खेतों में दिए मा को सेक्सी कपड़े

मेरा नाम विजय है. उमीद है की आपने मेरी सेक्सी स्टोरी का पिछला पार्ट पढ़ लिया होगा. ये भी उमीद है की पिछला पार्ट आप सब को पसंद आया होगा. अगर किसी ने पिछला पार्ट नही पढ़ा है, तो उसको ज़रूर पढ़े.

जैसा की आपने पिछले पार्ट में पढ़ा, की मैं अपनी मा को अलविदा कह के अपनी गाड़ी तर में बैठ के शहर की तरफ चल दिया. वहाँ पहुँच के मैं सबसे पहले खाद की शॉप पे गया. वहाँ से मैने नयी फसल तैयार करने के लिए बीज लिए.

बीज लेने के बाद उसी शॉप से बढ़िया वाला खाद खेतों के लिए लिया. ये सब करते हुए मुझे ज़ोरों की भूख लगी. उस वक़्त टाइम 12 बाज रहे थे. मैं होटेल की तरफ गाड़ी में समान लोड करके निकल गया.

फिर मैं वहाँ के बढ़िया रेस्टोरेंट में गया और फुल प्लेट वेग ताली का ऑर्डर दिया. खाना खाने के बाद मैने कुछ स्वीट्स भी खाई. उसके बाद फिर मैं वहाँ से निकल गया.

फिर मुझे सामने रोड पे एक औरत दिखी, जो की मेरी मा की उमर की थी. वो काफ़ी सेक्सी थी, और उसके चुचे इतने गोल थे, की क्या ही बतौ. फिर मुझे मेरी मा का ख़याल आने लगा, की कैसे अपनी मा को पता के छोड़ू. उस ख़याल से मेरा लंड खड़ा हो गया, जिसे मैं अपने हाथ से सहला रहा था.

फिर मुझे ध्यान आया की मुझे अपनी वाइफ के लिए श्रीनगर का समान लेना था. ये ध्यान आते ही मैं एक लॅडीस शॉप पे गया. फिर वहाँ से मैने अपनी वाइफ के लिए श्रीनगर के समान लिया जैसे की बिंदी लिपस्टिक और भी बहुत कुछ.

उसके बाद मैं लॅडीस गारमेंट की शॉप पे गया. वहाँ से मुझे अपनी मा के लिए सेक्सी ब्रा पनटी भी तो लेना था. मैने एक जोड़ी ब्लॅक ब्रा पनटी और एक येल्लो ब्रा पनटी और एक रेड ब्रा पनटी लिया. साथ में मैने स्माल ट्रॅन्स्परेंट निघट्य भी लिया मा के लिए, और ब्लॅक सारी लिया, और एक रेड सारी लिया.

इतना सब लेने के बाद मैने कुछ ब्रा पनटी अपनी वाइफ के लिए भी लिया. फिर उस शॉप पे पेमेंट करके मैं अपने घर की तरफ निकल गया. घर जाते-जाते मुझे रात के 9 बाज जाते है.

गाड़ी मैं गाते पे से जब घर के अंदर आँगन में लेके जाता हू, तो देखता हू मा खटिया पे बैठ के गाओं की कुछ औरतों, जो की चाची लगती है, उनसे बात कर रही होती है. मेरी नज़र मा पे जाती है. मैं उनको गाड़ी में बैठ के देखता रहता हू.

मा भी च्छूप-च्छूप के मुझे ही देख रही थी. फिर मैं गाड़ी से बाहर निकलता हू और सारी खाद निकाल के बाहर रख देता हू. उसके बाद घर के अंदर जाके वाइफ को उसका समान देता हू. मा मुझे अनादर जाते देखती है. मैने मा के लिए लाया हुआ समान नही निकाला था. वो गाड़ी के अंदर ही रखा हुआ था.

मेरी वाइफ समान लेके खुश हो जाती है. फिर मेरे लिए छाई लेके आती है. मैं छाई पीते-पीते बाहर आ जाता हू, और मा को देखता रहता हू. बाहर चाची सब पूच रही थी कहाँ गया था बेटा. मैं उनको बताता हू की शहर गया था खाद लाने. उसके बाद वाइफ अंदर से आवाज़ देती है, “सुनिए जी, खाना लग गया है, खा लो.”

मैं बोलता हू, “नही मैं गाड़ी लेके खेत में जेया रहा हू. वहाँ खाद लेके जाना है और रात में मक्‍के में पानी भी देना है. तो मेरा खाना मा के हाथो भेज देना.” और मैं ये बोल के निकल जाता हू. रास्ते में ये सोचता रहता हू की क्या मा खाना लेके आएगी या नही.

बापू जो की खेत में ही मुझे मिलते है, मैं उन्हे देख के स्माइल करता हू. रात के 10:30 बाज गये थे. फार्महाउस में लाइट की वजह से चारों तरफ हरियाली दिख रही थी. बापू मक्‍के के खेत में पानी लगाने के लिए मोटर चालू करते है. मैं उनको बोलता हू-

मैं: बापू आप घर जाओ. सुबा से काम कर रहे हो, तक गये होगे.

बापू मेरी बात सुनते है. मैं उनको समझा देता हू की मैं पानी लगा दूँगा. फिर बापू घर चले जाते है क्यूंकी मैं रात में फार्महाउस पे रुकने वाला था. बापू के चले जाने के बाद मैं पानी लगाने लगता हू खेतो में.

12 बाज जाते है काम करते-करते. उसके बाद मुझे नही लगा की मा आएगी खाना लेके. फिर मैं उदास मॅन से खेत के किनारे फार्म पे बैठा था. थोड़ी देर बाद मेरी दोनो आँखों पे पीछे से कोई हाथ रखता है.

मैं दर्र जाता हू, और तभी मा ज़ोर-ज़ोर से हासणे लगती है. मा आ गयी थी, और खाना साइड में रख के ऐसा कर रही थी. मा ने हारे रंग की सारी पहनी थी. उनके बूब्स मोटे-मोटे काफ़ी सुंदर लग रहे थे.

फिर मैं भी उठा और मा को गोद में उठा लिया. मैं उनको लेके गोल-गोल घूमने लगा.

मा बोली: नीचे उतार, मुझे चक्कर आ रहे है.

फिर मैं मा को नीचे उतारता हू, और फिर मा खाना लेके फार्महाउस में जाती है. मैं गाड़ी की तरफ जाता हू मा के लिए लाए हुए सेक्सी कपड़े लेने. फिर मैं कपड़े का थैला लेके फार्महाउस में जाता हू. मा मुझे ही देख रही थी.

मैं फिर वो थैला मा को दे देता हू. वो उसे हाथ में लेती है और साइड में रख देती है.

मैं मा को बोलता हू: ये आपके लिए लाया हू.

मा बोलती है: पहले खाना खा ले, उसके बाद देखते है.

मैं फिर खाना खाने लग जाता हू. मा को मैं खाना खाते-खाते देखता रहता हू. वो मुझे ही देख रही थी.

मा बोलती है: ऐसा क्या देख रहा है?

मैं बोलता हू: अपनी सुंदर मा को देख रहा हू.

मा कहती है: अब मैं सुंदर नही हू. मैं तो बुद्धि हो रही हू.

मैं बोलता हू: ऐसी बातें मत करा करो मा. आप बहुत सुंदर और सेक्सी हो.

मा बोलती है: चुप बदमाश, खाना खा चुप-छाप.

मैं बोलता हू: ठीक है.

उसके बाद मैं खाना ख़तम करके, हाथ ढोने के बाद मा को बोलता हू: मा आप अब तो देखो मैं आपके लिए क्या लाया हू.

मा बोलती है: ठीक है.

वो फिर थैला उठा के देखती है. उसमे 4 से 5 पॅकेट्स थे. फिर मा उसमे से 1 पॅकेट निकालती है जिसमे ब्लॅक ब्रा और ब्लॅक पनटी होती है. उसे देख के स्माइल पास करती है और कहती है-

मा: ये क्या लेके आया है?

मैं उन्हे बोलता हू: मा आपके खराब हो रखे थे, इसलिए बढ़िया वाला लाया हू. एक बार पहन के दिखाओ कैसा लगता है.

मा माना करती है, पर मैं ज़ोर देता हू. फिर मा मान जाती है. उसके बाद क्या होता है ये आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. इसके लिए कम से कम 1 लॅक व्यूस कंप्लीट होने चाहिए और 200 कॉमेंट्स. चलो मिलते है नेक्स्ट पार्ट में.

error: Content is protected !!