मौसेरी बहन की कुँवारी चूत

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार, सलाम एवं सभी पाठिकाओं को मेरे भुजंग का प्रणाम।
मेरा नाम आर्य है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। मैं एक गोरा हैंडसम बंदा हूँ, मेरी हाइट 5’11” है और मेरा लंड 7″लंबा और 3″ मोटा है और उसका भी रंग हल्का सांवलापन लिए हुए है।

दोस्तो, मेरा सेक्स से परिचय काफी कम उम्र में हो गया था और मैंने मुठ मारना पोर्न देखना तभी से चालू किया था। जब मैं पढ़ाई कर रहा था, उन्ही दिनों मेरी मौसी की छोटी बेटी जिनका नाम गौरी है, हमारे यहाँ रहने आयी। दरअसल गौरी दीदी ने उसी साल बारहवीं पास की थी और आगे की पढ़ाई के लिए हमारे यहाँ आ गयी थी। वो मुझसे बड़ी थी।

गौरी दीदी का फिगर… दोस्तो, मैं क्या कहूँ, एकदम गुलाबी दूधिया रंग और फिगर 32″ 26″ 34″ उनकी हाइट लगभग 5’4″ है। जब वो हमारे यहाँ आयी तो उनके रहने का इंतज़ाम मेरे ही कमरे में किया गया, मैंने इसका विरोध किया क्योंकि मेरी आदत थी कि जब भी मन किया मैं लंड निकाल के हिलाने लगता।
पर मेरी मम्मी ने एक नहीं सुनी, आखिर गौरी दीदी का सिंगल बेड मेरे ही कमरे में लग गया।

जब गौरी दीदी आयी तो उन्होंने ब्लू जीन्स और वाइट शर्ट पहनी थी। उनका मस्त बदन देख मेरे अंदर का शैतान जाग गया और मैंने आँखों से ही उनको चोदना शुरू कर दिया। मुझे सबसे प्यारी चीज़ उनके लिप्स और चूतड़ लगे; उठी हुई भरी भरी 34″ की गांड।

खैर चूँकि वो शाम को आयी थी तो जल्दी ही सब लोग खाना खा कर टीवी देखने लगे। मेरी और गौरी दी की मुलाकात कई साल बाद हुई थी, बचपन में मेरी और उनकी बहुत बनती थी; उम्र में ज्यादा फर्क न होने से हम दोनों साथ साथ खेलते थे।
तो मैं और गौरी दी छत पर जा कर बचपन की बातें करने लगे।

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थोड़ी देर में उन्हें नींद आने लगी और वो बोली- चलो आर्य, सोते हैं।
मैंने कहा- ठीक है.
और हम दोनों कमरे में आ गए।

दीदी बोली- मैं चेंज कर लेती हूं.
और वो कपड़े ले कर बाथरूम में चली गईं।

जब वो चेन्ज करके आयी तो मैं उन्हें देखता रह गया, उन्होंने स्कर्ट टॉप पहन रखा था। स्कर्ट जांघों तक थी तो उनके गुलाबी पैर चमक रहे थे, पैरों पर एक भी बाल नहीं एकदम चिकने भरे हुए गुलाबी सुडौल पैर।
मेरी नज़र उनके चूचों पर अटक गयी; शायद उन्होंने ब्रा उतार दी थी तो उनके चलने से वो जेली की तरह हिल रहे थे, उनकी शेप देख मेरा लंड सलामी देने लगा।

दीदी ने मुझे उन्हें घूरते पाया तो बोली- क्या देख रहे हो इतनी गौर से?
मैं पहले तो हड़बड़ा गया पर जल्दी ही सँभलते हुए बोला- आप तो गज़ब की सुन्दर हो गयी हो, मोहल्ले में क़त्ल-ए-आम हो जाएगा।
वो हँसने लगी और बोली- अच्छा जी, तो आप शायर भी हो गए हैं।

वो अपने बेड पर लेट गयी और इधर उधर की बातें करते हुए उन्होंने अचानक पूछा- तुमने कोई गर्लफ्रेंड बनायी या नहीं?
मैंने झेंपते हुए कहा- मैं तो अभी छोटा हूँ, गर्लफ्रेंड तो बड़े लड़के बनाते हैं।
उन्होंने हंसते हुए कहा- जब बॉडी पर बाल उग जाये तो कोई बच्चा नहीं होता।
मैंने चौंक कर उनकी तरफ देखा तो उन्होंने जल्दी से कहा- अरे, तुम्हारी भी तो दाढ़ी मूछ आ गयी हैं।
खैर जल्दी ही हम दोनों सो गए।

रात को अचानक मेरी आँख खुली तो मैं उठ कर बाथरूम की साइड जाने लगा। तभी मेरी नज़र दीदी की तरफ गयी, मेरी आँखें फटी रह गयी, नज़ारा ही ऐसा था दोस्तो!
दीदी की चादर एक तरफ हो गयी थी, उनकी स्कर्ट ऊपर को चढ़ कर चूतड़ों से ऊपर खिसक गयी थी, सफ़ेद रंग की लेसेज़ वाली फैंसी पैंटी में से दो बड़े बड़े गुलाबी ख़रबूज़ झांक रहे थे। केले के तने जैसी गुलाबी जाँघें… वाह मेरी तो नींद ही उड़ गयी। मैं बाथरूम से जल्दी जल्दी लौट आया।

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दीदी ने मेरी तरफ पीठ की हुई थी, मैं पहले तो अपने बेड से उनके शानदार चूतड़ देखता रहा, फिर मैं उठा और दीदी के बेड के पास फर्श पर बैठ गया। अब दीदी के चूतड़ एकदम मेरे चेहरे के पास थे।
मैंने हल्के से अपने हाथ दीदी की गांड पर रखे… ओह… क्या अहसास था… आज तक नंगा बदन सिर्फ पोर्न फिल्म में देखा था और आज असलियत में छू कर पता लगा कि क्या अहसास होता है। मेरे बदन की नसें तन गयी गर्म हो गयी.

उधर मेरा लंड आजतक के अपने सबसे सख्त अंदाज़ में तन गया; लंड इस कदर टाइट हो गया कि मुझे दर्द होने लगा।

अब मेरे मन में थोड़ा और पाने की लालसा हुई, मैंने पहले उठ कर दीदी के चेहरे को देखा तो पाया वो थकन से गहरी नींद में सो रही थी। मैं फिर उनकी गांड की तरफ आया और उनके एक चूतड़ पर से उनकी पैंटी की लेस पकड़ कर एक तरफ खिसकने लगा।

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