माँ और बेटी दोनों को चोदा

यह एक सच्ची कहानी है, मानो या न मानो, आज से तीन साल पहले शुरू हुई और आज भी जारी है।

मेरा नाम महेश शाह, उम्र 39 साल, एक बैंक ऑफिसर हूँ और वदोदरा में रहता हूँ।

बैंक में एक दिन 36-37 साल की एक महिला मेरे पास आई।

उससे ऐसे ही मैंने उसके पति बारे में पूछा, तो वह बोली- वो तो हमेश बाहर ही रहते हैं।

तो मैं बोला- तो फिर आप बोर हो जाती होगी?

वह बोली- हाँ ! आप आओगे मुझे कंपनी देने?

तो मैंने कहा- क्यों नहीं !

शनिवार को आधे दिन का काम होता हे बैंक में, एक शनिवार मैं उसके घर गया। उसकी एक बेटी है, वो तब स्कूल गई हुई थी। घर पर और कोई नहीं था।

उसने मुझे बिठाया और गर्म कॉफ़ी लेकर आई और मेरे बाजू में बैठ गई। उसने सिर्फ एक गाउन पहना था, अंदर कुछ नहीं पहना था।

बातों ही बातों में, उसने मेरी दो जांघों के बीच हाथ रख दिया।

मैं तैयार था, मैंने भी उसके वक्ष पर हाथ रख दिया। उसके स्तन बहुत ही बड़े थे, पर एक लड़की माँ होने की वजह से थोड़े नर्म थे।

मैंने उसका गाउन निकल दिया। अब वह पूरी नंगी थी, मैंने उसके स्तन चूसना शुरु किया। दोनों स्तनों के चुचूक बारी-बारी चूसने लगा। फिर मैं नीचे लेट गया और उसको ऊपर की तरफ उल्टा करके उसकी भोंस चाटने लगा, और ऊपर से वह मेरे पैर की तरफ मुँह करके मेरा बड़ा लण्ड चूसने लगी। दस मिनट तक हम एक दूसरे की चूसते रहे। फिर, मैंने उसे चार पैरों पर करके पीछे से कुत्ते की तरह चोदना शुरु किया। उसकी चूत बहुत बड़ी थी, 15 मिनट तक चुदने के बाद वो थक गई और नीचे लेट गई। मैंने उसके दोनों पैरों के बीच जाकर उसे चोदना शुरु किया और जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा।

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उसकी भोंस में से पानी निकल रहा था और छप-छप, पुच-पुच की आवाजें आ रही थी। वह मुझे और जोर से, और जोर से, जल्दी जल्दी चोदने को कह रही थी, उसका पूरा बदन कांपने लगा, उसकी चूत लपकारे मारने लगी थी। उसे बहुत ही मजा आ रहा था, वह अब चरम सीमा पर आने लगी थी, वह छटपटाने लगी थी, मुँह से आवाजें निकल रही थी और वह जोर से चीखी। उसकी भोंस में से पानी का एक फव्वारा उठा, वह अब झड गई थी और आहें भर रही थी। वह अब ठण्डी हो रही थी। मैंने भी आखिर उसे जोर-जोर से चोद के अपना वीर्य उसकी भोंस में ही निकाल दिया।

वह मुझे जोर से पकड़ कर चूम रही थी, वह बहुत ही खुश थी, कहने लगी- अब किसी और से कभी नहीं चुदवाऊँगी।

फिर हम दोनों हर शनिवार को चुदाई करते थे। वह मुझे हमेशा कोई न कोई बड़ा उपहार देती थी।

एक शनिवार को हम दोनों बिस्तर पर पूरे नंगे होकर चुदाई रहे थे….

उस वक्त उसकी बेटी स्कूल से जल्दी वापस आ गई। हम चुदाई में मशगूल थे। घर में और कोई नहीं था इसलिए हम बेडरूम का दरवाजा बंद करना भूल गए थे। वह हमें बाहर से देख रही थी। उसे देखने में मजा आ रहा था और छुप-छुप कर देख हमें चुदाई करते रही थी। और अपने दोनों स्तन अपने हाथों से दबा रही थी।

अचानक मेरी नज़र उस पर पड़ी। मैंने चोदते हुए ही उसकी माँ के कान में कहा- तुम्हारी बेटी आ गई है और हमें देख रही है।

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वह घबरा गई- अब क्या होगा?

तो मैंने उसे कहा- उसको चुप करने का एक ही तरीका है- उसे भी चोद डालो।

उसकी माँ ने कहा- वो चिल्लाएगी तो?

तो मैंने कहा- वो हमें देख कर मजे ले रही है, उसका भी चुदवाने का मन होगा। एक बार मैं उसे चोद डालूँगा तो फिर वो बार-बार मुझसे ही चुदवायेगी। और वैसे भी वो आज नहीं तो कल, स्कूल या कॉलेज में किसी आवारा लड़के से चुदवायेगी ही। उससे बेहतर है कि मैं ही उसे घर में ही चोदूँ। उसकी हवस भी मिट जाएगी और पढ़ाई में भी ध्यान दे पाएगी।

तो उसनी माँ ने कहा- ओ के ! ठीक है।

मैं एकदम से उठ कर नंगा ही कमरे के बाहर आ गया। उसकी बेटी कुछ समझे, उससे पहले ही मैंने उसके पीछे से उसके दोनों स्तन पकड़े और उठाकर कमरे में ले आया। वो छटपटा रही थी और “मुझे छोड़ दो” कह रही थी। मैंने उसकी एक न सुनी, उसके स्तन दबाते हुए उसके शर्ट के बटन खोल डाले, और उसकी ब्रा निकल दी। उसके स्तन छोटे पर कड़क थे। मैंने उसके चुचूक चूसने शुरु किये, वो छटपटा रही थी और छुटने की कोशिश कर रही थी। मैंने उसकी माँ को उसकी पैंटी निकालने को कहा। फिर मैंने उसकी भोंस पर हाथ फेरना शुरु किया। उसकी भोंस गुलाबी थी और बाल आने शुरु नहीं हुए थे।

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