कुंवारी लौंडिया की देसी सेक्स स्टोरी

इस देसी सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मेरी पड़ोसन लड़की ने खुद पहल करके मुझे फोन करके मुझसे दोस्ती की. और फिर एक रात वो मेरे कमरे में आ गयी.

दोस्तो, मैं इंदौर से हूँ. वैसे तो मैं दिखने में साधारण सा ही हूँ, लेकिन मेरा लंड मेरी ताक़त है. मेरी यही खासियत है कि मेरा लंड करीब 8 इंच लम्बा और 2 इंच मोटा है. ये मेरे लिए गर्व की बात है.

मेरी दुकान है और मैं दुकान में ही बिजी रहता हूं. इसलिए इस बार बहुत समय हो गया था, मुझे कोई चूत नहीं मिली थी. मैंने उम्मीद भी छोड़ दी थी. अब तक मुझे चुदाई किए हुए करीब 2 साल हो गए थे. रात में मैं घर में कम … और मोहल्ले के बाहर ज्यादा रहता हूं. दिन में तो दुकान में ही रहना पड़ता है. कुल मिलाकर बोरिंग जिंदगी जीना पड़ रही थी.

फिर एक दिन अचानक एक ऐसा वाकिया हुआ, जिसने मुझे मजा दे दिया.

हुआ यूं कि मेरे घर के पास एक देसी लड़की रहती थी … उसका नाम साराह था. वो मुझे पसंद करती थी, पर बता नहीं पाती थी.

उसके बारे में क्या बताऊं दोस्तो … उसके बड़े बड़े बूब्स और बड़ी सी उठी गांड को मैं रोज़ आते जाते देखता था.

एक दिन में उसके घर के सामने गुजर रहा था कि अचानक उसने मुझे रोक लिया और बोली- मुझे तुम्हारा नंबर चाहिए.
मैंने कहा- तुम अपना नम्बर दे दो, मैं अभी मिस कॉल दे देता हूँ.
वो बोली- नहीं, तुम मुझे अपना नम्बर दे दो. मैं तुमको कॉल करूंगी.

मेरे को तो उड़ कर लग गई … मेरी तो साली किस्मत ही खुल गई. मैंने उसे अपना नंबर दिया ओर खुश होकर घर चला गया. उस रात को मुझे नींद ही नहीं आई. मैंने उसके कॉल का बहुत इंतजार किया. मगर उसने मुझे फोन नहीं किया.

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सुबह जब में दुकान में जा रहा था, तो उसने कॉल का इशारा किया और मैं दुकान चला गया.

कुछ समय बाद उसका कॉल आया, तो हमारी बातचीत शुरू हो गई. ऐसे ही कुछ ही दिनों में हम दोनों आपस में पूरी तरह से खुल गए थे.

मैंने उससे पूछा- तूने कभी सेक्स किया है?
उसने कहा- कभी नहीं किया.

मैं हैरान रह गया कि साली की इतनी सेक्सी फिगर, इतने बड़े बड़े चुचे और इतनी बड़ी गांड बिना चुदे कैसे हो गई.

मैंने उसकी बात का यकीन नहीं किया और रात में उसको अपने रूम में आने को कहा. पर उसने आने से मना कर दिया.
वो बोली- अभी नहीं, वक़्त आने दो … जब मेरी अम्मी कहीं बाहर जाएंगी, मैं खुद आ जाऊंगी.

उसकी बात सुनकर मैं कुछ मायूस हो गया. मगर मुझे उम्मीद जग गई थी कि ये माल एक न एक दिन मेरे लंड के नीचे से जरूर निकलेगा.

ऐसे ही हमारी बातचीत होती रही. फिर करीब एक महीने बाद उसकी अम्मी बाहर अपने मायके गईं और उसने मुझे बताया कि आज अम्मी बाहर गई हैं. मैं रात को दस बजे तेरे कमरे में आ जाऊंगी.

मैं उसे चोदने की खुशी से पागल हो गया कि जिसको मैं चोदने के सपने देखता था, वो मेरे पास खुद चुदवाने आ रही है.

जैसे तैसे रात हुई, मेरी बेसब्री बढ़ती जा रही थी. मैंने उस रात उसका बहुत रास्ता देखा, पर वो साली ग्यारह बजे तक आई ही नहीं. उसके आने की मेरी उम्मीद टूट चुकी थी.

मैं कमरे का दरवाजा खुला छोड़ कर सो गया. रात को करीब एक बजे वो मेरे कमरे में धीरे से आई और दरवाजा बंद करके मुझे जगाने लगी. मैंने जाग कर उसे देखा, तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि वो आ गई.
मैंने पहले तो उससे कहा कि जरा मुझे मेरे गाल पर चिकोटी लेकर देखना.
उसने असमंजस से मेरी तरफ देखा और मेरे गाल पर एक चिकोटी ले ली.

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मैं दर्द से आह कर बैठा और मुझे यकीन हो गया कि मेरे कमरे में वो आ गई है.
अब वो भी चिकोटी का राज समझ गई थी, वो हंस दी.

मैंने उसे बिठाया, पर समझ में नहीं आ रहा था कि कहां से शुरू करूं. मैंने उसे धीरे से आई लव यू कहा और उसके गाल पर एक पप्पी ले ली. उसने भी जवाब में मेरे गाल पर पप्पी ले ली.

मैं खुश हो गया. मैंने उसके होंठों पर धीरे से अपने होंठ रख दिए और लंबा किस करने लगा.
आह … दोस्तो, में बता नहीं सकता, वो कैसा मस्त सा अहसास था.

फिर मैंने अपना एक हाथ उसके चुचे पर रख दिया. कसम से ऐसा लग रहा था कि किसी रुई के गोले पर हाथ रख दिया हो. फिर मैंने धीरे से अपना दूसरा हाथ भी उसकी सलवार में डाल दिया और पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा. उसकी चुत बहुत चिकनी लग रही थी.
मैंने उससे पूछा कि ये चिकनी कैसे है?
उसने बताया कि तुम्हारे लिए ही आज जंगल साफ किया है. आज तुम मेरी प्यास बुझा दो.

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