बस में मिला एक नौजवान के साथ कामुकता

मेरा नाम शोभा है, मै ४० वर्ष कि साधारण सी दिखने वाली एक घरेलु महिला हूँ. घर में मेरे पति है जो बहुत सौम्य है और मुझे प्रेम करते है और साथ में हमारी एक १३ साल कि एक बेटी है. हम लोग मुम्बई के मलाड इलाके में में रहते है. मेरे पति जिनका नाम अनिल है करीब ४५ साल के है और एक बैंक में मैनेजर पद पर कम करते है.अनिल स्वभाव से बिलकुल भी दकयानूसी नहीं है, अन्य मधामवर्गीय मर्दो कि तरह उन्हें मेरे पुरुष मित्रो और कॉलेज के ज़माने के दोस्तों से बात करने पर कोई इतराज़ नहीं है.

मै रोज अपनी बेटी को ऑटो रिक्शा से स्कूल छोड़ती हूँ , फिर सब्जी और बाज़ार का काम करते हुए दुपहर तक घर वापस आ जाती हूँ. एक दिन मैंने अपनी बिटिया को स्कूल छोड़ा और लौटने में मुझे ऑटो रिक्शा नहीं मिला और जो मिल भी रहे थे वो बड़े अनाप शनाप किराया बता रहे थे. २० मिनट इंतज़ार के बाद भी जब मुझे कोई कायदे का रिक्शे वाला नहीं मिला तब मैंने बस पकड़ने कि सोची जिसका स्टोपेज मेरे घर के पास ही था. थोड़ी देर में बस आ गयी और जब बस देखि तो भीड़ देख कर एक बार मैंने न चढ़ने का फैसला किया लेकिन कोई और चारा न देख कर मै उस पर चढ़ गयी. मुझे बस पर चलने कि कोई आदत नहीं थी और अस्त में दोनों हाथ में घर का सामान था, मै घुस तो गयी लेकिन अब कोई और चारा भी नहीं था. मै सामान को दोनों हाथो में साधे हुए उस भरी बस में किसी तरह बीच में खड़ी रही. मेरे सामने एक बुजर्ग आदमी खड़े थे और मेरे पीछे एक कॉलेज जाने वाला लड़का खड़ा था. उस हिचकोले खाती बस में मै उन दोनों के बीच फसी थी और किसी तरह मै अपने को सम्भाले हुई थी.

थोड़ी देर बस चलने के बाद मुझे महसूस हुआ कि मेरे पिछवाड़े पर कुछ लग रहा है, मैंने पीछे मुड़कर देखा और खड़े हुए लड़के को भौ चढ़ा कर देखा. उस लड़के ने कंधे उचका दिए जैसे बता रहा हो कि जान भुझ कर उससे नहीं हुआ है. बस कि भीड़ देखते हुए , मुझे भी यही लगा कि उसने जान भुझ कर नहीं किया होगा, आखिर मै एक ४० साल कि औरत थी और कोई १९/२० साल का मेरे लड़के ऐसा, लड़का तो इतनी उम्रदराज के साथ नहीं करेगा. थोड़ी देर बाद मुझे फिर लगा कि मेरे चुतर में कुछ रगड़ रहा है. और एक झटका सा लगा जब यह समझ में आया कि वो दबाव उस लड़के का लंड से हो रहा था जो कड़ा होगया था. उसके रगड़ने से जहाँ मुझे एक दम से गुस्सा आया वाही एक अजीब सी अनुभूति भी हुई , उसके लंड का मेरे चुतर में दबना कही न कही मुझे एक मीठा सा सुख भी दे रहा था. मै बस कि भीड़ में एक तरह से फंसी हुयी थी और हलात को देखते हुए मैंने कोई भी अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी.

मेरे चुप रहने से उस लड़के कि हिम्मत थोड़ी खुल गयी थी. बस के हिचकोले लेने पर वह और मेरे पीछे आकर सट गया, उसका कड़ा लंड अब मेरे चूतरो में पहले से ज्यादा करीब से रगड़ खाने लगा था. उसका लंड जब मेरे चूतरो में जब पूरी तरह रगड़ा तो मेरे शारीर में एक सनसनी से दौड़ गयी और मेरी साँसे भरी चलने लगी. मै खुद पर विश्वास नहीं पर पा रही थी कि उस लड़के का अपना लंड मेरे चूतरो में रगड़ना मुझे अंदर से सुख दे रहा है. उस अनजाने सुख कि तलब इस तरह मेरे अंदर घर कर गयी थी कि मुझे यह एहसास ही नहीं हुआ कि मै उसके लंड को और अपने पीछे महसूस करने के लिए मैंने अपने शारीर को और पीछे की तरफ धकेल दिया था. उस लड़के ने इस बात का एहसास कर लिया था कि मुझे उसके लंड का स्पर्श अच्छा लग रहा है और उसने अपना लंड और कस के मेरे चूतरो पर रगड़ने लगा, यहाँ तक कि मेरे दोनों चूतरो के फांक के बीच भी उसमे धसने लगा था. मेरी साँसे बहुत भारी चलने लगी थी, मेरी आँखे भी अधमुँदी हो गयी थी और मै पुरे एहसास का मौन लुत्फ़ लेने लगी. मैंने अपनी कमर को थोडा इस तरह से कर लिया कि उसका लंड मेरे चूतरो के बीच कि दरार को भी महसूस कर सके. मेरे इस तरह से अपने शरीर को करने से उस लड़के ने मेरा स्वागत ही समझा और उसने पहली बार मेरे चूतरो को छुआ. अपने हाथो से मेरे चुतर सहलाते हुए उसने उन पर चुटकी काट ली. उसकी इस हरकत से मेरे पैर एक दम से कमजोर हो गये और मेरी चूत गीली हो गयी.

बस स्टॉप जैसे ही मैनेजमेंट कॉलेज के पास आकर रुकने लगी उस लड़के ने अपने आप को मेरे पीछे से अलग कर लिया और जब मेरे बगल से आगे कि तरफ जाने लगा तब उसने एक शरारती मुस्कान देते हुए मेरी तरफ कनखियों से देखा, लेकिन मैंने अपनी जल्दी से आँखे घुमा ली. वोह लड़का वही उतर गया और मै अपनी साँसों को सँभालते हुए अपने स्टॉप का इंतज़ार करने लगी जो की थोड़े ही आगे था. मेरे स्टॉप आने पर मै तेजी से बस से उतर गयी और तेज कदमो से अपने घर कि ओर भागी.

मै जैसे तैसे घर पहुची और दरवाज़ा खोल कर अंदर चली गई, मैंने सिक्यूरिटी को फ़ोन कर के कहा कि मेरी नौकरानी को थोडा देर से आने का सन्देश दे दे. उसके बाद मै सारा सामान ड्रॉइंग रूम में छोड़ कर अपने बेडरूम में चली गयी और अपने को अपनी ड्रेसिंग टेबल में लगे शीशे में निहारने लगी. मैंने बहुत दिनों के बाद अपने आप को इस तरह निहारा था और महसूस किया कि ४० साल कि उम्र के बाद भी मेरा शारीर ख़राब नहीं हुआ था, थोडा सा वजन जरुर बढ़ा हुआ था लेकिन मै अपने आपको एक आकर्षक महिला के रूप में देख रही थी. मै आज बस में हुई घटना, उस लड़के कि हरकत को याद करने लगी और एक यह सोच के गर्म होने लगी कि मुझसे आधे उम्र का लड़का मेरी ऐसी अधेड़ औरत पर आकर्षित हो गया था.

मैंने अपने सरे कपडे वही खड़े खड़े शीशे के सामने उतार दिए और अपने चूतरो के उन हिस्सो को छूने लगी जहाँ उस बांके छोरे के लंड ने उसको सहलाया था. दूसरे हाथ से मै अपनी चूचियों को पकड़ के सहलाने लगी और मेरी उंगलियां उनकी घुंडियों से खेलने लगी जो मेरे हर सपर्श से और तनी और बड़ी होती जा रही थी. मै अपने ही सपर्श से बेहद उत्तेजित हो रही थी. मेरा दूसरा हाथ चूतरो से हट कर सामने चूत पर आगया, जो लड़के कि हरकत से पहले से ही गीली थी और उसको सहलाने लगी, मेरी ऊँगली क्लिट को आहिस्ता आहिस्ता रगड़ने लगी. मेरी आँखे अब बन्द होगयी और मै वासना कि उतेजना में हचकोले खाने लगी थी. उस लंड कि याद करते करते मेरे शरीर में एक झनझनाहट हुयी और मुझे ओर्गास्म हो गया. वह बड़ा तेज ओर्गास्म था मेरी चूत ने पानी बाहर फेक दिया था. मै एक दम से अपने को निढाल महसूस करते हुए वैसे ही अपने बिस्तर पर गिर गयी. मेरी साँसे अब भी भारी चल रही थी औरमै हैरान थी कि मुझे इतनी जल्दी ओर्गास्म हो गया, जब कि मुझे १५/२० मिनट लग जाते थे.

मै उसी हालत में ही सो गयी लेकिन बस में हुयी घटना मेरे दिमाग से नहीं उतार पा रही थी. वास्तव में उस घटना ने मुझे हिला दिया था और मुझे वह सब अंदर से अच्छा लगा था. हर औरत मर्दो कि आँखों में आकर्षित लगना चाहती है और खास तौर पर जब वो अधेड़ उम्र कि हो जाती है. मै समझती हूँ उसके कई कारण होते है, एक तो ढलती उम्र उसको अपनी जवानी के ख़तम होने का एहसास देती है , दूसरा उस उम्र में पति अपने काम और करिएर में व्यस्त होता है कि वोह अपनी पत्नी पर ध्यान ही नहीं दे पाता है और इन सबका असर सेक्स पर पड़ता है. मुझे उन दिनों कि अच्छी तरह याद है जब मेरी नयी शादी हुयी थी, मेरे पति मुझे हर रात चोदते थे, मुझे बिल्कुल अपनी रानी बनाकर रक्खा हुआ था. हर बात का ख्याल रखते थे. अब समय के साथ साथ हमारे अंदर कि काम इच्छा ख़तम होने लगी थी, और जो मेरे अंदर थी वो शायद उनकी नज़र से ओझल हो गयी थी और उन्होंने मेरे अंदर कि औरत को महसूस करना भी बंद कर दिया था. हमारी चुदाई अब बहुत कम होगयी थी, कभी कभी वो मुझे बाँहों में लेते और एक काम कि तरह, मेरी टंगे फैलाकर मेरी चूत में लंड डाल कर चोदते और झड़ने के बाद चादर ओढ़ कर सो जाते थे. कितनी ही बार मै बिना ओर्गास्म के ही रह जाती और तड़पती रहती थी लेकिन फिर मैं मेस्ट्रोबेशन का सहारा लेने लगी और मै अपनी उल्झन को उस से शांत करने लगी. मुझे तो अब यह भी याद नहीं की कब हमलोगो ने आखरी बार मिशनरी के अलावा किसी और तरीके से चुदाई की थी.

अगले दिन मैंने अपनी बेटी को स्कूल में छोड़ा और लौटने के लिए ऑटो रिक्शॉ को जैसे रोकने के लिए बढ़ी तभी मुझे बस आती दिखी और मेरे कदम अपने आप बस स्टैंड कि तरफ बढ़ लिए. मेरे हर बढ़ते कदम पर अपने से ही सवाल था कि शोभा क्या कर रही है? जब मै स्टैंड पर पहुची तो वह मुझे कल वाला लड़का खड़ा दिखा, मेरा दिल मेरे मुँह को आ गया, दिल बेहद तेजी से धड़कने लगा और मैंने अपनी नज़र उससे हटा ली और आती हुई बस को देखने लगी. बस में भीड़ थी मै कुछ रुक कर उसपर चढ़ गयी, मैंने यह देख लिया था कि वह लड़का तब तक नहीं चढ़ा जब तक मै बस में नहीं चढ़ गयी, मेरे चढ़ते ही वह भी बस में मेरे पीछे चढ़ गया. एक अजीब सी संतुष्टि मिली जब लड़का मेरा इंतज़ार में बस में चढ़ने से रुका रहा.मै बीच में ही खड़ी होगयी थी और लड़का भी ठीक मेरे पीछे आकर खड़ा होगया. उसको मै अपने पीछे खड़ा महसूस कर रही थी और तुरंत ही मैंने उसके हाथ को अपने चूतरो पर महसूस किया, वह मेरे चूतरो को अपनी हथेली से सहला रहा था. आज वह लड़का बहुत आत्मविश्वास में लग रहा था उसके छूने का ढंग में पूरा अधिकार था. उसके हाथ रास्ते भर मेरे चूतरो को सहलाते रहे, दबाते रहे और बीच बीच में उसकी उँगलियाँ मेरे चूतरो कि दरार को भी महसूस करते रहे. मै सब कुछ सांस रोके होने देरही थी. मै उसकी हर हरकत से अंदर ही अंदर उतेजित होती जाती थी. बड़ी मुश्किल से मै अपनी साँसों पर काबू कर पा रही थी. उसके स्टॉप पर वह लड़का मुझ से रगड़ता हुया आगे निकला और उतर गया.

उस दिन के बाद से यह रोजाना कि बात हो गयी, मै रोजाना अब बस ही पकड़ने लगी. पहले मै ही चढ़ती थी और वह लड़का , चाहे कितनी ही भीड़ हो मेरे बाद ही चढ़ता और धक्का मुक्की करता हुआ मेरे पीछे आकर खड़ा होजाता और मेरे चूतरो को मसलता था. मै हमेशा ही शलवार कमीज़ पहना करती थी लेकिन एक दिन मैंने साडी पहनने का फैसला किया जिसको देख कर मेरी बेटी भी बड़ी चौकी क्यों कि मै हमेशा उसको शलवार कमीज़ में ही छोड़ने जाती थी.मैंने उसको समझाया कि मेरी साड़ियां रक्खे रक्खे ख़राब होरही थी इसलिए अब मैंने अब साडी ज्यादा पहनने का फैसला किया है. मैंने जन भुझ कर साडी का फैसला लिया था, मै उस लड़के को अपनी नंगी कमर का एहसास देना चाहती थी, मै उसे वहा अपने को छुआना चाहती थी. जैसा मैंने सोंचा था वैसे ही उस लड़के में किया, उस दिन उसके हाथ मेरे चूतरो को सहलाने के बजाये मेरे ब्लाउस और साडी के बीच में कमर पर रेंगने लगे. उसके मेरे नंगे अंग पर हाथ रखते ही मुझ मे करंट सा दौड़ गया और मेरी चूत एक दम से गीली होगयी. बस में सब अपनी अपनी दुनिया में इतना व्यस्त थे कि किसी को यह ख्याल भी नही था कि बस में वह लड़का क्या कर रहा था और मै उसे आज़ादी देरही थी. बस ने एक जगह कस के ब्रेक लगाया तो लड़का मेरे ऊपर पीछे से झूल गया और बड़े आत्मविश्वास से पीछे से हाथ डाल कर साडी के पल्लू के नीचे से मेरी चूंची पर हाथ रख दिया. मेरा दिल धक् कर गया और पकड़े जाने के डर से मै उससे आगे खिसक के आगयी. वह बात को समझ गया और उसने अपने हाथ मेरे चूतरो पर रख दिए और जब तक उसका स्टॉप नहीं आया वह मेरे चूतरो को दबाता रहा और मेरी नंगी कमर को हथेली से सहलाता रहा. उसके स्टॉप आने पर हमेशा कि तरह वह मुझसे रगड़ता हुआ आगे जाकर उतरने लगा लेकिन इसी दौरान उसने मेरे हाथ को नीचे थपथपाया और एक छोटी सी कागज़ कि चिट मेरी हथेली में डाल दी.

मैंने उस चिट को अपनी मुठ्ठी में कस के दबा लिया और यह जानते हुए भी उस चिट में क्या होगा मै उसे पढ़ने कि हिम्मत न कर सकी .मै भौचक्की और एक अनजाने डर से डरी होयी थी. बस में मै उसके छूने का मज़ा तो ले रही थी लेकिन मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि वह ऐसी कोई हरकत करेगा. मैंने उस चिट को अपने पर्स में डाल दिया. घर में, मै पुरे समय उस लड़के के बारे में ही सोचती रही, उसका छूना, उसका मुझे दबाना उसका मेरी चूची पर हाथ रखना, सब कुछ मुझे अंदर से जलाता रहा. उस रात मेरे पति जब बिस्तर पर आये. तो मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उनसे लिपट गयी. उन्होंने चौक्ते हुए मुझे देखा और मुस्कराते हुए मुझे बाँहों में जकड लिया. उनके हाथ मेरी नाईटी को खिसकते हुए मेरी चून्चियों पर पहुच गए और उसे दबाने लगे, उस वक्त मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वह लड़का मेरी चून्चियों को दबा रहा है. जब वह मेरी नाईटी ऊपर कर रहे थे तो मैंने अपने आप ही उसको पूरी तरह से अपने से अलग कर दिया और बहुत दिनों बाद मै नंगी उनसे चिपट गयी. मै बहुत ही गर्म थी. मैंने आँख बंद कर रक्खी थी और मुझे उनकी हर हरकत में उस लड़के का होने का एहसास होरहा था. उन्होंने जैसे ही मेरी टंगे फैला कर मेरी चूत में अपना लंड डाला वो फचाक से मेरी चूत में घूस गया. उनको मेरी चूत का गीलेपन का एहसास होगया था, वह मुझे चोद रहे थे और कह रहे थे “शोभा, आज तो बिलकुल ही तुम गर्मायी हुई लग रही हो, इतनी जल्दी चूत ने पानी छोड़ रक्खा” है?”

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उनका हर धक्का मुझे उस लड़के के लंड का धक्का लग रहा था और मै तेजी से कमर उठा उठा कर उनके लंड से चुद रही थी. मैंने उनसे कस के धक्के मारने को कहा और वह भी गरमा कर तेजी से मुझे चोदने लगे. वह थोड़ी देर में झड़ भी गये, लेकिन मै बहुत दिनों बाद चुदाई के दौरान झड़ी थी. मुझे चोदने के बाद वह अपने हिस्से पर जाकर सो गये, लेकिन खूब चुदने कि बाद भी मेरे आँखों मै नींद नहीं थी. मुझे तो सिर्फ उस लड़के कि शकल सामने घूमती नज़र आरही थी. एक बरगी उठ कर अपने पर्स से उस चिट को निकल कर देखने कि इच्छा भी हुयी, लेकिन मै अपने से बार बार पूछ रही थी, “शोभा उस चिट में लड़के ने अपना नंबर दिया है. क्या तू उसे कॉल करेगी”? लेकिन मेरी अंतरात्मा ने मुझे रोक दिया, “यह सही नहीं है, एक सीमा के बाद बात बिगड़ सकती है”.

अगले दिन रोजाना कि तरह मैं बस स्टैंड पहुची , लेकिन वहाँ वह लड़का नहीं दिख रहा था.थोड़ी देर में बस आयी और चली गयी लेकिन वह नहीं आया और मैं उसके इंतज़ार में में खड़ी रही. दूसरी बस भी आकर चली गयी लेकिन मैं बस पर नहीं बैठी, मैंने ऑटो रिक्शा किया और घर चल दी. मुझे बिना उस लड़के के बस में चढ़ने कि कोई इच्छा नहीं थी. मैं रास्ते भर परेशान रही कि आज क्या होगया ?, आज वह क्यों नहीं आया? उसका न होना ऐसा लग रहा था जैसे मेरी ज़िन्दगी से कुछ चला गया हो. उस लड़के के साथ बस का सफ़र मेरी रोजाना कि ज़िन्दगी में इस तरह शामिल हो चूका था कि उसके आज न होने से सब कुछ खाली खाली लग रहा था और परेशान भी हो रही थी कि क्या हुआ उसको. मेरी इतनी बैचैनी बढ़ गयी कि मैंने अपना पर्स खोल के उस चिट को ढून्ढ निकला जो उस लड़के ने मुझे दी थी. उस पर मोबाइल नंबर लिखा था. एक बार मन आया कि उसको कॉल करू और पता करू कि क्यों नहीं आया , लेकिन हिम्मत नहीं हुयी.

घर आकर मैं सुस्त सी कमरे में लेट गयी. ध्यान बटाने के लिए मैंने टी वी चालू कर दिया लेकिन मेरा दिमाग उस लड़के में ही लगा हुआ था. इसी उलझन में मैंने अपना मोबाइल हाथ में ले लिया और उस लड़के का नंबर मिला दिया. काल जाती देख मेरी हिम्मत जवाब दे गयी और मैंने झट से मोबाइल काट दिया. मेरे हाथ कॉप रहे थे, मैंने मोबाइल सामने बिस्तर पर फेक दिया. मेरे मोबाइल फेकते ही मेरा मोबाइल बज उठा, मैंने उसको उठा कर देखा तो काल उसी लड़के की थी, उसने काल बैक कि थी. मैंने काल बजने दी, अजीब दुविधा में थी. सोचती रही कि क्या करू कि क्या न करू तब तक मेरा मोबाइल अपने आप बजना बंद हो गया. मोबाइल मेरे हाथ में ही था कि उसने दोबारा काल किया, इस बार मैंने धड़कते दिल से कॉल उठा ली.

मैंने मोबाइल कान पर लगा लिया और उधर से ‘हाय’ कि आवाज़ आयी, आवाज़ बड़ी खुश्की भरी थी. मैं चुप रही.फिर उसने कहा,’ मैं जानता हूँ कि यह काल अपने की है’.

मैंने रुक कर पुछा,’कौन है’?

उसने हलके हॅसते हुये कहा,’ आपको मालूम है की मैं कौन हूँ.’

उसकी आवाज़ में शरारत थी. अब तक मैंने अपनी बदहवासी पर काबू कर लिया था, मैंने सपाट और तलक लहजे में कहा,’ क्या चाहिए मुझ से? मैं एक औरत हूँ और तुमसे बहुत बड़ी. कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या’?

उसने तपाक से कहा,’ आप मेरी गर्लफ्रेंड हो ऑंटी जी.’

मैंने भी तुरंत उसे डपटते कहा,’ मुझे आंटी वांटी मत कहो’.

उस पर उसने कहा,’ आप, अपने आप को बड़ी समझती हो इसलिए आपको आदर में मैंने आपको आंटी कहा.’

लड़का तेज था, तपाक से जवाब दे रहा था, मैंने उसको छेड़ते हुए कहा,

‘तुमको आदर यही दिखाना था, बस में आदर नहीं दिखा सकते थे ‘?

‘आप जो है और मुझे जो लगती है मैं उसका आदर करता हूँ, आपकी उम्र का नहीं’.

‘मैं क्या हूँ? मैं क्या लगती हूँ?’

‘आप में एक सेक्स अपील है. जो मुझे और किसी औरत में नहीं दिखाई देता’.

मैंने शरारत भरे अंदाज़ में उससे कहा, ‘तुम मेरी सेक्स अपील के बारे में क्या जानते हो? तुमने तो सिर्फ मेरे बम्स को ही नोचा है’?

‘आपकी गदराई चूतरो को छु कर ही मुझे बाकि सबका अंदाज़ा लगा गया है’. इसके साथ ही मुझे चूमने की आवाज़ सुनायी दी.

मैंने पूछा, ‘ यह क्या है’?

उसने कहा, ‘ किस था मेरी नयी गर्लफ्रेंड के लिए.’

मैंने हॅसते हुए कहा, ‘ तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड कह रहे हो! मैं एक शादी शुदा १३ साल की बच्ची की माँ हूँ!’

उस पर उसने बेफिक्री से कहा,’ छोड़िये इन बातो को , आप मेरी दिलरुबा हो’.

मैंने बात टालते हुये उससे पुछा, ‘आज तुम क्यों नहीं आये’?

उसने सवाल मुझ पर ही दाग दिया ‘आपने मुझे मिस किया’?

मैंने तेजी से जवाब दिया,’नहीं! पागल हो क्या?’

उधर से उसने तंज लेते हुये कहा, ‘ अच्छा? फिर मुझे काल क्यों किया’?

मैंने भी कह दिया, ‘तुमने नंबर दिया था इसलिए काल मैंने किया था’.

मेरे जवाब पर उसने बड़े आहिस्ता से कहा,’ मैं आज यह जानने के लिए नहीं आया की आप मुझे मिस करती हो या नहीं. मेरा ख्याल सही था, मेरी दिलरुबा मुझे मिस करती है.’ यह कह कर वो बच्चो की तरह हॅसने लगा.

मेरे जवाब पर उसने बड़े आहिस्ता से कहा,’ मैं आज यह जानने के लिए नहीं आया की आप मुझे मिस करती हो या नहीं. मेरा ख्याल सही था, मेरी दिलरुबा मुझे मिस करती है.’ यह कह कर वो बच्चो की तरह हॅसने लगा.

अब आगे –

मैं बात कर रही थी और बात किस तरफ जा रही है मुझे कोई भी ख्याल नहीं था, मैं बस उससे बात कर के मस्ती लेने लगी थी. हमारी आगे को बात चीत कुछ इस तरह से हुयी.

मैं: ‘तुम क्या करना चाहते हो’?

वोह: ‘मैं मिलना चाहता हूँ और आपको बाँहों में लेना चाहता हूँ’.

मैं: ‘ तुम मेरे पीछे क्यों पड़े हो? तुमको तो मुझे ज्यादा सेक्सी और जवान लड़की मिल जायेगी’.

वोह: ‘मुझे लड़किया अच्छी नहीं लगती मुझे मैच्योर औरते पसंद है’.

मैं: ‘कितनी मैच्योर औरतो को अब तक जानते हो’?

वोह: ‘ किसी भी को नहीं , केवल फंतासी में महसूस किया है. आज तक मैं इतने करीब से किसी को भी नहीं जाना है , जितना मैंने आपको जाना है और किया है’

मैं: ‘सुनो, मैं तुमसे नहीं मिलूंगी, समझे? मेरी खुशहाल शादीशुदा ज़िन्दगी है और उसको मैं तुम्हारे लिए ख़राब नहीं करूंगी’.

वोह: ‘ठीक है. मैं आपके हाँ का इंतज़ार करूंगा’.

मैं: ‘कोई बात नहीं, तुम काल आ रहे हो’?

वोह: ‘कहाँ? तुम्हारे घर’?

मैं: ‘ नहीं बेवकूफ! बस पर’.

वोह: ‘ बिलकुल! चूतरो की मालिश के लिए तैयार रहना’.

हम दोनों ही इस बात पर हॅसने लगे.

वोह: ‘ सुनो कल पैंटी मत पहनना’.

मैं: ‘क्या’!!!

वोह: ‘ ओह हो! कल साडी के अंदर पैंटी मत पहनना’!

मैं: ‘पागल हो क्या’!

यह कह कर मैंने मोबाइल काट दिया.

जब मैंने मोबाइल बिस्तर पर फेका तब तक मैं इतनी गीली हो चुकी थी की अनायास मेरा हाथ चूत पर चला गया और उसी हालत में मेरी उसकी हुयी बात को याद करते हुये मैं मास्टरबेट करने लगी. मेरी उंगलियां मेरी गीली चूत के अंदर बहार हो रही थी और मैं अपनी क्लिट को भी बेरहमी से रगड़ रही थी. मैं लड़के की हिम्मत के बारे में सोंच रही थी, जो मुझसे २० साल छोटा था लेकिन बड़े अधिकार से मुझ से बिना पैंटी के साडी पहनने के लिए कह रहा था ताकि वोह भरी बस में खुले आम मेरे चूतरो से और मस्ती ले सके. सेक्स की इस असीम चाहत से मैं रोमांचित हो उठी और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया. मैं बिस्तर पर पड़े पड़े उसी के बारे में और उससे हुयी बातो के बारे में सोचती रही. मैंने उसका नंबर अपने मोबाइल में, एक लड़की के नाम सेव कर लिया. तब मुझे ध्यान आया की अभी तक न मैंने अपना नाम उसे बताया था न उसने ही अपना नाम मुझे बताया था.

अगले दिन जब मैं अपनी बेटी को छोड़ने के लिए तैयार हुयी तब मुझे कल वाली उसकी बात ध्यान में आयी. मैंने शीशे में अपने आपको घूरा और मैंने अपनी साडी पेटीकोट उठा कर एक झटके में पैंटी उतार दी. मैं जब बाहर निकली तो बिना पैंटी के मुझे बड़ा अजीब लग रहा था. लग रहा था मेरी चूत भरे बाज़ार नंगी होगयी है और मेरी झांघो के बीच वोह रगड़ी जा रही है.मैं अंदर ही अंदर बहुत उतेजित भी थी और सोंच भी रही थी, हे भगवान! मैं यह क्या कर रही हूँ! वह भी एक २० साल के प्रेमी के लिए! मैं जब बस स्टॉप पर पहुँची वह लड़का वहाँ पहले से ही खड़ा था. उसने जीन्स और टी शर्ट पहने हुयी थी, हमारी आँखे मिली और हमने नज़र घुमा ली, जैसे हम दोनों एक दुसरे को नहीं जानते .

हमेशा की तरह मैं हैंडल पकड़ कर खड़ी होगयी और वोह लड़का धक्का देता हुआ ठीक मेरे पीछे आकर खड़ा होगया. उसने फ़ौरन मेरी कमर के नीचे हाथ रख कर मेरी पैंटी को महसूस करने की कोशिश की. जब उसको इसका एहसास हो गया की आज मैंने उसके कहने पर पैंटी नहीं पहनी है तब उसने मेरे चूतरो को थप थपा दिया, जैसे वोह मुझे धन्यवाद दे रहा हो. बिना पैंटी के जब उसके हाथ मेरे चूतरो के ऊपर पड़े मैं बिना दांत भीचे नहीं रह पायी. आज पहली बार उसके उद्वेलित हाथो की गर्मी मेरे चूतरो पर सिर्फ साडी के ऊपर से महसूस कर रही थी. मैंने थोड़े पैर और फैला दिया और जैस मुझे उम्मीद थी उसका कड़ा लंड मेरे चूतरो की दरार से रगड़ खाने लगा. आज वह अपना लंड वही रगड़ रहा था और मेरे चूतरो को मसल भी रहा था,मैं बिलकुल अलग दुनिया में पहुँच गयी थी, उस भीड़ भरी बस में मैं वासना के उस सागर का सुख ले रही थी जो मेरी शादी के १८ साल बाद भी अभी तक मुझसे महरूम था. पुरे रास्ते उसका लंड मेरे चूतरो पर रगड़ता रहा और मेरी चूत भी आज कुछ ज्यादा गीली हो गयी थी. आज मैं पैंटी नहीं पहने थी , मेरी चूत का पानी बहकर मेरी जांघो पर आगया था. जब उसका स्टॉप आया वोह उतरने के लिए आगे आया और जाते जाते धीरे से मुझे ‘थैंक्स , कॉल मी’ कहते हुये आगे बढ़ गया. मैं मूर्ति की तरह वैसे ही वैसे खड़ी रही.

मैं जैसे तैसे घर पहुँची और घुसते ही रुमाल से मैंने अपनी बहती हुयी चूत को पोंछा और उसको मोबाइल लगा दिया.

वोह: ‘हाय दिलरुबा!’

मैं: ‘हम्म्म’.

वोह: ‘थैंक्स, मेरी इच्छा पूरी करने के लिए’.

मैं: ‘ हाँ, मैं बच्चो को निराश नहीं करती’.

यह कह कर हॅसने लगी और वह भी हॅसने लगा.

वोह: ‘हम कब मिल सकते है?’

मैं चुप हो गयी. मिलने की इच्छा मुझे भी होने लगी थी और मन मानने लगा था की उससे मिलने में कोई बुराई और खतरा नहीं है. लेकिन परेशानी थी की मैं उससे कहाँ मिल सकती हूँ?

मैं: ‘मुझको नहीं पता. कोई ऐसी जगह नहीं समझ में आती जहाँ मैं तुमसे मिल सकू’.

वोह: ‘मैं आपको अपने घर नहीं ले जा सकता, मेरी माँ हमेशा घर रहती है. आपका घर कैसा रहेगा?’

मैं: ‘मेरा घर?’

उसने जब मेरे घर की बात की तब मैं सोचने लगी की बात सो सही है, मेरी नौकरानी १२ बजे चली जाती थी और ४ बजे मैं अपनी बेटी को लेने स्कूल के लिए निकलती थी. १२ से ४ के बीच मैं घर पर बिलकुल ही अकेली रहती थी. मैंने बिना हिचके उसको १२:३० बजे का समय दे दिया और अपने मकान का पता बता दिया.

अगले दिन वह बस स्टॉप पर नहीं दिखा , मैं घर ऑटो रिक्शॉ पकड़ कर जल्दी आगयी. नौकरानी को भी मैंने जल्दी कम ख़तम करने को कहा और १२ से पहले ही उसे भी घर के बाहर कर के दरवाज़ा बंद कर दिया. उसके जेन के बाद मैं बिलकुल एक कामातुर प्रेमिका की तरह कपडे निकलने लगी. मैंने अब स्लीवलेस काले रंग का ब्लाउज पहन लिया जिसकी बैक खुली थी और उसके साथ सफ़ेद रंग की साडी जिस पर काले पोल्का डॉट पड़े थे पहन ली. बड़ी अजीब बात थी, यह साडी मेरे पति की पसंदीदा साडी थी , जो उन्होंने मुझे शादी की १५ वीं वर्ष गांठ पर दी थी. जब मैंने पहली बार इस साडी को पहना तो उन्होंने मुझसे कहा था, की मैं बहुत सेक्सी लग रही हूँ और उन्होने वही साडी उठा कर मुझे जल्दी से चोदा और उसके बाद ही हम लोग बाहर खाने पर गए थे. मैंने साडी पहन कर अपने आप को शीशे में निहारा और अपने पर रश्क कर बैठी, मैं आज भी इस साडी में बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रही थी.मैं अपने को निहार ही रही थी कि तभी बाहर दरवाज़े पर घंटी बजी. मैं एक बार ठिठकी , एक बार और अपने को देखा और फिर दरवाजा खोलने चली गई.

मैंने दरवाज़ा खोला, वोह सामने खड़ा हुआ था, मै बाहर निकली , इधर उधर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा है और इत्मीनान होने के बाद उसको अंदर आने का इशारा किया. वह तेजी से अंदर आगया और मैंने तुरंत दरवाज़ा बंद कर के डबल लॉक कर दिया, मै अब उस वक्त बेहद घबड़ायी होयी थी और साथ मै अंजाने पल के लिए उतावली भी हो रही थी.मै जब दरवाज़ा बंद कर के मुड़ी तो मुझे मंत्रमुग्ध देख रहा था और वह मेरे पास आया और मेरे कंधो को पकड़ के अपने पास खीच लिया और कहा, ‘बहुत खूबसूरत लग रही है’.

जब उसने मुझे अपने से चिपकाया , तब उसका कड़ा लंड मेरी जांघो से टकरा गया. उसके लंड का मेरे जांघो को छूने से मेरे बदन में सनसनी सी दौड़ गयी. मैंने अपने आप को उससे अलग किया और उसको अंदर ड्राइंग रूम में सोफे पर बढ़ने को कहा और खुद किचन में उसके लिए पानी लेने को चली गयी. लेकिन वोह मेरे पीछे किचन में आ गया और मुझे पीछे से अपनी बाँहों में जकड लिया. उसक लंड हमेशा कि तरह मेरे चूतरो से रगड़ खा रहा था. उसने मेरी गर्दन पर अपने ओठ रख दिए और मुझे वह चुम्बन देने लगा, उसके हाथ मेरे नीचे कि तरफ चलने अलगे और उसने मेरी दोनों चूंचियो को अपने दोनों हाथो में लेकर दबाने लगा. उसकी इस हरकत से मेरे मुँह से,’उम्म्म्म’. निकल गयी. मैंने कापती हुई आवाज में कहा, ‘थोडा इंतज़ार करो’.

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उसने फुसफुसाते हुए मेरे कान में कहा,’बहुत इंतज़ार किया है मैंने’.

और मेरे कान को चूमने और चूसने लगा. उसकी गर्म साँसे मेरे कान में जारही थी और उस मादकता मै हिलोरे लेने लगी. मुझसे अब रहा नहीं गया और मै घूम गयी और उसकी गर्दन को अपनी बाँहों मै ले लिया और अपने ओठ उसके ओठों पर रख दिए. हमारे ओठ जैसे ही मिले हम दोनों एक दुसरे के ओठ पागलो कि तरह चूमने लगे. मुझे उसके चूमने के तरीके से साफ लग गया कि यह पहली बार किसी को चूम रहा है , तब मैंने एकाधिकार से अपने ओठो से उसके ऊपर के ओठ को दबा लिया और उसको चूसने लगी. मैंने अपनी जीभ उसके मुँह मै डाल दी और उसको देर तक चूमती रही.थोड़ी देर बाद उसके हाथ मेरे चूतरो पर रेंगने लगे और उसने उन्हें अपनी तरफ दबाते हुए मुझे अपने से चिपका लिया, उसका लंड मेरी झांघों पर रगड़ रहा था और मुझे अपनी चूत गीली होती हुयी महसूस होने लगी.

मैंने अपने आपको उसकी बाँहों से आज़ाद किया और उसे अपने पीछे बेडरूम आने को इशारा किया, वोह मेरे पीछे चल दिया और बेडरूम के अंदर जाने से पहले ही उसने अपनी टी शर्ट उतार दी. मै बिस्तर पर जाकर गिर गयी और उसकी तरफ देखने लगी, वो २० साल का बांका छोरा अपनी नंगी छाती लिए मेरे बेड के पास आरहा था. उसकी शारीर कसा हुआ और कसरती लग रहा था. जब वोह मेरे पास आया तब मैंने उसके कैसे बदन को अपनी बाँहों मै ले लिया और हम दोनों एक दुसरे को चूमने लगे. उसने मेरी साडी का पल्लू मेरे सीने से हटा दिया और मेरी क्लीवेज को चूमने लगा. वोह बौरा रहा था,

वह कभी मेरी क्लीवेज को चूमता कभी मेरी नंगी बाँहों को चूमता और मै उसकी छाती और उसके निपल्स को चूमने लगी.जब वह मेरे ब्लाउस को खोलने कि कोशिश करने लगा तब मै उससे अलग हुई और मैंने ब्लाउस और ब्रा उतार कर किनारे रख दी. अब मै बिलकुल ऊपर से नंगी थी. मेरी नंगी चूचियों को देखते ही उसने उनको अपने हाथो मे ले लिया और अपना मुँह उनपर लगा दिया.वोह मेरी चूंचियों को कसके चूसने लगा और मेरे मुँह से सिर्फ ‘उह! ओह!’ कि आवाज़ निकल रही थी. वह मेरी चूंचियां चूस रहा था और मै अपने हाथ से उसके चेहरे को सेहला रही थी. वोह मेरे पति से बिलकुल अलग तरह से उनको चूस रहा था. मेरे पति मेरी चूंचियों को खूब सहलाते थे और फिर आइस क्रीम कोन कि तरह उसे चूसते थे , लेकिन यह जवान बांका लड़का उनको आइस क्रीम कि तरह खा रहा था. उसके अंदाज़ मे उतवलापन के साथ वहशीपन भी था जो मुझे और रोमांचित और उतेजित कर रहा था.

उसके बाद वोह मेरी चूचियों से हट गया और अपनी पैंट और अंडरवियर उतारने लगा. जैसे ही उसने अपने सहरी से कपडे हत्ये और नंगा खड़ा हुआ मेरी तो सांस रुक गयी! क्या मंजर था! मुझे बिलकुल ग्रीक गॉड लग रहा था. मेरे सामने एक छर छरे बदन का मालिक वह लड़का नंगा खड़ा था, उसका फ़ुफ़कारते हुआ टेढ़ा सा लंड उतेजना से अपने आप हिल रहा था. उसके शारीर मे बिलकुल ही बल नहीं थे बिलकुल मेरे पति के विपरीत जिनके शारीर पर काफी बाल थे. मैंने गौर किया उसके लंड का सुपाड़ा खुला हुआ था, बिलकुल चिकना सा लाल सा. मैं ेउसको नंगा देख अपनी साडी और पेटीकोट उतार दी और बिस्तर पर नंगी लेट गयी और उसको अपने बगल मे लेटने को कहा.उसके लेटते ही मै उसकी तरफ घूम गयी और उसके जवान टनटनाएँ लंड को अपने हाथ मे ले लिया और उसको अपने हाथो से सहलाने लगी. उफ्फ्फ उसके लंड को अपनी हथेली मे पाकर बिलकुल ही बेसुध हो गयी. जिसका लंड मै अपने हाथो मे खिला रही थी मै उसका नाम भी अभी तक नहीं जानती थी. मैंने उसको चूमा और पुछा,

‘तुम्हारा नाम क्या है?

‘उसने मेरे हाथो मे अपने लंड को धक्का मरते हुए कहा, ‘आर्यन. आपका?’

मैंने कहा, मै शोभा हूँ’.

उसने मुझे सहलाते हुए कहा, ‘ अच्छा नाम है शोभा आँटी!’ और खिलखिला कर हॅसने लगा.

.मैंने उसकी छाती पर एक चपत लगायी और बोली, ‘ तुम मुझे आँटी क्यों कह रहे हो?’

यह सुन कर उसने मुझे कस के जकड लिया और कहा, ‘ मुझे औंटी कहना अच्छा लगता है, मेरी सेक्सी आंटी! मुझे आपको चोदना है!’

उसकी बात सुनकर मै शर्मा गयी. अब मैंने उसको बिस्तर पर गिरा दिया और उस पर चढ़ गयी. उसके थरथराते हुये लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर लगा दिया. उसके दमकते हुये सुपाड़े ने मेरी चूत को छुआ और मुझे उस लंड का एहसास अपने पति के लंड से बिलकुल जुदा और प्यारा लगा. मै लंड पर चढ़ गयी और वोह सटाक से मेरी गीली चूत में घुस गया. मै धक्का माँरने लगी और खुद ही उसको चोदने लगी. बिना कंडोम के नंगा लंड मेरे अंदर पूरा समां गया और मेरे मुँह से सिसकारी निकल रही थी. उसके लंड मुझे अंदर तक मेरी चूत में समा गया था और मेरी चूत ने उस जवान लंड को जकड लिया था. मै धक्के मार रही थी और अभी पूरी तरह चुदाई का मज़ा भी नहीं लिया था कि वोह झड़ गया. उसने मेरी चूत में अपना पानी फेक दिया. मुझे बहुत खीज हुयी और वोह भी ‘शिट शिट’ कहने लगा. हम दोनों हाफ रहे थे. उसका लंड सिकुड़ के मेरी चूत से बहार निकल आया और वोह मेरे नीचे से निकल के बाथरूम चला गया. मै बिस्तर पर ही पड़ी रही और उसका गरम पानी मेरी चूत से बहता हुआ मेरी जांघो पर आ गया.

थोड़ी देर में आर्यन बाथरूम से निकल के आया और झेंपता हुआ सौरी कहने लगा. मैंने उसको मुस्कराते हुए देखा और इशारे से उसको मेरे पास आने को कहा. उसका कड़ा तना हुआ लंड अब सिकुड़ के बिलकुल चूहा बना हुआ था. वो मेरे पास आ कर लेट गया और मैंने उसको बाँहों में ले कर पुछा, ‘क्यों, कुछ ज्यादा ही उतेजित हो गये थे?’

उसने शर्मायी आँखों से कहा, ‘मेरा पहली बार था न और मुझे यह भी मालूम है कि आँटी लोगो को संभालना असान नहीं होता’

उसके यह कहने पर मै हॅस दी और वह भी हॅसने लगा. मैंने फिर गर्म होने लगी थी. मै जानती थी कि समय कम है और इसके लंड को दोबारा खड़ा होने में थोडा वक्त लगेगा, इसलिए मैंने उससे कहा कि मेरी चूत में ऊँगली डाले.

उसने मेरे कहने पर पहले मेरी चूत को अपनी हथेली से ढ़ाप कर उसको सहलाने लगा और फिर मेरी चूत में उंगली डाल कर अंदर बाहर करने लगा. उसकी ऊँगली जब मेरी चूत में अंदर बाहर हो रही थी, तब मेरी आँखे आनंद में चढ़ने लगी और वोह मुझे देख कर समझ गया था कि उसकी ऊँगली मुझे मजा दे रही है. उसने अपना मुँह नीचे कर अपने ओठो को मेरी चूंचियों पर रखा और उन्हें चूसने लगा था. मुझे अच्छा तो लग रहा था लेकिन मै अभी पूरी तरह उतेजित नहीं हो पायी थी. मैंने उसको हुकम देने के अंदाज़ में कहा, ‘मेरी चूत को चाटो’.

जल्दी झड़ने के कारण वोह पहले से ही हिला हुआ था और अब तो वोह सिर्फ मेरे हुक्म का गुलाम था. उसने नीचे आ कर मेरी चूत पर अपना मुँह रख दिया और नौसिखिये ऐसा मेरी चूत को चूसने लगा. मैंने उसके सर पर हाथ रख कर उसको अपनी क्लिट तरफ इशारा किया. उसकी जीभ जब मेरी क्लिट लगी तो मेरे अन्दर एक गुदगुदी सी दौड़ गयी थी और मैंने कहा, ‘उसको कायदे से चाटो’.

मेरे कहते ही वोह मेरी क्लिट को कस के चाटने लगा और मै मस्ती में झूम उठी और मेरे पैर और फ़ैल गए. मेरे मुँह से अब सीत्कार निकलने लगी थी और इसका असर उस पर भी पड़ा, वोह मेरी चूत और क्लिट को अपने ओठो में लेकर और शिद्दत से चूसने लगा. मेरी चूत बहुत दिनों बाद ओठो और जीभ का सुख ले रही थी और मुझे उतेजित कर रही थी.

मेरी उत्तेज़ना बढ़ती ही जारही थी. मेरे हाथ उसके सर को दबोचे हुए थे और मेरी टांगे पूरी तरह फ़ैल गयी थी. मै आज पहली बार बहुत ज्यादा वहशी हो रही थी. इतने साल दूसरे को चुदाई का सुख देने के बाद, आज मै अपना सुख चाहती थी. मै चुदाई का सुख लेना चाहती थी और आर्यन मेरे लिए अब एक प्रेमी से ज्यादा एक ऐसा गुलाम हो गया था, जिसे मेरी हर इच्छा को को पूरा करना था और मै अपने को एक महारानी से कम नहीं समझ रही थी. मैंने उसके बाल पकड़ पर उसका सर उठाया और उसकी तरफ देख के बोली, ‘अपनी जीभ चलाओ. इसे मेरी चूत के अंदर पूरा डाल के चोदो’.

इतना सुनते ही उसने अपनी जीभ मेरी चूत में डाल दी और मेरी चूत के अंदर कि दीवारो को उससे चाट लिया. उफ़!! जब उसकी जीभ ने मेरी चूत को अंदर से छुआ तो मेरे मुँह से आह आह निकलने लगी. वोह मेरी चूत को अब अपनी जीभ से चोदने लगा और मै उसके सर पर हाथ रख कर उसके सर को अंदर कि तरफ धक्का मारने लगी, साथ में अपने अपने चूतरो को भी बराबर ऊपर उठा रही थी, ताकि मेरी पूरी चूत के अंदर उसकी पूरी जीभ जाये. मै उसकी पूरी जीभ अंदर समेत लेना चाहती थी. वोह भी मेरी तेज़ी और मेरे हाथ का अपने सर पर बढ़ते हुए दबाव को समझ रहा था और लगातार अपनी जीभ मेरी चूत में अंदर बहार करने लगा. मै सिसयानी लगी. मेरे अंदर का तूफान चरम सीमा पर पहुच गया था. अचानक मेरी चूत के अंदर एक विस्फोट हुआ और मेरा शारीर अकड़ सा गया. मुझे ओर्गास्म होने लगा था.

मेरी चूत ने पानी छोड दिया और मैंने कस के अपनी दोनों जांघो के बीच उसका सर दबा दिया और उसके सर और पीठ को नोचने लगी. मेरी यह हालत एक आध मिनट तो रही होगी. उस वक्त मुझे कुछ भी होश नहीं था, मेरी चूत से लगातार पानी निकल रहा था. मुझे याद नहीं पड़ता की मुझे कभी भी इतना जबर्दस्त ओर्गास्म इससे पहले हुआ हो. मै हाफ रही थी और मेरी आँखों में अजीब सा नशा चढ़ा हुआ था. जब मेरा शरीर स्थिर हुआ, तो मैंने पाया वोह मेरी जांधों में सर रक्खे हुए था .

मै उसकी तरफ देख कर मुस्करायी और वोह भी अपनी सफलता से खुश हो कर मुझे देख रहा था. मैंने उसे ऊपर खीच के अपनी बाँहों में ले लिया और उसको चूम लिया. उसका मुँह मेरे चूत के पानी से सराबोर था. उसने मुझ को बाँहों में लेकर मेरे ऊपर चढ़ने कि कोशिश कि लेकिन मैंने उसको रोक दिया और कहा, ‘आर्यन, बाथरूम से टॉवेल ला कर मुझे साफ करो और खुद भी साफ हो कर आओ’.

वोह चला तो गया लेकिन उसकी आंखो में मायूसी थी. मै जानती थी उसका लंड खड़ा होने लगा है और वोह मुझे चोदना चाहता था. लेकिन मै झड़ चुकी थी और उसको यह एहसास भी करवाना चाहती थी की जब उसकी मर्ज़ी होगी, वोह मुझे नहीं चोद सकता है. यहाँ बिस्तर पर मेरी मर्ज़ी ही चलेगी. मैंने खुद की चुदने की इच्छा के कारण उससे चुदवाया था, न कि उसकी चोदने की इच्छा पूरी करने के लिए. वोह टॉवेल ले कर आ गया, उसने टॉवेल एक कोने से गीली भी कर रक्खी थी. मैंने पैर फैला कर उसको पोछने को कहा. उसने मेरी चूत, मेरी जांघे, मेरा पेट, मेर चुतड, जहाँ जहाँ मै कहती गई वोह सब पोंछा. उसके बाद वोह मेरे पास आकर लेटने लगा तब मै उठ गयी और कहा, ‘आर्यन, अब कपडे पहन कर निकलो. अब कोई न कोई आ जायेगा’.

उसने कहा, ‘आंटी, एक बार तो और चोदने दो.’

मैंने उस के गालो को सहलाते हुए कहा, ‘क्या एक ही दिन में ही सब कर लोगे? जाओ, कही कोई आ गया तो फिर कभी नहीं हो पाएगा’.

यह कह कर मैंने अपना ब्लाउज और पेटीकोट उठाया और बाथरूम में चली गई. शावर कर के जब मै निकली तब तक वो कपडे पहने हुए मेरे बिस्तर पर बैठा था. मै बाहर निकली और बाहर का दरवाज़ा खोलने चली गयी. वोह मेरे पीछे पीछे आया और उसने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया. मैंने भी उसको अपनी बाँहों में ले कर उसको चूम लिया और कहा, ‘चलो फिर मिलते है’.

उसने मुझे चूमते हुए कहा, ‘आंटी, आई लव यू. फिर चुदवाओगी न?’

अजीब बात थी कि इस वक्त उसके ‘चुदवाओगी’ कहने ने मुझे बिलकुल भी रोमांचित नहीं किया. मैंने उसके गाल पकडे और कहा, ‘आर्यन, यह आई लव यू अपने दिमाग से निकाल दो. हम बाहर जब मिलेंगे तो अजनबी कि तरह और जब मौका मिलेगा मै तुम को कॉल करूंगी’.

और यह कह के मैंने दरवाज़ा खोल दिया. जब वोह बाहर जा रहा था तब उसने कहा, ‘आंटी कल बस पर मिलते है’.

मैंने कहा, ‘अब बस पर नहीं मिलूंगी. बाय’

और मैंने दरवाज़ा बंद कर लिया.

मेरे सम्बन्ध आर्यन से ४ महीने रहे. इस बीच उसने मुझे १० बार या यह कहिये कि मैंने उसको १० बार चोदा. वोह लड़का बाद में मुझ पर आसक्त हो गया और मेरे पति कि बराबरी करने लगा था. तब मैंने समझ लिया इस को अपनी ज़िन्दगी से निकाल देना है, नहीं तो उसके लड़कपन में मेरी खुशहाल ज़िन्दगी बदहाल हो जायेगी. बेटी के इम्तिहान के बाद मैंने अपने पति से तबादला लेने को कहा और हम बेंगलोर चले गए.

समाप्त


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