कच्ची उम्र की कामुकता Part 2

रिंकू के बंग्लॉ के शानदार कमरे मे मॉंटी रश्मि को ले आया. आते ही उसे बेड पर लिटा दिया, रश्मि आँखे बंद थी, उसका अचेतन मन उसे सतर्क कर रहा था, लेकिन बदन मे लगी आग उसपर ज़्यादा हावी हो रही थी,……..मॉंटी उसके पास बैठ गया, पहले उसके खूबसूरत चेहरे को देखता रहा, रश्मि के गुलाबी अधखुले होठ थरथरा रहे थे, मॉंटी की नज़र अब रश्मि की हर सांस के साथ उपर नीचे हो रही छातियो पर पड़ी…..पूरी तरह से पके हुए अनार के साइज़ की चुचिया उसे निमंत्रित कर रही थी, खेलने के लिए, चखने के लिए…….टॉप उपर खिच जाने से पेट नंगा हो गया था, खूबसूरत नाभि उसको पुकार रही थी,…..सुडौल लंबी टाँगे, उसके कमर पर कसने के लिए बेताब थी…….मॉंटी ज़्यादा देर तक देखता नही रहा पाया…….उसने फटाफट अपने कपड़े उतार फेके, और वो रश्मि के उपर झुक गया.

उसके होठ का स्पर्श अपने होठ पर होते ही रश्मि ने आँखे खोल दी, सिर्फ़ एक पल के लिए,….फिर बंद हो गयी,….शर्म से, या वासना से वो नही जानती थी, उसके हाथ अपने आप मॉंटी की पीठ पर कसते चले गये………किसी भी बात पर कोई विरोध नही हो रहा था…….रश्मि को सहयोग करता पाकर, मॉंटी का जोश बढ़ गया………..मन ही मन रिंकू को धनयवाद दे रहा था………उसकी बदौलत, ये कची कली आज उसे भोगने को, कुचलने को मिल रही थी, और वो भी पूरे सहयोग के साथ.

मॉंटी रश्मि के चेहरे पर हर जगह पर किस कर रहा था, चाट रहा था, उसके हाथ चुचियो से खेल रहे थे, धीरे से उसने रश्मि का टॉप उपर उठाया, गले तक, अब ब्लॅक ब्रा मे कसे पके अनार उसके सामने थे…..क्या नज़ारा था…….मॉंटी का लंड बेकाबू होने लगा, उसने ब्रा से झाँकाती चुचियो को चूमा, हल्केसे अपनी जीभ उसकी चुचियो पर घुमाने लगा…….रश्मि की कामुक सिसकारिया बढ़ने लगी,.वो अपने आप को कंट्रोल मे रखने के लिए,टाँगे कसने लगी……..मॉंटी के सर को ज़ोर से अपनी कड़ी चुचियो पर दबाते हुए बड़बड़ाने लगी…..आहह..आहह…मॉंटी, चूसो और ज़ोर से चूसो….आ..अछा लग रहा हैं…मुझे प्यार करो, ….खूब प्यार करो….आअहह ..मेरे अंदर आग लगी हैं…..उसे बुझादो प्लीईआअसए.

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अंधे को क्या चाहिए……मॉंटी को भी क्या चाहिए था……लेकिन अब उसके शैतानी दिमाग़ मे एक नया आइडिया आया…अब वो इस कमसिन कली को तड़पा, तड़पा कर, अपने एशारे पर नचा, नचा कर चोदना चाहता था…….वो रश्मि के शरीर से हट गया…..ओर उसके अलग होने से रश्मि तड़प गयी, मचल गयी, मछली की तरह छटपटाने लगी……..”क्या हुआ मॉंटी…..त..तू..तुम….दूर क्यू हट गये……?
मॉंटी के होटो पर कुटिल मुस्कान तेर गयी.

“रश्मि डार्लिंग, अगर तुम सचमुच पूरा मज़ा लेना चाहती हो तो, तुम्हे मेरी हर बात माननी होगी……विदाउट हेसिटेशन……..नही तो तुम जा सकती हो..!”

रश्मि का तो मानो काटो तो खून नही, जैसा हाल हो रहा था. वो वासना के आग मे जल रही थी, झुलस रही थी,…इश्स आग को बुझाने के लिए तड़प रही थी, पागल हो रही थी……बेशर्मी की हर हद लाँघ सकती थी……..”क्या चाहते हो तुम”…..उसने थरथराती आवाज़ मे पूछा……..मॉंटी समझ गया ये चिड़िया अब उसके एशारे पर नाचेगी, फुदकेगी.
“यहाँ मेरे सामने खड़ी हो जाओ….ना..ना..ना..टॉप नीचे लेने की ज़रूरत नही…”…..मॉंटी का पहला आदेश था
रश्मि उसी अवस्था मे, उसके सामने खड़ी हो गयी,…टॉप गले तक उठा हुआ….कमर से लेकर, ब्रा मे कसी चुचियो तक सब खुला था, सेक्स की देवी लग र्है थी रश्मि.
“अब टॉप उतार दो….”………..टॉप तुरंत उतर गया.
“अब जीन्स खोलो……थोडा नीचे सरकाओ….पूरा नही…मूज़े पनटी की झलक दिखाओ..!”

ये होती हैं कच्ची उम्र की कामुकता

एक बार बदन मे वासना के शोले भड़क उठे……तो सोचने समझ ने की ताक़त चली जाती हैं, घर परिवार, समाज़, सेल्फ़ रेस्पेक्ट,अपनी नाबालिग,कची उम्र, कुछ भी नही बचता, सब जल जाता हैं सेक्स की उस आग मे.

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उस वक़्त ज़रूरत होती हैं एक मोटे, लंबे, तगड़े लंड की जो चूत की दीवारो को रगड़ कर,फैला कर, अंदर तक जाए और बुझाए उस आग को अपनी तेज़ बौछार से
रश्मि इन सब भावनाओ से काफ़ी दूर जा चुकी थी, उसे महसूस हो रही थी सिर्फ़, पूरे जिस्म को झुलसने वाली आग, उसे शांत करने के लिए वो कुछ भी करने के लिए तैय्यार थी, उसने मॉंटी की इच्छा के अनुसार, अपनी जीन्स के उपारले हिस्से को खोला, थोड़ा नीचे खिसकाया………अब उसके कुल्हो को, और चूत को छुपति पनटी साफ नज़र आ रही थी.
“अब अपने जीन्स को पूरी तरह से उतार दो”………मॉंटी का अगला आदेश
पानी के बाहर निकली हुए मछली की तरह छटपटाती हुई रश्मि ने अब पॅंट भी उतार दी,….अब वो सिर्फ़ ब्रा पनटी मे थी……….अपने हाथ से अपने ही कपड़े उतरना……अपने अधनंगे जिस्म की नुमएइश करना…..वो भी एक अंजान नौजवान के सामने…….रश्मि पर अब शर्म कम और एक्शितमेंट ज़्यादा हावी थी…….वो जल्द से जल्द अपने अंदर की आग बुझाने की कोशिश मे थी.

“रश्मि डार्लिंग अब ज़रा यहा, मेरे पास आओ……….तुम्हारी ये गदराई जवानी देख कर मेरा लंड बहुत टाइट हो गया हैं…..इसे प्लीज़ मेरी पॅंट से आज़ाद कर दो.”

रश्मि पर फिर से शर्म और एक्शितमेंट हावी हो गई, उसने धीरे धीरे चल कर, मॉंटी के पॅंट तक का फासला तय किया, और अपनी नाज़ुक उंगलियो से मॉंटी के पॅंट की ज़िप खोलने लगी……..इश्स मिशन मे वो उकड़ू बैठी हुई थी, उसके कूल्हे बाहर निकले हुए थे, उसने मॉंटी का लंड जैसेही च्छुआ,….उसे राज अंकल के लंड की याद आई…….राज का लंड मॉंटी से भी ज़्यादा मोटा और लंबा था.

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