मामी की चुदाई और मा का गुस्सा

दोस्तों उमीद है आपने इस सेक्स कहानी का पिछला पार्ट पढ़ा होगा. अगर नही पढ़ा तो ज़रूर पढ़ ले.

रात में डिन्नर किया. फिर सब अपने अपने रूम में गये. सब के जाने के बाद मैं मम्मी के रूम में गया.

मैं: मम्मी, मैने आपसे कुछ पूछना है.

मम्मी: क्या?

मम्मी मामी का वेट कर रही थी. लेकिन मुझे पता था, आज वो नही आने वाली थी. अब आयेज-

मैं: मैं सब बताता हू, जल्दी क्या है? और वैसे भी आज मामी नही आने वाली.

मम्मी: बेटा, तू कैसी बात कर रहा है? मामी तो अपने रूम में रहेगी, यहाँ क्यूँ आएगी?

मैं: मम्मी, आक्टिंग मत करो. मुझे सब पता चल गया है, की इस घर में क्या-क्या चल रहा है.

मम्मी घबरा गयी और बोली-

मम्मी: हहे बेटा, बोल ना क्या चल रहा है? कुछ भी तो नही चल रहा इस घर में.

मैं: मैने कल दोपहर को अपनी आँखों से देखा है, और मामी ने भी मुझे सब बता दिया है.

मम्मी ये सुन के घबरा गयी, उनका गला सूख गया था.

मैं: ये सब आपने क्यूँ किया? पापा, मेरा और दीदी का ख़याल नही आया क्या?

मम्मी: तू समझ नही रहा है. मेरा भाई यहाँ नही है, तो स्वाती को किसी की ज़रूरत तो थी.

मैं: लेकिन आप भी तो मज़े ले रहे थे. मैने खुद देखा और रेशमी दीदी ने भी बताया.

मम्मी: रेशमी?

मैं: हा, वही मुझको आपके और मामी के बीच जो चल रहा था, दिखाने आई थी.

मम्मी कुछ सोची और बोली: अगर मैं मज़े ले भी लू, तो तुझे उससे क्या?

मुझे तोड़ा दुख हुआ की मम्मी रवि के साथ मज़े ले रही थी.

मैं: हा, बात तो आपकी भी सही है. मुझे क्या?

ये बोल के मैं उनके रूम से बाहर आ गया, और सीधा मामी के रूम में चला गया.

मामी: रोहन, क्या हुआ? इतनी रात में मेरे रूम में?

मैं: मामी, आपको मेरे लंड का स्वाद चखना था ना? चखने आया हू.

मामी: क्यूँ, तू अभी मधु से मिलने नही गया था?

मैं: वो सब बात बाद में, पहले चुदाई.

उन्होने एक निघट्य पहनी थी. मैं उस निघट्य को एक बार में निकाल देता हू. उन्होने नीचे से कुछ नही पहना था. अब वो नंगी हो गयी थी. क्या क़ातिलाना फिगर था, मज़ा ही आ गया. उन्होने मेरे कपड़े उतारे और मेरा लंड चूसने लगी. वो एक्सपर्ट थी चूसने में.

फिर वो मुझे लिटा देती है, और मेरे लंड के उपर बैठ जाती है. हमारी चुदाई स्टार्ट हो जाती है. उनकी चुदाई में मज़े ही अलग थे. मुझे मामी का ये रूप पहली बार देखने मिला था, पर मुझे मज़ा भरपूर आ रहा था. मैने सोचा भी नही था की एक वीक के अंदर मेरी लाइफ ऐसे बदल जाएगी.

मेरे रूम लीव करते ही मम्मी’स पॉइंट ऑफ व्यू-

मैं: रोहन, कहाँ जेया रहा है बेटा?

इतना बोलने के बाद मैं सोचने लगी. ये लड़का भी ना, और रेशमी को मेरे और स्वाती के बारे में कैसे पता चला? और स्वाती ने हमारी बात रोहन को क्यूँ बताई? अब मैं इसको कैसे समझोउ?

अब मैं उसको कैसे बताती की मुझे लड़के लड़कियाँ दोनो का शौंक है. यू तो मेरी शादी ब्रिज मोहन जी से हुई थी, पर मैं कभी सुमन (मिस्टर. बंटी की वाइफ) के साथ मज़े कर लेती थी, और यहाँ आई तो स्वाती ने मुझे अप्रोच किया. फिर मैने सोचा की रोहन को सब सच-सच बता देती हू.

फिर मैं रोहन को ढूँढने उसके रूम गयी. रोहन रूम में नही था. तो मैने सोचा स्वाती को कन्फ्रंट किया जाए की उसने मेरे बेटे को ये बात क्यूँ बताई. जैसे ही मैं स्वाती के रूम पहुँची, मैने जो देखा मेरे होश उडद गये. रोहन और स्वाती सेक्स कर रहे थे.

मेरा लड़का उसकी मामी को छोड़ रहा था. मुझे गुस्सा आ रहा था, पर मैं एग्ज़ाइटेड भी हो रही थी. मेरी नज़र मेरे बेटे के लॉड में गयी तो देखा उसका लंड उसके बाप जैसा था, बल्कि तोड़ा उससे बड़ा ही था.

तभी मेरे पीछे से एक हाथ मेरे बूब्स में आया. मैने भी निघट्य ही पहनी थी, क्यूंकी मैं स्वाती का वेट कर रही थी. वो हाथ रवि का था.

रवि: रोहन मेरी मा छोड़ रहा है, तो मैं भी तो उसकी मा छोड़ सकता हू.

रवि ने कुछ नही पहला था, वो पूरा नंगा था. उसने निघट्य से मेरे बूब्स निकाले, और उनको रगड़ने लगा. मैं कुछ बोल नही पा रही थी, पर मुझे भी मज़ा आ रहा था. मैं इसको रोकना चाहती थी, पर मेरे मूह से आवाज़ नही निकल रही थी. रवि मेरी निघट्य उपर करता है, और अपना लंड छूट में रगड़ने लगता है. तभी-

रोहन (अंदर): मामी, कैसा लग रहा है? मेरा लंड रवि से ज़्यादा मज़े दे रहा है ना?

स्वाती: हा, बहुत मज़े आ रहे है, एयेए उफ़फ्फ़.

रोहन: अब रवि को पता चलेगा किसी की मा छोड़ना कैसा लगता है? मेरी मम्मी के साथ सेक्स कर रहा था ना वो.

ये सुनते ही मैं होश में आ जाती हू. रवि जो मेरी छूट में लंड डालने वाला था, मैं उसको धक्का देती हू. फिर मैं दरवाज़ा खोल के रूम में जाती हू. रोहन और स्वाती दोनो शॉक में थे. फिर मैने रोहन को एक छाँटा मारा और स्वाती से बोली-

मैं: तुझे तो मैं बाद में देखूँगी.

मेरे बूब्स बाहर निकले हुए थे निघट्य से. मैं रोहन का हाथ पकड़ के उसको अपने रूम में ले आती हू. रोहन ने अपना लंड अपने हाथ से ढाका हुआ था.

मी पॉइंट ऑफ व्यू-

मम्मी मुझे उनके रूम में ले आई.

मैं: रवि आपको छोड़ सकता है, मैं मामी को नही छोड़ सकता क्या?

मम्मी: तो बोल क्या रहा है?

फिर मैने सब बात जो मेरे यहाँ आने के बाद हुई बताई, तो मम्मी ने भी मुझे सब बात बताई. तब मुझे पता चला रवि मेरी मम्मी के लेने के चक्कर में था, और सभी लोग उसकी हेल्प कर रहे थे. मैने सोचा इन लोगों से बाद में नीपतुँगा. फिर मैने मम्मी के तरफ देखा. उनको एहसास नही था, पर उनके बूब्स अभी भी दिख रहे थे, और मेरा लंड सॅटिस्फाइड नही था. मैने मम्मी को इशारा किया तो उन्होने पहले माना किया, फिर कुछ समय बाद बोली-

मम्मी: चल ठीक है, फर्स्ट आंड लास्ट टाइम है ये.

फिर मम्मी ने मेरा लंड ज़ोर-ज़ोर से हिलाया, और मैं उनके बूब्स दबा रहा था. कुछ समय बाद मैं उनके हाथ में झाड़ गया. फिर मैं अपने रूम में जाने लगा, तो एक आँख से देखा मम्मी ने मेरा माल अपने हाथ से चाट लिया. जब मैं रूम में जेया रहा था, तभी रवि मामी को छोड़ रहा था.

मैने वो इग्नोर किया, और सो गया. सुबह हम सब वहाँ से अपनी सोसाइटी के लिए आ गये. मम्मी मामी से बात नही कर रही थी. वो मामी का फ्लॅट सेट करने के लिए रुक गयी, और मैं अपने घर में आ गया. मैने अपने रूम में देखा सोनिया और प्रिया दीदी नंगे होके एक-दूसरे को किस कर रही थी. उन्होने मुझे देखा.

प्रिया: अर्रे, जैसे तो समझ रहा है, वैसा नही है, मैं तुझे सब बताती हू.

नेक्स्ट 1-2 पार्ट प्रिया दीदी के पॉइंट ऑफ व्यू में है. अगर आपको यहाँ तक कहानी पसंद आई

error: Content is protected !!