खेल खेल में चुदाई

khel khel mai chudai आज मैं आप’को अप’ने घर की कहानी बताने जा रहा हूँ. मेरे घर में पापा, मम्मी, छोटी बहन सलोनी (15 साल) , मुनिया (1 साल)
और मैं; ये पाँच लोग रह’ते हैं . मेरी उमर 18 साल की हो गयी है और कॉलेज में बी. एस सी. फाइनल एअर में हूँ. छ्होटी बहन सलोनी
10थ में है. कॉलेज में दोस्तों के साथ लड़’कियों से छेड़ छाड़ कर’ना और लऱ’कियों की बातें कर’ने में मैं किसी से कम नहीं
था. हमारी सम्मर वाकेशन्स चल रही थी. पापा तो सुबेह ही काम पर चले जाते और शाम को घर आते थे और मम्मी सारा दिन काम
में बिज़ी रहती थी. एक दिन दोपहर के वक़्त खाना खा के मैं और सलोनी टी. वी. देख रहे थे. मम्मी और मुनिया सो रहे थे. इतने में
ही लाइट चली गयी. अब मैं और सलोनी बोर हो रहे थे.

“भैया, लाइट तो चली गयी, अब क्या करें?”

“कुच्छ खेलते हैं”

“क्या खेलोगे?”

“लुडो”

“मेरा दिल नहीं कर रहा”

“फिर चलो साँप सीढ़ी ही खेल लेते हैं, इतने में कहीं लाइट आ
जाय.”

“नहीं भैया ये सब खेल मुझे बहुत बोर लग’ते हैं.”

“अच्च्छा सलोनी आज हम वो बच’पन वाला खेल “घर घर” खेलते
हैं, जिसमें तुम कुच्छ बनोगी और मैं भी कुच्छ बनूंगा.

“उम्म. . . ठीक है, भैया.”

“पर यहाँ तो बहुत गर्मी है, चल ऊपर वाले कमरे में चल के खेलते हैं” हमारा घर दो मंज़िला है. मैं और सलोनी फर्स्ट फ्लोर
वाले रूम में चले गये. यह कमरा प्रायः बंद ही रह’ता था और इसमें किसी के आने का भी डर नहीं था.

“भैया मम्मी ने अगर हमें आवाज़ लगाई तो सुनाई नहीं देगी यहाँ पर”

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“मम्मी तो अभी कम से कम 2 घंटे सोती रहेगी और मुनिया तो पूरे दिन सोती ही रहती है”

“पर हम ‘घर घर’ में आज खेलेंगे क्या?”

“उम्म. . मैं डॉक्टर बन’ता हूँ और तुम पेशेंट बन जाओ. तुम मेरे पास दिखाने आओगी” खेल शुरू हो जाता है.

“हेलो डॉक्टर साब, मेरा नाम रसीली है”

“हेलो. यस. . रसीली जी. . क्या प्राब्लम है आपको”

“डॉक्टर साब मेरे पेट में अक्सर दर्द रहता है”

“आप सामने बेंच पर लेट जाईए” सलोनी जाकर बेड पर लेट गयी. सलोनी ने उस दिन ग्रीन कलर का सलवार- कमीज़ पहना हुआ था. फिर
मैं भी बेड की साइड पर जाकर बैठ गया.

“यस. रसीली जी. पेट में किस जगह दर्द होता है आपको” सलोनी ने अपनी नाभि पर हाथ रख कर बताया,

“डॉक्टर. . इस जगह होता है दर्द”

“आप ज़रा अपनी कमीज़ थोड़ी ऊपर करेंगी?” तो सलोनी ने पूचछा,

“असली में भैया”

“हां! खेल का तो तभी मज़ा आएगा.” सलोनी ने अपनी कमीज़ ऊपर कर दी. फिर मैने सलोनी के पेट पर हाथ मारना शुरू किया.
सलोनी थोड़ा सा शर्मा रही थी.

“क्या दर्द हमेशा यहीं होता है?”

“जी डॉक्टर साहब.”

“अब मैं आपके पेट को दबाऊंगा , जहाँ दर्द हो वहाँ बताना” मैं सलोनी के पेट को अपने हाथों से दबा-ने लगा. इस पर मेरा लॉडा
खड़ा होने लगा. सलोनी की छाती ऊपर नीचे हो रही थी. मेरी नज़र सलोनी की चूचियों पर पड़ने लगी. सलोनी की स्किन बहुत कोमल और चिक’नी थी. सलोनी को भी मेरा दबाना अच्च्छा लग रहा था. मैं कुच्छ देर तक तो पेट को दबाता रहा लेकिन अब मैं सलोनी का एक एक अंग दबा-ना चाह रहा था.

“यह दर्द कब कब होता है आपको”

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“रोज़ सुबेह उठ’ते ही. . और कभी कभी तो छाती में भी होता
है.”

“छाती में. . . छाती में किस जगह?”

“बिल्कुल बीच में “देखना पड़ेगा. कमीज़ थोड़ा और ऊपर कीजीए” सलोनी को मज़ा आ रहा था और वो इस खेल को और खेलना चाह-ती थी. मेरा तो लॉडा बेकाबू सा होता जा रहा था. सलोनी को मज़ा तो आ रहा था पर वो शर्मा भी रही थी. जब मैने सलोनी की कमीज़ और ऊपर उठानी
चाही तो वह बोली,

“भैया कमीज़ और ऊपर मत करो,”

“देखिए रसीली जी इस छाती के दर्द वाली बात को आप गंभीर’ता से लीजिए. मुझे पूरा चेक अप कर’ना पड़ेगा. और मैने
सलोनी की कमीज़ ऊपर कर’ने की कोशीष की.

“डॉक्टर साब. . कमीज़ ऊपर मत कीजीए, मैं आज कुच्छ पह’नी नहीं ”

“क्या नहीं पह’नी”

“मेरा मत’लब आज मैने नीचे ब्रा न्हीं पहन रखी.”

“पर क्यों नहीं पह’नी.”

“मुझे इन गर्मी के दिनों में अंडर गारमेंट्स नहीं सुहाते. आप कमीज़ और ऊपर मत कीजीए, कमीज़ के अंदर हाथ डाल के देख लीजीए”

“ठीक है” मैने सलोनी की कमीज़ में हाथ डाला और पूचछा.

“कहाँ दर्द होता है”

” इन दोनो के बीच में”

“क्या. तुम्हारा मत’लब इन दोनो चूची के बीच में?” मैने सलोनी की एक चूची दबाते हुए जान बूझ के चूची शब्द इस्तेमाल
किया. “हाँ” सलोनी शर’माते हुए बोली. मैं सलोनी की चुचियो के बीच के पार्ट को दबाने लगा और मुझे चिड़िया दाना चुग’ती नज़र आई.

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