पिछले पार्ट को ढेर सारा लोवे देने के लिए शुक्रिया. अब चलिए आयेज की स्टोरी शुरू करते है.
वो आदमी वहाँ पे खड़ा अपना बड़ा वाला लंड सहला रहा था, और मैं और पापा नीचे डॉगी पोज़िशन में थे. उसे देख कर हम दोनो के फ्यूज़ उडद गये. मैं भी डॉगी से वापस चादर पर बैठ गयी.
पापा: कौन हो तुम?
अंजान आदमी: जिस खेत में तुम ये रास-लीला कर रहे हो, उसका मालिक.
पापा: क्या चाहिए तुम्हे?
अंजान आदमी: इस जगह को उसे करने का भाड़ा.
पापा: मतलब?
अंजन आदमी: मतलब की वही लेना है, जो तुम ले रहे हो.
पापा खड़े हो गये, और अपनी पंत पहन ली.
पापा: ये नही हो सकता. तुम चाहो तो में तुम्हे पैसे दे सकता हू.
आदमी: भोसड़ी के, ये ज़मीन जिसपे तू इसकी ले रहा है. उसका रते सुनेगा तो तेरी गांद फटत के हाथ में आ जाएगी. तू बोले तो मैं देता हू इसके पैसे. पर आज इसे मैं छोड़ के रहूँगा. क्या मस्त कड़क और जवान माल है. साला पैसे देकर भी आज-कल ऐसा जवान और कमसिन माल नही मिलता (वो आदमी की बातों से लग रहा था की उसने ड्रिंक किया हुआ था).
पापा: नही, ये नही हो सकता.
आदमी: अछा जी. रेकॉर्डिंग है मेरे पास तुम्हारी?
और वो अपने फोन को बंद करते हुए अपनी जेब में रखने लगा. तभी पापा ने अचानक उसकी तरफ तेज़ी से बढ़ते हुए उसका फोन छीनना चाहा, पर वो आदमी भी फुर्तीला था. वो पापा का इरादा भाँप गया, और साइड में हॅट गया. पापा इससे बॅलेन्स खो कर गिर पड़े.
ये अचानक ऐसे हुआ, की मेरे तो होश ही उडद गये. मेरे मूह से चीख निकल गयी, “पापा, आप ठीक तो है?”
ये सुन कर उस आदमी की आँखें फाटती रह गयी, और उन फाटती आँखों से हम दोनो को बारी-बारी देख रहा था. पापा भी उठ कर एक साइड बैठ गये थे.
आदमी: ओह भेंचोड़. तो यहाँ पे बाप बेटी की चुदाई चल रही है. तभी मैं सोचु की इस छूतिए को इतना कड़क माल कहाँ से मिला.
मैं नही चाहती थी की किसी का नुकसान हो, इसलिए मैं बोली-
मे: अंकल, आपको जो चाहिए वो यहाँ है.
और मैने अपनी टाँगों को उसकी आँखों के सामने फैला दिया. ये सुन कर पापा थोड़े से चौंक गये.
पापा: श्रुति, ये क्या कर रही हो? तुम तो इसे जानती भी नही हो (पापा ने जान-बूझ कर मेरा ग़लत नामे लिया. श्रुति मेरी फ्रेंड का नामे है)
मे: पापा, अब इसके अलावा और कोई रास्ता नही है, प्लीज़, ई आम सॉरी.
फिर वो अंकल ने अपना पाजामा सब निकाल दिया, और मेरे पास आ कर मुझे बिताया. उसके बाद अपना लंड मेरे मूह के आयेज किया, और मुझे चूसने को बोला. मैने पापा की और देखा, जो ना में अपनी मंडी हिला रहे थे. पर मैं अंकल के लंड को मूह में लेकर चूसने लगी. अब अंकल भी मोन करने लगे. ये देख कर पापा जैसे फुट पड़े.
पापा: साली, रंडी, कुटिया, आख़िर-कार दिखा ही दी ना तूने अपनी औकात? (ये सुन कर मैं और वो अंकल दोनो ही उन्हे देखने लगे) भोंसड़ी के, तुझे जो घरेलू लड़की लगती है, असल में वो 1 नंबर की छिनाल है.
पापा: कुछ दिन पहले मैं ऑफीस में इससे वीडियो कॉल पे बात कर रहा था कॅंटीन में, तो मेरे बगल में एक आदमी बैठा था. उसने बोला की ये वीडियो कॉल पे भी सर्विस देती है? मुझे कुछ अजीब लगा. फिर उससे पूछा तो उसने बताया, की इस लड़की को उसने पिछले महीने ही छोड़ा था. और उसने मुझे एजेंट का नंबर दिया.
पापा: ये साली, हॉस्टिल में रह कर पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम रंडी-गिरी करती है. मैं उसकी सिटी गया, और एजेंट को कॉल किया. मैने उसको फोटो भेजी, तो बोला की ये ऑलरेडी 2 दिन से बुक थी, और आज तीसरे दिन वो मुझे होटेल में मिली. होटेल में मेरे कमरे पर वो अंधेरे में नंगी हो गयी. फिर जब लाइट ओं की, तो उसे सच का पता लगा.
पापा: फिर इसे वहीं से लेकर मैं घर जेया रहा था. इसने रास्ते में बहुत रिक्वेस्ट की, की ये बात मैं उसकी मों को ना बतौ. पर अब जब घर नज़दीक था, तो इसने सीधा मेरा लंड ही पकड़ लिया पीछे से और बोली की, “पापा, आपने मेरा सब कुछ देख ही लिया है, तो फिर बाकी का काम भी पूरा कर लो, जो होटेल में करने आए थे.”
पापा: फिर मुझे भी लगा, की जिसे पूरी दुनिया ने छोड़ा हुआ है. उसको छोड़ने में क्या हर्ज़ है? इसलिए मैं यहाँ पे उसको लेकर आया.
मे: पापा. ये क्या बकवास है? मैं कोई रंडी नही हू!
पापा: चुप बैठ, साली च्चिनाल. जो इतनी आसानी से किसी अननोन आदमी के सामने अपनी टाँगें फैला दे, और झट से उसका लंड अपने मूह में लेकर चूसने लगे, वो रंडी नही तो क्या है? (उस आदमी की और देखकर) भाई, जब ये तय हो ही चुका है की तुम इसे छोड़ने वाले हो, तो बस इसे कॉंडम लगा कर छोड़ना (और पापा ने बाग से निकाल कर उसकी तरफ पॅकेट को फेंका).
ये सुन कर मेरी आँखें लाल हो गयी, और मैं ज़ोरो से उसके लंड को मूह में लेकर चूसने लगी. उसका लंड इतना बड़ा था की मेरे मूह में पूरा नही आ रहा था. फिर कुछ देर बाद अंकल ने अपना लंड निकालते हुए हाथ में कॉंडम का पॅकेट लेते हुए पूछा-
अंकल: क्या तुम सच में रंडी हो?
मे (धीरे से): पापा को डोर भेजो, फिर बताती हू.
अंकल: ओह भाई. अपनी बेटी को दूसरे से चूड्ता हुआ देखेगा क्या? एक काम कर, तोड़ा पीछे खेत के साइड में एक रूम के बाहर खटिया पड़ी है. वहाँ जेया कर तू बैठ. मेरा काम होते ही तुझे बुला लूँगा.
पापा: नही, मैं इसे तुम्हारे साथ अकेले छ्चोढ़ कर नही जौंगा.
अंकल: अर्रे बावली के, ये तेरी कुवारि लौंडिया थोड़ी ना है, जो तू दर्र रहा है. तूने तो बोला की इसने काई लंड अंदर ले रखे है. तो तू चिंता मत कर, ये मेरा भी संभाल लेगी. क्यूँ श्रुति बेटा, अपने अंकल का तुम संभाल लॉगी ना अकेले?
और अंकल ने मेरी और देखा. उधर पापा भी मुझे देख रहे थे. सो पापा को मैने इशारे से कहा की मैं संभाल लूँगी. पापा की इक्चा तो नही थी, पर मेरे इशारा करने पे, और अंकल ने भी जाने का इशारा किया, तो वो वहाँ से चल दिए. जाते-जाते बोले, “चुड साली, रंडी.” जिसे सुन कर मूज़े बुरा लगा. मैं पापा की सेफ्टी के लिए ये सब कर रही थी, और वो मुझे ही गालियाँ दे रहे ..
. (. . . . . . . . . .): ., . . . में . . . .? अगर . . . . तुम्हारे पापा ने सही किया, तुम्हे यहाँ नंगा करके.
मे: कॉंडम तो आपने चढ़ा ही लिया है लंड पे. सो फिर मेलोडी खाओ खुद जान जाओ. मैं आपसे चूड़ने के लिए रेडी हू, और तुम्हे भी मेरी छूट ही चाहिए. सो मेरी 2 शर्ते है. आप ना ही मुझे किस करना, और ना ही मेरी गांद में डालोगे. ये दो के अलावा मैं सब तुम्हे दूँगी. और…
अंकल: और क्या?
मे: और मैं आज तुम चाहो तो तुम्हारी बेटी बन कर तुमसे चुड़ूँगी. बेटी है कोई तुम्हारी?
अंकल: हा.
मे: कितनी आगे की है, और क्या नामे है?
अंकल: तुमसे बड़ी ही होगी. 25 की है, और 6 महीने पहले ही उसकी शादी हो गयी है. सुरभि नामे है उसका.
मे: कभी उसको छोड़ने के बारे में सोचा है?
अंकल: कभी सोचा नही.
मे: तो घर जेया कर ज़रूर सोचना. फिलहाल मैं तुम्हारी सुरभि हू, और तुम मेरे पापा. तो क्या तुम छोड़ोगे आज अपनी बेटी सुरभि को?
अंकल: एस बेटा सुरभि. मैं तुझे आज ज़रूर से छोड़ूँगा.