परेश जी ने पीछे से ब्रा के हुक खोल दिए, और भाभी के बूब्स को आज़ाद कर दिया. उनके बूब्स बहुत मुलायम थे. वो नीचे की और झुक गयी. दामाद जी बूब्स को हल्के हाथो दबाने लगे. किंजल भाभी की तो आ निकल रही थी. अब उन्होने भाभी का मूह उनकी और करके गोदी में बिता दिया, और बारी-बारी उनके गुलाबी निपल्स को चूसने लगे.

किंजल भाभी को देख कर ऐसा लग रहा था जैसे एक कुवारि लड़की पहली बार अपनी छूट छुड़वा ने आई हो. वो बहुत शर्मा रही थी. मैने कहा-

मैं: भाभी अब देर ना करे, दामाद जी के साथ मज़ा कर भी लीजिए. वैसे भी उनका घोड़ा बहुत देर तक भागता है. कही आप तक ना जाओ.

किंजल: दीदी मैं तक गयी तो आप चले आना. वैसे देखा जाए तो मैं आप दोनो के बीच कबाब मैं हड्डी बनी हू.

परेश जी: मामी जी आप जैसी हड्डी तो मैं चूस कर ख़ौँगा. आज आप मेरे साथ ऐसा अनुभव करेंगी की मौसी जी की तरह मेरी दीवानी बन जाओगी.

अब परेश जी उठ कर खुद नंगे हो गये. उनका बड़ा और मोटा लंड एक और छूट फाड़ने के लिए बेताब हो रहा था. अब भाभी ने मेरी और परेश जी की और देख कर शरमाते हुए अपने पेटिकोट का नाडा खोल दिया. वो सरक कर नीचे गिरा. मैने देखा उसकी पिंक पनटी आयेज से गीली हो गयी थी.

अब परेश जी ने उसको कस्स कर गले लगाया, और भाभी के होंठो को चूसना शुरू कर दिया. उनका लंड पनटी के उपर से भाभी की छूट पर रग़ाद रहा था. भाभी की आँखों में अब चूड़ने के लिए उत्तेजना दिख रही थी. उन्होने अपने हाथो से पनटी निकाल कर दामाद जी को दिखाते हुए ज़मीन पर फेंकी.

मैने देखा उनकी छूट पर हल्के बाल थे. पर उनकी छूट गुलाबी थी. वो देख कर दामाद जी की आँखों में चमक आ गयी. हमने देखा उसकी छूट से रस्स निकल रहा था, जो उसकी जांघों तक बह कर चला आया था.

मेरे से अब रहा नही गया, और मैं गाते पर कुण्डी लगा कर दामाद जी के पैरों में बैठ कर उनके लंड को चूसने लगी. मैने उनके लंड को आचे से चूस कर टाइट किया और कहा-

मैं: भाभी देखो अब ये आपकी चुदाई के लिए तैयार हो गया है. आइए यहा लेट जाइए. अब आप भी मेरी तरह चरम सुख पर आने के लिए तैयार हो जाइए.

अब दामाद जी ने भाभी की छूट पर अपना लंड सेट किया और एक धक्का मारा. पर लंड फिसल गया. भाभी ने कहा-

किंजल: दामाद जी धीरे से, आपके मामा का आपके जितना मोटा नही है. प्लीज़ ज़रा मेरी और देख कर प्यार से करना.

मैं: दामाद जी आपकी मामी सास बहुत नाज़ुक है, तो ज़रा संभाल कर.

अब उन्होने छूट के मूह को खोल कर लंड रखा, और मैने भी लंड को छूट के दरवाज़े पर दबा कर रखा. अब जैसे ही परेश जी आचे से ज़ोर लगाया उनका टोपा अंदर घुस गया. किंजल की चीख निकल गयी. मैने उसके मूह को अपने हाथो से दबा दिया, और दामाद जी को छोड़ने के लिए इशारा किया.

दामाद जी भी बड़े हरामी थे. उन्होने एक ही झटके में पूरा लंड छूट में उतार दिया. वो अपने हाथ पैर झटपटा रही थी. उनकी आँखों से आँसू निकल रहे थे. उनकी आँखें मुझे ये कह रही थी, की वो इस दर्द को से नही पा रही थी. मानो लंड निकालने के लिए मिन्नटे कर रही थी.

मैने दामाद जी से धीमे-धीमे चुदाई करने के लिए कहा. थोड़ी देर में भाभी सिसकियाँ करने लगी, और नीचे से गांद उठा कर छुड़वाने लगी. मैं समझ गयी अब उसको मज़ा आने लगा था. दामाद जी ने भी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी. किंजल भाभी भी चुदाई के नशे में डूब कर बड़े और मोटे लंड का आनंद लेने लगी थी. वो दोनो लगातार 15 मिनिट तक चुदाई करते रहे. अब दामाद जी ने उनका काम रस्स किंजल की छूट में बहा दिया.

परेश जी: मामी जी बहुत मज़ा आया आपके साथ. आप बेहद खूबसूरत हो. आपकी छूट तो कुँवारी लड़की की तरह टाइट है.

किंजल भाभी: होगी ही ना. आपके मामा मेरे पर इतना ध्यान कहा देते है. (मेरा हाथ पकड़ कर) दीदी आप नही होते तो शायद मैं अपने बदन की प्यास कभी बुझा ही नही पाती.

मैं: कोई बात नही भाभी. अब से मैं हू ना आपके साथ. चलो अब दोनो कपड़े पहन लो. ज़्यादा देर यहा रहना ठीक नही है. वैसे भी मैं 2-3 दिन यहा रुकने वाली हू.

किंजल: ठीक है, मैं भी रुक जाती हू.

मैं: क्या बात है भाभी अब तो आप भी दामाद जी के लंड की दीवानी बन गयी हो ( वो शरमाने लगी).

अब हम भाभी और ननद क्या मज़ा करती है, वो मेरी किसी और कहानी में बतौँगी. आपको स्टोरी अची लगी हो तो प्लीज़ कॉमेंट करे.

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