जवान लौंडिया की हॉट चुदाई

दोस्तो एक और मस्त कहानी लेकर उपस्थित हूँ उम्मीद करता हूँ आपको ज़रूर पसंद आएगी ये तब की घटना है जब मैं मेरी मौसी के यहाँ शहर में पढ़ता था। एक दिन मेरी मौसी की बेटी शन्नो मौसी से मिलने आई। यह जो घटना मेरे जीवन में घटी.. वो अनायास ही घटी है मेरी मौसी की बेटी बहुत ही सुंदर है और वो अपनी एकलौती बेटी डॉली को साथ में लाई थी।
मेरे मन में कुछ भी नहीं था.. लेकिन डॉली नई-नई जवान लौंडिया थी.. उसकी गोरी चमड़ी तथा उठे हुए मम्मे बहुत ही सुंदर लग रहे थे.. उसने सफेद फ्रॉक पहना हुआ था। शरीर से गबरू होने के कारण बहुत ही जानदार लग रही थी। उसका फ्रॉक घुटनों तक आ रहा था.. उसकी टाँगें भी बहुत चिकनी और गोरी थीं।
मैंने उसे अपनी तरफ बुला लिया और अपने पास पर बिठा लिया। वो बहुत होशियार तथा सुंदर ढंग से बातें कर रही थी.. लेकिन थोड़ी समय बाद उसके बड़े-बड़े मुलायम कूल्हों की नर्माहट ने मेरे लंड को खड़ा कर दिया।
मेरी बहन उसी शाम को वापस जाने वाली थीं.. लेकिन मौसी ने ज़िद करके रोक लिया।
रात का खाना खाने के बाद बहुत गप्पें लड़ाने के बाद सोने का इंतज़ाम हुआ और चूंकि घर में सीमित साधन थे.. सो ऊपर वाले ने मेरी सुन ली.. डॉली को मेरे साथ खटिया पर सोने का प्रबंध हो गया। मेरी मुँह माँगी मुराद पूरी हो गई।
वो मुझे उम्र में छोटी थी.. मैं एकदम से उसके साथ कुछ कर तो नहीं सकता था.. लेकिन बाहरी मज़े तो ले ही सकता था।
डॉली मेरी खटिया पर आकर मेरे एक तरफ लेट गई। वो मेरी तरफ पीठ करके सो गई.. उसकी फ्रॉक घुटनों के ऊपर तक आ गई थी। रात के दूधिया उजाले में वो परी सी लग रही थी।
बहुत गप्पें लड़ाने के बाद धीरे-धीरे घर के सब लोग गहरी नींद में सो रहे थे। लेकिन मैं जाग रहा था.. इतना कमसिन और मदमस्त माल मेरे बगल में मुझसे चिपक कर लेटा हुआ था.. पीछे से उसकी गाण्ड की गहरी दरार देखकर मेरा लंड खड़ा हो चुका था। मैं एक हाथ से अपने लंड को सहला रहा था।
अब रात के 11:45 हो गए.. सारे लोग गहरी नींद में सो गए थे.. तब डॉली ने मेरी तरफ़ पलटी मारी और उसने अपना एक पैर मेरे ऊपर डाल दिया.. तब मैंने अपनी रज़ाई हम दोनों के ऊपर ओढ़ ली.. और मैंने उसकी साँसों की गरमी को महसूस किया।
अब मैंने अपना बरमूडा नीचे खिसका दिया.. अब मेरे लौड़े के ऊपर सिर्फ एक निक्कर ही बची थी। अब आपस में हमारी रानों की नर्माहट को मैं महसूस कर रहा था।
एक हाथ मैंने उसकी पीठ पर रख दिया और उसे आहिस्ता से सहलाने लगा.. जब उसकी कोई उजरदारी नहीं हुई तो मैंने धीरे से उसकी फ्रॉक को ऊपर को किया और उसकी कमर के ऊपर तक उठा दिया।
अब मेरा हाथ उसके बड़े-बड़े गोल-गोल चूतड़ों पर रखा। एक छोटी सी चड्डी में उसके दो बड़े-बड़े कूल्हे फंसे हुए थे।
मैंने उसका एक पैर जो मेरे ऊपर था उसे और ऊपर कर दिया और उससे चिपक गया।
अब लोहा और चुंबक आपस में चिपक गए थे.. मैं बहुत खुश था। मेरा लवड़ा डिस्को कर रहा था।
हमारी नंगी रानें एक-दूसरे से चिपक गई थीं.. तभी मैंने उसकी गाण्ड की तरफ से उसकी चड्डी की इलास्टिक में अपना एक हाथ घुसा दिया।
कुछ पलों तक स्थिति को समझने के बाद मैंने अपना हाथ उसके गोल चूतड़ों पर दबा दिया और सहलाने लगा।
वो बेसुध सो रही थी.. मैंने उसका फ़्रॉक और ऊपर उठा दिया और आगे से उसके चीकू के आकार के स्तनों पर हाथ फेरा.. उसके बदन की मदहोश कर देने वाली खुशबू.. मुझे बेचैन कर रही थी.. मेरा कड़क हो चुका लण्ड उसकी चूत के सामने निक्कर से बाहर आने के लिए फुंफकारें भर रहा था।
तब मैंने डॉली को चित्त लिटा दिया और पहली बार मैंने उसकी नाज़ुक चूत पर उसकी चड्डी की ऊपर से हाथ रखा।
उसकी चूत गरम साँसें छोड़ रही थी। मैं धीरे से उसके स्तनों को सहलाता हुआ.. नीचे उसकी नाभि को भी सहलाने लगा।
फिर नाभि से नीचे उसकी चड्डी की इलास्टिक में हाथ घुसा दिया.. अब उसकी चूत का इलाका.. जिधर उसकी चूत पर इने-गिने रेशम से मुलायम बाल उगे हुए थे।
आज एक कच्ची कली मेरे पास थी.. और बस मैं कैसे खुद को रोकता.. नीचे मेरी उंगलियाँ सरक गईं.. मेरी हथेली उसकी फूली हुई पावरोटी की तरह चूत पर छा चुकी थी।
तब उसकी साँसें निकल गईं.. उसकी चूत के फलक बड़े-बड़े थे.. आपस में एकदम से मिले हुए थे।
मैं अपनी बहन को धन्यवाद दे रहा था कि क्या चूत को जन्म दिया है।
मैं क्या करूँ ये मेरी समझ में नहीं आ रहा था। तब मैंने मेरा लंड निक्कर से बाहर निकाला और हिम्मत करके उसके दोनों पैर मेरी कमर पर रख लिए।
अब मैंने एक बार इधर-उधर देखा.. सारे लोग तथा बहन आराम से सो रहे थे। मैं अपनी भांजी की चूत का उद्घाटन करने जा रहा था। अब मैंने उसकी चड्डी कमर से घुटनों तक नीचे को खिसका दी।
मैंने फिर एक बार आस-पास सभी को देखा.. सब सो रहे थे। तब मैंने रज़ाई नीचे की.. और देखा कि उसकी सफेद छोटी सी चड्डी उसके घुटनों तक आ गई थी। उसकी नाज़ुक कमसिन चूत रसमलाई की तरह दिख रही थी.. उसके फलक चिपके हुए थे.. उसकी चूत से दाना थोड़ा सा बाहर को निकल रहा था।
मैंने लंड का निशाना बराबर बनाया और सुपारे को छेद पर लगा दिया। मेरे बड़े सुपारे ने उसकी चूत का मुँह पूरा बंद कर दिया था।
अब मुझे बहुत खुशी हुई कि मेरा लंड उसकी नाज़ुक चूत का चुम्मा कर रहा था।
तब मैंने उसकी चूत की दोनों फाँकों को अलग किया और मेरा सुपारा छेद में सटा दिया।
मेरा लंड लार टपका रहा था.. तब मैंने अपने लण्ड को पीछे से हाथ से पकड़ कर सहलाते हुए हिलाने लगा.. और थोड़े ही समय में मेरा लावा.. जो कि गाड़ा वीर्य था.. उस कुंवारी चूत पर फूटा..
मेरा माल उसकी चूत के ऊपर-नीचे चारों तरफ से जहाँ जगह मिली.. निकलने लगा।
तभी कामांध होकर मैंने एक धक्का मार दिया.. तब उसकी डॉलीकली मेरा आधा सुपारा निगल गई।
उसने मेरा पानी अन्दर कितना लिया.. यह मुझे मालूम नहीं.. लेकिन उसकी चूत के मुँह में मैंने ढेर सारा मेरा खारा पानी छोड़ दिया.।
मुझे बाद में मालूम हुआ कि वो जाग रही थी।
फिलहाल तो मेरा तनाव उस कच्छी कली को बिना चोदे ही खत्म हो गया था।
अगले दिन फिर हम एक ही चारपाई पर सोए मैं बहुत खुश था लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था और मुझे कब नींद आई पता नहीं चला।
रात में जब मेरी नींद खुली तब मेरे हिसाब से रात के दो बजे होंगे और देखता हूँ कि मेरी उंगलियाँ डॉली की चूत पर थी, मतलब साफ था, वो ही मेरी चारपाई पर आई और मेरा हाथ अपनी चूत पर ले गई थी। मतलब डॉली अपनी चूत का भोसड़ा बनवाने के लिये तैयार थी। इस दृश्य को देखकर मेरा बदन कांपने लगा, मैं धीरे से डॉली की चूत का जायजा उसकी फ़टी चड्डी में से उंगली डालकर लेने लगा। मैंने महसूस किया कि चूत बिल्कुल साफ थी, चूत पर इने-गिने रेशम से बाल थे, चूत पूरी तरह से कचोरी की तरह फ़ूली हुई थी। चूत के होंट आपस में मिले हुये थे।
मैंने एक उंगली से दोनों होटों को अलग करके देखा तब डॉली चूत की एकदम बन्द और कसी लगी। तब डॉली ने तेज सांस छोड़ी, मतलब वह जग रही थी।
तब मैंने डॉली को अपनी तरफ करके उसके माथे पर अपने होंठ जमा दिये, अपने कच्छे से लंड निकाल कर डॉली की जान्घों में जहाँ पर चूत का मुँह खुला था, रख दिया। फ़िर मैंने उसकी शर्ट के बटन खोले, उसके दोनों कबूतर आजाद हो गये, उसके होटों का चुम्बन करते हुए मैं अपने हाथ उसकी पीठ नितम्बों पर फेरने लगा। उसकी स्कर्ट मैंने पूरी उठा दी और उसके गोल कूल्हों को मसलने लगा।
उसके कड़े स्तन बहुत मसले, दस मिनट तक बहुत मजे लिये।
मैं ऊपर उसके गुलाबी लब चूस रहा था और नीचे डॉली की गोरी चूत के होटों का चुम्बन मेरा काला लंड ले रहा था।
उसकी सांसें तेज हो रही थी। तब मैंने नीचे हाथ ले जाकर उसकी चूत और मेरा लंड देखा, दोनों लार टपका रहे थे, डॉली की चूत गर्म हो रही थी, मेरे लंड के सुपारे पर महसूस हो रहा था। तब मैंने डॉली की चड्डी नीचे खिसकाई एक पैर से उसे उसकी चिकनी जांघों से सरकाते हुए उसकी टाँगों से अलग कर दी।
मैंने भी अपना कच्छा निकाला, डॉली का एक पैर मोड़ लिया और उसकी चूत पर लंड रख कर दबाव डालने लगा। कभी नीचे तो कभी ऊपर हो जाता था। उसकी चूत बहुत टाइट थी, तब मैंने बहुत सारा थूक मेरे सुपारे तथा उसकी चूत पर मल दिया और उसके कंधे पकड़कर जोर से धक्का दे दिया। चारपाई की चर्र की आवाज के साथ मेरा लंड डॉली की चूत में दो इंच जा चुका था। उसके मुख से सिसकारी निकल गई- ममम्म… म्म्म्माआआह !
तब मैंने उसके होटों को अपने होटों की गिरफ्त में ले लिया और चूसने लगा। डॉली की गोरी चूत में मेरा काला लंड फंसा पड़ा था, एक हाथ से उसके स्तन गोल गोल करके मसल रहा था। उसकी चूत से मस्त खुशबू आ रही थी। उसे मसलता हुआ थोड़ा हिलता रहा और कब 6 इंच लंड मैंने डॉली की चूत में पेल दिया, पता भी नहीं चला।
मेरी भांजी डॉली की चूत की गरमाहट मुझे बहुत मजे दे रही थी, मैं धीरे-धीरे धक्के देने लगा, डॉली को भी मजे आने लगे, डॉली भी मेरे बालों में उंगलियाँ फ़िराने लगी, मैं ऊपर उसका रस पी रहा था और नीचे डॉली की चूत मेरे लण्ड से मेरा रस निकाल लेने को आतुर हो रही थी।
तभी मुझे डॉली जोर जोर से जकड़ने लगी, मतलब उसका रस निकलने वाला था, मैंने गति बढ़ा दी, मैं उसे उठकर चोद नहीं सकता था क्योंकि पास में ही बहन और जीजा जी सोये थे।
वह मेरे होटों को, गालों को काटने लगी, मतलब उसकी चूत पानी छोड़ रही थी, मैंने गर्म गर्म महसूस किया था। वह मुझे जोर से चिपक गई, मैंने जोर से झटके लगाये और कुछ देर बाद मेरा लिंग अपना लावा डॉली की योनि में छोड़ने लगा। हमने एक दूसरे को जोर से जकड़ लिया, मतलब हम एक हो गये थे।
मैंने डॉली का योनिछेदन करके उसका शील भंग कर दिया था। मैंने डॉली को बहुत रोन्दा था, मैंने कच्ची कली को फ़ूल बना दिया था !
और काफ़ी देर हम वैसे ही मतलब उसकी चूत में लंड डाले पड़े रहे !

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