खूबसूरत भाभी ने सेक्स के लिये घर बुलाया

अन्तर्वासना पर सेक्स कहानी पढ़ते हुए मेरे मन में आया कि मैं भी अपनी कहानी साझा करूँ. मैंने पहली चुदाई अपने पड़ोस की एक जवान भाभी से की थी. बहुत खूबसूरत थी वो!

दोस्तो, मेरा नाम मयंक है. मैं वैसे तो पंजाब से हूँ, पर इन दिनों नौकरी के कारण दिल्ली के पास गुड़गांव में रह रहा हूँ. मैं एक आईटी इंडस्ट्री में डाटा एनालिस्ट हूँ. मैं बहुत से शहर घूमा हूँ, पर पिछले तीन साल से तो गुड़गांव में ही रह रहा हूँ.

मैं अन्तर्वासना का बहुत पुराना पाठक हूँ, पर एक अनजान से संकोच के चलते मैंने अपना कोई भी किस्सा किसी से आज तक शेयर नहीं किया.

कुछ दिन पहले ही अन्तर्वासना पर सेक्स कहानी पढ़ते हुए मेरे मन में आया कि क्यों ना मैं भी आप लोगों से अपनी कहानी साझा करूँ.

आगे बढ़ने से पहले मैं अपने बारे में आपको बताना चाहता हूँ. मैं दिखने में औसत हूँ, उम्र 27 साल है, रंग गोरा है और हाइट 5 फुट 8 इंच है. मेरे लंड का साइज़ 6 इंच के आसपास है. मैंने बहुत सारी तो नहीं, लेकिन कुल मिला कर 6 लड़कियों और औरतों के साथ सेक्स किया है.

अब मैं यह सोच रहा हूँ कि अपना कौन सा अनुभव आप लोगों के साथ शेयर करूँ.

खैर चलो … एक एक करके सब कर दूँगा, अपने सेक्स जीवन की शुरुआत प्रिया (नाम बदला हुआ) की चुदाई से की थी. उसकी चुदाई की कहानी कुछ यूँ शुरू हुई थी.

उन दिनों मैं एक सोसाइटी में रहता था. जिसके बीच में पार्क है, जहां बच्चे खेलते हैं और चारों ओर घर व फ्लैट्स बने हुए हैं. हर बिल्डिंग में 3 फ्लैट्स हैं. मैंने एक बिल्डिंग में बीच वाले माले पर एक फ्लैट लिया हुआ था. मेरे फ्लैट के नीचे वाले फ्लैट में एक परिवार रहता था और ऊपर वाले फ्लैट में एक न्यूली मैरिड कपल रहता था. उस न्यूली मैरिड कपल वाली भाभी का नाम अर्चना था.

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एक दिन में जब ऑफिस से घर आया … तो मैंने देखा कि एक बहुत सुन्दर सी औरत वहां हाथ में प्लास्टिक का बैट लिए खड़ी हुई है और अपने बच्चे को खिला रही है. जैसे ही मैंने कार पार्क की और कार से उतरा, तो मैंने जानबूझ कार का हॉर्न बजा दिया. जैसे ही वो भाभी हॉर्न की आवाज़ सुन कर पलटी, तो मैं उसे देखते ही रह गया.

वो सफेद रंग के टॉप और लेगिंग पहने हुए थी, जो इतनी टाइट थी कि उसकी पैंटी की लाइन साफ चमक रही थी. मैं कुछ देर तक तो उस भाभी को देखता ही रह गया. मानो वक़्त थम सा गया हो. एक अच्छी चीज़ जो मुझे ख़ुशी दे रही थी, वो यह थी कि वो भाभी भी मुझे देख रही थी.

अभी हम दोनों एक दूसरे को देख ही रहे थे कि अचानक अर्चना भाभी नीचे आ गईं और ज़ोर से बोलीं- प्रिया, चल चलें.

मतलब उस शै का नाम प्रिया था और यह पता चलते ही मैं खुश हो गया कि चलो ज्यादा नहीं सही … नाम तो पता चल गया.

भाभी की आवाज़ सुनते ही, वो एकदम से बोली- मैं गुड्डू को ऊपर इसके पापा के पास छोड़ कर आती हूँ.

उसने तुरंत अपने बच्चे को गोद में उठाया और उसे लेकर अपनी बिल्डिंग में चली गयी. मैं उसे एक बार दुबारा देखना चाहता था, इसलिए कार से उतर कर अर्चना भाभी से इधर उधर की बातें करने लगा.

जैसे ही प्रिया नीचे आई और आते ही अर्चना भाभी से बोली- चलो चलें.

अभी अर्चना भाभी अपनी एक्टिवा पर जा कर बैठी ही थीं कि उन्हें याद आया कि वो एक्टिवा की चाबी तो भूल ही आई हैं. उन्होंने मुझसे ऊपर जाकर भैया से चाबी लेकर आने को बोला. मैं दौड़ कर ऊपर गया. भाभी के फ्लैट में जाते ही मैंने देखा कि चाबी टेबल पर रखी थी. मैंने जानबूझ कर चाबी को उठा कर टेबल के नीचे ऐसे फेंक दिया कि वो आसानी से ना मिले.

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उसके बाद मैंने भैया को आवाज़ लगाई, तो भैया अन्दर से बाहर आए और बोले- हां मयंक बोलो भाई?
मैंने कहा- भैया, अर्चना भाभी एक्टिवा की चाबी मंगवा रही हैं.

भैया ने 2-3 मिनट चाबी खोजी और ना मिलने पर बोले कि तेरी भाभी कुछ काम ढंग से नहीं करती है. जाओ उसे बोल दो कि आकर खुद ही चाभी ढूंढ ले.

ऐसा बोल कर भैया अन्दर कमरे में चले गए कि मेरी ऑफिस की क्लाइंट कॉल चल रही है. उससे खुद ही अपना काम करने की कह दो.

मैंने ठीक वैसा ही किया. मैं मन ही मन खुश हो रहा था कि मेरी तरकीब काम आई.

मैंने जैसे ही नीचे जाकर भाभी को बोला कि चाभी नहीं मिल रही और भैया ऑफिस का काम कर रहे हैं.
भाभी बोलीं- तुम यहां प्रिया के साथ खड़े हो जाओ … मैं चाबी लेकर आती हूँ.

यह कह कर भाभी चली गईं और मैं नीचे खड़े होकर प्रिया को देखने लगा. मैंने उसे हैलो बोलते हुए अपना हाथ आगे किया, तो उसने घबराते हुए केवल मुँह से हैलो बोल दिया. उसने मुझसे हाथ नहीं मिलाया.

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