जीजा साली में भड़की वासना की आग

मेरी शादी को 11 साल हो चुके थे. जब मेरी शादी हुई थी, तब हीरल सिर्फ़ 7 साल की एक छ्होटी बच्ची थी. वक़्त गुज़रा, और जब वो पहली बार मेरे घर आई, तो वो अब 19 साल की हो चुकी थी. गाओं से आई हीरल को देख कर, मैं तभी उस पर फिदा हो गया. वो स्लिम-फिट जीन्स और स्टाइलिश टॉप पहने थी.

उसका फिगर अभी 32-26-32 था, जो उसकी उमर और उसकी खूबसूरती को और भी निखार रहे थे. मेरी पत्नी ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम दोनो बैठो, बातें करो. मैं तुम दोनो के लिए छाई बना कर लाती हू.”

हीरल ने मेरी तरफ देखते हुए कहा, “जीजू, आप तो आज भी कितने फिट और हॅंडसम है!” 40 की आगे में भी. मैने भी उसकी तारीफ में कहा, “और तुम भी तो, पहले से कितनी सुंदर और जवान हो गयी हो.”

और फिर जब मेरी पत्नी छाई ले आई, तो हम तीनो बैठ कर बातें करने लगे. छाई की चुस्कियों के बीच, मेरी निगाहें बार-बार चोरी-चोरी हीरल पर जेया टिकती थी. वो भी शायद ये महसूस कर रही थी, क्यूंकी उसकी हल्की मुस्कान और कभी-कभी झुकती नज़रें बता रही थी की हीरल भी मुझे भा गयी थी. उसके हर अंदाज़ में एक अनोखी आडया थी, जो मेरे दिल को छ्छू रही थी. मैं उसकी मासूमियत और उसके नये रूप के बीच कहीं खो सा गया था.

रात हो चुकी थी. डिन्नर के बाद सब अपने कमरों में थे. मैं बातरूम से नहा कर बाहर निकला, सिर्फ़ एक टवल लपेटे हुए. मेरा मूड तोड़ा मस्ती भरा था और मैं सीधा अपनी पत्नी के कमरे की तरफ बढ़ा. शायद मैं उसे च्चेड़ने के मूड में था.

जैसे ही मैं कमरे के दरवाज़े पर पहुँचा, मैने जान-बुझ कर टवल गिरा दिया, ये सोच कर की मेरी पत्नी रानी ही सामने होगी. पर मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी, जब सामने रानी की जगह हीरल खड़ी थी!

हम दोनो एक-दूसरे को देख कर झेंप गये. एक पल के लिए तो जैसे साँसें ही थम सी गयी तीन. मैने झट से टवल उठाने के लिए नीचे देखा, पर उस पल मैने नोटीस किया की हीरल की निगाहें मेरे ‘लंड’ पर टिकी हुई तीन. और मेरी नज़रें, उसकी उभरती हुई ‘बूब्स’ पर जेया अटकी तीन.

वो पल अजीब था, शर्मिंदगी से भरा, पर कहीं ना कहीं एक अंजानी सी चिंगारी भी उसमें मौजूद थी. हम दोनो तेज़ी से अपनी नज़रें चुरा गये, जैसे कुछ हुआ ही ना हो.

रात गहरी हो चुकी थी, पर मेरी आँखों से नींद कोसो डोर थी. जैसे ही मैं आँखें बंद करता, हीरल के वो उभरते हुए ‘बूब्स’ मेरी आँखों के सामने आ जाते. वो स्लिम थी, पर उसके ‘बूब्स’ वाक़ई में काफ़ी भरे हुए थे.

उधर, हीरल को भी नींद नही आ रही थी. वो बिस्तर पर करवट बदल रही थी, और उसके दिमाग़ में बस वही तस्वीर घूम रही थी. उसके मॅन में चल रहा था, “वाउ, क्या ‘लंड’ था जीजू का! मेरा मॅन तो उस ‘लंड’ को पकड़ने को हो रहा है.” हम दोनो एक ही च्चत के नीचे, अलग-अलग कमरों में, एक-दूसरे के ख़यालों में खोए हुए थे.

अगली सुबह, रानी ने मुझसे कहा, “कुमार, तुम हीरल को बेज़ार ले जाओ, उसे कुछ शॉपिंग करनी है. मैं चली जाती, पर मुझे घर में बहुत काम है.” ये सुनते ही मेरे मॅन में तो जैसे लड्डू फूटने लगे! ये एक ऐसा मौका था जिसके बारे में मैं रात भर सोच रहा था, और अब खुद किस्मत ने मुझे ये सुनहरा अवसर दे दिया था.

मेरे चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आ गयी, जिसे मैने रानी से च्छुपाने की कोशिश की.
और फिर, मैं हीरल को अपनी बिके पर बिता कर बेज़ार ले जेया रहा था. रास्ते में मैं जान-बुझ कर थोड़ी तेज़ी से और झटके दे कर बिके चला रहा था, ताकि ब्रेक्स लगाने पर हीरल मुझसे और ज़्यादा लिपट जाए. और वही हुआ! हर झटके पर वो और करीब आती, और उसके ‘बूब्स’ मेरी पीठ से टकराने लगते. वो एहसास अनोखा था.

हीरल ने हल्की हँसी के साथ कहा, “जीजू, आप बड़े शरारती हो!” उसके इस अंदाज़ ने मेरे दिल की धड़कनो को और तेज़ कर दिया.

हम पहले एक शॉपिंग माल गये. हीरल ने वहाँ अपने लिए कुछ नये कपड़े चुने – जीन्स और टॉप, और साथ ही एक खूबसूरत पिंक कलर की ब्रा भी. जब वो चेंजिंग रूम में ब्रा ट्राइ करने गयी, तो मैं बाहर उसके पास ही खड़ा था. मेरे अंदर एक अजीब सी बेचैनी और उत्सुकता थी, ये सोच कर की वो अंदर क्या कर रही होगी.

और फिर, चेंजिंग रूम के अंदर से हीरल की आवाज़ आई, “जीजू, प्लीज़ ये हुक लगा दो ब्रा का, मुझसे नही लग रहा.” उसके शब्दों ने मेरे अंदर एक हलचल सी मचा दी. मैं हैरान भी था और तोड़ा घबराया हुआ भी, पर मैने अपने आपको संभाला और उसकी मदद करने के लिए अंदर चला गया.

जैसे ही मैने हुक लगाने की कोशिश की, वो टूट गया और ब्रा नीचे गिर गयी. हीरल के दोनो बड़े ‘बूब्स’ मेरे सामने थे. इस नज़ारे को देख कर मेरा ‘लंड’ उपर हो गया और हीरल की ‘छूट’ को छ्छूने लगा. हम दोनो एक पल के लिए ठिठक गये, हैरान और थोड़े से सहमे हुए.

थोड़ी देर तक हम दोनो चुप-छाप खड़े रहे, उस अजीब से पल को समझने की कोशिश करते हुए. फिर हीरल ने शर्मिंदगी तोड़ते हुए कहा, “लगता है ये ब्रा साइज़ में छ्होटी है, इसलिए हुक टूट गया है, जीजू.”

मैने उसकी आँखों में देखा और धीरे से जवाब दिया, “नहीं हीरल, ये ब्रा का साइज़ बराबर है, बस तुम्हारे ‘बूब्स’ बड़े हो गये है.” मेरी बात सुन कर उसके चेहरे पर हल्की सी लाली छा गयी.

हीरल ने एक गहरी साँस ली और धीरे से कहा, “ओह, अछा, इसलिए आपका ‘लंड’ खड़ा हो गया और मेरी ‘छूट’ के होंठो को छ्छू रहा है.”

मैने उसकी आँखों में देखते हुए जवाब दिया, “हा, लगता है तुम्हारे ‘पपीते’ की तरह तुम्हारी ‘छूट’ भी मेरे ‘लंड’ को पसंद आ गयी होगी.” हम दोनो के बीच एक अंजानी सी गर्माहट बढ़ रही थी, जिसे हम शब्दों में बयान नही कर सकते थे.

और फिर, जैसे-तैसे हम दोनो चेंज रूम से बाहर आए. उस पल की शर्मिंदगी और उत्तेजना अब भी हवा में घुली हुई थी. हमने माल से निकल कर एक रेस्टोरेंट का रुख़ किया, जहाँ हमने एक साथ बैठ कर कोल्ड कॉफी पी. बातों-बातों में, मैने जान-बुझ कर अपना पावं हीरल के पावं से च्चेड़ रहा था. वो कुछ नही बोल रही थी, बस हल्की सी मुस्कुराहट उसके होंठो पर थी, और उसकी नज़रें मेरी नज़रों से मिलने से कटरा रही थी. उसका चुप रहना ही सब कुछ कह रहा था.

अगली रात, करीब 1 या 2 बजे के बीच मेरी नींद खुली और मैं पानी पीने के लिए उठा. तभी मुझे हीरल के कमरे से कुछ अजीब सी आवाज़ सुनाई दी. मैं धीरे से उसके कमरे की खिड़की के पास गया और अंदर झाँका. हीरल बेड पर बैठी थी, अपने घुटनो को उपर किए हुए, और उसके मूह से हल्की “ह… ह” की आवाज़ आ रही थी. उस पल मुझे यकीन हो गया की वो अपनी ‘बिल्ली’ में उंगली कर रही है. एक अंजानी सी आग मेरे अंदर भी भड़क उठी.

और तभी, उसकी आवाज़ों में मेरा नाम भी घुलने लगा, “ह… जीजू… और ज़ोर करो… और ज़ोर से करो…” उसके मूह से हल्की सिसकियाँ निकल रही थी. ये सब सुन कर और देख कर मेरा ‘लंड’ एक बार फिर से खड़ा हो गया. एक अजीब सी उत्तेजना और बेचैनी ने मुझे घेर लिया. मैं वहाँ से हॅट नही पा रहा था, उस पल का गवाह बनते हुए.

और फिर, मेरा हाथ अपने आप मेरे ‘लंड’ पर चला गया. उसकी आवाज़े और उसकी तस्वीर मेरे दिमाग़ में घूम रही थी, और मैं अपने ‘लंड’ को हिलने लगा. थोड़ी देर में, ‘लंड’ ने अपना पानी छ्चोढ़ दिया, और मैं वहीं खिड़की के पास हानफते हुए खड़ा रहा, एक अजीब से एहसास के साथ.

फिर अचानक से हम दोनो की नज़र एक-दूसरे पर पड़ी. एक पल के लिए तो जैसे साँसें ही रुक गयी थी. हीरल ने झट से कंबल ओढ़ लिया और मैं वहाँ से पलट कर अपने कमरे की तरफ निकल गया. पर उस पल, मुझे इतना तो पता चल गया था की हीरल भी प्यासी थी, और उसके अंदर भी वही आग थी जो मेरे अंदर थी. और अब, ये आग मैं ही बूझौँगा.

अगली सुबह नाश्ते के टेबल पर हीरल मुझसे नज़रें चुरा रही थी, और हम दोनो के बीच एक अजीब सी खामोशी च्छाई हुई थी. कोई कुछ नही बोल रहा था. तभी रानी ने हम दोनो को देख कर कहा, “तुम दोनो चुप क्यूँ हो? क्या हुआ है?” हम दोनो ने एक साथ, झट से कह दिया, “कुछ नही!”

पर हमारे चेहरों पर और आवाज़ में जो हिचकिचाहट थी, वो सब कुछ बयान कर रही थी. रानी ने शायद ध्यान नही दिया, या उसने नज़रअंदाज़ कर दिया. पर हम दोनो जानते थे की रात का राज़ अब हमारे बीच एक नयी दीवार खड़ी कर चुका था.

रानी ने फिर कहा, “अछा ठीक है, आज मुझे बाहर जाना है अपनी सहेली के घर. कुमार, तुम घर पर ही रहना, हीरल अकेली होगी.” उसके इन शब्दों ने मेरे अंदर की खुशी को डबल कर दिया. मैने मॅन ही मॅन सोचा, “वाह! मुझे तो सामने से मौका मिल गया है.”

मेरे चेहरे पर एक मुस्कान फैल गयी, और मैं रानी के जाने का इंतेज़ार करने लगा. आज का दिन कुछ ख़ास होने वाला था. रानी के जाने के बाद, हीरल बातरूम में नहाने गयी थी. मैं उसके पीछे-पीछे बातरूम में घुस गया.

दरवाज़े का लॉक खराब था, इसलिए वो खुल गया. अंदर हीरल सिर्फ़ टवल में खड़ी थी. जैसे ही मैं अंदर गया, मैने पीछे से हीरल को पकड़ लिया. उसका बदन मेरे बदन से टकराया, और हम दोनो एक पल के लिए सांस रोक कर खड़े रहे.

फिर हीरल मेरी तरफ मूडी, तो उसका टवल नीचे गिर गया. उस पल, मुझे उसकी ‘छूट’ और बड़े ‘बूब्स’ के पुर दर्शन हो गये. उसने शरम से अपनी आँखें बंद कर ली थी, क्यूंकी मेरा ‘लंड’ उसके बिल्कुल सामने खड़ा था. हम दोनो के बीच की दूरी अब ख़तम हो चुकी थी, और हवा में एक गहरा एहसास टायर रहा था.

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