लंड की भूखी तड़पति दीदी को लंड दिया

ही फ्रेंड्स, मेरा नामे यश है. ये उस वक़्त की बात है, जब मैं 1स्ट्रीट एअर में था, और मेरे एग्ज़ॅम आने वाले थे. तो मुझे कही टुटीओन लगना था. फिर मैं पड़ोस में एक देसी सेक्सी दीदी के पास टुटीओन लगा.

मेरी टुटीओन दीदी का नामे अन्नू था, और उनकी आगे 22 थी, और वो एक-दूं वर्जिन थी. तो मैने टुटीओन जाना शुरू किया. पहले तो सब कुछ नॉर्मल था. वो मुझे पढ़ती और भेज देती थी. काई दिन बाद हम फेमिलियर हो गये. कुछ भी न्यू नही लगा, बस ऐसा लग रहा था, की वही रहता हू शुरू से.

तो एक दिन हम बेड पे बैठ के पढ़ रहे थे. दीदी मेरे साथ जुड़ कर बैठ गयी. मुझे अजीब लगा और मैं तोड़ा डोर होने लगा. लेकिन वो मेरे साथ टच होके बैठने लगी. अगले दिन फिरसे सेम हुआ. फिर जहा पे वो बेड पे बैठती थी, मैं उनके पास जाके बैठने लगा.

रोज़ मैं दीदी के पास जाके बैठ जाता था, जिससे हमारी साइड एक-दूसरे से टच होती रहती थी. वो भी मुझे जान-बूझ कर टच करती थी, जैसे उन्हे भी मज़ा आता हो. एक दिन मैं अपने हाथ पे कुछ बना रहा ऐसे ही टॅटू जैसा पेन से.तो दीदी बोली: मेरे हाथ पे भी कुछ बनाओ.

मैं बोला: मैं तो ऐसे ही बना रहा हू. मुझे कुछ बनाना नही आता.

फिर वो बोली: कोई बात नही, बना दो.

फिर वो मेरी साइड में बैठी थी. तो मैने दीदी का हाथ पकड़ा, और बनाने लगा. उन्होने लूस त-शर्ट और लोवर पहनी हुई थी. जब वो टॅटू बनवाने के लिए झुकी, तो मुझे उनके आधे बूब्स दिखने लगे, जो की बिना ब्रा के थे. लेकिन मुझे निपल्स नही दिख रहे थे, और बूब्स ही दिख रहे थे.

मैने अपने लंड के उपर बुक रखी हुई थी, और दीदी का हाथ बुक के उपर रख के टॅटू बना रहा था. दीदी के आधे नंगे बूब्स देख के मेरे लंड में हुलचूल होने लगी. दीदी बार-बार इधर-उधर हिल रही थी, और खुली त-शर्ट में दीदी के आधे बूब्स हिलते भी दिख रहे.

लोवर में मेरा लंड हुलचूल कर रहा था, और उसका असर बाहर भी दिखने लगा. बुक उपर हुई, और मैं अनकंफर्टबल होने लगा, और एक तरफ मज़ा भी लेना था इसलिए दीदी के बूब्स भी देख रहा था. दीदी झुक कर टॅटू देख रही थी, तो मैने कैसे भी करके जल्द से जल्द टॅटू को ऐसे ही पूरा कर दिया. फिर दीदी ने हाथ हटाए, और सीधी हो गयी.

मैने लंड को शांत किया, और कंफर्टबल हो गया. उसके बाद पढ़ाई के बहाने दीदी मुझे टच करती रही. पता नही दीदी को क्या स्वाद आता था टच करने में. इसलिए कभी-कबार मैं भी टच कर देता था.

एक दिन ऐसे ही हुआ. दीदी मेरे पास में ही बैठी थी. मुझे भी दीदी को टच करना अछा लगता था. इसलिए एक दिन मैं ऐसे ही अंजान बन कर दीदी की तंग को उपर से टच किया तोड़ा सा. दीदी कुछ नही बोली. फिर धीरे-धीरे मैं घुटने के उपर टच करने की कोशिश करने लगा. दीदी बेड पे टाँगो को सीधी करके बैठी थी

मैं दीदी को टच करके की कोशिश कर रहा था, और पढ़ने का नाटक कर रहा था. मैं देख बुक में रहा था, और टच दीदी को कर रहा था. फिर मैने हिम्मत की, और मेरे हाथ दीदी के जांघों पे टच हो गये. दीदी को लगा ऐसे टच हो गया होगा ग़लती से क्यूंकी मैं पढ़ने का नाटक कर रहा था. इसलिए लगा होगा की हाथ लग गया.

मैं उन्हे तोड़ा-तोड़ा टच कर रहा था, और दीदी कुछ नही बोल रही थी. तो मैने जांघों (घुटने के उपर) की साइड में हाथ रख लिया. दीदी कुछ नही बोली. मैं पढ़ने का नाटक करता रहा और हाथ रखा ही रहा. दीदी भी मज़ा ले रही थी, और फिर मैने हाथ उठा लिया और नॉर्मल हुआ.

तो अगले दिन मैं आया और दीदी वाहा रूम में नही थी. वो किचन में छाई बना रही थी, क्यूंकी उस टाइम वो घर पे अकेली होती थी, और कोई घर पे नही होता था. मैं जाके रूम में बैठ गया. जब मैं बेड पे बैठा था, तो मैने देखा की बेड के ड्रॉयर में एक क्रीम कलर की पनटी पड़ी थी.

ड्रॉयर आधा खुला हुआ था, और पनटी आयेज ही पड़ी थी. मैने पनटी को बाहर निकाला, और देखा की ये वही पनटी थी जो दीदी ने कल पहनी थी. क्यूंकी जब मैं दीदी के पास बैठा था, तो कल दीदी की लोवर साइड से नीचे थी, और पनटी लोवर के उपर हुई पड़ी थी. उसको देख के मेरा लंड हुलचूल करने लगा था, और दीदी ने देख भी लिया था. लेकिन हम कुछ नही बोले थे.

तो मैं उस पनटी को सूंघने लगा. क्या खुसबु थी दीदी की छूट की. ऐसा लग रहा था की दीदी की छूट ही मेरे सामने थी. मैने कुछ देर उसकी खुश्बू ली. फिर दीदी आ रही थी, तो जल्दी-जल्दी में मैने उसे अंदर रख दिया. लेकिन ड्रॉयर बंद करना भूल गया, और पनटी भी दिख रखी थी उसमे से.

फिर दीदी अंदर आई और वो मेरी साइड में आ कर बैठ गयी. वो बेड का ड्रॉयर दीदी के पीछे हो गया. मैने आज भी दीदी की पनटी देखने की कोशिश की, लेकिन आज दिख नही रही थी. शायद दीदी ने पनटी पहनी नही थी, और अकेली लोवर ही थी, और अंदर से नंगी थी.

ऐसे ही चलता रहा और मेरी आज की स्टडी पूरी हो गयी थी. लेकिन टाइम अभी बाकी था. तो दीदी ने बोला-

दीदी: चलो लडो खेलते है.

तो हम लडो खेलने लगे. दीदी मेरे सामने बैठ गयी, और उस दिन की तरह नीचे झुक गयी. उन्होने ब्रा भी नही पहनी थी. लगता था की दीदी को पनटी ब्रा पहनना अछा नही लगता था. वो अंदर से नंगी रहना पसंद करती होगी. वो चाहती तो पूरी नंगी भी रह सकती थी, लेकिन कपड़े तो पहने पड़ते ही थे.

तो उस दिन की तरह दीदी झुक गयी और मुझे बूब्स दिखाने लगी. मेरा भी लंड खड़ा होने लगा था. हम जान-बूझ कर एक-दूसरे की बारी चल देते थे, और एक-दूसरे को रोकने की कोशिश करते और हाथ पकड़ लेते. दीदी के आधे नंगे बूब्स देख के लंड खड़ा हो रहा था. दीदी भी सामने ही बैठी थी, तो मैने लंड पे हाथ रख लिया था.

लंड देख लिया था दीदी ने, और उन्हे भी देख के हुलचूल होने लगी थी. वो भी धीरे-धीरे अपना हाथ नीचे ले गयी, और खुजली करने के बहाने वो छूट पे हाथ फेर देती और हटा देती. बार-बार ऐसे ही करने लगी.

उस दिन दीदी के घर पे कोई नही था. फिर दीदी उठ कर मेरे सामने आ गयी. इससे वो पनटी दीदी के सामने आ गयी थी. दीदी ने अचानक से वो देख ली. पनटी भी आधी बाहर थी

दीदी: यश, ये ड्रॉयर तुमने खोला है?

मे: नही दीदी, मैने नही खोला.

दीदी: लेकिन तुम्हारे अलावा तो पहले यहा कोई नही था. और ये अंडरवेर भी आधी बाहर है.

मे (तोड़ा घबरा के): दीदी वो मैं.

दीदी: मुझे पता है की तुमने ही खोला है, बताओ.

मे: दीदी मैने आपकी पनटी के साथ कुछ नही किया.

दीदी: तुम्हे कैसे पता की वो पनटी मेरी है?

मे: नही दीदी, मैने ऐसे ही बोला की मैने पनटी के साथ कुछ नही किया.

दीदी: सच-सच बोलो, वरना तुम्हारे घर पे बता दूँगी.

मे ( दर्र के ): सॉरी दीदी, मैं आपकी पनटी को देख रहा था बसस

दीदी: पूरा सच बताओ.

मे: मैं उसे सूंघ रहा था.

दीदी: क्यूँ?

मे: मैं आपकी छूट की खुश्बू देख रहा था.

दीदी चुप हो गयी और कुछ नही बोली. मैं दीदी से माफी माँगने लग गया. लेकिन दीदी कुछ नही बोल रही थी. मैं सॉरी-सॉरी बोल रहा था.

दीदी: तो कैसी लगी मेरी छूट की खुश्बू?

मैं चौंक गया ये बात सुन कर, और कुछ नही बोला. दीदी ने फिरसे पूछा-

दीदी: बताओ कैसी लगी खुश्बू?

मैं भी तोड़ा कंफर्टबल हुआ की दीदी को कोई ऑब्जेक्षन नही हुई थी.

मैं बोला: ज़्यादा कुछ पता नही चला.

दीदी बोली: तो सच में मेरी छूट की खुश्बू ले लो.

दीदी फिर एक-दूं से उठी, और अपनी लोवर उतार दी. जैसे मैने कहा था की दीदी को पनटी ब्रा का ज़्यादा शौंक नही था. दीदी बिना पनटी के ही थी. उन्होने लोवर उतरी, और नीचे से नंगी हो गयी. फिर वो टांगे फैला के लेट गयी.

मुझे उन्होने बोला: खुश्बू लो.

मैं उठा, और दीदी की छूट चाटने लगा. वो आहह आ करने लगी. अब मैं दीदी की छूट चाट रहा था. मैने अपने सारे कपड़े उतार दिए, और दीदी को भी नंगी कर दिया. हम नंगे ही एक-दूसरे से लिपट-ते रहे. फिर दीदी मेरा लंड चूसने लगी. मैं नीचे लेता हुआ था. दीदी उपर लंड चूस रही थी.

वो बोली की: अब छूट में डाल ही दो, और नही वेट होती.

फिर दीदी ने तोड़ा थूक अपनी छूट पे लगा के के मेरा लंड अपनी छूट पे सेट किया, और धीरे-धीरे अंदर डालने लगी. लंड अंदर जेया रहा था, और क्यूंकी दीदी पहली बार छूट में लंड ले रही थी, तो दर्द भी हो रहा था. दीदी मज़े भी ले रही थी तोड़ा-तोड़ा करके. अब लंड आधा अंदर जेया चुका था. लेकिन आधा लेने में दर्द हो रहा था.

फिर मैने एक झटका मारा, और पूरा लंड छूट में घुसा दिया. दीदी एक-दूं चिल्लाई और मेरे उपर गिर गयी. वो रही थी और बोल रही थी-

दीदी: ऐसे मत करो, दर्द हो रहा है.

मैं फिर लंड को उपर-नीचे करने लगा और थोड़ी देर में दीदी खुद लंड पे उछालने लगी.

हम लगातार सेक्स करते रहे. आख़िर में हम दोनो का पानी निकल गया.

फिर हम रोज़ स्टडी के बाद एक-दूसरे के साथ सेक्स करते ही थे. उसके बाद मेरी स्टडी पूरी हो गयी और मैने टुटीओन जाना छ्चोढ़ दिया. फिर उसके बाद दीदी से ना मिलना हुआ, और ना ही बात हुई. लेकिन काई सालों बाद दीदी सोशियल मीडीया पे मुझे मिली. अब देखते है की कैसे प्यास बुझेगी दीदी की.

तो मिलेंगे अगले पार्ट में. अपनी फीडबॅक ज़रूर दे

पर.

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