मालिश ने मिताई तंन की थकान और भूख

तो अब देर ना करते हुए मैं स्टोरी पर आती हू. फूलपुर में एक साल की जॉब के बाद आख़िर मेरा ट्रान्स्फर वापस देहरादून में हो गया. मैं खुश थी, की अब मैं फिर एक बार अपने पति के साथ रह पौँगी, और हर रोज़ हम मज़े से सेक्स एंजाय कर पाएँगे.

लेकिन हुआ यू, की जिस दिन मुझे फूलपुर से देहरादून आना था, उसी दिन अजय की मुस्सूरीए में एक बॅंक इवेंट आ गयी, और उसी वजह से वो मुझे लेने के लिए नही आ सके. वैसे मेरा समान तो पहले ही पहुँच चुका था, तो मैने सोचा की खुद ही ड्राइव करके देहरादून चली जाती हू.

रास्ता काफ़ी लंबा और टूटा हुआ था, और हर जगह मेंटेनेन्स के काम चल रहा था. तो मुझे घर पहुँचने में 8 घंटे लग गये. अजय 3 दिन के लिए इवेंट में थे, तो अब मैं 3 दिन घर पे बिल्कुल अकेली थी. उस रात मैने उनको याद करते हुए अपनी छूट को खूब मसला. एक साल की प्यास के बाद अब ये 3 दिन गुज़ारना बहुत कठिन होने वाला था.

दूसरे दिन जब मैं उठी, तो मुझे फील हुआ की मेरा पूरा बदन बहुत ही दर्द कर रहा था. उबड़-खाबड़ रास्ते पर लंबी सी ड्राइव की वजह से मेरा पूरा बॉडी स्टिफ हो गया था. आज सॅटर्डे की छुट्टी थी, तो ऑफीस नही जाना था, तो मैं आराम कर सकती थी. हालाकी बॉडी का पाईं मुझे ठीक से सोने नही दे रहा था.

मैने सोचा अगर अजय साथ होते तो आज मेरी मालिश करके मेरा पाईं मिटा सकते थे. तभी मेरे मॅन में ख़याल आया की सिटी में इतने सारे यूनिसेक्स स्पा है, क्यूँ ना किसी प्रीमियम स्पा में जाके मालिश करवा ली जाए. थकान और पाईं दोनो डोर हो जाएँगे.

मैने गूगले सर्च करके अपने घर के नियर्बाइ एरिया में एक टॉप रेटिंग वाला स्पा ढूँढ निकाला, और वाहा पे कॉल करके अपायंटमेंट बुक कर ली. अपायंटमेंट एक घंटे बाद की थी. तो तब तक मैं नहा धो कर तैयार हो गयी, और ठीक समय पे स्पा पर पहुँच गयी.

स्पा के रिसेप्षन पे एक क्यूट सी यंग गर्ल ने मेरा स्वागत किया, और वेटर ने आ कर मुझे वेलकम ड्रिंक दी. रिसेप्षनिस्ट ने मुझसे पूछा की मैं बॉय से मसाज करवाना चाहूँगी या गर्ल से. मैने सोचा की थकान और दर्द इतना ज़्यादा था की गर्ल के नरम हाथो से दर्द डोर होगा नही. तो बॉय से ही मसाज करवा ली जाए. मैने उसे बॉय के लिए कहा.

रिसेप्षनिस्ट मेरे साथ आ कर मुझे मसाज रूम तक छ्चोढ़ गयी, और मुझे चेंज करके वेट करने के लिए कहा. मसाज रूम एक बड़ा सा कमरा था. उसके बीच के एरिया में मसाज टेबल लगी हुई थी. मसाज टेबल पे एक सॉफ्ट सी मॅट्रेस थी, वाइट चादर लगी थी, और एक सॉफ्ट कुशन भी था.

उस टेबल की एक साइड पर रॅक बनी हुई थी, जिसमे बहुत सारे तेल और क्रीम्स सज़ा के रखे हुए थे. टेबल की दूसरी साइड कोने में एक बातरूम बना हुआ था. दीवार पर स्टाइलिश हॅंगर थे, जिनमे मसाज के लिए डिस्पोज़ेबल ब्रा, पनटी और वाइट टवल रखे हुए थे. पास में ही एक बड़ा सा मिरर लगा हुआ था, और आख़िर में एक फ्रिड्ज पड़ा हुआ था.

मैने सबसे पहले दरवाज़ा अंदर से लॉक किया. उसके बाद अपने शूस, सॉक्स, त-शर्ट और जीन्स उतार के हॅंगर में लटका दिए. फिर मैने अपनी ब्रा और पनटी भी निकाल दी, और बिल्कुल नंगी हो गयी. पता नही क्यूँ, पर मेरे मॅन में कुछ मस्ती सूझी, और ऐसे ही नंगी जाके मैं मिरर के सामने खड़ी रह गयी. मैने मिरर में अपने आप को निहारा.

गोरे स्टअंन, क्लीन छूट, फ्लॅट पेट, पतली सी कमर, और गोल गांद में मैं बहुत ही सेक्सी लग रही थी. 5 मिनिट्स ऐसे ही खुद को निहारने के बाद मैने हॅंगर में रखी हुई डिस्पोज़ेबल ब्रा और पनटी पहन ली, जो की थोड़ी सी ट्रॅन्स्परेंट थी.

मुझे लगा की मसाज के लिए गर्ल के बदले बॉय को चूज़ करना शायद ग़लत आइडिया था, पर गाओं में आनंद के साथ चूड़ने के बाद अब मुझे गैर-मर्दों से ज़्यादा शरम नही आती थी. फिर भी मैने अपनी ब्रा और पनटी के उपर टवल लपेट लिया.

कुछ देर के बाद डोर नॉक हुआ तो मैने डोर ओपन किया. सामने एक 25-26 साल का मॉडरेट बिल्ड उप वाला लड़का खड़ा था. उसने मुझे ग्रीट किया और अपना नाम संजय बताया. अंदर आके उसने डोर को ठीक से लॉक किया. उसने मुझसे बात करना शुरू किया.

संजय: मा’आम, आप आयिल मसाज करवाना चाहोगे या ड्राइ?

मैं: आयिल.

संजय: मा’आम, फिर ये टवल हटाना पड़ेगा.

इतना कहते ही उसने खुद ही मेरा टवल बड़े सॉफ्ट हाथो से खींच लिया, और मुझे मसाज टेबल पर पीठ के बाल लेट जाने को कहा.

टवल अचानक खींच लिए जाने से मैं थोड़ी सी शर्मा गयी, और टेबल पे जेया कर पीठ के बाल लेट गयी. अब शायद वो उन सेमी-ट्रॅन्स्परेंट ब्रा और पनटी में मेरे कोमल अंगो को तोड़ा सा देख पा रहा था.

संजय: मा’आम, अब आराम से रिलॅक्स करिए, मैं अपना काम करता हू.

उसने सबसे पहले मेरे पैर की आइडियो, तलवे और उंगलियों से मसाज शुरू किया. प्रॉपर प्रेशर के साथ धीरे-धीरे वो मसाज करने लगा. धीरे-धीरे आयेज बढ़ते हुए उसने मेरे दोनो पैरों के घुटने से नीचे तक तेल लगा कर मालिश की.

अब उसने मेरी दोनो थाइस पर तेल डाला, और हल्के हाथो से थाइस पर मसाज करना शुरू किया. थाइस काफ़ी सेन्सिटिव होते है, तो मैं उस मसाज से थोड़ी सी सिसकारियाँ लेने लगी. धीरे-धीरे उसने मेरे घुटनो से लेके थाइस पर हाथ फिरा के मसाज करना शुरू कर दिया. अब जब भी उसके हाथ घुटनो से हो कर थाइस पर घूमते तो बहुत ही रिलॅक्स हो रहा था.

धीरे-धीरे उसने अपने हाथ घूमने का एरिया बढ़ा दिया, और अब उपर की तरफ जाते हुए उसके हाथ मेरी पनटी को टच करने लगे. लगातार हाथ घूमते हुए और हर बार पनटी को टच करते हुए, वो मसाज किए जेया रहा था.

तभी एक बार उसके हाथ पनटी के बीचो-बीच मेरी छूट पे जेया पहुँचे. मैं थोड़ी सी सिहर गयी, और मूह में से छ्होटी सी आ निकल गयी. मैने उसकी तरफ देखा तो उसने एक प्यारी सी स्माइल दी. अब घुटनो से पनटी पर आते हुए हर बार उसके हाथ मेरी छूट पे दस्तक दे रहे थे.

जब मैने कोई विरोध नही किया, तो धीरे-धीरे ये दस्तक सहलाने में बदल गयी. अब वो घुटनो से पनटी की तरफ अपने हाथ लाता, और एक बार लेफ्ट हॅंड से तो दूसरी बार रिघ्त हॅंड से मेरी छूट को सहला देता. मैं धीरे-धीरे गरम हो गयी और मेरी छूट पानी छ्चोढने लगी. इससे मेरी पनटी भी गीली हो गयी, और मुझे शरम आने लगी.

इससे पहले की और कुछ होता, उसने पैरों की मसाज बंद की और मुझे पेट के बाल लेट जाने को कहा. मैने भी तुरंत ही पेट के बाल लेट कर अपनी गीली पनटी च्छूपा ली. अब उसने मेरी पीठ और कमर के एरिया में बहुत सारा तेल लगाया और धीरे-धीरे कमर, पीठ और कंधो की मालिश करने लगा. उसके हाथो में सच में जादू था. मेरी थकान मिटने लगी थी. तभी उसने कहा-

संजय: मा’आम, ब्रा की वजह से पूरी तरह से मसाज हो नही पा रहा. क्या मैं इसके हुक्स खोल डू?

मैने सोचा की वैसे भी गरम तो ये मुझे कर ही चुका था, और उसको भी इस बात का पता था, तो क्यूँ ना हुक्स खोल के पूरी तरह मसाज लेली जाए, ताकि थकान मिट जाए. वैसे भी पीठ के बाल लेट कर ब्रा खोलने से वो मेरे स्टअंन नही देख पाएगा तो कोई रिस्क भी नही था.

मैने उसे हा बोल दिया और उसने तुरंत ही ब्रा के हुक खोल के दोनो स्ट्रॅप्स साइड पे कर दिए. अब मेरी नंगी पीठ, कमर और कंधे उसके सामने थे. उसने फिर एक बार बहुत सारा तेल लगाया, और मेरी कमर से लेकर कंधो तक दोनो हाथ घुमा के सही प्रेशर से मसाज करने लगा. ये तो बहुत ही रिलॅक्सिंग था. मेरी बॅक साइड बहुत ही आराम महसूस कर रही थी.

जब वो कंधे से लेकर हाथ लोवर बॅक पर लाता, तो कभी-कभी उसकी उंगलिया मेरी पनटी को नीचे की तरफ धकेल देती. वो एक मोमेंट के लिए कमर पे हाथ फेर के पनटी को वापस ठीक कर देता, और मसाज करता रहता था. मैं भी उसके इस खेल का आनंद ले रही थी. तभी उसने कंधो से कमर तक आते हुए पनटी को दोनो हाथो से ज़ोर का धक्का मारा, और इस बार पनटी मेरी आधी गांद तक सरक गयी.

मैं चौंक उठी, पर इससे पहले की और कुछ कर पाती, उसने एक मोमेंट के लिए मेरी आध-नंगी गांद पे स्मूद हाथ फिराया, और फिर मेरी पनटी ठीक कर दी. उसके इस स्मूद टच ने फिर एक बार मेरी घंटी बजा दी. अब धीरे-धीरे हर दूसरी तीसरी बार मैं पनटी को ज़ोर धक्का लगाने लगा. पनटी धीरे-धीरे नीचे सरकने लगी.

अब वो गांद के खुले एरिया को सहलाता पर पनटी को ठीक नही करता था. धीरे-धीरे धक्के खाते हुए पनटी बेचारी इतनी नीचे उतार गयी, की अब मेरी गांद पूरी तरह से उसके सामने खुल गयी थी. अब वो मेरी गोरी गोल गांद और कुल्हो को आचे से देख सकता था.

अब उसने कमर और पीठ को छ्चोढ़ के सिर्फ़ गांद की मसाज स्टार्ट कर दी. मैं शब्दों में बता नही सकती की ये कितना ज़्यादा रिलॅक्सिंग था. मैने अपनी आँखे मूंद ली. वो मेरे दोनो कुल्हों को दबाता, सहलाता, और उनके साथ खेल रहा था. मैं भी उसके रंग में रंग गयी थी, और बिना किसी विरोध के उसका साथ दे रही थी.

अब उसने मेरी गांद की दरार और च्छेद में बहुत सारा तेल लगाया और उसमे उंगली घुमा के आचे से मालिश करने लगा. 10 मिनिट्स तक ऐसे ज़बरदस्त मसाज से, गांद की दरार, च्छेद, और कुल्हों को मसल के उसने मुझे पूरा गरम कर दिया, मेरी छूट तो जैसे पानी का दरिया बन चुकी थी.

अब उसने मेरी पनटी जो की ऑलरेडी घुटनो तक आ चुकी थी, उसे उतार ही दिया और कयडे से मुझे नीचे से नंगी कर दिया. उसने मेरे दोनो पैरों को चौड़ा कर दिया. 2 मिनिट्स तक उसने कुछ नही किया तो मैने कन्फ्यूज़ हो कर देखने के लिए पीछे नज़र की. पीछे देखते ही मैं शॉक हो गयी.

उसने अपने कपड़े पुर उतार दिए थे, और उसका मोटा तगड़ा लंड मेरी गांद से बस एक इंच डोर था. मैं कुछ समझ पाती उससे पहले उसने मेरी कोमल गांद में अपना कड़क लंड पेल दिया. मेरे मूह से चीख निकल गयी. हालाकी मैने अपनी गांद 100 से भी ज़्यादा बार मरवाई तो है. पति के अलावा भी और 3 मर्दों ने मेरी गांद का भरपूर आनंद लिया है.

पर ऐसे मसाज करवाते ही अचानक मेरा गुदा मैथुन हो जाएगा, ये एक्सपेक्टेड नही था. उसने अपना लंड मेरी गांद में अंदर तक उतार दिया, और धीरे-धीरे उसे अंदर-बाहर करके मेरी गांद मारने लगा. शुरुआत के 2 मिनिट्स तो मैं शॉक में ही रही. मैं डाइजेस्ट ही नही कर पा रही थी की मेरा गुदा मैथुन हो रहा था.

पर धीरे-धीरे मैं शॉक से बाहर आ गयी और अब मुझे भी बहुत मज़ा आने लगा. मैं अपनी गांद उठा-उठा कर उसका साथ देने लगी. 10 मिनिट्स ऐसे गांद मारने के बाद उसने मुझे घोड़ी बना दिया, और फिर एक बार मेरी गांद में खूब तेल लगाया.

इस बार उसने मेरी गांद में धीरे से लंड पेला. मेरे सॉफ्ट कुल्हों को सहलाते हुए वो मेरी गांद में अंदर तक लंड को पेल कर मेरी गांद मारने लगा. धीरे-धीरे उसने स्पीड बढ़ा दी, और मेरी धक्का पेल गांद चुदाई करने लगा.

ब्रा के हुक्स तो पहले ही खुल चुके थे. गांद पे लग रहे धक्को की वजह से ब्रा भी गिर पड़ी और मैं पूरी तरह नंगी हो गयी. उसने अब एक हाथ मेरे स्टान्नो पर रखा, और उन्हे सहलाने और दबाने लगा. दूसरा हाथ मेरी छूट पर ले जेया कर उसे भी मसालने लगा. अपने होंठो से वो मेरी पीठ और गर्दन को स्मूच करने लगा, और अपने लंड से मेरी गांद को मारने लगा.

इन तीन तरफे हमलो के आयेज मैं टिक नही पाई, और ज़ोर से चीखते हुए मैं झाड़ के गिर पड़ी. उसी वक्त हू भी झाड़ गया, और मेरी पूरी गांद और कुल्हों को अपने स्पर्म्ज़ से रंग दिया. निढाल हो कर हम दोनो थोड़ी देर एक-दूसरे से लिपट कर सोए रहे.

उसके बाद उसने मुझे पानी और गेल से आचे से सॉफ किया, और खुद कपड़े पहन लिए. मैं भी रिलॅक्स हो कर नीचे उतार आई, और कपड़े पहन के तैयार हो गयी. फिर उसने कहा-

संजय: मा’आम, आशा करता हू आपको मसाज और सर्विस अची लगी होगी.

मैं: एस, बहुत मज़ा आ गया. हालाकी अगर फ्रंट साइड पे भी मज़े मिल जाते तो बात ही कुछ अलग होती.

संजय: मा’आम, आज का 1 अवर तो हो गया है. आप कल भी आईएगा, फ्रंट साइड भी सर्विस कर देंगे.

ये कह कर वो हासणे लगा, और मैं भी उसके साथ खूब हस्स पड़ी. उसने कमरे में रखे फ्रिड्ज में से मुझे पानी और जूस निकाल कर दिया. जूस पी कर मैने उसे एक प्यारी सी हग की और फिर उससे विदा लेके घर के लिए चल पड़ी.

सच ही में ये एक काफ़ी रिलॅक्सिंग और एरॉटिक एक्सपीरियेन्स था, जिसने मेरे तंन की थकान को मिटा दिया था. लेकिन तंन की थकान तो मिटी थी, पर टन की भूख अभी भी कुछ बाकी थी. दूसरे दिन के मसाज में उसने कैसे मेरे तंन की भूख को भी तृप्त किया, ये मैं फिर किसी स्टोरी में ज़रूर बतौँगी.

ये स्टोरी आपको कैसी लगी? मुझे एमाइल्स कर के ज़रूर बताना. मेरा एमाइल अड्रेस है सुनीता.आ.चौहान1996@गमाल.कॉम. आप सब के एमाइल्स का इंतेज़ार रहेगा. धन्यवाद.

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