वो बोलीं- दीपक, अब और बर्दाश्त नहीं होता.. चोद दो मुझे..
अब मैं भी कण्ट्रोल से बाहर हो गया था, मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और उनकी गांड के नीचे पिलो लगा दिया और लंड को चूत की फांक पर सैट करके धक्के लगाया।
आंटी की चूत चुदी-पिटी थी.. ऊपर से रस से भरी हुई थी तो ‘सटाक..’ से लौड़ा अन्दर घुस गया।
जो भी हो.. मैं खुद को जन्नत में महसूस कर रहा था। पूरे कमरे में उनकी मादक सिसकारियां गूंज रही थीं।
शायद वो कई दिनों के बाद लौड़े का मजा ले रही थीं ‘इस्स्स्…ह्ह्ह्ह्ह्.. आआअ..’
उनके मजे के कारण मेरे मुँह से भी सिसकारियां निकलने लगीं।
करीब 5 मिनट की चुदाई के बाद वो बोलीं- चल, पोजीशन बदल लेते हैं।
अब मैं बिस्तर पर लेट गया और वो मेरे लंड को चूत में फिट करके बैठ गईं और ऊपर-नीचे होने लगीं।
कुछ ही मिनट मैं वो झड़ गईं लेकिन मेरा अभी नहीं हुआ था।
मैंने उन्हें घोड़ी बना कर उनके पीछे से चूत में लंड डाल दिया और आगे-पीछे करने लगा।
चूत एकदम लबालब पानी से तर थी तो मुझे भी ऐसा लग रहा था कि दलदल में लौड़ा पेल रहा होऊँ।
कुछ देर में मैं झड़ने वाला हो गया, मैंने उन्हें बताया.. तो वो बोलीं- अन्दर ही डाल दो.. मैं दवा ले लूँगी।
बस ताबड़तोड़ धक्कों के साथ मैं चूत में ही स्खलित हो गया।
उनको दम से चोदने के बाद वहीं उनके साथ बाजू में ढेर हो गया।
मैं उनकी गांड भी मारना चाहता था, पर वो राजी नहीं हुईं, बोलीं- दर्द होता है।
उस दिन उनकी चूत को चार बार चोदा.. मुझे मजा आ गया।
इसके बाद उनके पति के जॉब पर जाने के बाद मैं उन्हें रोज चोदता था। अब वो हमारा घर छोड़ कर जा चुकी हैं।
तो दोस्तो, यह था मेरा पहला अनुभव उम्मीद है.. आप लोगों को पसंद आया होगा।