मा-बेटे के बीच पहले सेक्स की कहानी

अंतर्वसना कहानी अब आयेज से-

रात को करीब 10 बजे, जब सब लोग सो चुके थे, मम्मी धीरे से मेरे बेडरूम में आई. मैं बेड पर लेता हुआ था, पर नींद आँखों से कोसो डोर थी. मेरा दिमाग़ दिन भर की घटनाओं में उलझा हुआ था. मम्मी मेरे बेड के पास आकर बैठ गयी. उनके चेहरे पर उदासी थी, और आँखों में एक सवाल था.

मम्मी (आँखों में नामी के साथ): बेटा, तू नाराज़ है मुझसे? अनिरुढ़ जी से?

मैने करवट बदल ली, उनकी तरफ देखा नही.

मैं: कुछ नही मम्मी.

मम्मी ने मेरा हाथ पकड़ा. उनका स्पर्श गरम और नरम था, पर इस बार मुझे उसमें वो सुकून नही मिला जो पहले मिलता था. उन्होने मेरे हाथ को हल्के से सहलाया.

मम्मी (मेरी तरफ झुक कर, कान में फुसफुसते हुए): आराव, मुझे पता है तू क्या सोच रहा है. मैं जानती हू तुझे बुरा लगा है.

मैने एक झटके से करवट बदली और उनकी तरफ देखा.

मैं: तो फिर क्यूँ करती हो ऐसा? आपको शरम नही आती? मेरे सामने… मेरे दोस्त के साथ…

मम्मी की आँखों में दर्र और शरम सॉफ दिखी. उन्होने नज़रें झुका ली.

मम्मी: आराव, मैं…

मैने उन्हें बीच में ही रोक दिया.

मैं: क्या मैं? मैं समझ गया मम्मी. आपको सिर्फ़ अपनी खुशी चाहिए, मेरी कोई परवाह नही. मैने आपके लिए क्या कुछ नही किया? और आप… आप मुझे डल्ला समझने लगी हो, है ना?

मेरी आँखों में पानी भर आया. मम्मी ने मेरा हाथ कस के पकड़ लिया.

मम्मी (रोते हुए): आराव, ऐसा मत बोल बेटा. तू मेरा सब कुछ है. मैं तुझे कभी ऐसा नही समझूंगी. और अनिरुढ़ जी… वो तो बस…

मैं (चीखते हुए): बस क्या? वो आपको मेरी आँखों के सामने… और आप उनसे चिपक कर बैठी थी, मुझे इग्नोर कर रही थी. जैसे मैं वहाँ था ही नही!

मम्मी ने मेरा चेहरा अपने हाथो में लिया. उनकी आँखों में आँसू थे.

मम्मी: मुझे माफ़ कर दे आराव. मैं नही जानती थी तुझे इतना बुरा लगेगा. मैं तो बस…

मम्मी ने खुद को मुझसे अलग किया और मेरी आँखों में देखा.

मम्मी: मैं तेरे सामने ऐसा नही करती अगर तुझे इतना बुरा लगता. पर अनिरुढ़ जी ने… उन्होने कहा की तुम समझदार हो, और तुम्हे पता है की हमारी खुशी में तुम्हारा भी हाथ है.

मैने आँखें बंद कर ली. अनिरुढ़ भाई ने सब कुछ जान-बूझ कर किया था. ये सब मेरी नफ़रत बढ़ने के लिए किया था. मम्मी और अनिरुढ़ भाई, दोनो ने मुझे ज़लील किया था. धीरे से मम्मी ने मेरे गाल पर हाथ रखा.

मम्मी: आराव, मैं जानती हू तुझे मुझ पर गुस्सा है. पर प्लीज़, मुझे ऐसे अकेला मत छ्चोढ़.

मेरी आँखों में मम्मी की बेचैनी दिख रही थी. उनकी चाहत, उनकी खुशी, सब कुछ मेरे हाथो में थी. पर अब मेरे अंदर अनिरुढ़ भाई के लिए नफ़रत थी.

मैं (धीमी आवाज़ में): मम्मी, मैं नही चाहता की आप दुखी रहो. पर मुझे अनिरुढ़ भाई से ये सब…

मम्मी ने मेरे होंठो पर अपनी उंगली रखी. उन्होने मेरे मोबाइल से अनिरुढ़ भाई का नंबर डाइयल किया और स्पीकर पर रखा. मेरा दिल एक अंजाने दर्र और इंतेज़ार में तेज़ धड़कने लगा.

ओं कॉल:-

अनिरुढ़ भाई: हेलो आराव, कैसे याद किया?

मम्मी (सर्द आवाज़ में): आराव नही, मैं यामिनी बोल रही हू.

अनिरुढ़ भाई (रोमॅंटिक होते हुए): श, क्या बात है. इतनी रात को आपको मेरी याद सताने लगी?

मम्मी: अब से ना मुझे आपकी याद सताएगी ना आपको मेरी याद सटानी चाहिए. आज से आपका और मेरा रिश्ता ख़तम.

ये सुन कर मेरे होश उडद गये. मैं मम्मी को हैरानी से देखने लगा.

अनिरुढ़ भाई: क्यूँ मज़ाक कर रही हो मेरी जान?

मम्मी (गुस्से में): समझ नही आया मैने क्या कहा? और तमीज़ से बोलना सीखो.

अनिरुढ़ भाई (शॉक और दर्र के साथ): अर्रे अर्रे, अचानक क्या हुआ? आपके घर पर सब ठीक तो है ना?

मम्मी: घर पर सब ठीक है, मेरा बेटा आराव भी ठीक है. लेकिन आपका व्यवहार ठीक नही है.

अनिरुढ़ भाई (घबराते हुए): मैने क्या किया?

मम्मी: आपने जो किया वो माफी के लायक नही है. आपने आज मेरे बेटे का अपमान किया. मेरे लिए मेरा आराव सब कुछ है.

अनिरुढ़ भाई (आवाज़ में बेचैनी बढ़ती है): लेकिन मैने ऐसा क्या कर दिया उसके साथ?

मम्मी: आप अपने आप को क्या समझते है? मेरा बेटा हमे सपोर्ट करता है तो कमज़ोर है? और आज आप उसको क्या बोले, “ठीक है, नीचे वेट कर. यामिनी जी को भेज रहा हू.” तो क्या समझ कर आप ऐसा बोले?

मम्मी (उनकी आँखों में गुस्सा और चेहरे पर दर्द): मैं आप से मिलने आती हू, आप से कुछ टाइम एंजाय करती हू, तो क्या आपने मुझे अपनी प्रॉपर्टी समझ लिया है? अनिरुढ़ जी, मुझे आपसे ये उम्मीद नही थी.

अनिरुढ़ भाई (गिड़गिदते हुए): अर्रे सॉरी, मेरा वो मीनिंग नही था. ऐसा है तो मैं आराव से पर्सनली सॉरी बोल दूँगा. प्लीज़ आप मेरे से इतना नाराज़ ना हो जाओ.

मम्मी: आराव को आप सॉरी बोलो या ना बोलो, वो आपकी मर्ज़ी है. पर मेरे बेटे का अपमान मैं से नही सकती.

अनिरुढ़ भाई आयेज कुछ बोले उसके पहले मम्मी ने फोन काट दिया. कमरे में एक तेज़ सन्नाटा च्छा गया. मैं मम्मी को देख रहा था, समझ नही पा रहा क्या होगा.

उसके बाद मम्मी ने मुझे फोन दिया और बोली: आयेज से अनिरुढ़ जी तेरे से कयडे से बात करेंगे. आराव, तुझे लग रहा होगा की मैं तुझे समझ नही रही हू, तुझे इंपॉर्टेन्स नही दे रही हू. पर बेटा, ऐसा नही है. मेरे लिए तुम ही सब कुछ हो. तुम्हारे लिए मैं किसी को भी छ्चोढ़ सकती हू.

मम्मी: अनिरुढ़ जी तो बस ज़रिया है आराव. मेरी खुशी तो अब तुझमे है. तू ही तो है जो मुझे समझता है. तू ही तो है जिसने मुझे ये आज़ादी दी.

उन्होने फिर मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपनी निघट्य के अंदर ले गयी. मेरा हाथ उनके बूब्स पर था, और इस बार मम्मी ने मेरे हाथ को अपने बूब्स पर कस्स के दबाया. उनकी आँखों में एक गहरी चाहत थी.

मैं: मम्मी…

मम्मी ने मेरा चेहरा अपने हाथो में लिया और मेरे होंठो पर अपनी उंगली फेरी.

मम्मी: आज रात, सिर्फ़ तू और मैं, आराव. किसी और की ज़रूरत नही.

उनकी आँखों में जो चमक थी, वो सिर्फ़ अनिरुढ़ भाई के लिए नही थी. वो मेरे लिए थी. वो चमक थी एक मा की, जो अब अपने बेटे में अपना सब कुछ ढूँढ रही थी. मेरे अंदर का गुस्सा धीरे-धीरे शांत होने लगा, और उसकी जगह एक नयी, अजीब सी हवस और चाहत ने ले ली.

मम्मी की बात सुन कर मेरे अंदर एक झुरजुरी दौड़ गयी. उनके बूब्स पर मेरा हाथ अभी भी था, और उनकी साँसें तेज़ हो रही थी. उनकी आँखों में वो चाहत इतनी सॉफ थी की मुझे कुछ बोलने की ज़रूरत ही नही पड़ी. मम्मी ने धीरे से मेरा हाथ उठाया और मेरे चेहरे पर ले आई. उन्होने अपने होंठो को मेरे होंठो से मिला दिया.

ये किस पहले वाली किस्सस से बिल्कुल अलग थी. इसमें शरम नही थी, ना ही कोई रोक-टोक. ये एक गहरी, जुनूनी किस थी, जिसमे मम्मी ने अपनी सारी ख्वाहिशें उधेल दी थी. मैं भी इस पल में पूरी तरह खो गया. मेरे हाथ अपने आप उनकी कमर पर चले गये और मैने उन्हे अपने करीब खींच लिया.

उनकी निघट्य के पतले कपड़े से उनका गरम जिस्म मुझे महसूस हो रहा था. मम्मी ने अपने होंठो को मेरे होंठो पर मसला, और उनकी जीभ मेरे मूह में आ गयी. मैने भी उनकी जीभ को चूसा, और वो एहसास मेरे अंदर आग लगा रहा था.

हम दोनो की साँसें तेज़ हो गयी थी. मम्मी ने होंठ अलग किए, पर उनका माता मेरे माथे से लगा हुआ था. उनकी आँखों में प्यार, जुनून, और एक नयी शुरुआत की चमक थी.

मम्मी (फुसफुसते हुए, उनकी साँसें गरम थी): आराव, मैं नही जानती थी की मैं तुझसे इतना प्यार करती हू.

मैं (धीमी आवाज़ में,उम्मी की आँखों में देखते हुए): मम्मी, मैं भी आपसे बहुत प्यार करता हू.

मम्मी ने धीरे से मेरे लंड पर हाथ रखा, जो अब शॉर्ट्स के अंदर तंबू बना रहा था. उनकी उंगलियों का स्पर्श मिलते ही मेरा लंड और भी सख़्त हो गया. मम्मी ने नॉटी स्माइल दी.

मम्मी (मुस्कुराते हुए): लगता है मेरा बेटा भी आज बहुत खुश है.

मैने शर्मा कर नज़रें झुका ली. मम्मी ने मेरा चेहरा उठाया और मेरे होंठो को फिर से चूसा. इस बार वो किस और भी गहरी और जोशीली थी. मम्मी ने मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपनी निघट्य के अंदर अपने बूब्स पर रख दिया. उन्होने मेरे हाथ को अपने बूब्स पर मसला, और मेरी उंगलियों को उनकी निपल के उभार पर महसूस होने दिया. मम्मी की साँसें रुक सी गयीं.

मम्मी (मेरी आँखों में देखते हुए): आराव, आज से हम दोनो, हम दोनो एक-दूसरे के लिए है. किसी तीसरे को हमारे रिश्ते का पता नही चलेगा.

मैं समझ गया. ये एक नयी शुरुआत थी. एक मा और बेटे के बीच का रिश्ता अब एक च्छूपे और गहरे प्यार में बदल चुका था. जिस हवस को मैने पहले अनिरुढ़ भाई के लिए महसूस किया था, वो अब पूरी तरह से मम्मी पर केंद्रित हो गयी थी.

मम्मी ने धीरे से अपनी निघट्य को उतरा, और वो सिर्फ़ पनटी में मेरे सामने थी. उनके भरे हुए बूब्स, पतली कमर, और गोल गांद, सब कुछ मुझे मदहोश कर रहा था. मम्मी ने शरमाते हुए मुस्कुराइ.

मम्मी (धीमी आवाज़ में): आराव, तू क्या देख रहा है?

मैं (मम्मी की आँखों में देखते हुए): मम्मी, आप बहुत खूबसूरत हो.

मम्मी ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने करीब खींच लिया. मैने उनके बूब्स दबाते हुवे उनके गले पर सब जगह किस कर रहा हू. उनकी गरम साँसें मेरे कान पर पद रही थी, और उनके मूह से एक मदहोश आ निकली. मैं उनके गले से नीचे उतार कर उनके कंधो और छ्चाटी के पास किस करता गया. मम्मी ने अपना सर पीछे किया और अपनी आँखें बंद कर ली, जैसे वो इस पल का पूरा आनंद ले रही हो.

मैं उनके बूब्स को अपने हाथो से सहलाता रहा, और उनकी निपल्स को अपनी उंगलियों से मसालने लगा. मम्मी के मूह से सिसकियाँ निकालने लगी. उनका जिस्म मेरे हाथों में गरम और नरम लग रहा था. मैने उनके बूब्स को धीरे से चूमा, और फिर उन्हे अपने मूह में लेकर चूसने लगा. मम्मी ने अपने बालों में मेरे हाथ को कस्स कर पकड़ लिया.

मैं धीरे से मम्मी की पनटी उतार कर उनको पूरा नंगा कर दिया. हम मा-बेटे अब पुर नंगे थे, एक-दूसरे के सामने. फिर मैं झुक कर उनकी छूट देखने लगा. ये वही छूट थी जहाँ से मैं निकला था और आज यही छूट की आग बुझाने का मुझे मौका मिला था. उसका गुलाबी रंग और हल्की नामी मुझे और भी उत्सुक कर रही थी.

मैने अपना चेहरा मम्मी की छूट के करीब लाया और धीरे से उसे चूमा. उनकी साँसों की गर्मी और उनके जिस्म की महक मुझे मदहोश कर रही थी. मम्मी ने अपने पैर थोड़े और खोले, जैसे वो मुझे निमंत्रण दे रही हो. मैने अपनी जीभ बाहर निकली और उनकी छूट के उपरी हिस्से पर फिरनी शुरू की, जहाँ से हल्की नामी महसूस हो रही थी. मम्मी ने एक मदहोश आ भारी और उनका जिस्म मेरे स्पर्श से काँप उठा.

मैं धीरे-धीरे उनकी छूट को चाटने लगा, उपर से नीचे तक, और फिर वापस उपर. हर बार जब मेरी जीभ उनकी छूट पर फिरती, मम्मी के मूह से सिसकियाँ निकालने लगती. उन्होने अपने हाथो से मेरे सिर को पकड़ लिया और उसे अपनी छूट पर और कसने लगी. उनकी गरम साँसें मेरे कानो में पद रही थी.

मैं अपनी जीभ को उनकी छूट के अंदर घुसने लगा, और उसे अंदर-बाहर करने लगा. मम्मी का जिस्म अब पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था. उनकी छूट से रस निकालने लगा था, और मैं उस रस को चाट-चाट कर पीने लगा. उस रस्स का स्वाद मेरे मूह में फैल गया, और मुझे एक अजीब सा नशा चढ़ने लगा.

मम्मी ने अपने पैर मेरे कंधो पर रख दिए, और उनका जिस्म उत्तेजना से तर-तर काँप रहा था. वो सिर्फ़ आ और सिसकियाँ भर रही थी, और उनकी आँखों में खुशी और आनंद सॉफ दिख रहा था.

उसके बाद मम्मी ने मेरा सर पकड़ कर उपर खींचा और मुझे लिप्स किस देकर बोली: आराव, तू तो बिल्कुल मेरे सपनो का राजा है. कभी सोचा नही था मेरा बेटा इतना नॉटी होगा.

मैं (मम्मी की आँखों में देखते हुए): और मम्मी, आप भी तो कम नही. आपके नखरे तो और भी जानलेवा है.

मम्मी (हल्के से हेस्ट हुए): चल बदमाश, ज़्यादा तारीफ मत कर. वरना तेरी मम्मी और बिगड़ जाएगी.

मैं (मम्मी के बूब्स पर हाथ फेरते हुए): अब आप बिगड़ भी जाओगी तो मुझे क्या? मैं तो खुश ही होऊँगा. मेरा ही तो फ़ायदा है.

मम्मी ने मेरे गाल पर हल्के से थप्पड़ मारा.

मम्मी (शरारत से): तू तो सच में बेशरम हो गया है. अपनी मम्मी को नंगा कर दिया. और तो और छूट भी चाट ली मेरी.

मैं (उनकी आँखों में चाहत से देखते हुए): जब मम्मी इतनी हॉट हो, तो बेटा क्या करे? कंट्रोल ही नही होता. और वैसे भी, अनिरुढ़ भाई से अची तो मैं ही चाट सकता हू ना?

मम्मी (मेरी बात सुन कर थोड़ी शर्मा गयी, पर उनके होंठो पर मुस्कान आ गयी): बस कर, बेशरम. अब ज़्यादा बोल मत. और अनिरुढ़ का नाम मत ले. अब सब कुछ मेरा सब कुछ तेरा है.

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