जवान लड़की से अंतर्वासना शांत की

दोस्तो, मेरा नाम राज है और मैं गगन विहार, पानीपत में रहता हूँ, शादीशुदा हूँ, बाल बच्चेदार दूँ, पत्नी भी भरपूर सुख देती है।
मगर इंसान की फितरत होती है कि उसे जितना भी मिलता है थोड़ा ही लगता है और सेक्स के मामले में तो मर्दों की भूख कभी भी शांत नहीं होती है।

मैं भी कोई अपवाद नहीं हूँ, अच्छी ख़ासी सुंदर बीवी के होते हुये भी मैंने इधर उधर बहुत मुँह मारा है। जिनमे मेरे दफ्तर की सहकर्मी, काम वाली बाई, मतलब किसी को नहीं बख्शा, जो मेरी लच्छेदार बातों के जाल में आ गई, मैंने उसे ठोक कर ही दम लिया।

वैसे तो मैं अपने रिश्तेदारों के घर बहुत ही कम जाता हूँ, क्योंकि वहाँ जाकर मुझे अपनी ही रिश्तेदारी में नई नई चूतें, अलग साइज़ की गाँड और बोबे दिखते हैं तो मेरा लंड मचलने लगता है।

मगर पिछले साल मुझे अपनी बड़ी साली के घर चंडीगढ़, पंजाब जाने का मौका मिला। जब मैं उनके घर गया, सब से मिला तो मेरी साली की बेटी रिंकी भी मुझसे मिली, ‘नमस्ते मौसा जी’ कह कर चली गई।

कोई 20-21 साल की पतली दुबली सी लड़की, साधारण सा चेहरा मोहरा, कद मुश्किल से 5 फीट 1 या 2 इंच। उसने काले रंग की टाईट टी शर्ट और नीचे से जीन्स की मिनी स्कर्ट पहन रखी थी।
और मिडल क्लास फ़ैमिली की लड़की अब मिनी स्कर्ट में अपनी टाँगें तो दिखा नहीं सकती तो टाँगों को ढकने के लिए उसने स्कर्ट के नीचे से एक काली स्लेक्स पहन रखी थी।

अब अपनी तरफ से तो उसने सब ढक कर अपना मिनी स्कर्ट पहनने का शौक पूरा किया था, मगर मेरे जैसे बदमाश बंदे ने तो इसी में बहुत कुछ देख लिया।
स्किन टाईट स्लेक्स होने के कारण मुझे पता चल गया कि उसकी टाँगें और जांघें कितनी मोटी हैं।
टाईट टी शर्ट ने बता दिया के उसका पेट कितना सपाट है और बूब्स का साइज़ क्या है।

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और जब मुझे नमस्ते कह कर वो वापिस गई, तो उसकी मस्तानी चाल ने उसके चूतड़ों का साइज़ और मटक दिखा दी। जब वो जा रही थी तो मैंयही सोच रहा था कि अगर इसके स्कर्ट के नीचे ये काली स्लेक्स न पहनी होती तो इसकी नंगी टाँगें कितनी खूबसूरत लगती, और अगर स्कर्ट ही न पहनी होती काली स्लेक्स में से इसके छोटे छोटे चूतड़, हिलते हुये मटकते हुये कितने प्यारे लगते।

खैर मैंने उसे देखा भी बहुत अरसे बाद था, शायद 5-6 साल बाद। इस दौरान वो ज़्यादा लंबी या तगड़ी तो नहीं हुई, मगर उसके कूल्हों और बूब्स का साइज़ ज़रूर बढ़ गया था। मगर लगती अब भी वो छोटी सी ही थी, क्योंकि दुबला जिस्म और छोटा कद उसको छोटा ही दिखा रहा था।

मैं भी सोच रहा था, कॉलेज में पढ़ती है, बॉय फ्रेंड होगा इसका या नहीं? अगर होगा तो इसने कुछ किया होगा या नहीं? चुदी हुई तो नहीं लगती है, अगर मुझसे चुद जाए तो मज़ा आ जाए ज़िंदगी का।
मगर यह तो संभव नहीं था, वो अपनी उम्र का लड़का छोड़ कर मुझ जैसे अंकल से क्यों चुदने आएगी भला।

मगर इन दिनों मैंने उसके जो कपड़े पहने देखे, कभी जीन्स-टी शर्ट, कभी कोई कैप्री या बरमूडा, जिसमें से मैंने उसकी घुटने से नीचे की नंगी टाँगें देखी, टाँगें भी पूरी तरह से वेक्स की हुई थी।
इसी से मैंने अंदाज़ा लगाया कि अगर इसने टाँगें वेक्स करी हैं तो बगल और चूत के बाल भी ज़रूर साफ किए होंगे।
बल्कि एक दिन वो बड़ी ढीली स्लीवलेस टी शर्ट पहन कर अपने कपड़े प्रैस कर रही थी, तो मैंने चोरी से देखा, के उसकी बगलों में एक भी बाल नहीं था, बिल्कुल चिकनी बाहें और साफ बगलें।
यही नहीं, टी शर्ट के गले के अंदर से मैंने पहली बार उसके आज़ाद झूलते बूब्स भी देखे, मम्मे बढ़िया थे साली के… ओह सॉरी मेरी साली तो उसकी माँ है।

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खैर, दो तीन दिन उनके घर रह कर मैंने अपने परिवार सहित अपने घर वापिस आ गया।
मगर उसका कुँवारा मदमाता यौवन मेरी आँखों में बस गया। घर आकर जब अपनी बीवी की ली तो मैंने अपनी आखें बंद करके रिंकी को चोदने का खयाल अपने मन में लिया।

दिन बीतते गए। करीब 6 महीने बाद बीवी ने बताया कि इस बार की गर्मियों की छुट्टियों में रिंकी हमारे घर कुछ दिन रहने के लिए आ रही है।
मेरी तो खुशी का कोई ठिकाना न रहा, मैंने सोचा कि अगर मैं उसे चोद नहीं सकता तो नंगी तो देखना ही देखना है।

इसी विचार के चलते मैंने अपने घर के दोनों बाथरूम के दरवाजों में जो कुंडियाँ लगी थी, उनमें इस हिसाब से सुराख कर दिये कि देखने को लगे के ये पेंच कसने के लिए सुराख किया होगा, बस पेच लगाना रह गया।

जिस दिन रिंकी हमारे घर आई, हम दोनों मियां बीवी ने उसे भरपूर प्यार दिया। मैंने तो उसे इतना लाड़ किया जैसे वो मेरी अपनी बेटी हो।
वो भी बहुत खुश थी।

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