हॉट सीमा 2 Xxx की चूदाई कहानी 2

हॉट सीमा 2 Xxx की चूदाई कहानी 2
मेरी पिछली कहानी आई थी
हॉट सीमा 2 Xxx की चूदाई कहानी 1
मैंने अपनी चूत में पहला लंड कैसे लिया 2
अब आगे
अगले दिन मुझे बॉडी में थकान सी महसूस हो रही थी, अच्छी बात तो यह थी के मेरे आफिस की छुट्टी थी तो में घर पर आराम करने लगी।
अनुम का कॉल आया की सीमा रोड ड्राई पर गुमने चलते है पहले तो मेने मना किया पर बाद में मन गई।
बाथरूम के अंदर गई पूरी बॉडी को साफ किया नहाने में कुछ अलग सा अनुभव हो रहा था
फिर मैं बाथरूम से बाहर निकली और एक जोडी कपड़े पहने हैं उसके बाद हल्का सा मेकअप किया
और कुछ ही देर में
अनुम का फोन आया तो मैं अपने फ्लैट से निकलकर नीचे आ गई गाड़ी पार्किंग में खड़ी थी
मैं जैसे ही कार में उसके पास बैठी, उसने मेरे गाल चूम के मेरा स्वागत किया, बोला- बहुत सुंदर और सेक्सी लग रही हो।
मैंने उसे उसकी सीट पर धकेलते हुए कहा- प्लीज़ चलो यार, पहले शहर से बाहर तो निकलो !
और हम चल पड़े।
हम अब हाइवे पर थे और फिर से बरसात शुरू हो गई थी, इस बार जोर से.. तेज बरसात के कारण बाहर अँधेरा हो गया था, मैं अपना सिर उसके कंधे पर रख कर बैठी हुई थी और बाहर हो रही बरसात मुझे सेक्सी बना रही थी, गर्म कर रही थी।
वो बहुत सावधानी से कार चला रहा था। बारिश की वजह से रास्ते पर बहुत कम वाहन थे और यह हमारे लिए बहुत ही अच्छा था।
उसने मेरे गाल पर चुम्बन लिया तो मैं अपना आपा खोने लगी, मैंने भी उसके गाल को चूमा।
गाड़ी चलते हुए उस ने मेरी चूचियों को दबाया, मैं जो नही चाहती थी, वो हो रहा था।
इन सब में, में अपने आप को रोक नहीं पा रही थी।
उसने फिर एक बार मेरी चूचियों को दबाया और मसला, इस बार जरा जोर से।
चलती गाड़ी में जितना सम्भव था, उतना मैं उससे चिपक गई। अब मेरी चूचियाँ उसके हाथ पर रगड़ खा रही थी।
मैंने उसके शर्ट के ऊपर का बटन खोल दिया, मेरी उँगलियाँ उसकी चौड़ी, बालों भरी छाती पर, उसकी मर्दाना निप्पल पर घूमने लगी।
अनुम की छाती पर खूब बाल हैं, यह मुझे पहले से ही मालूम था, और मर्द के छाती के बाल मुझे बहुत ही ज्यादा पसन्द हैं इसलिए मैं उसके कंधे पर सर टिकाये उसके निप्पल को मसलने लगी और मैंने महसूस किया कि उसकी निप्पल मेरे सेक्सी तरीके के कारण कड़क हो गई थी।
मैंने एक के बाद एक, उसकी दोनों निप्पलों को मसला तो उसको मज़ा आया।
मैंने नीचे देखा तो पाया कि उसकी पैंट के नीचे हलचल हो रही थी मुझे शरारत सूझी और मैं मुस्कराते हुए उसकी निप्पल को छोड़ कर अपना हाथ नीचे ले गई।
मेरा एक हाथ उसकी गर्दन के पीछे था और मेरी चूचियाँ अभी भी उसके हाथ पर रगड़ खा रही थी, अब मेरा दूसरा हाथ उसकी पैंट के ऊपर, उसके तने हुए लण्ड पर था, उसके दोनों हाथ अभी तक स्टीयरिंग में बिज़ी थे
लेकिन अब हम मेगा हाई-वे पर थे तो और कार एक ही गीयर में और आराम से चल रही थी, उसने स्पीड भी लिमिट में रखी हुई थी तो उसने भी अपना एक हाथ फ्री करते हुए मेरी जांघों के बीच में रख दिया था,
और मेरा हाथ उसके पैंट के उभार पर था जिसमें उसका लण्ड फँस रहा था इसलिए उसने अपने पैरों की पोज़िशन ऐसी बना ली कि वो कार चलाता रहे और मैं उसके लौड़े से खेलती रहूँ।
मैं उसका खड़ा हुआ लण्ड मसल रही थी और उसको बाहर निकालना चाहती थी। मैंने उसकी जिप खोली तो उसने भी अपने खड़े हुए लण्ड को चड्डी से बाहर निकालने में मेरी मदद की।
कितना सुन्दर लण्ड है मेरे प्रेमी का…करीब 9 इंच लम्बा होगा वो और शायद 3 इंच मोटा ।
अनुम का कड़क लण्ड, काफी कुछ बाहर निकल आया था गर्म, सख्त और मज़बूत। उसके लण्ड के सुपाड़े पर चमड़ी नहीं है इसलिए उसका पूरा गुलाबी सुपाड़ा बाहर की तरफ उभरा हुआ था और ऐसा लण्ड मुझे बहुत प्यारा लगता है।
मुझे उसके मर्दानगी भरे लण्ड को देखना और सहलाना अच्छा लग रहा था।
उसके लण्ड के सुपाड़े पर छेद पर पानी की एक बूँद आ गई थी जो आप जानते हैं यह चुदाई के पहले का पानी है जिसे प्री-कम कहते हैं।
उसने भी कार चलाते हुए मेरी चूत पर मेरी लेगिंग के ऊपर से ही हाथ फिराया जिससे मेरे बदन की गर्मी बढ़ने लगी और हमेशा की तरह मेरी चूत ने भी रस निकालना चालू कर दिया।
मुझे अनुम की एक बात और अच्छी लगी, वो यह कि जैसे उसका लण्ड कड़क हुआ तो वो और भी ज्यादा सावधानी से कार ड्राइव करने लगा।
मैंने धीरे से उसके खड़े लण्ड को पकड़ कर हिलाया, मेरे छूने से उस का कड़क लौड़ा और भी सख्त हो गया।
बाहर हो रही बरसात हमारी भावनाओं को भड़का रही थी और हम चलती कार में हमारा पसंदीदा काम करने लगे।
मैंने अनुम की आँखों में देखा तो उनमें मेरे लिए प्यार के सिवाय कुछ और नहीं था।
मैंने उसके लण्ड को पकड़ कर ऊपर नीचे करना शुरू किया, कुछ समय बाद मैंने अपना सिर नीचे करके उस के तनतनाते हुए लण्ड को अपने मुंह में लिया।
मैं अपनी जीभ उसके लण्ड मुंड पर घुमा कर उसके पानी का स्वाद लिया। उसका लण्ड चूसते हुए भी चलती कार में मेरा मुठ मारना लगातार चालू था। मुझे पक्का था कि कोई भी बाहर से नहीं देख सकता था कि अन्दर चलती कार में हम क्या कर रहे है।
कार के शीशे गहरे रंग के थे और बाहर बरसात होने की वजह से वैसे भी अँधेरा था।
बाहर बरसात और तेज होने लगी थी जो कार में हम दोनों को गर्म, और गर्म, सेक्सी बना रही थी।
कार की छोटी जगह में झुक कर उसके लण्ड को चूसने में तकलीफ हो रही थी क्योंकि हिलने जगह बहुत ही कम थी।
उसने भी इस बात को समझा और मैं सीधी हो कर बैठ गई।
उसने फिर मेरी चूचियों को मसला और दबाया, मेरी चूत पर हाथ फिराया, मैंने बैठे बैठे उसके लण्ड को कस कर पकड़ा और शुरू हो गई, जोर जोर से मुठ मारने का काम करने को।
वो भी बार बार मेरी चूचियों से खेल रहा था, दबा रहा था, मसल रहा था और मेरी चूत पर भी हाथ फिरा रहा था।
चुदाई की, सेक्स की गर्मी बढ़ती गई, हम दोनों को ही मज़ा आ रहा था। मैं सोच रही थी कि उस के लण्ड का पानी जब निकलेगा, तब कार में, उसके कपड़ों पर फ़ैल जाएगा।
मुझे पता है कि लण्ड, बहुत दूर तक, बहुत तेजी से और बहुत सारा पानी निकालता है। मैं उसके लण्ड की मुठ मारने का काम कर रही थी और उसने कार में पड़ा छोटा तौलिया अपने हाथ में ले लिया।
मैं समझ चुकी थी कि अब अनुम ज्यादा देर अपना स्खलन रोक नहीं पायेगा और यह तौलिया उसने लण्ड से निकलने वाले पानी को फैलने से रोकने के लिया है।
वो कार चला रहा था और मैं उस के लण्ड पर मुठ मार रही थी, मुठ मारते मारते मैंने उसके लण्ड में और ज्यादा सख्ती, उसके लण्ड की नसें बहुत ज्यादा उभर आई थी, अब तो मुझे पता चल गया कि उसका पानी निकलने वाला है।
एक हाथ से वो ड्राइव कर रहा था और एक हाथ में अपने लण्ड के पास तौलिया पकड़े हुए था।
अचनक उसके मुंह से निकला ‘ऊऊह सीमा’ और उसने तौलिया अपने लण्ड के मुंह पर रखा।
मैंने जल्दी से तौलिया पकड़ कर उसके लण्ड पर लपेट दिया और फिर से उसके लण्ड को तौलिये के ऊपर से पकड़ लिया। उसका लण्ड पानी छोड़ने लगा जो तौलिये में जमा होता जा रहा था।
पानी निकालते हुए उसका लण्ड मेरे हाथ में नाच रहा था। मैं उसके लण्ड को कस कर पकड़े रही। उसके चेहरे पर संतोष के भाव थे और मैं खुश थी कि मैंने अच्छी तरह से मुठ मार कर उसके लण्ड को शांत किया था।
मैंने तौलिये से उके लण्ड को साफ़ किया और फिर उसने अपने लण्ड के पानी से भीगा हुआ तौलिया चलती कार से बाहर गीली सड़क पर, थोड़ी सी खिड़की खोल कर फ़ेंक दिया।
जब उसने खिड़की खोली तो पानी की कुछ बूँदें अन्दर आई, हमें अच्छा लगा।
उसका लण्ड अभी भी आधा खड़ा, आधा बैठा था, न ज्यादा कड़क, न ज्यादा नर्म। आप जानते हैं कि हमेशा ही खड़े लण्ड को थोड़ी कोशिश के बाद चड्डी और पैंट से बाहर निकाला जा सकता है, पर खड़े लण्ड को वापस चड्डी और पैंट में डालना मुश्किल है।
नर्म लण्ड को आसानी से वापस कपड़ों के अन्दर डाला जा सकता है।
उसने वापस अपना नर्म लण्ड अपनी जिप के अन्दर, पैंट में, चड्डी में डाल लिया।
मेरी चूत भी पानी छोड़ चुकी थी और अंदर सब कुछ गीला गीला हो गया था, मेरी चूत के होंठ और जांघों का जोड़ उस चिकनाई की वजह से आपस में फिसलने लगे थे।
अनुम तो एक बार स्खलित होने से रिलेक्स हो गया था लेकिन मेरी चूत में आग लग गई थी और मुझे चुदवाने की जबरदस्त इच्छा होने लगी।
मैंने अनुम से कहा- प्लीज़ यार, मुझे चुदाई चाहिए अभी, कैसे भी करो, कुछ भी करो।
मैंने उससे कहा- क्या हम हाइवे पर कार में चुदाई कर सकते हैं?
तो उसने मुस्करा कर जवाब दिया- अगर मैं तुमको हाइवे पर कार में चोदूंगा और इस मौसम और अँधेरे में कोई मेरी कार की पीछे से गाण्ड मार देगा तो?
मैं उसकी बात सुन कर हंस पड़ी लेकिन अपनी बात पर अड़ गई।
अनुम बोला- यार, अब ऐसे किस होटल में चलें, यहाँ कोई भी ऐसा सेफ होटल नहीं है और सीमा तुम्हारी हालत ऐसी हो रही है कि सब देखते ही समझ जाएँगे कि हम चुदाई के लिए कमरा ले रहे हैं, और जानू तुम्हें तो मालूम है कि देश का आजकल क्या हाल हो रहा है, गड़बड़ लोग मिल गए न तो, वो मुझे बाँध के पीट के तुम्हारे साथ सामूहिक देह शोषण कर सकते हैं, प्लीज़ जानू, कंट्रोल करो अपनी चूत को।
मैं गुस्से में बोली- साली यह चूत मेरे कंट्रोल में होती तो क्या मैं तुम से कहती , मुझे साली इस चूत ने ही तो बिगाड़ा है जो आज मैं तुम्हारे साथ इस कार में हूँ, प्लीज़ कुछ करो यार अनुम !
‘ओके !’ अनुम बोला- मौसम ऐसा है तो क्यों न कार में ही चुदाई की जाए।
मैं मान गई कार में चुदवाने को क्योंकि मैं भी कार में चुदवाने का अनुभव लेना चाहती थी।
मैं अपनी सहेली से सुन रखा था कि उसे हमेशा अलग अलग पोजीशन में, अलग अलग जगह में चुदवाने में बहुत मज़ा आता है।
मैं भी यह सब अनुभव करना चाहती थी।
अनुम को रास्ते का अच्छा खासा आईडिया था,वो यहाँ आता जाता रहता था, तो वो कोई सुरक्षित जगह देखने लगा और मुझे बोला- रानी, एक जगह है आगे बहुत मस्त, जहाँ हम दोस्तों ने एक बार पिकनिक की थी, बीयर वगैरा पी थी।
और फिर कोई 2-3 किमी आगे आने के बाद वो बोला- लो डार्लिंग, आ गई अपनी मंज़िल !
और उसने कार हाइवे से नीचे उतार कर पेड़ों के झुण्ड की तरफ बढ़ा दी। आखिर उसने कार वहाँ खड़ी की जहाँ चारों तरफ घने पेड़ थे।
मैंने देखा कि हमारी कार दो बड़े पेड़ों के बीच खड़ी थी। हम हाइवे से ज्यादा दूर भी नहीं थे और वो रास्ता ऐसा था कि हाईवे से कोई और हमारी तरफ आता तो सबसे पहले वो हमें दिखाई दे जाता और हम कार स्टार्ट करके उससे पहले ही वहाँ से रवाना हो सकते थे।
मुझे अनुम की सेक्स को लेकर यह सावधानी और समझदारी, बहुत पसंद आई क्यूंकि सेक्स करते समय मन में कोई डर या वहम नहीं होना चाहिए, तभी चुदाई का मज़ा आता है।
और यह जगह इस हिसाब से बहुत मस्त थी, क्यूंकि यहाँ आते ही मेरी चूत में खलबली सी मच गई जैसे कि वो और मैं किसी बैडरूम में चुदाई के लिए आ गये हों।
यहाँ पर चारों तरफ पानी भरा था, बड़े बड़े पेड़ों के बीच हमारी नीली कार को इस मौसम में और घने बादलों की वजह से दिन में ही अँधेरे का सा अहसास था तो ऐसे में हाइवे से देख पाना संभव नहीं था।
यह एक बहुत महफूज़ जगह थी, पहली बार कार में चुदाई करने के लिए।
भारी बरसात लगातार हो रही थी और हम बड़ी बड़ी पानी की बूंदों को हमारी कार की छत पर गिरते हुए सुन सकते थे।
वहाँ पहुँचते ही अनुम ने मुझे बाहों में भर लिया और कस के मेरे होठों पर एक लंबा सा चुम्बन करने लगा- सीमा माय डार्लिंग, पूरे साल भर के प्रयास के बाद वो दिन आए है कि तुमने मुझ पर मेहरबानी की है।
मैंने भी उसके चुम्बन का जवाब कस के उस से लिपट के उसे अपने उन्नत उभारों में भींचते हुए दिया- अनुम यार, समझा करो, कोई लड़की कैसे किसी अनजान मर्द से चुदवाने का फैसला कर सकती है, अब मैंने तुम्हे जांच लिया परख लिया, तो मैं तुम्हारी बाहों में हूँ,
तुम सही में बहुत स्वीट हो,
‘अब जल्दी बताओ जानू चुदाई कैसे करनी है, क्यूंकि घर भी समय से पहुँचना है।’
मैं बोली- कार में कैसे करेंगे? पिछली सीट पर?
अनुम- पिछली सीट पर कर सकते है पर इस छोटी कार में जगह बहुत कम है। मैं सोच रहा हूँ कि क्यों न आगे की सीट पर किया जाए जिस पर तुम बैठी हो। हम सीट को पीछे करके जगह बना सकते हैं।
मैं- इस सीट पर? कैसे होगा इतनी कम जगह में?
अनुम- ठीक है, हम यहाँ शुरू करते हैं। अगर जरूरत हुई तो पिछली सीट पर चले जायेंगे। मैं कुछ बता नहीं सकता क्योंकि मैंने कार में कभी नहीं किया है, आज पहली बार है।
मैं- मेरा भी तो पहली बार है, ठीक है, हम पहली बार ट्राई करते हैं साथ साथ।
एकांत और बाहर का बरसाती मौसम हमारे तन बदन में आग लगा रहा था। एक तो हम दोनों वैसे ही स्वभाव से सेक्सी है और ऊपर से यह मौसम। हम दोनों ही जानते है कि समय और जगह कैसे सही इस्तेमाल किया जाता है।
हम लोग सेक्सी बातें कर रहे थे और कार में, हाइवे के पास और बरसात के मौसम में एक मजेदार चुदाई के लिए तैयार हो रहे थे।
वहाँ पेड़ों के बीच कार में बैठे बैठे हमको हाइवे पर आती जाती गाड़ियों की रोशनी दिखाई दे रही थी पर हमें पता था कि कोई भी हम को देख नहीं पायेगा।
चुदाई के लिए जगह बनाने के लिए उसने मुझे मेरी सीट पीछे करने को कहा। मैंने सीट पीछे की तो वो करीब करीब पीछे की सीट को छू गई।
अब मेरी सीट के सामने काफी जगह हो गई थी। मैं अभी भी सोच रही थी कि इस सीट पर वो मुझे कैसे चोदेगा।
अब मैंने सीट की पीठ को पीछे धकेला तो मैं अधलेटी पोजीशन में हो गई।
वो बोला- डार्लिंग! हम केवल अपने नीचे के कपड़े ही उतारेंगे ताकि हम आराम से चुदाई कर सकें। अगर अचानक कोई आ गया तो ऊपर के कपड़े पहने होने की वजह से हम नंगे नहीं दिखेंगे।
उसने अपनी पैंट और चड्डी उतार कर पिछली सीट पर फ़ेंक दी। अब केवल वो अपनी शर्ट पहने हुए था। मैंने देखा कि उसका लण्ड धीरे धीरे खड़ा हो रहा था जैसे उस में हवा भरी जा रही थी।
उसका लण्ड लम्बा होता जा रहा था, मोटा होता जा रहा था और ऊपर की ओर उठ रहा था।
मैंने भी अपनी लेगिंग और चड्डी उतार कर पिछली सीट पर उसके कपड़ों पर फ़ेंक दिए।
अब मैं भी ऊपर केवल अपना ढीला सा कुर्ता पहने हुए थी।
फिर उस ने मेरी चुदाई की, उस के बाद हम ने कपड़े पहने और कुछ देर और गुमने के बाद शाम को उसने मुझे घर पर छोड़ दिया।
अगले दिन मुझे अनुम का फ़ोन आया वो मुझसे मिलना चाहता था तो मैंने उसे अपने फ्लैट पर बुला लिया और सारे काम निपटा कर नहाने चली गयी।
सबसे पहले मैंने अपनी हॉट चुत को गर्म पानी से साफ किया जो अब ठीक हो गयी थी। मैंने नहा कर एक नाइटी पहन ली जो मेरी जांघों तक ही थी और कन्धों पर पतली सी पट्टी थी। इसमें से मेरी नंगी चुची आधी दिख रही थी।

अनुम आ गया और मुझे देख कर अपनी बांहों में भर लिया, इस बार मैंने भी उसे अपने से चिपका लिया और उसे अपने गर्म जिस्म का अहसास कराया।
मैंने नाईटी के अन्दर ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी तो मेरी चुची अनुम को महसूस हो रही थी। मैंने अनुम को बैठने को बोला और उसके लिये चाय बनाने चली गयी।

अनुम सोफे पर बैठ कर मेरा इन्तजार कर रहा था, मैं चाय के साथ कुछ खाने को लेकर आयी और अनुम के सामने झुक कर टेबल पर रखने लगी। अनुम मेरे नाईटी के अन्दर मेरी चुची को देखने लगा जो मुझे अच्छा लग रहा था तो मैं कुछ देर तक जानबूझ कर उसे अपनी नंगी चुची दिखाती रही!

अब मैं अनुम के सामने सोफे पर बैठने के लिये सोफे पर पड़ा सामान हटाने के लिये झुकी तो अनुम को पीछे से मेरी चिकनी गांड और जांघों के बीच छिपी हुई चूत दिखने लगी जिससे अनुम का लंड खड़ा होने लगा।
मैं सोफे पर बैठ कर अनुम से बात करने लगी, उस वक्त अनुम अपने लंड को सहला रहा था जो मैं मुस्कुराती हुई देख रही थी।

फिर अनुम ने मुझे एक गिफ्ट दिया.
मैंने पूछा- ये किसलिए?
तो उसने बताया कि उसको बिसनेस डील मिली है

मैं बहुत खुश हुई और मैंने गिफ्ट खोल कर देखा तो उसमें आई फ़ोन था, जिसे देख कर मैं बहुत ज्यादा खुश हुई और उछल कर अनुम को गले से लगा लिया।

अब अनुम ने मेरे पुराने फोन से सिम निकाल कर आई फोन में डाला और मुझे फ़ोन के फीचर दिखाने लगा और मैं उसकी गोद में बैठ गयी जिससे उसका लंड मेरी गांड में महसूस होने लगा। अनुम ने मुझे पीछे से पकड़ रखा था और उसका हाथ मेरे नाइटी के अन्दर मेरे पेट को सहला रहा था। मैं बस फोन को देख रही थी और उसकी हरकत का मजा ले रही थी।

धीरे धीरे अनुम अपने हाथ से मेरे निप्पल को सहलाने लगा और पीछे से मेरे एक चुची को दबाने लगा। इससे मैं उत्तेजित हो गयी और मेरी चूत से पानी निकलने लगी जो अनुम के लंड को गीला करने लगी।
अब अनुम ने अपने दोनों हाथ से मेरी चुची को पकड़ लिया और सहलाने लगा फिर दबाने लगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था पर मैंने अनुम से कुछ नहीं कहा और बस फ़ोन को देखती रही।
इस बीच अनुम ने मेरी नाईटी के स्ट्रिप को कंधे से नीचे उतार दिया और मेरी पीठ पर चुम्बन करते हुए मुझे फ़ोन के बारे में बता रहा था।

अब उसका लंड ज्यादा टाइट हो गया था जिससे मुझे थोड़ा अनकम्फर्ट लगा और मैं कमर हिला कर उसे ऐडजस्ट करने लगी।
अब उसका लंड पैंट के ऊपर से ही मेरी गरम चूत की फांकों में फंस गया जिससे मेरी आँखें बंद हो गयी और मैं पलट कर अनुम को किस करने लगी उसके जीभ को चूसने लगी। अनुम ने अपने एक हाथ से मेरी चुची को दबाना जारी रखा और दूसरे हाथ से मेरी जांघों को सहलाने लगा, बीच बीच में वो हल्का हल्का मेरी चूत को रगड़ देता जो मुझे और मजा दे रहा था, मेरी चुत हॉट हो रही थी.

अब मैं समझ गयी कि मैं चुदने वाली हूँ जिसके लिये मैं भी तड़प रही थी।

अनुम ने मेरी नाइटी को नीचे कर दिया और मेरा निप्पल चूसने लगा. मैं निप्पल चुसवाती हुई अनुम को सहला रही थी और उसके टीशर्ट को ऊपर उठाने लगी जिसे मैंने खींच कर निकाल दिया। अब मैं और अनुम दोनों ऊपर से बिल्कुल नंगे थे।

मैं अनुम की गोद में बैठ कर उसे अपना निप्पल चुसवा रही थी। मैंने आँखें बंद कर ली थी और अनुम मेरे निप्पल के साथ साथ पूरा जिस्म चाट रहा था। मैं यह बर्दाश्त नहीं कर पायी और झड़ गयी जिससे अनुम की पैंट गीली हो गई लंड पर से।
अनुम मुझसे बोला- यार, तुमने मेरी पैन्ट गीली कर दी।

मैंने अनुम के पैंट के साथ साथ उसकी चड्डी भी निकाल दी। अब अनुम मेरे सामने नंगा सोफे पर बैठा हुआ था, उसके लंड में चमक थी।
अनुम ने मेरी बची हुई नाईटी निकाल दी, अब मैं बिल्कुल नंगी अनुम के सामने खड़ी थी, अनुम मेरे जिस्म को सहला रहा था और मैं उसके लंड को।

मैंने अपनी एक टांग सोफे पर रख दी और उससे अपनी हॉट चुत चटवाने लगी।

लेकिन तभी अनुम को उसके पापा का फ़ोन आ गया तो वो फ़ोन पर बात करने लगा।

इस बीच मैं सोफे पर लेट गयी और अनुम का लंड चाटने लगी। अनुम मेरे सिर को पकड़ कर अपने लंड से मेरे मुँह को चोदने लगा। मुझे अच्छा लग रहा था और मैं अपना मुँह चुदवा रही थी।

अब अनुम ने फ़ोन रख दिया और मेरे मुँह को चूत समझ कर मेरे गले तक अपना लंड घुसा देता फिर थोड़ी देर मेरे गले को चोद कर निकाल देता। उसके बाद अनु ने मुझे उठा दिया और सोफे पर लिटा कर अपनी दो उंगलियाँ मेरी चूत में डाल कर जीभ से मेरी भगनासा को चाटने लगा।
मैं अनुम से बोली- अब मत तड़पाओ!
तो अनुम बोला- आज मैं कुछ नहीं करूंगा।

इससे मुझे अच्छा नहीं लगा और मैं उठ कर जाने लगी तो अनुम ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपने ऊपर खींच लिया। मेरी दोनों टांगें फैला कर अपनी गोद में बिठाया जिससे उसका खड़ा लंड सीधा मेरी चूत के अन्दर चला गया और मैं चिल्ला दी।
उसने तुरन्त मुझे अपनी बांहों में जकड़ कर मेरे मुँह में अपना मुंह डाल दिया।

मैं उसके लंड पर बैठी रही और उसके बालों को नोचने लगी कि वो मुझे छोड़ दे पर उसने नहीं छोड़ा और मुझसे पूछने लगा- यार तुझे आज भी दर्द हो रहा है?
मैं- हाँ यार, दर्द हो रहा है, निकाल लो प्लीज।
अनुम- मैं तो नीचे हूँ तुम ऊपर हो, खुद उठ जाओ।

तो मैं थोड़ा सा ऊपर हुई फिर अनुम ने मेरी कमर में अपनी बांहें कस ली जिससे उसका बचा हुआ लंड भी मेरी गर्म चुत के अन्दर घुस गया और मैं दुबारा दर्द से तड़प उठी।
अब अनुम मेरे निप्पल को चूसने लगा और मेरी कमर को सहलाने लगा, इससे मैं थोड़ा नॉर्मल हुई, मुझे अच्छा लगने लगा और मैं चूत में यार के लंड का मजा फील करने लगी।
मैंने अनुम को चूमना शुरू कर दिया और अपनी कमर को हिलाने लगी।

अनुम बोला- आज मैं तुमको नहीं चोदूँगा, तुम खुद चुदोगी।
और मुझसे पूछा- क्या तुम चुदना चाहती हो?
मैंने उसके होंठों को चूसते हुए कहा- हाँ, बहुत तेज तेज चुदना चाहती हूँ।

तो अनुम ने मुझे सिखाया और कहा- अपनी कमर पीछे ले जा कर झटके दो।
मैंने वैसा ही किया और कमर को आगे पीछे करके चुदवाने लगी। मैं अनुम के कन्धों को पकड़ कर जोर जोर से झटके मारने लगी और उसके होंठों को काटने लगी।

इस बीच मैं जोर से झड़ने लगी और अनुम ने मेरे निप्पल को दबा दबा कर मेरी चूत का पूरा रस अपने लंड पर ले लिया। अब मैं उसके ऊपर निढाल होकर गिर गई और सुस्ताने लगी।

अनुम ने मेरी गांड के छेद को अपनी एक उंगली से रगड़ना शुरू कर दिया जो मुझे दुबारा उत्तेजित करने लगा, मैं फिर से अपनी कमर हिलाने लगी और गांड रगड़वाते हुए चुदने लगी।

अब अनुम ने मुझे थोड़ा ऊपर उठा दिया और नीचे से ओप्पर को चूतड़ उछाल उछाल कर मेरी चूत में लंड मारने लगा। उसका यह स्टाइल और उसका लंड मुझे इतना मजा दे रहा था कि मैं बता नहीं सकती।

फिर कुछ देर बाद उसने मुझे सोफे पर लिटा दिया और मेरे ऊपर लेट कर अपने लंड से मेरी चूत फाड़ने लगा। इस बीच मैं दुबारा झड़ गयी और इससे कमरे में फच फच की अवाज गूँजने लगी।

अब अनुम भी झड़ने के करीब आ गया तो वह तेज तेज झटके मारने लगा।
उसने मुझे पूछा- सीमा डार्लिंग, कहाँ लोगी मेरा माल?
तो मैंने उसे बोला- अपना लंड मेरे मुँह में डाल दो।

अनुम उठ गया और मैंने उसके लंड को अपनी नाइटी से पौंछा और फिर चू सने लगी उसके लंड को जिससे उसका लंड फूलने लगा और मेरे मुँह को अपने वीर्य से भरने लगा।
मुझे उसका टेस्ट बहुत अच्छा लग रहा था तो मैं अनुम के वीर्य को पीने लगी और फिर उसका लंड चाट कर साफ कर दिया।

अब अनुम सोफे पर मेरे साथ नंगा बैठ गया और हम दोनों एक दूसरे को देखने लगे।
अनुम मुझसे पूछने लगा- सीमा मजा आया?
मैं बोली- बहुत ज्यादा।
अनुम- हमेशा चुदोगी मुझसे?
मैं- कैसे?
अनुम- मुझसे शादी करोगी?

मैं चुप रही, सोचने लगी कि क्या बोलूं?
तो मैंने अनुम से कहा- अभी नहीं! फिर कभी इस बारे में सोचेंगे. अभी मैं बस तुम्हारे साथ लाइफ को एन्जॉय करना चाहती हूँ।
अनुम ने कहा- ठीक है सीमा।
और मुझे अपने गोद में बिठा कर किस करने लगा।

फिर थोड़ी देर बाद अनुम चला गया और मैं नंगी ही सो गयी।

जब मेरी नींद खुली तो देखा कि मेरा फोन बज रहा है. मेरे ऑफ़िस से फ़ोन आया जो मेरे बॉस का था उनका नाम बाबर अली था , उसने बताया कि उसने अपने 1 साल के बेटे की बर्थडे पार्टी रखी है और मुझे आना है।
मैंने हाँ कहा और मैं पार्टी में जाने के लिए तैयार होने लगी और मैंने एक मॉडर्न ड्रेस पहन ली पार्टी के लिये जिसमें से मेरी आधी चुची नंगी दिख रही थी और मेरी नंगी बांहें उस पर चार चाँद लगा रही थी।

मुझे इस तरह देख कर मेरे ऑफ़िस के सभी लड़कों के मुँह में पानी आ गया और सब अपना लंड रगड़ने लगे।
फिर मैं बाबर जी के पास गयी उनको बधाई दी तो उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और गले से लगा कर मेरे नितम्बों को हल्का सा दबा दिया।
मैं थोड़ी अचकचा सी गई कि बाबर जी मेरे साथ ये क्या कर रहे हैं लेकिन मुझे बुरा नहीं लगा, मैं उनसे बात करने लगी.

तभी अनुम का कॉल आ गया और मैंने उससे 2 मिनट बात की तो बॉस ने देखा कि मैं आई फ़ोन यूज़ कर रही हूँ।
इससे उन्होंने नए फोन की पार्टी मांग ली.
मैं मना नहीं कर पायी और अगले दिन उनको अपने फ्लैट पर पार्टी के लिये आने को बोल दिया।
आप मेरे साथ बने रहिए और इस हॉट सीमा 2 हार्ड सेक्स कहानी पर किसी भी प्रकार की राय देने के लिए आप मेल पर मुझसे संपर्क कर सकते हैं.

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