इंडियन फॅमिली सेक्स स्टोरी अब आयेज-
घर में मैं, मम्मी और दीदी ही थे, और हम एक ही रूम में थे. मम्मी चेर पे थी.
उन्होने बोला, “पहले मेरी गुड़िया करेगी, फिर वो भी हुमको जाय्न करेंगी.” मैं और दीदी एक-दूसरे को देख रहे थे. फिर हम दोनो एक-दूसरे को किस करने लगे.
हम दोनो की टंग आपस में लड़ रही थी. ये देख कर मम्मी भी गरम हो रही थी. मैने फिर उनकी चुननी खींच ली. अब सब नंगे थे. मैं दीदी के बूब्स दबा रहा था. तभी मम्मी की नज़र मेरे फुल्ली एरेक्टेड लंड पर गयी.
तभी उनको याद आया की प्रिया दीदी तो वर्जिन थी. तो वो उस चेर से उठी और अपने बेड के बगल का ड्रॉयर खोला और एक छ्होटा सा वाइब्रटर निकाला. हम दोनो उनको देख रहे थे. फिर वो हमारे पास आई और बोली-
मम्मी: “प्रिया, तेरा फर्स्ट टाइम है ना? ज़्यादा फोरप्ले और ये वाइब्रटर का उसे करना, तुम दोनो को दर्द कम होगा.”
ये बोलते ही मम्मी ने वो वाइब्रटर दीदी की छूट में डाल दिया, और डालने के बाद उन दोनो ने एक-दूसरे को देखा और एक ज़ोर का किस किया. मेरा लंड दीदी के हाथो में था. उन दोनो ने किस तोड़ा. फिर मम्मी चेर में जाके बैठ गयी. उनके पास वाइब्रटर का रिमोट था.
उन्होने उसको स्लो में सेट किया हुआ था. फिर दीदी ने एक कॉंडम लिया, उसको अपने होंठो पे सेट किया और मेरे लंड को मूह के पास लाई और वो कॉंडम मेरे लंड में चढ़ा दिया. अब दीदी मुझे प्रॉपर ब्लोवजोब दे रही थी.
पहला लंड था तो उतना एक्सपीरियेन्स नही था, पर मुझे मज़े आ रहे थे, ई कॅन’त कंप्लेन अबौट तट. मम्मी भी बीच-बीच में मज़े ले रही थी. वो वाइब्रटर को स्लो, मीडियम और फास्ट में स्विच कर रही थी.
वो अब बहुत गीली हो चुकी थी. उनके मूह से ‘गवक गवक’ की आवाज़ आ रही थी. मैने अपना लंड उनके मूह से निकाला.
प्रिया: “आ मुम्मा, मॅर गयी, आराम से करो ना, मम्मी आप.”
मम्मी को देखा तो उनका एक हाथ बूब दबा रहा था तो ये हाथ छूट में था. फिर मैने दीदी को लिटाया और वो वाइब्रटर छूट से निकाल दिया. और उनकी छूट को मूह में लेके चूसने लगा. मैने छूट चूसने से पहले उनकी इन्नर थाइ में किस किया. फिर किस करते-करते उनकी छूट तक पहुँचा.
एक उंगली मैने उनकी छूट में डाली और उनके ग-स्पॉट को रब करने लगा. उतने में वो झाड़ गयी. फिर मैने उनका रस्स छाता. दीदी हाँफ रही थी और उस हाँफने के बीच एक हल्की-हल्की मोनिंग भी थी. फिर मैने अपनी टंग का उसे करके फोरप्ले थोड़ी देर और किया. फिर उसी पोज़िशन में मैने अपना लंड लिया और उनकी छूट में रगड़ने लगा.
अब प्रतीक्षा की घड़ी समाप्त हो गयी थी. वो समय आ चुका था. मैने तोड़ा सा धक्का दिया और तोड़ा लंड उनकी छूट में चला गया. फोरप्ले ने थोड़ी मदद तो की थी पर छूट तो अभी भी टाइट थी.
प्रिया: “आ भाई, बाहर निकाल, बहुत दर्द हो रहा है.”
ये सुन कर मम्मी चेर से उठी और हमारे पास आई और हमको गाइड करने लगी. हमने फिर वही किया जो हुमको उन्होने बताया. 5 मिनिट्स बाद वो दर्द मज़े में बदल गया. अब मैं लेट गया और दीदी मेरे लंड पे बैठ गयी. ये चुदाई चल रही थी और इसका आनंद मम्मी डोर से ले रही थी.
प्रिया: “आ छोड़ भाई, और ज़ोर से छोड़.”
मैने भी उनको अपनी बाहों में लिया था. बीच-बीच में मैं उनको अपने पास लाता, कभी उनके बूब्स चूस्टा तो कभी उनको होंठो में किस करता.
प्रिया: “उम्म, मज़ा आ रहा है, करते रह ऐसे ही.”
मैं भी उनकी कमर पकड़े लंड को ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर कर रहा था. फर्स्ट टाइम का प्रूफ मेरे लंड और चादर में लगा हुआ था. चुदाई के दौरान वो एक बार झाड़ चुकी थी. आज उन्होने इस संभोग क्रिया को जान लिया था.
कहते है ना, शेर के मूह में खून लग चुका था तो वो शिकार करना क्यूँ ही छ्चोड़ता? वही हाल दीदी का था. अब उनकी टाइट छूट की वजह से मेरा भी होने वाला था. मैने उनको बताया तो वो बोली की उनको मेरा माल उनके मूह में चाहिए था.
मैने अपना लंड निकाला और उससे कॉंडम निकाल कर वो लंड मूह में दे दिया. कुछ एक दो मिनिट चुसाई के बाद मैं भी झाड़ गया. मेरा माल उनके मूह में था, तभी मम्मी पीछे आई और दीदी को किस करने लगी.
मैने देखा की दोनो मा-बेटी किस किए जेया रहे थे, मेरे वीर्या को आपस में शेर कर रहे थे. ये सब चल ही रहा था, तभी पापा का मुझे कॉल आया. मैने कॉल पिक किया.
मैं: “हेलो पापा.”
पापा: “रोहन, ध्यान से सुन, एक एमर्जेन्सी के चलते मुझे कहीं जाना पद रहा है. मैने तेरे अकाउंट में पैसे डाल दिए है. तू घर का ध्यान करना. और हा, मुझे आने में एक महीना तक लग जाएगा.”
मैं: “लेकिन आप जेया कहाँ रहे हो?”
पापा: “मुझे इतना बताने का टाइम नही है, तू ये सब मम्मी से पूच लेना.”
और इतना बोलते ही उन्होने कॉल कट कर दिया. वो दोनो भी मुझे देखे हुए थे. उन्होने पूछा किसका कॉल था तो मैने बताया की पापा का था और उन्होने जो मुझे कॉल में बताया था, मैने इनको बता दिया.
फिर मैने मम्मी से पूछा की पापा कहाँ गये थे. तो वो बोली की वो हुमको सब बात बता देंगी, पर जो काम हम कर रहे थे, उसको पूरा करने के बाद. उन्होने आश्वासन दिया की पापा जहाँ भी गये थे, सही सलामत थे.
प्रिया: “रोहन, तूने जैसे मेरे साथ किया, वैसे ही मम्मी के साथ कर.”
मम्मी: “अर्रे, ऐसे नही, मुझे तुम दोनो के मज़े एक साथ चाहिए.”
आज पूरी रात वासना का खेल चलने वाला था. दूसरी तरफ मातम छ्चाया हुआ था. हॉस्पिटल में पापा और बुनती अंकल खड़े थे. पापा के आँखें नाम थी, उनके आस-पास और लोग थे. तभी एक 65 साल के बुज़ुर्ग आदमी पापा के पास आए, उनकी आँखों में आँखें डाल कर देखा और उनको छाँटा मार दिया. उस छानते की गूँज ने सब का अटेन्षन उनकी तरफ खींच लिया.
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