मौसेरी बहन की चुदाई

मेरा नाम चरण है. मै एक छोटे से बस्ती का रहने वाला था. मेरे पिता प्राइमरी स्कूल के मास्टर थे. मेरी उम्र 15 वर्ष की थी जब मै और मेरे माता पिता अपने ननिहाल गया हुआ था. वहां मेरे मामा की शादी थी. वहां पर सभी सगे संबंधी जुटे थे. हम लोग शादी के पंद्रह दिन पहले ही पहुँच गए थे. मेरे पिता जी हम लोग को पहुंचा कर वापस अपनी ड्यूटी पर चले गए. और शादी से एक-दो दिन पहले आने की बात बोल गए. वहां पर दिल्ली से मेरे मौसा भी अपने बाल बच्चों के साथ आये थे. मेरी एक ही मौसी थी.

उनको एक बेटा और एक बेटी थी. बेटा का नाम वीरू था और उसकी उम्र लगभग सोलह साल की थी. जबकी मौसी की बेटी का नाम नीरू था और उसकी उम्र लगभग पंद्रह साल की थी. हम तीनो में बहुत दोस्ती थी. मेरे मौसा भी अपने परिवार को पहुंचा कर वापस अपने घर चले गए. उनका ट्रांसपोर्ट का बिजनस था. पहले वो भी साधारण स्तर के थे लेकिन ट्रांसपोर्ट के बिजनस में कम समय में ही काफी दौलत कम ली थी उन्होंने. उनका परिवार काफी आधुनिक विचारधारा का हो गया था. हम लोग लगभग सात या आठ वर्षों के बाद एक दुसरे से मिले थे.

मै , वीरू और नीरू देर रात तक गप्पें हांकते थे. नीरू पर जवानी छाती जा रही थी. उसके चूची समय से पहले ही विकसित हो चुके थे. मै और वीरू अक्सर खेतों में जा कर सेक्स की बातें करते थे. वीरू ने मुझे सिगरेट पीने सिखाया. वीरू काफी सारी ब्लू फिल्मे देख चूका था. और मै अभी तक इन सब से वंचित ही था. इसलिए वो सेक्स ज्ञान के मामले में गुरु था.

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एक दिन जब हम दोनों खेतों की तरफ सिगरेट का सुट्टा मारने निकलने वाले थे तभी नीरू ने पीछे से आवाज लगाई – कहाँ जा रहे हो तुम दोनों?

मैंने कहा – बस यूँ ही, खेतो की तरफ, ठंडी ठंडी हवा खाने.

नीरू – मै भी चलूंगी.

मै कुछ सोचने लगा मगर वीरू ने कहा – चल

अब वो भी हमारे साथ खेतों की तरफ चल दी. मै सोचने लगा ये कहाँ जा रही है हमारे साथ? अब तो हम दोनों भाइयों के बिछ सेक्स की बातें भी ना हो सकेंगी ना ही सिगरेट पी पाएंगे. लेकिन जब हम एक सुनसान जगह पार आये और एक तालाब के किनारे एक पेड़ के नीचे बैठ गए तो वीरू ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और एक मुझे दी. मै नीरू के सामने सिगरेट नहीं पीना चाहता था क्यों की मुझे डर था कि नीरू घर में सब को बता देगी. लेकिन वीरू ने कहा – बिंदास हो के पी यार. ये कुछ नही कहेगी.

लेकिन नीरू बोली – अच्छा…तो छुप छुप के सिगरेट पीते हो ? चलो घर में सब को बताउंगी.

मै तो डर गया. बोला – नहीं, नीरू ऎसी बात नहीं है. बस यूँ ही देख रहा था कि कैसा लगता है. मैंने आज तक अपने घर में कभी नहीं पी है. यहाँ आ कर ही वीरू ने मुझे सिगरेट पीना सिखलाया है.

नीरू ने जोर का ठहाका लगाया. बोली – बुद्धू , इतना बड़ा हो गया और सिगरेट पीने में शर्माता है. अरे वीरू कितना शर्मिला है ये.

वीरू ने मुस्कुरा कर एक और सिगरेट निकाला और नीरू को देते हुए कहा – अभी बच्चा है ये.

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मै चौंक गया. नीरू सिगरेट पीती है?

नीरू ने सिगरेट को मुह से लगाया और जला कर एक गहरी कश ले कर ढेर सारा धुंआ ऊपर की तरफ निकालते हुए कहा – आह !! मन तरस रहा था सिगरेट पीने के लिए.

तब तक वीरू ने भी सिगरेट जला ली थी. वीरू ने कहा – अरे यार चरण, शहर में लडकियां भी किसी से कम नहीं. सिगरेट पीने में भी नहीं. वहां दिल्ली में हम दोनों रोज़ 2 – 3 सिगरेट एक साथ पीते हैं. एकदम बिंदास है नीरू. चल अब शर्माना छोड़. और सिगरेट पी.

मैंने भी सिगरेट सुलगाया और आराम से पीने लगा. हम तीनो एक साथ धुंआ उड़ाने लगे.

नीरू – अब मै भी रोज आउंगी तुम दोनों के साथ सिगरेट पीने.

वीरू – हाँ, चली आना.

सिगरेट पी कर हम तीनों वापस घर चले आये. अगले दिन भी हम तीनो वहीँ पर गए और सिगरेट पी. अभी भी मामा की शादी में 12 दिन बचे थे.

अगले दिन सुबह सुबह मामा वीरू को ले कर शादी का ड्रेस लेने शहर चले गए. दिन भर की मार्केटिंग के बाद देर रात को लौटने का प्रोग्राम था. दोपहर में लगभग सभी सो रहे थे. मै और नीरू एक कमरे में बैठ कर गप्पें हांक रहे थे.

अचानक नीरू बोली – चल ना खेत पर, सुट्टा मारते हैं. देह अकड़ रहा है.

मैंने कहा – लेकिन मेरे पास सिगरेट नहीं है.

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