जीजू ने की साली की चुदाई की सेट्टिंग

हेलो फ्रेंड्स, मेरा नाम शिवानी है, और मेरी उमर 23 साल है. मैं नॉइदा की रहने वाली हू. मैं आज आप लोगों को अपनी चुदाई का एक नया किस्सा सुनने जेया रही हू. उमीद है आप लोगों को अछा लगेगा.

ये कहानी 2 साल पहले की है जब में 21 साल की थी. इस कहानी में मुझे मेरे जीजू ने जाम कर छोड़ा है. मेरी सोना दी और जीजू की शादी अभी 4 साल पहले ही हुई थी. वो लोग गाज़ियाबाद में जॉइंट फॅमिली में रहते थे. दी के 2 जेठ-जेठानी, उनके बच्चे, सास-ससुर, सब एक ही साथ रहते थे.

मेरे जीजू थोड़े से ज़्यादा ही हवासी थे. ऐसा दीदी ने मुझे बताया था जब उनकी नयी-नयी शादी हुई थी. जॉइंट फॅमिली में रहने से जीजू दी की ज़्यादा चुदाई नही कर पाते थे, शरम के मारे.

उन्हे गाज़ियाबाद से डेली नॉइदा आने में भी दिक्कत होती थी. वो रात में काफ़ी लाते हो जाते थे आते-आते. दीदी भी जॉइंट फॅमिली में अड्जस्ट नही कर पा रही थी. तो इन्होने अपने घर में नॉइदा जेया कर फ्लॅट में रहने की बात करी.

पहले तो जीजू के मम्मी-पापा ने माना कर दिया. पर जब जीजू ने ज़्यादा ज़िद करी, तब वो मान गये. अब दी और जीजू यहाँ नॉइदा हमारे घर के पास रहने आ गये. मतलब, उनका फ्लॅट हमारे यहाँ से बस 4 से 5 केयेम की दूरी पर ही है.

जीजू का शुरू से ही मुझसे ज़्यादा ही लगाव रहा है. मुझसे बात करते रहते थे. पर मुझे लगा नही था कभी की जीजू के मॅन में मुझे छोड़ने का ख़याल भी आया होगा कभी.

खैर, जीजू है तो बहुत हॅंडसम. एक-दूं गोरे, उनकी बियर्ड से तो अलग लेवेल प्यार है मुझे. पर मैने भी जीजू के बारे कभी इतना नही सोचा. दीदी थोड़ी ज़्यादा ही मोटी थी, तो मैं सोचती थी इन्होने शादी के लिए हा क्यूँ करी होगी. क्यूंकी ये उतने वेल सेटल्ड और दिखने में भी दीदी से बहुत सुंदर है. इनकी गर्लफ्रेंड भी ज़रूर ही होगी, और तो और, ना उनकी आगे ज़्यादा थी, वो बस 25 साल के थे तब. ये सब बातें भी मुझे बाद में पता चल गयी थी, आप लोगों को भी बाद में ही बतौँगी.

अभी दीदी और जीजू यहाँ नॉइदा रहने आए. तब मेरे एग्ज़ॅम्स शुरू होने वाले थे. मेरे एग्ज़ॅम्स ख़तम हुए तो दीदी ने मुझसे बोला की, “अब आजा, पहले तो एग्ज़ॅम्स की वजह से नही आ रही थी.” मम्मी पापा ने भी मुझसे जाने के लिए बोला तो मैने हा बोल दी.

फिर जीजू मुझे घर लेने आ गये. मैं जब जीजू के साथ बिके पर जेया रही थी. तो वो बहुत ब्रेक मार रहे थे. फिर बोलते, “ठीक से पकड़ लो शिवानी.” मुझे अजीब लग रहा था पर मैने पकड़ लिया. उन्होने मेरे दोनो हाथो को पकड़ा और मुझे अपने करीब खीच लिया. फिर बोले, “ऐसे पाकड़ो नही तो गिर जाओगी, तुम तो दर्र रही हो.”

मैने थोड़ी देर पकड़ कर रखा फिर अपने हाथ हटा लिए. जीजू ने फिर से साइड में बिके रोकी और मुझे अपनी तरफ खीचा और टाइट्ली पकड़ने बोला. फिर मैने भी पकड़ कर रखा क्यूंकी मुझे भी मज़े आ रहे थे. इतना हॅंडसम लड़का खुद चिपका रहा है तो मैं क्यूँ ही पीछे हटु, और इसमे कुछ ग़लत था भी नही.

मैं पहुँची तो जीजू दीदी के सामने एक-दूं नॉर्मली बिहेव कर रहे थे. पर कहीं ना कहीं मैं समझ गयी थी की उनके दिमाग़ में क्या चल रहा था.

जीजू मुझे रात को डेली मार्केट लेकर जाते, कुछ ना कुछ खिला कर लाते, दी भी साथ जाती. दीदी, जीजू अपने रूम में और मैं दूसरे रूम में सो रही थी. तो मुझे रात में 2 बजे प्यास लगी तब भी जीजू दी को छोड़ रहे थे. उनकी आवाज़े सुन कर मेरा भी मॅन करने लगा.

मैं वहीं खड़ी उंगली करने लगी. खिड़की का परदा हल्का सा खुला था, वो मुझे दिख रहे थे. मैने 2 घंटे वहीं खड़े हो कर उनकी चुदाई देखी. दीदी तक जाती पर जीजू नही थकते, वो छोड़ते ही रहते, बोलते, “कुटिया, मेरी रंडी. अभी मेरा मॅन नही भरा तुझे छोड़ कर, चुड मेरी कुटिया. आज तेरी छूट फाड़ुँगा साली, रुक तू.”

ऐसा कह कर दीदी पूरी रात चूड़ी, सुबह के 5 बाज गये तब जेया कर वो लोग सोए. और मैं भी तभी वहाँ से गयी. अब मेरा भी जीजू से चूड़ने का बहुत मॅन कर रहा था. उधर से उनका लंड उतना नही दिखा था, पर लग रहा था की बहुत मोटा और लंबा है.

एक बार दीदी तक गयी थी तो उन्होने जाने से माना कर दिया था, तब जीजू मुझे रेस्टोरेंट में लेकर गये. उधर हम बैठे थे तो उन्होने मेरा हाथ पकड़ा और पकड़ कर बैठे रहे.

वो मुझसे बोलते, “कितने मुलायम हाथ है तुम्हारे.” मुझे बहुत अजीब लग रहा था. मैने जीजू से मज़ाक मज़ाक में बोल दिया, “क्यूँ, जीजी के हाथ मुलायम नही है, और उनसे पूरा नही पद रहा क्या आपका?”

वो हस्स कर बोले, “काफ़ी जल्दी समझ गयी.” मुझे भी उनका मुझे च्छुआ अछा लगने लगा था. मैने उनसे कहा, “जैसे आप दिन में रहते हो वैसे रात में नही रहते.” कहते, “मतलब?” मैने कहा, “कुछ नही.” कहते, “कुछ देखा है क्या तुमने?” मैने मुस्कुरा कर मूह फेर लिया.

शायद वो समझ गये थे. अब उन्होने मुझसे वहाँ पूछा, “क्या तुम कभी किसी से चूड़ी हो?” तो मैने उनसे माना कर दिया. वो कहते, “झूठी, हो ही नही सकता की तुम अब तक चूड़ी ना हो.” मैने तब भी उनसे माना कर दिया.

हम वहाँ से निकल कर घर आ गये. तब दीदी अपनी बेस्ट फ्रेंड शिवनगी दीदी से बात कर रही थी. शिवनगी दीदी 2 दीनो के लिए नॉइदा आ रही थी. तो उन्होने दीदी को अपने पास बुलाया था. जीजू के आने के बाद दीदी ने उनसे पूछा की वो शिवनगी से मिलने जाए या नही. तो जीजू ने उन्हे पर्मिशन दे दी.

दीदी पहले मुझे भी ले जाने के लिए बोलती है. जीजू मुझे इशारे करके कहते है की मैं माना कर डू. मुझे पता था आज जीजू का मुझे छोड़ने का प्लान था. चुड तो मैं पहले भी काफ़ी बार चुकी थी, पर शादी-शुदा आदमी से आज पहली बार चुड़ूँगी.

उनका लंड कितना बड़ा होगा, ऐसा सब मैं मॅन ही मॅन सोच रही थी. और सच बतौन तो मुझे जाना भी नही था. मैने दीदी से माना करा तो दीदी ज़िद करने लगी. तब जीजू बोले की, “रहने दो इसे घर, खा-मखा ये परेशन हो जाएगी तुम दोनो बेस्ट फ्रेंड्स के बीच.” तब दीदी मान गयी और कहती, “ठीक है, तू घर ही रह.”

अगले दिन दीदी को जाना था, उस दिन सनडे था. पर जीजू ने दीदी से बोला की, “मैं भी ऑफीस जौंगा पर लाते जौंगा.” दीदी कहती है, “ठीक है, आप चले जाना, मैं निकलती हू.” जीजू ने बहुत रोमॅंटिकली किस करते हुए बोला, “ओके सोना… ध्यान से जाना.”

जीजू के फ्लॅट में 2 रूम थे. तो मैं दूसरे रूम में थी जब दीदी गयी. मैं सारी बातें वहीं से सुन रही थी. दी के जाते ही जीजू ने दरवाज़ा बंद कर दिया. फिर मेरे पास आ गये. बोलते, “क्या हो रहा है?” मैने कहा, “कुछ नही,” मैं तोड़ा दर्र भी रही थी. पता नही क्यूँ, मैं चाहती तो वही थी जो जीजू चाहते थे.

इसके आयेज क्या हुआ, वो अगले पार्ट में. अगर मेरी स्टोरी आपको अची लगी और आप मेरी चुदाई की वीडियोस देखना चाहते हो तो मुझे एमाइल पे कॉंटॅक्ट करो.

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