होटेल के मलिक ने की चूत चुदाई

कामुकता कहानी अब आयेज-

लाला जी मेरे करीब आ गये. मेरे अंदर एक अजीब सी कसक थी. मैं बिना देरी किए उनके सामने घुटनो पर बैठ गयी. मेरे हाथो ने उनका लंड थाम लिया. ये एक नया एहसास था, एक अलग गर्मी. मैं उसे हिलने लगी.

जैसे ही मेरी उंगलियाँ उनके लंड पर फिरी, मुझे एक अजीब सी चुभन महसूस हुई. ये पहले देखे किसी भी लंड से अलग था. उपर का हिस्सा कटा हुआ था, बिल्कुल नंगा. हैरानी से मेरी आँखें बड़ी हो गयी. मैने नज़र उठा कर लाला जी को देखा, उनके चेहरे पर एक नॉटी स्माइल थी.

मैं: लाला जी, आपका लंड ऐसा क्यूँ है? ये कटा हुआ सा क्यूँ है?

वो मुस्कुरा कर बोले, उनकी आँखों में चमक थी: लगता है आपने पहली बार किसी मुस्लिम का लंड देखा है.

उनकी बात सुन कर मेरे पुर जिस्म में एक झटका सा लगा. मैं समझ गयी ये क्या था. मेरे अंदर एक अजीब सी हैरानी, झिझक, और उसके साथ एक नया जुनून पैदा हो गया. ये धरम का टकराव था, जो अब मेरे जिस्म में एक नया स्वाद भर रहा था. मेरी साँसें तेज़ हो गयी, और उनकी बात ने मुझे और गरम कर दिया. एक अंजान हवस मुझ पर हावी होने लगी.

मैं: आपके होटेल का नाम तो शिवम है, और विज़िटिंग कार्ड पर आपका नाम लाला लिखा है.

वो एक नॉटी स्माइल के साथ बोले, उनकी आँखों में वही शरारत थी: लाला तो बस ऐसे ही, काम के लिए नाम है. असली नाम तो युसुफ ख़ान है. जो सिर्फ़ उन्हे पता होता है जो मेरे लंड को टेस्ट करते है. और शिवम होटेल, ये तो बस बहाना है. असली खेल तो यहाँ अंदर होता है. मैने बहुत सारी आप जैसी औरतों को छोड़ा है. लेकिन जो हुंसे एक बार छुड़वा लेती है, वो बार-बार आती है.

मैं हैरानी और तेज़ साँसों के साथ उनकी तरफ देखते हुए बोली: हुंसे मतलब आप और दूसरे कौन?

युसुफ एक शिकारी मुस्कान के साथ बोले: मेरे कुछ ख़ास दोस्त है. आप जैसी संस्कारी औरतों को यहाँ लाते है. दुनिया के सामने धार्मिक बनती है, लेकिन यहाँ हमारी रंडी बन कर चुड्ती है. उनकी छूट और गांद सिर्फ़ हमारे लिए खुलती है.

मैं युसुफ को देखते हुए पूछी. मेरी आवाज़ में एक कपकपि थी: मैं आपको किस नाम से बूलौऊ, लाला जी या युसुफ?

उनका जवाब आया, उनकी आँखों में गहराई थी, जैसे मेरे जिस्म को निचोढ़ रहे हो: आपको जो मॅन करे मेरी जान. हर नाम में सिर्फ़ मेरा लंड है, आपकी प्यास बुझाने के लिए.

मैने बिना देर किए उनके लंड पर अपने होंठ रख दिए. एक गरम एहसास मेरी ज़ुबान पर फैला. होंठ हटा कर, मैं उनकी आँखों में देखते हुए गरम साँस में बोली-

मैं: युसुफ जी, आपकी बात सुन कर ही मेरी छूट और बेचैन हो रही है. मेरी जान निकल रही है. मुझे भी बाकी औरतों की तरह अपने लंड की ताक़त दिखा दीजिए, जिसे वो बार-बार पाने आती है.

अब युसुफ ने मेरी तरफ देखा. वो बोले: आप सोच क्या रही हो? मेरा लंड पसंद नही आया क्या?

मेरे अंदर का जुनून बढ़ गया. मैं बोली: मैने इतना खूबसूरत लंड आज तक नही देखा.

ये बोलते ही मैने फिर से उनका लंड अपने होंठो में ले लिया. उसकी टोपी को ज़ुबान से सहलाने लगी. हर स्पर्श के साथ मेरी आग और भड़क रही थी. मैं उसे ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी. मैं उनका लंड पूरी शिद्दत से चूस रही थी. मेरी ज़ुबान उसकी टोपी पर नाच रही थी.

युसुफ के मूह से धीमी आहें निकालने लगी. उनका हाथ मेरे सिर पर आया और उन्होने मेरे बालों को पकड़ कर अपने लंड को और गहरा मेरे गले में उतारने लगे. मेरी साँसें रुकने लगी, पर मैं रुकना नही चाहती थी.

युसुफ: अयाया… और… और गहरा… मेरी जान… तेरी ज़ुबान तो जादू कर रही है.

मैं उनका लंड चूस्टी रही. मेरी छूट बुरी तरह से गीली थी. युसुफ का जिस्म हिलने लगा. उनका हाथ मेरे सिर पर और दबाव डाल रहा था.

कुछ देर बाद युसुफ ने एक तेज़ साँस ली और अपना लंड मेरे मूह से बाहर निकाल लिया. मैं हानफते हुए उनकी तरफ देखी. उनका लंड अब चमक रहा था, और उसकी टोपी से पानी तपाक रहा था. उनके चेहरे पर एक हवस भारी निगाह थी.

युसुफ ने अपना लंड मेरे होंठो से हटाया. उनकी नज़रें मेरी प्यासी आँखों पर ठहरी हुई थी. उनका लंड अब भी तंन कर खड़ा था, और मेरी छूट उसे पाने के लिए तड़प रही थी.

युसुफ: अब तेरी छूट की बारी है.

उन्होने मुझे धीरे से खड़ा किया. मेरी सारी और पेटिकोट उन्होने उतार दिए. अब मैं सिर्फ़ रेड ब्रा और मॅचिंग पनटी सेट में उनके सामने थी. मेरे जिस्म की गर्मी कमरे में फैल रही थी. मेरी रेड पनटी मेरी गीली छूट पर कस्स कर बैठी थी, उसे और भी उभार रही थी.

युसुफ की आँखों में शिकारी भेड़िया की चमक थी. वो बोले: ओह हो, क्या माल है. तेरी कमर, तेरी गांद, तेरे बूब्स और ये रेड ब्रा पनटी सेट सब कुछ ऐसे तराश कर बनाया है जैसे सिर्फ़ मेरे लिए हो. आज तक ऐसी जवान औरत नही देखी मैने. तू तो मुझे पागल कर देगी.

मेरी छूट युसुफ की तारीफ सुन कर और भी तेज़ी से धड़क रही थी. मेरी साँसें गरम हो गयी.

मैं उनकी आँखों में देखते हुए एक नॉटी स्माइल दी और बोली: ये हिंदू औरत इतनी आसानी से आपके हाथ नही आएगी, युसुफ जी. पहले मुझे पकड़ कर दिखाओ. आपके मर्दाना जोश में इतनी ताक़त है भी या सिर्फ़ बातें है?

युसुफ की आँखों में अब शिकारी भेड़िए की हवस भारी निगाह थी. वो एक नॉटी स्माइल के साथ बोले: ओह हो, तो आपको लगता है की आप मेरे जाल से निकल जाएँगी? हम मर्द जब किसी औरत पर नज़रें गाड़ते है, तो वो हमारी रंडी बन कर ही रहती है. हमारा लंड एक बार जिस छूट में घुस जाता है, वो फिर अपने पति की भी नही रहती. क्या आपकी छूट में इतना दूं है की मेरे लंड को रोक सके?

मेरे अंदर एक अजीब सी खुशी और जुनून था. मैने अपनी कमर को तोड़ा मटकाया, अपनी पनटी को और स्ट्रेच किया.

मैं बोली: अगर इतनी ही ताक़त है आपके लंड में, तो पकड़ कर दिखा दो. आज देखते है कौन किसकी रंडी बनता है.

युसुफ ने एक तेज़ साँस भारी, उनकी आँखों में जुनून था: अभी दिखता हू तुझे साली.

मैं एक नॉटी स्माइल दी: आओ, पकड़ के दिखाओ.

युसुफ एक कदम आयेज बढ़े. उनकी नज़रें सिर्फ़ मेरी पनटी पर थी. वो मेरी तरफ लपके. मैं पीछे हटी. वो मेरे पीछे पड़े, और मैं उन्हें कमरे में भगाने लगी. हर बार जब वो करीब आते, मैं मुस्कुराती और तोड़ा और डोर हो जाती.

युसुफ हाँफने लगे, उनकी साँसें तेज़ थी, उनकी आँखों में शिकारी भेड़िए की हवस भारी निगाह और भी बढ़ गयी थी.

युसुफ: साली, कितना भगेगी? मेरे लंड से कब तक बचेगी?

मैं हासणे लगी, मेरी कमर मटक रही थी. मैं बोली: जब तक आप मुझे पकड़ ना ले, युसुफ जी. क्या हुआ, इतनी जल्दी हाँफ गये? आपके जैसे तो बहुत देखे है, जो सिर्फ़ बातें करते है.

युसुफ एक नॉटी स्माइल के साथ बोले: अभी दिखता हू तुझे असली मर्द का पवर. हमारा मर्दाना जोश सिर्फ़ बातें नही करता, ये औरतों की छूट फाड़ देता है. रुक जा अब.

मैं और भी ज़्यादा मुस्कुराइ, अपनी पनटी को नीचे खींचा तोड़ा सा, जिससे मेरी छूट और भी सॉफ दिखी.

मैं बोली: हिम्मत है तो पकड़ के दिखाओ. क्या पता आप इतना भी ख़ास ना हो की मुझे रोक पाए.

युसुफ ने एक तेज़ झटका मारा और इस बार उन्होने मुझे पकड़ लिया. उनकी मज़बूत बाहें मेरे जिस्म के गिर्द कस्स गयी. मैं उनकी छ्चाटी से चिपक गयी, उनके जिस्म की गर्मी मुझे जला रही थी. युसुफ ने एक शिकारी भेड़िया की हवस भारी निगाह से मुझे देखा.

युसुफ: आ गयी ना मेरी पकड़ में, रांड़? सोचा था बच जाएगी मेरे जोश से?

उन्होने बिना देर किए मेरी रेड ब्रा को साइड से खींच कर उतार दिया. मेरे बूब्स अब पूरी तरह से नंगे थे, हवा में काँप रहे थे. युसुफ ने एक नॉटी स्माइल दी और मेरे बूब्स पर झपते. उन्होने एक बूब को अपने मूह में भर लिया और उसे ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे, जैसे कोई प्यासा भेड़िया शिकार को चूस्टा है. दूसरे बूब को वो अपने हाथ से मसल रहे थे.

मेरी आँखों में मदहोशी थी. मैं आहें भरने लगी. युसुफ ने मेरे बूब्स को चूस्टे हुए, मेरी गर्दन पर अपने होंठ रखे और तीखी आवाज़ में बोले: अब बता, अब भी बोलेगी की तेरी छूट में दूं है? अब तो तेरी छूट हमारी रंडी बनेगी.

युसुफ ने बेड के पास से एक कॉंडम का पॅकेट उठाया. उन्होने उसे फादा और अपने लंड पर चढ़ा लिया. उनका लंड अब कॉंडम में और भी चमक रहा था, पूरा तंन कर खड़ा था.

युसुफ: अब चल, तेरी प्यास बुझते है.

उन्होने एक झटके में मेरी पनटी भी उतार दी, उसे फर्श पर फेंक दिया. मेरी छूट अब पूरी तरह से नंगी थी, उसके होंठ पानी से चमक रहे थे. उन्होने मुझे गोड में उठा लिया और बेड पर पटक दिया. मैं चिट लेती थी, टाँगें मोड़ कर उनके कंधो पर रखी थी. मेरी छूट पूरी तरह से खुल गयी.

युसुफ ने अपना लंड मेरी छूट के मुहाने पर सेट किया. मेरी साँसें थम गयी. एक पल के लिए उन्होने मुझे तडपया. फिर, उन्होने एक तेज़ धक्का मारा. युसुफ का लंड मेरी छूट में आधा घुस गया. एक तेज़ दर्द और अजीब सा एहसास हुआ. मेरी मूह से हल्की चीख निकली.

मैं: अयाया… युसुफ जी… धीरे…

युसुफ ने मेरी चीख को अनसुना कर दिया. उनके चेहरे पर तोड़ा गुस्सा था. उनका लंड पूरा का पूरा मेरी छूट में समा गया. मेरी मूह से एक तेज़ सिसकी निकली. मेरी आँखों में पानी आ गया, पर उस दर्द में भी एक अजीब सा मज़ा था.

युसुफ ने ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए. हर धक्के के साथ उनका लंड मेरी छूट की गहराइयों तक जेया रहा था. मेरी छूट फटने वाली थी, पर हर झटके के साथ मेरी प्यास बढ़ रही थी. मैं अपनी कमर उठा कर उनका साथ देने लगी, उनके धक्को की ताल पर खुद को हिलने लगी.

युसुफ धक्के मारते हुए ही मेरी उपर झुके हुए थे. उनके होंठ मेरे होंठों पर आ गये और हम एक गहरे किस में खो गये. उनका मज़बूत लंड मेरी छूट में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था. मैं उनकी कमर को कस्स कर पकड़ ली थी.

युसुफ: तेरी छूट तो जन्नत है. आज तक ऐसी मज़ेदार औरत नही मिली.

मेरी छूट युसुफ के लंड को पूरी तरह से जकड़े हुए थी. कुछ देर बाद, युसुफ ने मेरी टाँगें अपने कंधों से हटाई और मुझे पलट दिया. मैं घुटनो और हाथो के बाल थी. उन्होने पीछे से अपना लंड मेरी छूट में दोबारा घुसाया और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगे. मेरी गांद उनके धक्को से हिल रही थी, और मैं आयेज की तरफ झुकी हुई थी.

मैं: उउउफ़फ्फ़… और… और तेज़्ज़… युसुफ जी… मुझे और छोड़ो…

युसुफ की आवाज़ में हवस थी: अब दिखा तेरी छूट का दूं, रांड़. आज तेरी छूट को हमारे लंड का पूरा मज़ा मिलेगा.

उन्होने मुझे फिर उठाया और दीवार से सता दिया. मेरे पैर उनकी कमर पर रख कर, खड़े-खड़े मेरी छूट छोड़ने लगे. हर धक्के के साथ मेरा जिस्म दीवार से टकरा रहा था, और हम दोनो के मूह से गरम आहें निकल रही थी.

युसुफ: कैसा लगा मेरा लंड? तेरी छूट भी हमारा साथ दे रही है.

मैं: अयाया… युसुफ जी… बहुत मज़ा… आ रहा है… और छोड़ो…

युसुफ ने मुझे चेर पर बिताया, उनकी तरफ मूह करके. मेरे पैर उनकी कमर पर थे. उनकी नज़रें मेरी आँखों में थी. उन्होने अपना लंड मेरी छूट में घुसाया और फिर से धक्के देने लगे. इस पोज़िशन में हम एक-दूसरे को करीब से देख पा रहे थे, और हर धक्के के साथ नज़रें मिल रही थी, हवस और बढ़ रही थी.

मेरी प्यास और बढ़ गयी थी. मैं युसुफ को पीछे धकेली और उनके लंड पर खुद बैठ गयी, उनका मूह मेरी तरफ था. अब मैं उनके लंड पर खुद उछाल रही थी, उपर-नीचे, आयेज-पीछे. मेरी छूट उनके लंड पर पूरी तरह से चढ़ चुकी थी.

मैं उनके कान में फुसफुसाई: अब मैं आपको छोड़ूँगी, युसुफ जी…

युसुफ मुस्कुराए, उनकी आँखों में जुनून था: देखते है, तेरी छूट में कितना दूं है. आज तक किसी औरत ने मुझे इतना मज़ा नही दिया. तू तो मेरी असल रंडी बनेगी.

मैं उनके लंड पर उपर-नीचे होती रही, अपनी स्पीड बढ़ती गयी. मेरी छूट और लंड की टक्कर से पूरा कमरा गूँज रहा था. हम दोनो पूरी तरह से चुदाई के नशे में डूब चुके थे. मेरी बात सुन कर युसुफ और भी गरम हो गये. उनकी आँखों में हवस की चमक बढ़ गयी.

वो एक तेज़ आ भरते हुए बोले, उनकी आवाज़ में नशा था: अया, मेरी जान. तेरी छूट की ताक़त तो कमाल की है. तूने तो मुझे पूरी तरह से पागल कर दिया है.

मैने भी अपनी कमर को और तेज़ी से उछलते हुए कहा: और आपका लंड तो मेरी छूट को चियर रहा है, युसुफ जी. आइसा मज़ा तो आज तक नही मिला.

हम दोनो एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे, और स्पीड बढ़ते गये. मेरी छूट और युसुफ का लंड एक-दूसरे में पूरी तरह से डूब चुके थे. हर धक्के के साथ एक तेज़ करेंट मेरे पुर जिस्म में दौड़ रहा था. मेरी साँसें उखाड़ने लगी. मैने अपनी आँखें बंद करके, पूरी ताक़त से उनके लंड पर उछालने लगी.

युसुफ के मूह से भी तेज़ आहें निकालने लगी. उनका जिस्म काँपने लगा. मैं समझ गयी, वो झड़ने वाले थे. मैं भी पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी. मेरी छूट के अंदर एक अजीब सा दबाव महसूस हुआ. एक तेज़ गरम लेहायर मेरे अंदर फैल गयी.

मैं: अयाया… युसुफ जी… मैं… मैं आ गयी…

युसुफ ने भी एक तेज़ सिसकी भारी. उन्होने मेरी छूट के अंदर ही अपना वीर्या छ्चोढा. मुझे वीर्या का गरम एहसास नही हुआ, पर उनके लंड के झटके और उनकी तेज़ साँसों से मैं समझ गयी की वो झाड़ चुके थे. हम दोनो बुरी तरह से हाँफ रहे थे, जिस्म पसीने से भीगा हुआ था.

मैं उनके उपर ही ढीली पद गयी. उनका लंड अभी भी मेरी छूट में ही था, लेकिन अब वो धीरे-धीरे शांत हो रहा था. कुछ पल बाद, जब उनका लंड ढीला हो गया, उन्होने उसे मेरी छूट से बाहर निकाला. हम दोनो की साँसें तेज़ थी, और पूरा कमरा हमारी गरम साँसों और झड़ने की आवाज़ो से भरा हुआ था.

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