मासूम बहेन की कामुकता

वो बरसात के दिन थे और मैं यूनिवर्सिटी से जल्दी वापिस आ गया, जब मैं घर पाहूंचा तो ऐज यूषुयल मेन गेट लॉक्ड था क्योंकी मेरी छ्होटी बहन स्कूल से 1 बजे वापिस आती थी और उस वक़्त 11 बजे थे. मैं ने की से मेन गेट खोला और कॉरिडर से गुज़रता हुआ अपने रूम की तरफ बढ़ रहा था कि मुझे शुमैला के कमरे का दरवाज़ा खुला नज़र आया मैं ने अंदर देखा तो शमी सोई हुई थी (शुमैला का निक नेम शमी हे).

मैं हैरान था कि आज शमी स्कूल क्यूँ नही गयी? लेकिन फिर मुझे खुद ही यह ख़याल आया की आज बरसात की वजह से स्कूल में छुट्टी हो गयी हो गी. मैं ने शमी की तरफ देखा वो सोते हुए बुहुत मासूम लग रही थी. मैं ने उसे जगाना मुनासिब ना समझा और अपने रूम में आ गया, बाथ लिया, शॉर्ट्स पहने और फिर नेट लगा के बैठ गया और राज शर्मा की स्टोरीस पढ़ने लगा उस वक़्त मैं ऐक इंसेस्ट (सेक्स वित रिलेटिव्स) की स्टोरी पढ़ रहा था और जैसे जैसे मैं पढ़ता जा रहा था मेरा लंड खड़ा होता जा रहा था.

मेरे दिमाग़ में मेरी छ्होटी बहन शमी का तसवउर आ रहा था जो अपने बेडरूम में सोई हुई थी. मैं आप’को हमारे घर के बारे में बता दूँ. यह आज से 2 साल पह’ले का वाकिया है. मेरा नाम आज़ाद और उमर उस समय 19 साल की थी.तब शमी की उमर यही कोई 18 साल होगी,(अब शुमैला 20 साल की हो चुकी हे). मेरी अम्मी और अब्बू 5 दिन के लिए रिस्तेदारी में गये हुए थे.

शमी की बिल्कुल गोरी और सफेद रंगत, काले बाल सियाह आँखे, छ्होटे छ्होटे बूब्स और दरमियाना क़ांड है. मेरे दिमाग़ में ऐक सोच आई कि क्यू ना अपनी बहन के जिस्म का मज़ा चखा जाए और यह सोच कर मैं अपनी छ्होटी बहन के कमरे में चला गया. वो उस वक़्त भी सो रही थी और उस के पेट पर से क़मीज़ हटी हुई थी और उस का गोरा पैट नज़र आ रहा था जिसे देख कर मेरा लंड झटके मारने लगा.

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मैं शमी के बेड पर बैठ गया, मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था, आख़िर कार मैं ने उस के पेट पर हाथ रख दिया, वाउ कितना गर्म पेट था उस का छ्होटा सा लैकिन चिकना फिर मैं ने अपने दूसरे हाथ को उस के गालो पर फेरना शुरू किया मगर वो नही जगी तो मैं ने पेट पर हाथ फेरते फेरते अपनी बहन की क़मीज़ ऊपर उठाके उस के मम्मे नंगे कर दिए वाउ क्या सीन था! टेबल टेन्निस की बाल जितना बूब जिस पर हल्का ब्राउन सा निपल उभरा हुआ था. वाउ मैं तो पागल हो गया. मेरी बहन शमी ज़रा सी हिली तो मैं ने फ़ौरन हाथ पीछे हटा लिए, लैकिन वो जगी नही थी.

मैं ने अपना ऐक हाथ उस के मम्मे पर रख दिया उफफफ्फ़ यह कित’ना कड़ा था, कुच्छ देर अपनी छ्होटी बहन के मम्मे से खेलने के बाद मैं ने अपना दूसरा हाथ उस की ग्रीन फूलों वाली शलवार में डाला ओह मेरी छोटी बहन की शलवार में अज़रबन्द की बजाए एलास्टिक था. मैं ने आहिस्ता से उस की शलवार थोड़ी सी नीचे कर दी… मेरा दिल सीने से बाहर आने वाला था शमी की नन्ही मुन्नी चूत बेहद हसीन थी उस पर हल्का हल्का ब्राउन कलर का दाना था. मैं ने शमी की चूत को देखा तो पागल सा हो गया और झुक कर उस पर अपनी ज़ुबान रख दी. शमी ने अपनी टाँगे पीछे घसीटी और उठ कर बैठ गई मैं भी पीछे हट गया. शमी ने मुझे देखा और सब से पहले अपनी शलवार ऊपर की और कहने लगी

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भाई जान आप क्या कर रहे हैं? मैं ने कहा.

मेरी बहन मैं तुम से प्यार कर रहा हूँ, वो कहने लगी.

भाई आप को शर्म आनी चाहिए मैं आप की छ्होटी बहन हूँ और आप मेरे साथ ऐसी हरकते कर रहे हैं. मैं ने शमी को बाज़ू से पकड़ा और कहा,

बहना देखो मैं तुम से प्यार करना चाहता हूँ… वो रोने लगी.

छोड़ो मुझे भाई. क्या हर भाई अपनी बहन को ऐसे करता है? मैं ने कहा,

मैं नहीं जानता. लैकिन बहुत से भाई कामो वेश अपनी बहनों के बारे में ऐसे ख़यालात रखते हैं और उन में से बहुत से अपने ख़यालों को हक़ीक़त भी बना लेते हैं.

लेकिन शमी मान कर ही नही दे रही थी वो चिल्लाने लगी बचाओ… बचाओ… बचाओ… मैं ने उस के मुँह पर हाथ रखा और दूसरे हाथ से उस की शलवार नीचे कर दी. वो चीखने की कोशिश कर रही थी मगर मैं ने उस का मुँह अपने हाथ से दबाया हुआ था, मगर शमी ने मेरे हाथ पर काट लिया और मैं ने दर्द के मारे उस के मुँह से हाथ हटा लिया और वो बचाओ बचाओ चीखते हुए कमरे से बाहर भागी… मैं उस के पीछे बाहर भगा. कॉरिडर में निकला तो मैं ने देखा कि हमारा चोकीदार गुल ख़ान शमी के सर पर हाथ फेर रहा था और गुस्से से मेरी तरफ देख रहा था उस ने मुझे देखते ही कहा.

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