मेरी चुदाई की कहानी अब आयेज-
उनका हर स्पर्श मेरे अंदर एक आग सी लगा रहा था, और मैं बस उस पल में खो जाना चाहती थी, मेरे होंठो से धीमी-धीमी सिसकारियाँ निकल रही थी.
उन्होने मेरी पेटिकोट का नाडा खोल दिया और वो सरक कर मेरे पैरों में आ गया. उन्होने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी पनटी को भी खींच कर घुटनों तक कर दिया. मैने अपनी सॉफ-सूत्री छूट च्छुपाने की कोशिश की, पर उन्होने मेरे हाथो को हटा दिया. वो नीचे बैठ गये और मेरी पनटी खींच कर फेंक दी. फिर मेरी टाँगें फैला कर मेरे छूट पर मूह लाने लगे.
मैं उनका सर डोर कर रही थी. पर उन्होने मेरे दोनो हाथ पकड़ लिए और मेरी टाँगों के बीच आ कर मेरी छूट पर किस करने लगे और चाटने लगे. उनकी गरम जीभ मेरी छूट को जला रही थी, और मैं तड़प उठी. मेरी साँसें तेज़ हो गयी, और मेरे जिस्म में एक तेज़ करेंट सा दौड़ गया.
मेरा जिस्म काँप रहा था. मैने सिसकते हुए, आवाज़ में लड़खड़ाहाते हुए कहा, “आप ये क्या कर रहे हो, जेठ जी?”
जेठ जी मेरी छूट चाट-ते हुए, मस्ती में बोले, “मैं तुम्हे संतुष्ट कर रहा हू, सपना. तुम्हारी ये प्यास मैं ही बुझा सकता हू.”
उनकी ज़ुबान में जैसे जादू था, और मैने खुद अपनी टाँगें फैला दी और अपनी छूट मेरे जेठ जी से चटवाने लगी. मेरी साँसें उखाड़ रही थी और मैं उनके हवाले हो चुकी थी, हर एहसास में खो चुकी थी.
मैं इतनी बेकाबू हो गयी की मैने उनका सर पकड़ कर अपनी छूट पर दबाने लगी. उनके बालों को अपनी उंगलियों में फासा लिया. उन्होने मुझे झड़ने पर मजबूर कर दिया और मैं तेज़ सिसकारी के साथ झाड़ गयी. मेरी पूरी बॉडी में एक तेज़ करेंट सा दौड़ा और मैं बिल्कुल ढीली पद गयी. वो मेरी छूट का रस्स चाटने लगे, हर बूँद का मज़ा ले रहे थे, जैसे कोई रसीला फल खा रहे हो.
मैने हानफते हुए, कमज़ोर आवाज़ में कहा, “अफ… जेठ जी… ये… ये क्या जादू है आपकी ज़ुबान में… मैं तो खुद को रोक ही नही पाई.”
जेठ जी मेरी छूट को सहलाता हुआ, मेरी आँखों में देखता हुआ, शरारती मुस्कान के साथ जवाब दिया, “जादू तो तुम्हारी प्यास में है, सपना. जो इतनी गहरी है की उसको बुझाते-बुझाते मेरा भी हाल बुरा हो गया.”
मैने भी उनको कोई रेज़िस्ट नही किया, क्यूंकी उनका हर स्पर्श मुझे बेचैन कर रहा था और मैं उस पल को जीना चाहती थी. उन्होने मेरी छूट को चाटना जारी रखा, और फिर उन्होने मेरे तरफ देखते हुए कहा, “सपना, तुम्हारी ये छूट तो… ये तो मेरी प्यास है. आज से ये सिर्फ़ मेरी है, मेरी जान.”
उसके बाद जेठ जी धीरे से खड़े हुए और मेरे सामने अपनी पंत खोलने लगे. मेरी नज़र बस उनके हाथो की हर हरकत पर थी… मैं उनका लंड बाहर आता देखना चाहती थी. जैसे ही उन्होने पंत के साथ अंडरवेर भी एक झटके में नीचे कर दिया, मेरी साँस एक पल के लिए अटक गयी.
मेरी आँखें बड़ी हो गयी… सामने उनका लंड था, मोटा, लंबा, मेरे हज़्बेंड से भी कहीं ज़्यादा बड़ा. मैं उसे देख कर हैरान रह गयी… ऐसा लंड तो मैने सिर्फ़ पॉर्न में देखा था.
उन्होने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बिता दिया. अब उनका लंड मेरे मूह के बिल्कुल सामने था. मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गयी. मैं शर्मा रही थी, पर चोरी-चोरी उस पर नज़र डाल रही थी… उसकी हर राग जैसे मुझे अपनी तरफ खींच रही थी.
जेठ जी ने मेरा तोड़ा सा चीन उठा कर मेरी आँखों में देखा. मैं समझ गयी… वो क्या चाहते थे. उनकी आँखों में एक भूख थी, ख़ुदग़र्ज़, पर उतनी ही गहरी, और मैं भी उस भूख का हिस्सा बन चुकी थी.
मैने अपना हाथ आयेज बढ़ाया… जैसे ही उनके लंड को च्छुआ, मेरे जिस्म में एक तेज़ करेंट सा दौड़ गया. वो बहुत सख़्त और गरम था… जैसे किसी गरम लोहे का रोड.
मैने उस पर एक हल्का सा किस रखा… फिर उनकी आँखों में देखा. उनकी नज़र में वहीं हवस थी… एक भूखे शेर की तरह चमक, जो मुझे अंदर तक हिला रही थी.
मैने अपनी आँखें बंद की… और बिना कुछ सोचे उनका लंड अपने मूह में ले लिया. जैसे मैं किसी सपने में खो गयी हू… बेपरवाह हो कर बस चूस रही थी. उनका लंड गरम, सख़्त… बिल्कुल मेरे मूह में फिट हो रहा था. मैं अपनी जीभ से उसका हर इंच महसूस कर रही थी… हर एक टेक्सचर का स्वाद ले रही थी.
जेठ जी ने प्यार से अपना हाथ मेरे सर पर रखा, उंगलियों से बालों को हल्की सी सहलाः दी. फिर धीरे-धीरे मेरा सर आयेज-पीछे करने लगे. उनका लंड मेरी होंठो के बीच से अंदर-बाहर होने लगा. कभी पूरा गले तक घुस जाता, तो कभी सिर्फ़ उनका सूपड़ा मेरे होंठो के बीच तिरकता.
हर धक्के पर मेरी साँस तेज़ हो जाती, सिसकारियाँ निकल जाती. गले में उनकी गर्मी महसूस होती. मैं पूरी तरह उनके लंड के मज़ा में डूब गयी थी, जैसे हर स्ट्रोक के साथ एक नशा चढ़ रहा हो.
जेठ जी ने आँखें बंद करते हुए, सिसकते हुए कहा, “आ सपना… क्या चूस्टी हो तुम… मज़ा आ गया. तुमने तो मेरी जान निकाल दी.”
उनकी तारीफ सुन कर मुझे और हिम्मत मिली. मैं और तेज़ी से उनका लंड चूसने लगी, जैसे कोई प्यासा पानी पी रहा हो. मेरी जीभ उनके लंड के हर हिस्से को चाट रही थी, और मैं उसकी नासो को भी महसूस कर रही थी, हर चूसने में और गहरा उतार रही थी.
जेठ जी ने मेरा सर पकड़ा और अपने लंड को मेरे गले में और गहरा उतार दिया और सिसकते हुए तेज़ी से बोले, “सपना… अया… मेरा निकालने वाला है… सब पी जाओ मेरी जान… सब पी जाओ… ये मेरा अमृत है.”
मैने भी बिना सोचे समझे उनका पूरा रस्स मूह में ले लिया और उसे पी गयी. वो मेरे मूह में ही झाड़ गये. उसके बाद वो धीरे से मेरे सर से हाथ-हटा कर पीछे हो गये. मैं हानफते हुए उनकी तरफ देखा. मेरे मूह में अभी भी उनके लंड का स्वाद था, और एक अजीब सा नशा चढ़ा हुआ था.
मेरे मूह में अभी भी उनके रस्स का स्वाद था, और मैं हल्की सी मुस्कान के साथ हानफते हुए उनकी तरफ देख रही थी. जेठ जी अपनी साँसें संभाल रहे थे, उनके चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि और आँखों में शरारत की चमक थी.
वो मुस्कुराते हुए बोले, “तो सपना… कैसा लगा मेरा टेस्ट? क्या ख़याल है अब? और पीलॉये, या इतना ही काफ़ी है?”
मैं शरमाते हुए, पर आँखों से उनका मज़ाक उड़ते हुए बोली, “आप तो बहुत… बहुत शैतान हो गये हो, जेठ जी.”
वो मेरे बिल्कुल पास आ गये, उंगलियों से मेरे गालों को सहलाते हुए धीमी आवाज़ में बोले, “शैतानी तो अब शुरू हुई है, मेरी जान… और अब जब तुमने मेरा स्वाद चख लिया है, तो क्या ये शेर ऐसे ही सो जाएगा? या तुम्हारा इरादा इसे फिर से जगाने का है?”
उनकी बातों से मेरे होंठो पर हँसी आ गयी, पर दिल में एक नयी आग भड़क उठी. उनका लंड अभी तोड़ा नरम था, पर अब भी इतना बड़ा की मेरी नज़र उसी पर अटक गयी.
मैं नॉटी स्माइल के साथ उनके लंड की तरफ इशारा करते हुए बोली, “आपको लगता है की मैं अपने इस शेर को ऐसे ही सोने दूँगी? अभी तो इससे बहुत काम करवाना है.”
जेठ जी की आँखों में जोश का बिजली सा चमक उतरी. “तो क्या करोगी मेरी जान? कैसे जगावगी इससे?”
मैने उनका हाथ पकड़ा, उन्हें बेड पर अपने पास बिताया. धीरे से उनका लंड अपनी उंगलियों में लेकर जैसे कोई अनमोल चीज़ हो, प्यार से सहलाया. “इससे तो अभी बहुत काम लेना है, जेठ जी… आपकी आज की हर बूँद, सिर्फ़ मैं ही पियूंगी.”
मैने उनका लंड अपने हाथो में ले लिया, धीरे-धीरे उसकी गर्मी महसूस करते हुए सहलाने लगी. उसका नरम और भारी एहसास मेरे हाथो में जैसे आग जला रहा था. मैं अपना मूह उसके करीब ले गयी और सूपदे पर हल्की सी किस दी.
फिर अपनी जीभ से उपर से नीचे तक उसकी लंबाई को चाटना शुरू किया. जेठ जी की पलकें बंद हो गयी, एक गहरी साँस उनके सीने से निकली, और उनके होंठो से हल्की सी सिसकी.
वो होत से मुस्कुराते हुए बोले, “आ सपना… बस ऐसे ही… तुम्हारे हाथो का जादू अलग ही है… तुम तो मेरी चहेती बन गयी हो.”
मैने उनके लंड को और प्यार से चूमना, चाटना शुरू किया, कभी टिप पर अपनी जीभ घूमते हुए, कभी उसे अपने मूह में लेकर आयेज-पीछे करती. धीरे-धीरे उसकी नर्मियत सख्ती में बदल गयी, और कुछ ही पलों में वो बिल्कुल टन चुका था, मोटा, लंबा, एक फौलादी रोड की तरह… जो अब मेरी गरम छूट में उतरने को बेचैन था.
जेठ जी का मोटा लंड पूरी तरह टन चुका था. उन्होने मेरी टाँगें धीरे से फैलाई और मेरी छूट पर तोड़ा सा थूक गिरा कर उंगली से फैला दिया, जिससे वो और ज़्यादा चमक उठी. मेरी छूट अभी भी उनके ओरल प्लेषर से गीली थी, और अब उनका लंड उसमें घुसने को बेचैन था. उसकी गर्मी मैं अपने अंदर तक महसूस कर रही थी.
जेठ जी ने एक नॉटी स्माइल दी, “अब मैं छ्होटे की कमी पूरी कर रहा हू, सपना… आज तुम्हे असल मज़ा चखने को मिलेगा. जो तुमने कभी सोचा भी नही होगा.”
उनकी बात सुन कर मेरी नज़र अपने आप उनके लंड पर चली गयी. मेरे दिल में एक अजीब सा दर्र और एग्ज़ाइट्मेंट दोनो साथ-साथ चल रहे थे. मैं उनकी आँखों में देखते हुए हल्की सी साँस ले कर बोली, “आपका तो बहुत बड़ा है… उनका तो आपके सामने कुछ भी नही. क्या मैं इसे पूरा अंदर ले पौँगी?”
मेरी बात सुन कर जेठ जी के होंठो पर एक और भी नॉटी मुस्कान आ गयी. वो मेरी छूट को घूरते हुए बोले, “लंड चाहे जितना भी बड़ा हो… औरत की छूट उससे निगल ही लेती है. और आज तुम्हे वही मिलेगा जो तुम हमेशा से चाहती थी. देखना… ये पूरा अंदर जाएगा… और तुम्हे जन्नत का मज़ा दिखाएगा.”
उन्होने मेरी गीली छूट पर अपना मोटा लंड धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया. हर रग़ाद के साथ मेरी साँसों की रफ़्तार तेज़ होती जेया रही थी, और मेरे अंदर एक मीठी तड़प उठ रही थी. लगता था जैसे वो जान बुझ कर मुझे तडपा रहे हो, मेरे जिस्म को अपने लंड की प्यास से बहाल करते हुए.
मेरे होंठो से बेकरारी निकल ही गयी, मैं उनकी गर्दन पकड़ कर बोली, “क्यूँ इतना तडपा रहे हो? अब छोड़ो मुझे… मुझसे और इंतेज़ार नही हो रहा.”
वो सिर्फ़ मुस्कुराए. एक गहरी साँस लेकर, उन्होने अपना लंड धीरे से मेरी छूट के दरवाज़े पर रखा… और हल्का सा धक्का दिया. जैसे ही उनका मोटा सूपड़ा अंदर घुसा, एक तेज़ दर्द ने मेरी सारी साँसें खींच ली. “आहह…” मेरी चीख निकल गयी, मेरी आँखों से आँसू तपाक पड़े.
जेठ जी ने मुझे अपनी बाहों में संभाला, मुझे करीब खींच कर धीरे-धीरे अपना पूरा लंड अंदर उतार दिया.
इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा.