मई और मेरी सेक्सी बहन

ये बात 2 साल पहले की है. जब मैं, मेरी फॅमिली और बेहन की फॅमिली ट्रेन से मुंबई आ रहे थे. मैं मुंबई में रहता हू और दी भी. दीदी का साइज़ 34-32-36 है, तो आपको अंदाज़ा लग ही गया होगा की हमने कितने मज़े किए. कमिंग तो स्टोरी लाइन.

वैसे तो हम लोग पाँच थे, बुत सीट्स हमारे पास सिर्फ़ टीन थी. तो मम्मी एक सीट पे, मौसी और छ्होटी बेहन एक सीट पे, और मैं और मेरी बेहन एक सीट पे बैठ गये.

सोने की तैयारी हो गयी थी. सब अपनी जगह पर सेट्ल हो गये थे. हमे मिड्ल सीट मिली थी. पहले दीदी गयी और फिर मैं गया. मैं जब सीट पर चढ़ रहा था तब मैने दी के पैरों को देखा. उसकी सलवार से सीधा पूरा पैर दिख रहा था.

मैने उसके पैरों की तरफ अपना सिर किया, और उसने मेरे. मुझे खुजली होने लगी थी, और नीचे लंड खड़ा होने लगा था. मेरी बेहन जब एक साइड हो कर सोने लगी, तो मैने धीरे से अपना लंड उसकी गांद के बीच में टच करवाया.

वो मुझे देखने लगी. शायद उसको एहसास हो गया था मेरी हरकत का. मैं भी दर्र गया था. लेकिन उसने इग्नोर किया और सोने लगी. फिर मैने उसको सिड्यूस करने की कोशिश की. उसकी कमीज़ उठी हुई थी, और उसकी कमर मुझे सिड्यूस कर रही थी.

सलवार से उसकी गांद सॉफ दिखाई दे रही थी. मैने फटत से लंड उसकी गांद में टच कर दिया. वो इस बार सो रही थी. फिर मैं उपर-नीचे अपने लंड को करने लगा. वो जागी, दूसरी और पलटी, और सोने लगी.

इस बार उसकी छूट मेरी तरफ थी. फिर मैने लंड धीरे से उसपे टच किया. फिर तोड़ा और टच किया. सिर्फ़ 10 मिनिट के टच से पानी निकालने लगा. मेरा लोवर तोड़ा सा गीला हुआ और उसकी सलवार गीली हुई. उसकी काली चड्डी मुझे दिख रही थी, जिसको मैने काई बार सूंग कर हिलाया था.

फिर वो उठी, और उसने नोटीस किया की उसकी सलवार भी थोड़ी गीली हो गयी थी. उसने मेरी तरफ मूह किया, कुछ सोचा, और थोड़ी देर बाद धीरे से पास आके कहा-

बेहन: ये ग़लत है.

मैने चुप हो गया और दर्र गया था. अब जब उसको पता चल गया था तो मैं आराम से उसकी कमर पर हाथ फेरने लगा. फिर उसने अपने फोन से मेरे फोन पर मेसेज किया-

बेहन: ये ग़लत है, मैं मौसी की बता दूँगी.

फिर मैने उसको मेसेज किया: पास आ कुछ कहना है.

वो उठी और तोड़ा करीब आई तो मैने उसको किस कर दिया. अब मैं बिना दर्र उसकी गांद को दबाने लगा. उसके बूब्स दबाने का बहुत मॅन था लेकिन वो ऑपोसिट लेती थी.

पर मैने अब अपना छ्होटा चेतन बहुत बड़ा कर लिया था. अब मैने उसकी सलवार उतार दी. ये मेरा पहली बार था. मैने उसकी छूट में उल्टा लंड डाल दिया. क्यूंकी मैं फर्स्ट टाइम सेक्स कर रहा था, तो पहले मैं रुक गया.

फिर मैने कुछ देर बाद अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया. बहुत ही धीरे मैं छोड़ रहा था अपनी बेहन को. फिर रात के 2 बाज गये, और ट्रेन ने स्पीड पकड़ ली. मैने उसको अपने पास बुलाया और सारी लाइट्स बंद थी.

फिर मैने उसको लिटाया, और उसके उपर चढ़ कर उसकी छूट में लंड डाल दिया. उसकी सलवार नीचे थी, कमीज़ उपर, और बीच में पूरी नंगी थी वो. अपना दुपट्टा मूह में डाल कर वो भी चुदाई के मज़े ले रही थी.

बेहन: आ अहहा उम्म्म इम्म ओह एम्म…

उसकी आँखों में आँसू देख कर मैने धक्के बंद किए, तो उसने मेरी गांद पे हाथ रखा, और धीमी आवाज़ में कहा-

बेहन: छोड़-छोड़, छोड़ दे यार.

फिर मैने ट्रेन की स्पीड के साथ उसको छोड़ा. हम दोनो 25 मिनिट के बाद झाड़ गये. फिर वो उठी, और बातरूम की तरफ गयी. डिब्बे में सब वेटिंग वाले नीचे बैठे थे, तो मौसी ने मुझे उसके साथ भेजा.

मैं मौके का फ़ायदा उठा कर उसकी गांद को दबाने लगा. फिर वो टाय्लेट में गयी, और मैं बाहर खड़ा था. मैने टाय्लेट की तरफ की लाइट भी बंद कर दी थी. मैने डोर नॉक किया, और उसने खोला, और हम दोनो अंदर चले गये.

फिर वो बोली-

बेहन: कोई देख लेगा तो?

मैं: अर्रे कोई नि देखेगा.

वो: ये तूने क्या किया भद्वे, मादरचोड़, बहनचोड़.

मैं: तुझे मज़ा आया ना? अब किस करने दे.

बेहन: करले भोंसड़ी-वाले.

अब हम किस कर रहे थे. मैने उसके सारे कपड़े उतार दिए. इंग्लीश टाय्लेट थी, तो मैं बैठ गया. फिर मैने उसको अपनी गोद में बिताया, और हम दोनो अब नंगे थे.

फिर वो बोली-

बेहन: देख ये पहली और आखरी बार है.

मैं: छोड़ने तो दे.

बेहन: डाला तो तूने.

मैं: और डालना है.

वो उठ कर जाने वाली थी, की मैने अपना लंड उसकी छूट में डाल दिया.

बेहन: ह.

साथ ही मैने उसको किस कर लिया.

बेहन: आह नही, ये आह ग़लत है आ आ.

मैं: आज छोड़ने दे, फिर कभी नही छोड़ूँगा पक्का .

बेहन: छोड़-छोड़, छोड़ आ अहहा अहहा आ अहः हाहहः उम्म्म भाई.

मैं: तेरी गांद मारनी है.

बेहन: सबसे पहले वही डाला था तूने मादरचोड़ आह अहहा छोड़.

अब मैं झड़ने वाला था, तो बाहर निकालने लगा अपने लंड को.

बेहन: छोड़ छोड़, अंदर ही निकाल दे. छोड़ कमीने.

फिर मैने उसकी छूट में अपना सारा पानी निकाल दिया.

जब वो कपड़े पहनने लगी, तो मैने उसकी सलवार नीचे की, और गांद में आधा लंड घुसा दिया.

बेहन (सलवार छ्चोढ़ कर): छोड़ आज मुझे, छोड़.

मैं: वाह.

बेहन: अयाया फक! फक! फक!

मैं: ह्म ह्म ह्म.

बेहन: भाई भाई भाई छोड़ छोड़ छोड़

मैं 10 मिनिट बाद झाड़ गया. फिर हमने कपड़े पहने, और सीट पे जेया कर लेट गये. इस बार दोनो एक ही तरफ मंडी करके लेते थे.

रात को मेरा मूड फिर बन गया. मैने उसकी सलवार खोली और झट से लंड घुसा दिया.

बेहन: तेरा फिरसे खड़ा हो गया.

मैं: हा.

बेहन: छोड़ भाई, तेरा यही मॅन है तो चोद दे. लेकिन ज़रा जल्दी कर, सोना है मुझे भोंसड़ी के.

मैने इतना फास्ट और ज़बरदस्त छोड़ा की वो रो दी.

फिर सुबा हो गयी. हम एक दूसरे को देख रहे थे. हमने एक दूसरे बहुत गंदे-गंदे मेसेजस किए. फिर हम स्टेशन पर उतरे और अपने-अपने घर चले गये.

तब से रोज़ सेक्सी छत और विज़िट चुदाई होती है.

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