कमसिन बेटी की महकती जवानी

पद्मिनी की माँ का उस समय ही देहांत हो गया था, जब पद्मिनी कच्ची उम्र की थी. उसका कोई भाई बहन न होने के कारण पद्मिनी अपने पिता की बड़ी दुलारी थी. एक ही औलाद होने के कारण छोटी उम्र से वह अपने पिता के साथ ही सोती थी. पिता को पद्मिनी से बहुत प्यार था और अपने दिल के टुकड़े को वो हमेशा अपने साथ रखता था. उस पिता को अपनी बेटी को लेकर कभी कोई बुरा ख्याल नहीं आया था. सब ठीक से चल रहा था और मोहल्ले के सभी बच्चों की तरह पद्मिनी भी स्कूल जा रही थी. स्कूल के बाद पद्मिनी ने अपने पिता से ही खाना पकाना सीखा. जब वो छोटी थी, तब से ही वो घर के सभी काम भी अच्छी तरह से करना सीख गई थी. पद्मिनी अपनी माँ के मरने के बाद अपने घर की मानो माँ बन गयी थी. वो अपने पिता का खूब ख्याल रखती थी.

परंतु कुछ सालों के बाद एक शाम को स्कूल की लड़कियां पद्मिनी के बारे में कुछ अनाप शनाप बक रही थीं, जो मोहल्ले के दूसरे लोगों ने सुना और वह बात पद्मिनी के पिता के कानों तक पहुंची. वह बात यह थी कि स्कूल के किसी किसी एक लड़की ने एक टीचर को पद्मिनी के साथ अकेले देखा था. यह बात इतनी बढ़ गयी थी कि सब कहने लगे थे कि वह टीचर हमेशा ब्रेक के वक़्त पद्मिनी को क्लास में अकेले पाकर अपने साथ रखता है और स्कूल खत्म होने पर पद्मिनी के साथ कहीं किसी जंगल के हिस्से में ले जाता है. इस तरह से पद्मिनी और उस टीचर को लेकर बहुत सी बातें हो रही थीं. जब बात गाँवों के मर्दों तक पहुंची, तब सबने खुल्लम खुल्ला यह कह दिया कि पद्मिनी को उस टीचर ने चोदा है. बाकी आसपास की गलियों की लड़कियां भी यही बात करने लगीं और पद्मिनी से दूर रहने लगीं.

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पद्मिनी सब लड़कियों से बहुत ज़्यादा खूबसूरत थी और उसका सबसे खूबसूरत जिस्म भी था. रंग में भी वो सबसे गोरी थी. उस छोटे से गाँव में पद्मिनी जैसे कीचड़ में खिला हुआ एक कमल थी.

अब बाकी के मर्दों की नज़र पद्मिनी की जवानी पर पड़ने लगी और सब मर्द उसके साथ सोने की इच्छा करने लगे. धीरे धीरे कानों कानों होते हुए यह बात पद्मिनी के पिता तक पहुंची.

एक रात उसने पद्मिनी को अपने पास प्यार से पूछने के लिए बुलाया. अब चूंकि पिता ने खुद सुना था कि पद्मिनी को एक टीचर चोदता है, तो खुद पिता भी अपनी बेटी से सवाल करते वक़्त उसके यौवन को देखने लगा.

पिता ने उस वक़्त ध्यान से पद्मिनी को देखा तो नोटिस किया कि उसकी चूचियां बड़ी हो गयी हैं, गांड के गोले उभर गए हैं, जिस्म एकदम एक जवान लड़की के जिस्म जैसे मादक हो गया है. हालांकि अभी उसकी उम्र उतनी नहीं हुई थी. पिता को पद्मिनी को अपने गोद में बैठाकर बात करने की आदत थी, तो उसको अपने गोद में बिठा लिया.

बापू ने उससे प्यार से पूछा- यह सब बातें जो तेरे बारे में हो रही हैं.. क्या सच हैं?
पद्मिनी शरमाती हुई बोली- कौन सी बातें बापू?

उस वक़्त पिता को महसूस हुआ कि पद्मिनी की जांघों के बीच उसका लंड खड़ा हो रहा था. उसने महसूस किया कि अब उसकी बेटी बड़ी हो गयी है. उसके घर में इतनी खूबसूरत लड़की है, ये उसने कभी गौर ही नहीं किया था.

पद्मिनी का बाप अपने लंड को अपने हाथों से पैन्ट के अन्दर सीधा करते हुए पद्मिनी की जांघों को छूते हुए अपनी बेटी से बात करता गया. जिस वक़्त उसने यह किया, पद्मिनी को अच्छी तरह से पता चल गया कि उसका पिता क्या कर रहा था. वो सर झुकाए अपने होंठों को दांतों में दबाए शर्म से लाल हो रही थी.

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बाप ने फिर बड़े प्यार से पूछा- बोल तो ज़रा मेरी बिटिया.. मैं तेरे बारे में क्या बातें सुन रहा हूँ?
“क्या बातें बापू.. क्या कह रहे हो आप.. मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है?” पद्मिनी ने कुछ नटखटी अन्दाज़ में जवाब दिया.

बापू ने अपने हाथों को उस वक़्त हल्के से पद्मिनी की जांघों के ऊपर फेरा और अपने हाथ को उसकी छोटी स्कर्ट के नीचे डालना चाहा.. मगर एक बाप के लिहाज से उससे साहस नहीं हुआ. वो रुक गया और कहा- देख, मुझे अच्छी तरह से पता है कि तू खूब समझ रही है कि मैं किस बारे में बात कर रहा हूं. तू भोली बन रही है, मुझसे शरमाने के बजाए, मेरी प्यारी बिटिया तुमको मुझसे खुल कर सारी बातें बता देनी चाहिए.
पद्मिनी ने बचपना सा किया और झट से अपने बाप की गोद से उतर कर किचन की तरफ जाते हुए कहने लगी कि उसको चाय बनाना है.

पिता को समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे उससे उस बारे में बात करे. वह पद्मिनी के पीछे किचन तक गया और दरवाज़े पर खड़े होकर खुद अपनी बेटी को वासना की नज़र से देखने लगा. यह सोचते हुए कि उसकी बेटी किसी टीचर से चुदवाती है.

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