मा की मौत के बाद पापा ने चोदा

मेरा नाम रीता है, और मैं आपको अपनी रियल सेक्स स्टोरी बताने जेया रही हू. मेरी उमर 22 साल है, और मेरे पापा के साथ मेरी चुदाई का सिलसिला पिछले 2 साल से चल रहा है. चलिए आपको सब डीटेल में बताती हू.

मैं राजस्थान के जाईपुर की रहने वाली हू. अभी मैं कॉलेज के फाइनल एअर में पढ़ती हू. मैं देखने में अट्रॅक्टिव और गोरे रंग की हू. ये बात तब की है जब मेरा कॉलेज का फर्स्ट एअर चल रहा था. उस वक़्त मेरा साइज़ 32-28-34 था. मैं लेगैंग्स-कुरती पहनती थी ज़्यादातर.

मेरे घर में मेरे अलावा सिर्फ़ मम्मी-पापा थे. मैं उनकी एक-लौटी संतान थी. मम्मी पिछले 6 महीनो से बीमार थी, तो मुझे ही घर का सारा काम देखना पड़ता था. पापा मेरे दुकान चलते थे.

फिर एक दिन मुझे कॉलेज में मेसेज मिला की मेरे घर से फोन आया था, और मेरी मम्मी की डेत हो चुकी थी. मैं जल्दी से घर आई. बहुत दुखी थी मैं, और बहुत रोई.

टाइम बीट-ता रहा, और कुछ ही महीनो में हालात ठीक हो गये. मैं और पापा अपनी रेग्युलर लाइफ में बिज़ी हो गये. मम्मी के रहते पापा मुझसे ज़्यादा बात नही करते थे, लेकिन अब करने लगे थे. लेकिन फिर ऐसी चीज़ें होने लगी, जो मैने सोची नही थी.

एक दिन मैं बातरूम में नहा रही थी. हमारे बातरूम का दरवाज़ा ठीक से बंद नही होता था, और ये काफ़ी वक़्त से ऐसा था. घर में सब को इसके बारे में पता था, तो हर कोई उसको खोलने से पहले पूच लेता था, की कहीं कोई अंदर ना हो.

लेकिन उस दिन जब अचानक मेरा ध्यान दरवाज़े की तरफ पड़ा, तो मैने देखा बाहर कोई खड़ा था. मुझे नीचे पैरों की परछाई दिख रही थी. ये देख कर मैं घबरा गयी. अब घर में तो मेरे अलावा पापा ही थे, तो क्या मेरे पापा मुझे देख रहे थे. ये सोच कर मुझे अजीब सा फील होने लगा.

फिर मैं च्छूपी नज़रों से बार-बार उस परछाई को देखने लगी. तभी वहाँ ज़मीन पर कुछ लिक्विड आके गिरा. मैं पॉर्न देख चुकी थी, तो मुझे पता था की वो लिक्विड क्या था. तभी वो परछाई वहाँ से हॅट गयी.

मैं इस बात को हाज़ाम करने की कोशिश ही कर रही थी, की अगली घटना हुई. उसी दिन रात को जब मैं अपने रूम में थी, तो पापा धीरे से मेरे कमरे में आए. मैं जाग रही थी, लेकिन आँखें बंद थी तो पापा को लगा मैं सो चुकी थी.

पापा मेरे नज़दीक आए, और मेरे बदन पर हाथ फेरने लगे. उन्होने मेरे बूब्स दबाए, फिर जांघें सहलाई, और फिर छूट पर हाथ फेरने लगे. ये सब करके वो कमरे से निकल गये. उनके जाने के बाद मैने देखा मेरी छूट गीली हुई पड़ी थी. बड़ी अजीब सी फीलिंग थी. मुझे ये सोचने में भी शरम आ रही थी की मेरे पापा मेरे साथ सेक्स करना चाहते थे.

फिर ये चीज़ें अक्सर होने लगी. अक्सर पापा मुझे दिन में कहीं ना कहीं बहाने से छ्छूने लगे. रात को वो मेरे कमरे में आते, और मुझे सोई हुई देख कर मेरे जिस्म को छ्छूते. अब तो बात होंठो पर हल्की किस, और छूट सूंघने तक पहुँच चुकी थी.

अब मुझे भी इस सब की आदत हो चुकी थी, और मेरी छूट गीली रहने लगी थी उनके ऐसे करने से. पापा इससे आयेज नही बढ़ रहे थे, तो मैने सोचा की इतने से कुछ नही होता. लेकिन वो आयेज बढ़े, और इतना बढ़ गये, की मैं उनकी रंडी बन गयी.

सनडे का दिन था, और बहुत बारिश हो रही थी. मेरी कॉलेज की छुट्टी थी, और पापा भी बारिश के चलते घर पर ही थे. दोपहर हो चुकी थी, और मैं किचन में खाना बना रही थी. मैने लाल रंग की लेगैंग्स और येल्लो कलर का कमीज़ पहना था. दुपट्टा नही लिया हुआ था मैने.

मैं रोटी बेल रही थी, की तभी पापा पीछे से आए, और उपर वाली स्लॅब से कुछ उठाने के बहाने मेरे पीछे चिपक गये. मुझे अपनी गांद पर उनका खड़ा लंड महसूस होने लगा, लेकिन मैने कोई रिक्षन नही दिया. मुझे लगा की वो तोड़ा रग़ाद कर पीछे हो जाएँगे. लेकिन ऐसा नही हुआ.

पापा अपना लंड रगड़ने लगे, और मैं रोटी बेल्टी रही. मेरी साँसें थोड़ी तेज़ होने लगी थी. फिर जैसे ही मैने रोटी उठा कर तवे पर रखी, पापा ने अपने हाथ आयेज किए, और मेरे दोनो बूब्स पर रख दिए. उनकी इस हरकत से मैं हैरान हो गयी.

पापा अब मेरी गांद पर लंड रगड़ते हुए मेरे बूब्स दबाने लगे, और मेरी गर्दन पर किस करने लगे. मैं समझ नही पा रही थी की मैं क्या करू. मैं जल्दी से रोटी पलटने लगी, लेकिन वो मेरे हाथ से गिर गयी.

जब मैं रोटी उठाने नीचे झुकी, तो पापा ने मुझे वैसे ही रोक लिया. फिर पापा ने पीछे से मेरी लेगैंग्स नीचे की, और साथ ही पनटी भी नीचे कर दी. मैं समझ चुकी थी की आज मेरी चुदाई होने वाली थी. मेरी छूट में इतनी खलबली मच चुकी थी की मैं उनको कुछ बोल ही नही सकी.

फिर पापा ने मेरी छूट को हाथ लगाया. शायद वो चेक कर रहे थे की छूट गीली थी या नही. छूट पर हाथ फेरने के बाद पापा ने अपना लंड मेरी छूट पर रखा, और दबाव बनाने लगे. मुझे दर्द होने लगा, और पापा का लंड छूट के अंदर जाने लगा.

मैं आ पापा श पापा करने लगी, लेकिन पापा ने ज़ोर लगा कर लंड चूत में घुसा दिया. मेरी दर्द से चीख निकल गयी. मैं आयेज भी नही हो सकती थी, क्यूंकी आयेज जगह नही थी. पापा लंड डाल कर वहीं रुके रहे. मेरी आँखों से आँसू नीचे ज़मीन पर गिर रहे थे.

कुछ देर के दर्द के बाद मेरी छूट पानी छ्चोढने लगी. अब दर्द कम हो गया, और मदहोशी छाने लगी. मेरी गांद अपने आप हिलने लगी. ये देख कर पापा ने धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर करना शुरू किया. मुझे अब मज़ा आने लगा, और मेरी दर्द भारी आहें कामुक सिसकियों में बदलने लगी.

फिर पापा ने धक्के तेज़ कर दिए. अब ठप-ठप की आवाज़ आने लगी. पापा की स्पीड बहुत तेज़ हो गयी, और मुझे मज़ा भी बहुत आने लगा. 15 मिनिट बाद मुझे अपनी छूट में गरम-गरम महसूस हुआ. मैं समझ गयी ये उनका वीर्या था. फिर पापा वहाँ से बिना कुछ बोले चले गये.

उसी रात को पापा मेरे कमरे में आए, और मुझे रात भर छोड़ते रहे. मैं भी मज़े ले-ले कर चूड़ी. हमारे बीच बात नही होती थी इस दौरान, लेकिन चुदाई रोज़ होने लगी. मैं समझ गयी थी की अब मैं अपने पापा की रांड़ थी, और मैं खुश भी हू.

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