मा और बहनो के भाई से चुदने की हॉट कहानी

हेलो दोस्तों, मैं क़ासिम लेकर आया हुआ आपके लिए एक नयी कहानी. पिछली स्टोरी में आपने पढ़ा था, की कैसे मैने और बॉस ने मेरी मा छोड़ी. अब आयेज की कहानी.

मैं मा को च्छूप-च्छूप कर छोड़ता रहता, या उन्हे बॉस के घर ले जेया कर छोड़ता था. मुझे ये दर्र हमेशा रहता, की बहनो को पता ना चल जाए. मगर जिसका दर्र था वही हुआ, और ना चाहते हुए भी मेरी ख्वाहिश पूरी हो गयी.

फिर कुछ महीने बीट गये. मैं मा को छोड़ता रहता था. एक बार हम लोग चुदाई कर रहे थे, की मुझे लगा खिड़की से कोई झाँक रहा था. मैने नज़र च्छूपा के देखा तो वो मेरी बड़ी बेहन थी फ़ातिमा.

मैने ज़्यादा ध्यान नही दिया, और मा की छूट में झाड़ गया, और अपने रूम में चला गया. कुछ देर बाद फ़ातिमा आई. उसने एक टाइट सूट पहना था, जिसमे उसके बूब्स और गांद बाहर आ रहे थे. वो बहुत गुस्से में लग रही थी. फिर वो आ कर मेरे पास बैठ गयी.

उसने मुझे पूछा: तुम मा के साथ क्या कर रहे थे?

मैने बोला: कुछ नही.

वो बोली: सच-सच बताओ, मैने सब देख लिया है.

मैने सोचा अब च्छुपाने से कोई मतलब नही था. तो मैने उसको सब कुछ बता दिया, की कैसे मेरा बॉस और मैं मा को छोड़ते थे. वो शॉक हो गयी, और मुझे डाँटने लगी.

फिर वो बोली: सेयेल बेशरम, शरम नही आई अपनी मा को बेचते हुए, और फिर ज़लील करके?

ऐसा कह कर उसने मुझे एक छाँटा मारा. मुझे गुस्सा आया तो मैने उसको पकड़ के सीधा बेड पे लिटा दिया. मैने उसके कपड़े निकाल दिए. उसने रेड कलर की ब्रा पहनी थी. वो मुझे माना करने लगी.

उसका फिगर था 30-26-32. साली एक नंबर की माल लगती थी. मैने सोचा आज तो अपनी सारी हवस निकाल दूँगा उसपे. मैने उसका सूट पूरा निकाल कर फेंक दिया. उसकी आवाज़ सुन कर मा मेरे रूम तक आ गयी. जमीला अभी घर पे नही थी. मा ने देखा क्या हो रहा था, तो वो चौंक गयी.

उसने पूछा: क्या हो रहा है?

तो मैने बोला: साली तेरी बेटी को तो आज मैं रांड़ बना कर रहूँगा.

ये बोल कर मैने मा को वापस भेज दिया. फ़ातिमा अब सिर्फ़ ब्रा पनटी में थी. वो मेरे क़ब्ज़े में थी, और मुझे डोर नही कर पा रही थी. रेड कलर की ब्रा और काली पनटी पहनी थी साली ने.

फिर मैने अपना लंड उसके मूह में घुसेध दिया. वो माना कर रही थी, लेकिन उसके माना करने में वो बात नही थी. ऐसा लग रहा था, की फॉरमॅलिटी कर रही हो.

वो बोल रही थी, की प्लीज़ ऐसा मत करो. पर मैने एक ना सुनी, और अपना लंड उसके मूह में घुसेध दिया. पूरा लंड अंदर जाते ही उसको साँस लेने में तकलीफ़ हो रही थी.

10 मिनिट लंड चुसवाने के बाद मैने अब उसकी पनटी निकाल कर फेंक दी. क्या मस्त चिकनी छूट थी.

वो अभी भी बोल रही थी: प्लीज़ मुझे छ्चोढ़ दो, मैं तुम्हारी बेहन हू.

लेकिन अब वो सिर्फ़ मूह से बोल रही थी, और मुझे डोर नही कर रही थी. मैने जब नीचे उसकी छूट को हाथ लगाया, तो देखा उसकी छूट पूरी तरह गीली थी. इसके मतलब ये था, की गरम वो भी हो चुकी थी. लेकिन भाई से चूड़ने में हिचकिचा रही थी.

मैने झट से अपना लंड उसकी छूट में एक धक्के में ही घुसेध दिया. वो उछाल पड़ी और चिल्लाने लगी. तब तक जमीला भी घर आ चुकी थी.

वो ये सब आवाज़े सुन कर कमरे तक आई. जब उसने ये सीन देखा, की मैं अपनी बेहन को बहुत ही गंदे तरीके से छोड़ रहा था, तो वो दर्र गयी और चली गयी.

अब फ़ातिमा ने आहें भरनी शुरू कर दी थी. जब मैने अपने होंठ उसके होंठो से मिलाए, तो उसने किस में मेरा पूरा साथ दिया. वो नीचे से गांद भी हिला रही थी लंड लेने के लिए.

मैने फ़ातिमा को करीब 30 मिनिट तक छोड़ा, और उसकी छूट में ही झाड़ गया. जब मेरा ख़तम हुआ, तो उसकी छूट से भी सफेद पानी निकल रहा था. इसका मतलब वो भी झाड़ गयी थी.

मैने कहा: आज से तू मेरी रांड़ है. जब मर्ज़ी होगी आके छोड़ूँगा.

रात को मैं फिरसे उसके कमरे में गया, और उसकी डुमदार चुदाई की. उसने रात को मुझे एक बार भी माना नही किया, और मज़ा लेते हुए चूड़ी.

अब धीरे-धीरे वो भी खुल कर मुझसे छुड़वाने लगी. मैं अब दोनो मा बेटी को एक साथ छोड़ता था. जमीला सब कुछ जानती थी, पर कुछ कर नही सकती थी. हर रोज़ रात को उसको हमारे कमरे से आवाज़े आती थी.

उसे पता था, की अगली बारी उसकी ही थी और मैं उसको भी छोड़ूँगा और अपनी रांड़ बनौँगा. एक दिन वो जब नहा रही थी, तो मैं ग़लती से बातरूम में चला गया. उसका गोरा मस्त बदन देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया. वो मुझे बाहर निकालने लगी, पर मैने कहा-

मैं: मैं इतनी आसानी से जाने वाला नही.

फिर मैने उसको खींच के अपनी बाहों में जाकड़ लिया, और उसके बड़े-बड़े बूस दबाने लगा. क्या मस्त मुलायम थे वो. वो भी गरम हो गयी थी.

अब मैं अपनी उंगली उसकी छूट पर रगड़ने लगा. मेरा लंड उसकी गांद में चुभ रहा था. मैने उसको नीचे बिताया, और उसको अपना लंड दिया. वो खुशी-खुशी मेरा लंड चूसने लगी.

करीब 20 मिनिट तक लंड चूसने के बाद मैने उसको दीवार से लगाया, और उसकी छूट पर लंड रगड़ा. फिर एक ही धक्के में आधा लंड अंदर घुसा दिया. वो चिल्ला उठी.

मैं उसको किस करता रहा. धीरे-धीरे चूड़ने के बाद उसका दर्द कम हुआ, और अब वो मज़े से चुड रही थी. उसके बूब्स और आस फ़ातिमा से भी बड़े थे. मैने 20 मिनिट तक उसको बातरूम में छोड़ा. फिर मैं उसको बेडरूम में ले गया.

करीब 3 बार चुदाई करने के बाद मेरा मॅन भर गया. उस रात मैने अपनी दोनो बहनो को एक साथ छोड़ा. अगले कमरे में मा बॉस से छुड़वा रही थी. अब तो ये रोज़ का सीन था. बॉस भी अब मेरी दोनो बहनो को छोड़ते थे, और मैं भी मा को छोड़ लिया करता था.

हमने साथ में ग्रूप सेक्स भी किया है. मेरी अपनी मा और दोनो सग़ी बहने मेरी रांड़ बन के रह गयी. मा ने अब बॉस से निकाह कर लिया है, और वो घर छ्चोढ़ कर चली गयी.

अब मैं और मेरी बहने अकेले रहते है, और हर रोज़ चुदाई करते है. जमीला को मेरे से एक बच्चा भी हुआ है. मैने फ़ातिमा की कही और शादी करवा दी, और खुद मैने जमीला से शादी कर ली. अब हम सब अपनी-अपनी लाइफ में बिज़ी है. पर मौका मिलने पर मैं सब को छोड़ता हू.

अगली कहानी में बतौँगा कैसे मुझे बॉस की बेटी पसंद आ गयी, और कैसे मैने छोड़ कर उसको अपनी बीवी बना लिया. अगर आपको कहानी अची लगी हो, तो प्लीज़ कॉमेंट में बताए. थॅंक योउ.

यह कहानी भी पड़े  कॉलेज लाइफ – पहला थ्रीसम

error: Content is protected !!