लड़की ने पड़ोसी अंकल से सील तुडवाई

हे गाइस ई’म स्वरा, आंड ई’म 20 यियर्ज़ ओल्ड और मैं सूरत की रहने वाली हू. गाइस बात तब की है जब मेरे पड़ोस में एक कपल रहने आया था 4 मंत्स के लिए. अंकल का नामे मेहुल था, वो 35 यियर्ज़ के थे. वो हटते-काटते, चौड़ी छ्चाटी, और ज़बरदस्त बाइसेप्स वाले थे.

अंकल की पूरी बॉडी बहुत हेरी थी, लेकिन सिर से वो थोड़े गंजे थे. उनकी मूचे और बियर्ड इतनी सेक्सी थी. उनके वाइफ बॅंक में काम करती थी, और अंकल वर्क फ्रॉम होमे करते थे, क्यूंकी उनका 3 साल का बेटा था आशु, और उसको संभालते भी थे.

गाइस मैं फ्लॅट में रहती हू, और हमारे बिल्कुल बगल वाले घर में वो रहने आए थे. आशु इतना प्यारा बच्चा था की मैं उसको खिलाने रोज़ जाती थी उनके घर में. अंकल को भी अछा लगता था, क्यूंकी उनको थोड़ी देर आराम मिलता था जब कोई आशु को संभालने वाला होता था तो. गाइस सच बतौ तो आशु तो सिर्फ़ बहाना था, मैं तो मेहुल अंकल को ही ताड़ने जाती थी.

एक दिन सॅटर्डे को मॉर्निंग में मैं उनकी घर गयी, तो मैने देखा की अंकल सिर्फ़ अंडरवेर पहन कर आशु को नहला रहे थे. उनका दीक्षसी स्कॉट का पूरा अंडरवेर गीला हो चुका था, और उसके उपर से उनका लंड सॉफ दिखाई दे रहा था.

जब मैने अंकल की पूरी हेरी बॉडी को गीला देखा, तो मैं इतनी हॉर्नी हो गयी. मुझे देखते ही अंकल थोड़े शॉक हुए क्यूंकी मैने उनको अंडरवेर में देखा और बोले-

अंकल: स्वरा, तुम जाके बाहर बैठो, मैं आशु को कपड़े पहना के रेडी करके लाता हू.

फिर मैं बाहर वेट कर रही थी. बाहर मैं यही सीन को याद करके, अपनी आइज़ क्लोज़ करके, आशु का खिलोना लेके अपनी छूट पे रब करने लगती हू. मैं अंकल की वेट हेरी बॉडी को इमॅजिन करके उस खिलोने को अपनी छूट पे इतनी ज़ोर से रगड़ने लगती हू, की तभी अंकल वाहा आ जाते है आशु को लेके. मुझे इसका पता भी नही चलता.

मुझे देख कर अंकल बोले: स्वरा क्या हुआ?

मैं शर्मिंदा महसूस करके बोलती हू: कुछ नही हुआ अंकल.

फिर अंकल कुछ नही बोले और आशु को मुझे देकर अपने रूम में चले गये. मैं और आशु खेलने लगे. 30 मिनिट्स बाद अंकल वापस आए और पास बैठ कर बोले-

अंकल: सच बताओ स्वरा, तुम अभी थोड़ी देर पहले क्या कर रही थी?

मैने सिर्फ़ स्माइल दी और कुछ नही बोली.

फिर अंकल बोले: घबराव मत स्वरा. तुम मुझसे सब कुछ शेर कर सकती हो. मैं भी तुम्हारी आगे से गुज़र चुका हू. इस आगे में ये सब फील करना नॉर्मल है. किया है कभी तुमने?

ऐसा अंकल ने डाइरेक्ट्ली पूच लिया मुझे, और मैने अपना सिर हिला के माना कर दिया.

फिर अंकल बोले: करोगी मेरे साथ?

और मुझे एक हवस भारी स्माइल दी. मैने भी तोड़ा साहस जमा करके ‘हा’ कह दिया.

फिर अंकल बोले: तो चलो अंदर मेरे साथ रूम में, और आशु को यही बाहर खेलने दो.

ऐसा बोलते ही अंकल अपने रूम में चले गये, और बेड पे बैठ गये, और मैं भी उनके पीछे-पीछे चली गयी. रूम के अंदर जाते ही अंकल बोले-

अंकल: दरवाज़ा तोड़ा सा बंद कर देना. पूरा बंद मत करना, वरना आशु रोएगा.

और फिर मैं जाके बेड के उपर बैठ गयी. अंकल मुझे ज़ोर-ज़ोर से लीप किस करने लगे. अंकल के होंठ मेरे होंठो को छूटे ही मैं इतनी वाइल्ड हो गयी, और ज़ोर-ज़ोर से उनको किस में साथ देने लगी. मेरी हार्टबीट एक-दूं से तेज़ हो गयी.

किस करते-करते अंकल मेरी छूट को स्कर्ट उपर करके सहलाने लगे. मुझे सच में जन्नत जैसा फील हो रहा था. उसके बाद अंकल ने मेरी पनटी निकाल ली, और उसको सूंघने लगे, और मुझसे कहा-

अंकल: तेरी छूट की स्मेल मुझे बहुत अची लगी.

फिर उन्होने मुझे ठीक से बेड पे लेटने को कहा टांगे फैला कर, और मैने वैसा ही किया. मेरी छूट के पास अंकल अपना फेस लेके आए और 2 मिनिट्स तक तो सिर्फ़ उन्होने मेरी छूट को मज़े से स्मेल किया. फिर मेरी छूट के लिप्स को अपने होंठो के बीच में लेके काटने लगे.

मुझे उनकी मूछों से छूट के उपर गुदगुदी सी हो रही थी. फिर अंकल पूरी जीभ बाहर निकाल कर मेरी छूट चाटने लगे, और उनका लोड्‍ा हिलने लगे. मुझे इतना मज़ा आ रहा था गाइस की ऐसा लग रहा था जैसे की मैं कोई जन्नत में थी. अंकल ने उनकी पंत नीचे की और लोड्‍ा मेरे फेस के पास ले आए और बोले-

अंकल: चूसोगी इसे?

गाइस उनका लंड इतना अछा था, मैने अपनी लाइफ में कभी इतना अछा लोड्‍ा नही देखा. लंड पूरा लंड मोटा और पूरा बालों से घिरा हुआ था. उनके लंड से पानी जैसा प्रेकुं भी निकल रहा था. मैने अपना पूरा मूह खोल लिया, और उनका पूरा लोड्‍ा एक बार में गले तक ले लिया और चूसने लगी.

अंकल आँखें बंद करके सिसकियाँ ले रहे थे, और मैं उनका लंड लॉलिपोप के जैसे चूस रही थी. उनकी झाँते मेरे होंठो पे चुभ रही थी, और अंकल क्या मस्त मुझे लोड्‍ा चुस्वा रहे थे. थोड़ी देर में आशु रोने लगा और फिर अंकल पंत चढ़ा के बाहर आ गये. मैं भी अपनी पनटी पहन के बाहर आ गयी.

फिर अंकल बोले: कल आशु अपने मामा के घर जेया रहा है आंटी के साथ, तो कल आना.

कल सनडे था, और सुबह होते ही 10:00 बजे के आस-पास मैं मेहुल अंकल के घर पहुँच गयी. मैने देखा की अंकल अभी जस्ट उठे थे, और अंकल अकेले थे घर में. अंदर जाते ही मैने अंकल से कहा-

मे: अंकल आप जैसे कल आशु को नहला रहे थे, वैसे ही आज मुझे नहलाओ.

अंकल बोले: अभी नहलता हू बेबी, अंदर आजा.

फिर अंकल मुझे उठा के बातरूम में ले गये, और नंगे हो गये पुर, और मुझे भी नंगा कर दिया. उनका लंड पूरा टाइट हो चुका था. फिर अंकल मेरी चुचियों से खेलने लगे और कहा-

अंकल: बेबी कल मज़ा आया था तुझे मेरा लोड्‍ा चूस के?

मैने कहा: अंकल बहुत मज़ा आया था. मैने अपनी लाइफ में कभी इतना अछा लोड्‍ा नही देखा.

फिर अंकल ने बताया की वो भी बहुत हॉर्नी रहते थे. जब से आशु हुआ था, उन्होने आंटी के साथ कभी सेक्स ही नही किया. आंटी भी बाहर रहती थी जॉब की वजह से, तो वो बहुत हॉर्नी रहते थे. फिर अंकल ने साबुन लिया, और मेरे बूब्स पे घिसने लगे.

वो साबुन मेरी छूट पे ले गये, और छूट और गांद को आचे से साबुन से सॉफ किया. मैं भी अंकल का लंड पकड़ के अपने हाथ से खेलने लगी. फिर अंकल ने मेरी एक टाँग उपर की, और लंड मेरी छूट पे लगाया, और उसपे रब करने लगे.

अंकल ने कहा: देख स्वरा, ये तेरा फर्स्ट टाइम है, तो तोड़ा सा दर्द होगा. लेकिन फिर मज़ा आएगा.

और ऐसा कहते ही उन्होने उनके लंड का टोपा मेरी छूट में घुसा दिया. फिर वो धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगे. थोड़ी देर में मेरी छूट की सील टूट गयी, और खून बाहर निकालने लगा. मेरी ज़ोर की चीखें निकालने लगी. तभी अंकल मेरी छूट को नाल के पास ले गये, और आचे से पानी से सॉफ किया.

फिर वापस अंकल लंड को मेरी छूट के अंदर-बाहर करने लगे, और वो मुझे शवर के नीचे खड़े-खड़े ही छोड़ रहे थे. धीरे-धीरे उन्होने झटके तेज़ कर दिए और मैं ना चिल्लौ इसलिए मुझे लीप किस करने लगे, और ज़ोर-ज़ोर से छोड़ने लगे. लंड पूरा अंदर जाते ही मुझे इतना दर्द होता था, लेकिन मज़ा भी आता था.

फिर मैने अंकल को बोला: अंकल मैं तक गयी हू.

वो फिर टवल लेके आए, और उन्होने मेरी बॉडी को आचे से पोंचा, और उनकी बॉडी को भी पोंछ कर मुझे बेड में लिटा दिया, और बेड पे मेरी टांगे अपने कंधो पे रख कर छोड़ने लगे. अंकल इतने हॉर्नी थे क्यूंकी उन्होने बरसो से सेक्स नही किया था. उनके झटके तेज़ होते जेया रहे थे. उनके टटटे मेरे शरीर से टकरा कर पूछ-पूछ आवाज़ निकाल रहे थे.

इस दौरान मुझे 2 बार ऑर्गॅज़म आया. उसकी फीलिंग ही कुछ और है. 10 मिनिट्स ऐसे ही छोड़ने के बाद अंकल मेरे पेट पे ही झाड़ गये, और अपना सारा माल छ्चोढ़ दिया. अंकल पुर पसीने से भीग गये थे, और मेरे बाजू में लेट गये. उनके आर्म्पाइट्स से उनके पसीने की इतनी मर्दाना स्मेल आ रही थी.

ये सूंघ के मैं और भी हॉर्नी हो रही थी. गाइस जब मेरा हाथ अपनी छूट पे गयी तो देखा की मेरी छूट पूरी खूल चुकी थी. मेरी पूरी छूट का अंकल ने भोंसड़ा बना दिया था. एक दिन तो चलने में भी तोड़ा सा पाईं हुआ, लेकिन ये चुदाई इतनी यादगार रही है, की ये चुदाई मैं कभी नही भूलूंगी गाइस.

आपको ये स्टोरी पढ़ के कैसा लगा ये कॉमेंट में बताओ. और अगर अछा लगा हो तो मैं जल्द ही इसका 2न्ड पार्ट लेके अवँगी. लोवे, स्वरा.

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