खूबसूरत मां और उसकी 3 सौतेली बेटियां

मैं डॉक्टर हूँ. एक बार मेरे पास एक सेक्सी महिला आई. मैंने ताड़ लिया कि यह बिस्तर पर आ जायेगी. मैंने उसे चोदन सुख दिया. फिर उसकी तीन जवान बेटियों को भी चोदा!

लेखक की पिछली कहानी: साली की चूत चुदाई का सपना पूरा हुआ

मैं अपने क्लीनिक में मरीज देख रहा था तभी 35-40 साल की एक सेक्सी महिला ने प्रवेश किया. उसके साथ 55-60 साल के एक सरदार जी थे, चुसे आम जैसा बेरौनक चेहरा.

जब तक उनका नम्बर आता मेरी आँखें कई बार उस महिला से टकराईं और मेरी पारखी नजरों ने ताड़ लिया कि यह बिस्तर तक पहुंच सकती है.

उनका नम्बर आया तो वो महिला मेरे बगल में रखे स्टूल पर बैठ गई और सरदार जी सामने वाली कुर्सी पर.

मेरे पूछने पर महिला ने बताया कि दो दिन से बुखार है, हरारत है, कुछ खाने का मन नहीं कर रहा.
उसकी कटीली निगाहें बहुत कुछ कह रही थीं.

मैंने उसकी पीठ पर स्टेथोस्कोप लगाया और लम्बी सांस लेने को कहा. फिर उसकी छाती पर तीन चार जगह स्टेथोस्कोप लगाया और अंगूठे से उसका निप्पल दबा दिया जिसके जवाब में वो अपने पैर के अंगूठे से मेरी टांग कुरेदने लगी.
तीर सही निशाने पर लगा था.

मैंने उससे अन्दर चलने को कहा.
वो अन्दर जाकर बेड पर लेट गई.

मैं अन्दर गया और उससे बोला- दो बजे तक क्लीनिक खुला रहता है, तुम सवा दो बजे आओ. मेन गेट बंद मिलेगा, साइड गेट से आ जाना. पर्चे पर मेरा मोबाइल नम्बर लिखा है, जरूरत समझो तो कॉल कर सकती हो.

बाहर आकर मैंने पर्चा उठाया, नाम पूछा तो जवाब मिला- प्रीति कौर.
मैंने दवा लिख दी और वे पर्चा लेकर चले गए.
मैं मरीज देखने में व्यस्त हो गया.

दो बजे मेरे मोबाइल पर फोन आया- डॉक्टर साहब मैं प्रीति बोल रही हूँ, सवा दो बजे आ जाऊं?
मैंने जवाब दिया- आ जाइये.

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थोड़़ी देर में मेरा कम्पाउंडर क्लीनिक बंद करके चला गया और मैं उस शेरनी का शिकार करने का इन्तजार करने लगा.

सवा दो बजे प्रीति आई तो मैंने उठकर दरवाजा बंद कर दिया और प्रीति से पूछा- वो सरदार जी कौन हैं?
“मेरे पति हैं.”
“तुम्हारे पति?”
“हां, डॉक्टर साहब. वो मेरे पति हैं, मैं उनकी दूसरी पत्नी हूँ, दस साल पहले इनकी पत्नी की मृत्यु हुई तो इनकी चार छोटी छोटी औलादें तीन लड़कियां और एक बेटा थे, हमारे रिश्तेदारों ने इनसे मेरी शादी करवा दी. अब बच्चे बड़े हो गये हैं, लड़कियां जवान हो गयी हैं. मेरे मां बाप गरीब थे इसलिये मेरी जवानी तड़प तड़प कर गुजर गई.

“अभी कहाँ गुजर गई, बहुत जवानी बाकी है. आओ जवानी का जश्न मनायें!”

इतना कहकर मैंने उसका हाथ पकड़ा और अन्दर कमरे में ले गया. कमरे में पहुंच कर प्रीति ने अपना दुपट्टा बेड पर रख दिया और अपनी बांहें फैला कर मुझे आमंत्रित किया.
मैंने प्रीति का सलवार सूट उतार दिया और अपनी पैन्ट शर्ट भी.

प्रीति ने आगे बढ़कर मेरी बनियान उतारी तो मैंने उसकी ब्रा खोल दी. प्रीति के बड़े बड़े कबूतर आजाद हो गये थे. मैंने प्रीति को बांहों में भर लिया और बेड पर लिटाकर उसकी चूचियां चूसने लगा. चूचियां चूसते चूसते मैं उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा.

मैंने प्रीति की पैन्टी भी उतार दी और उसकी ताजा ताजा शेव की हुई चूत में उंगलियां चलाने लगा. प्रीति की बेताबी जब ज्यादा बढ़ने लगी तो वो मेरा लण्ड सहलाने लगी.

मामला दोनों तरफ गर्म हो चुका था. मैंने अपना अण्डरवियर उतारा और प्रीति के मुंह में लंड दे दिया. प्रीति के चूसने से मेरा लण्ड और टाईट हो गया तो मैंने प्रीति के चूतड़ों के नीचे तकिया रखा, अपने लण्ड पर जेल लगाया और मेरा लण्ड सरदारनी की चूत में जाने के लिए तैयार हो गया.

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प्रीति की टांगों के बीच आकर मैंने उसकी चूत के लब खोले और अपने लण्ड का सुपारा अन्दर कर दिया.
प्रीति के चेहरे के भाव बता रहे थे कि वो पूरा लण्ड लेने को बेताब है.
मैंने एक झटके में पूरा लण्ड उसकी चूत में पेल दिया.

अपना लण्ड प्रीति की चूत में पेलकर मैं उसकी चूचियां चूसने लगा. लेकिन प्रीति जल्दी चुदवाने के मूड में थी इसलिये अपने चूतड़ उचकाने लगी.
ऐसा देखकर मैंने अपनी ट्रेन चलाई तो प्रीति भी उचक उचक कर चुदवाने लगी.

लण्ड के धकाधक अन्दर बाहर होने से प्रीति की चूत ने पानी छोड़ दिया तो फचफच की आवाज आने लगी. मेरा भी डिस्चार्ज होने वाला था इसलिए मैंने स्पीड बढ़ा दी और उसकी चूत में फव्वारा छोड़ दिया.

अब यह रोज का क्रम हो गया, प्रीति सवा दो बजे आ जाती और आसन बदल बदल कर चुदवाती.

हम दोनों के बीच होने वाली बातचीत से मुझे यह पता चला कि प्रीति की बीस साला बड़ी बेटी मनमीत के लिए रिश्ते की तलाश हो रही है लेकिन काफी दुबली पतली होने के कारण दो बार रिजेक्ट हो चुकी है.

मैंने प्रीति से कहा- कभी लाओ उसको भी. विटामिन एल खायेगी तो दुरुस्त हो जायेगी.
थोड़़ी आनाकानी के बाद प्रीति मनमीत को लाने के लिए राजी हो गई.

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