हॉस्पिटल मे मिली एक नयी भाभी-1

हेलो दोस्तों कैसे हो आप सब. ये कहानी पिछले कुछ दीनो की है और ये बिल्कुल साची कहानी है जो पिच्छले कुछ दीनो मे मेरे साथ बीती. ज़्यादा बातयन ना करते हुए अब कहानी पे आता हूँ.

पिछल्ले कुछ दीनो से मेरे कज़िन भाई की तबीयत थोड़ी ठीक नही चल रही थी. तो मैने उन्हे हॉस्पिटल लेकेर जाना सही समझ. वाहा मुझे एक भाभी, लेडी मिल्ली जो अपने बेटे को लेकर आई थी, पढ़ो वहाँ मेरे साथ क्या हुआ.

भाई का नाम रोहन.

अब मई भाभी के बारे मे बताता हूँ. उनका नाम अंकिता था, आगे लगभग 30-32 होगी. वो अपने बेटे को लेकर आई थी. उन्होने मुझे बताया की उनका पति जाड़ा ध्यान नही देता काम मे बिज़ी रहता है, देर रात घर आता कभी कभी तो आता ही नही 2-2 दिन.

बातयन ना करते आयेज कहानी पर आता हूँ.

मई अपने भाई को लेकर जैसे ही हॉस्पिटल पोनचा वहाँ हुँने चेक उप करवाया और उन्होने अड्मिट होने को बोला. हॉस्पिटा बड़ा था तो रूम दिया उन्होने और फिर जैसे ही हम वहाँ गये भाई को बेड पर लेता दिया और मे सोफे पर बेतत् गया.

भाई : – यरर मई ठीक हूँ मुझे घर ले चल यहा, मेरे से नही रहा जाता.

मे :- भाई मेरे लिए प्लीज़ 2-4 दिन की ही तो बात है रुक जाते है.

भाई:- तुम लोग मानते कहाँ हो मेरी.

और भाई सू गये कुछ देर बाद एक नर्स आई नाम ज़ोया था. मानो नर्स भी ज़हर थी और फिर मैने देखा क्या फिगर था उसका, मोटी गंद बड़े बूब्स ज़हर ल्ग रही थी. अब तो डिल कार रहा था की चाहे भाई को 10 दिन रुक्कना पड़े मई ही रुक्क्ुंगा भाई के साथ कोई और नही रुकेगा.

नर्स जाते टाइम स्माइल देकर गयी मई पीछे पीछे चला गया लाइन मारने.

मे :- भाई कैसे है मेरे ठीक तो जाएँगे ना?

ज़ोया:- जी जी वो ठीक है बस 3-4 दिन का कोर्स है हो जाएँगे ठीक आपके भाई.

और फिर मे अपने रूम आगया और नर्स के बारे मे सोचता रहा तभी भाई बोला.

भाई :- बेटा वो नि आएगी तेरे हाथ बसस कर.

मे :- किसकी बात कार रहा है तू क्या बोल रहा है?

भाई:- ज़्ब समझता हूँ जो तू ज़ोया नर्स के पिच्चे पिच्चे गया था.

मे :- अरे नही नही भाई वो तो तेरे बारे मे पुच्छने गया था.

भाई :- ऐसी हालत मे क्या करूँगा अभी मुझसे कुछ नि होगा.

इश्स बात पर मई और भाई हास पद्ड़े और फिर थोड़ी देर बातयन करने के बाद मई भाई को सुलाकर बाहर घूमने चला गया. देखने लगा की कही ज़ोया दिख जाए मज़ा आ जाए.

तभी एक भाभी अपने बेटे को लेते आ रही थी. देखने मे तो अमीर ल्गी और सारे डाली हुई थी, डीप गला मानो उसके दूध की लाइन क्या ज़हर लग रही थी. वो अकेली थी इसलिए मैने मोके पर चौका मारा.

मई ज्लडी से उसकी हेल्प करने ल्ग पड़ा. पहले उन्होने तोड़ा माना किया पर मेरे बोलने पर वो मान गयी. उसके बेटे को तेज़्ज़ बुखार आ रहा था. तो डॉक्टर ने बोला की 2-3 दिन अड्मिट करके देखते है की क्या है और इंजेक्षन लगते है.

तभी उन्होने जैसे ही फॉर्म फिल करने ल्गी. तो मैने उन्हे बोला की माँ देखिए आप एक काम करिए रूम शेर कर लीजिए. मेरा भाई भी यहाँ अड्मिट है तो एक ही रूम मे 2 मरीज़ रुक सकते है.

अंकिता भाभी :- अरे नही नही आप इतनी तकलीफ़ क्यू ले रहे है, अपने इतनी हेल्प करदी मेरे लिए वही काफ़ी है. मई अपने हज़्बेंड को बुला लेती हूँ वो कर लेंगे.

मे :- देखिए तकलीफ़ की बात नही है मुझे अच्छा लगेगा आपकी हेल्प करके. कल को मुझे हेल्प चाहिए होगी तभी कोई हमारी करेगा यही तो नेचर है.

मैने ऐसे बोलके लंबी ल्म्बि बातयन मारी.

उसने फिर अपने हज़्बेंड को कॉल किया पहले उसने उत्ताया नही ज्ब उत्ताया तो बोला-

वो :- डोंट कॉल मे आम बिज़ी रिघ्त नाउ और हन 2 – 4 दिन मई घर नही अवँगा ट्रिप है बिज़्नेस का.

और कॉल कर दिया. तो मैने फिर बोला-

मे :- माँ आप घबराईए म्ट प्लीज़ हमारे साथ ही रुक्क जाइए.

भाभी :- ठीक है पर मई आपको पैसे दे दूँगी.

मे :- ठीक है मे ज़िद्द नि करता जैसे आपको अच्छा लगे.

भाभी :- ठीक तो आप नर्स को बोलके कर दो जो करना है.

मे:- ठीक है एक मिंट रुकिये.

मैने तभी डॉक्टर को बोलके फॉर्म फिल किया और उसके बेटे को अपने रूम मे शिफ्ट करवा लिया. हम रूम की टरफ़ जाने लगे और फिर रूम मे पोनचे.

तो भाई मुझे घूर कर देख रहा था. मैने उससे आँख मारी और फिर ल्डके को वही लेता दिया और भाभी को बीतताया और पानी पिलाया.

फिर मैने पूछा-

मे :- वैसे क्या हुआ आपके बेटे को अभी तो छोटा है ये बोहट?

भाभी :- जी हन 2 साल का है इससे बोहट तेज़्ज़ बुखार आता है 3-4 दिन हो गये है.

मे :- कहाँ से है आप वैसे?

भाभी :- यहीं नज़दीक से ही हूँ और आप कहाँ से है?

मे:- हम तो दूर से है काफ़ी.

एस्सा बोलते ही भाई मेरी टरफ़ आँखे फाड़डके देखे की सला झूठ बोल रहा है.

भाभी :- ऊ चलो कोई बात नि ज्लडी ठीक हो जाएँगे भाई साहब भी.

मे :- जी बिल्कुल और घर मे कों कों है आपके हज़्बेंड क्या करते है?

भाभी :- घर मे मई मेरे हज़्बेंड और मेरा बेटा रहता है, मम्मी पापा गाओं मे है और हज़्बेंड कंपनी मे मॅनेजर है.

मे:- चलो आप भी टनस्न म्ट लो ज्लडी आपका बेटा ठीक हो जाएगा.

भाभी :- जी बसस ज्लडी ठीक हो जाए आपको भी तकलीफ्फ नि देना चाहती मई.

मे :- अरे तकलीफ्फ केसी ऐसे टाइम मे एक दूसरे के काम आना चाहिए.

ऐसे ही बातयन करते करते फिर मैने बोला-

मे :- चलिए छाई ब्गैरा पीकर आते है.

भाभी :- आप तकलेफ्फ कू कार रहे है?

मे :- तकलेफ्फ की क्या बात मई भी अकेला हूँ आपको भी कंपनी मिल जाएगी.

मैने भाई से पुचछा कुछ लोगे?

भाई :- नही तू ही पी लेना मुझे नही पीनी.

और फिर हम छाई पीने गये और हम बातयन करते रहे बातों बातों मे उसने बोला खाना कहाँ मिलता है यहाँ?

मे :- अरे यर्र खाना तो प्तनी शयद यहाँ सिर्फ़ मरीज़ों के लिए होता है, बाकी लोगों के लिए बाहर है कहीं इसका शॉप.

भाभी :- अच्छा चलो देखते है.

मे :- चलो फिर देखलेते है कुनकी रात भी होने वाली है.

भाभी :- जीई बिल्कुल.

हम जैसे ही वहाँ पोनचे हम वो जाग ही अच्चीी नही ल्गी और खाना तो डोर की बात थी.

भाभी :- य्र मे यहाँ का खाना नि खा पौँगी.

मे :- मई तो खुद नि खा सकता.

भाभी :- तो अब हम क्या करे रात भी होने वाली है?

मे :- एक रास्ता है अगर बुर्रा ना मानो.

भाभी :- कहो बुरा क्यू मान ना..

मे :- अगर खाना तुम अपने घर पर ब्ना लाऊ ंज़ड़ीक ही तो है तुम्हारा घर.

भाभी :- नज़दीक तो है पर जौन कैसे गद्दी नही है बस पर रात को तुम्हे पता ही है..

मे :- बुर्रा ना लगे तो मई चलता हूँ मेरे पास गद्दी है खाना ब्नाकर ले आएँगे?

भाभी :- तुम तकलेफ्फ कू ले रहे हो?

मे :- तकलेफ्फ केसी काम तो मेरा ही है.

भाभी :- चलो ठीक है.. फिर डन हम चलते है.

मैने फिर नर्स को बोला की हम खाना लेने जारे रहे प्लीज़ रूम मे उनका ख्याल रखना हम एक्सट्रा चार्ज कर देंगे.

वो मान गये और हम निकल गये हम उसके घर पोनचे और वो ज्लडी से खाना ब्नाने मे ल्ग गयी और ज्लडी ज्लडी मे फन चलाना ही भुल्ल गयी. मैने देखा की उसका पसीना उसके फेस से हो कर उसके दूध पर आ रहा था और मैने जनभुज कर फन नही चलाया और पास जाकर बोला-

मे :- यर्र देखो ये पसीना कैसे तुम्हे पूर्रा गिल्ला कार दिया है.

भाभी :- यर्र फन चलना ही भूल गयी प्लीज़ चालाड़ो.

मे :- ज्ररूर कू नही.

खाना ब्नाने के बाद उसने बोला की मई फिरेश हो जौन तब चलते है. मैने बोला ठीक है जैसे आपको अच्छा लगे. वो फिरेश होने रूम मे गयी और मई पिच्चे पिच्चे उसके रूम की टरफ़ गया.

उसके कुछ अंदाज़ा नही था की मई पीछे हूँ इसलिए उसने रूम लॉक नही किया और ऐसे ही फिरेश हो कर चनगे करने लगी. क्या जिस्म था उसका, बड़े बड़े दूध, मोटी गंद मानो लंड खड्‍डा हो गया.

फिर मुझसे तोड़ा सा डोर हिल गया और उसको टा छल्ल गया की कोई है डोर पर और मई ज्लडी से नीचे आ गया. ज्ब वो आई उसके आते ही मेरी पंत मे ब्ना हुआ तंबू देखा और साँझ गयी.

उसके बाद हम खाना लेकर निकल पडे और मई देख रहा था वो गद्दी मे मेरे साथ फिरंक होने ल्गी थी.

फिर हम फुँछ गये और हुँने खाना खाया और उसने अपने बेटे को भी खिलाया और भाई को मैने भी खिलाया खाना और उसको मेडिसिन दी और द्वै की व्झ से उनको नींद आने ल्गी और वो सू गये.

उसने बोला-

भाभी :- अगर हो सके मेरे साथ बाहर तक घूमने चलो, खाना खाने के बाद मुझे घूमने की आदत है. घर मे तो अकेली घूम लेती हूँ यहाँ तोड़ा डरर ल्गता है.

मे :- अरे कू नही चलो चलते है.

हम घूमने निकले पार्क मे घूम रहे थे, हवा चल रही थी. तो मैने उसको अपनी जॅकेट डेडी. अब वो मेरे साथ फिरंक हो चुक्की थी. यूयेसेस एक घटना से मानो की वो भी तलाश मे थी किसी की जैसे.

थोड़ी देर बाद मैने देख की उसने मेरा हाथ पकड़ा और कंधे पर स्रर रख दिया और बोली-

भाभी :- बुररा ना लगे तो ऐसे सर रख लूँ?

मे :- अरे पुच्छने की क्या बात है रख लो.

हम घूमते रहे और मैने भी अपना एक हाथ उसकी कमर पर रख दिया. वो कुछ नही बोली मैने सोचा की इसकी हन है बस मौका देखना है अच्छा सा.

और हम आंद्र जा कर सू गये और मैने रात को एक दो बार उसके बूब्स भी दबाए और फिर सू गया क्यूंकी भाई भी था.

अगली सुबा उठा और उसने मुझे कहा-

भाभी :- मुझसे ऐसे नही रहा जाएगी मुझे फिरेश होना है पल्लज़ घर ले चलो.

मे :- ह्म ज्ररूर खाना भी तो लाना है.

तभी भाई बोला-

भाई :- हमारे लिए खाना यहा का भी अच्छा होता है आप लोग खा आना हुमारे लिए म्ट लाना. और माँ इसको भी नहाने को बोल देना बेचारा कल से नही न्हाया.

भाभी :- जीई बिल्कुल आप मेरे बेटा का ध्यान रखना.

भाई :- आप चिंता म्ट कीजिए मई हूँ आराम से आना वैसे भी आपका कोई काम तो है नही नर्स और डॉक्टर लोग का ही काम है.

मई सोचूँ भाई तूने क्‍माल कर दिया.

फिर हम निकल पद्ड़े और उसके घर पर पोनच गये. उसने आज फिर फन नही चलाया था और मई भी सामने जाकर देखता रहा. उसका पसीना उसके दूध मे जेया रहा था.

फिर उसके बाद वो बोली-

भाभी :- मई फिरेश हो जाती हूँ फिर खाना खा लेंगे.

मे :- जी ठीक है.

इस बार वो जाती उसकी पीछे मड कर देख कर गयी मानो इशारा दे कर गयी. मैने भी फिर वही किया. जैसे ही वो रूम मे गयी मई उसके पिच्चे चला गया और डोर खोल दिया, वो कपड़े बदल रही थी.

ये है मेरी कहानी अपने मेरी पिछली कहानियो को भी धीर सारा प्यार दिया, इसको भी फीडबॅक देना और प्यार देना. मुझे आपके मेल्स का वेट होगा, कोई बात करनी हो तो भी म्स्ग करे.

किसी लड़की/भाभी/ आंटी को कोई भी बात करनी हो कर सकते है, हेल्प चाहिए म्स्ग कर सकती है. आपकी परिवसी सबसे पहले है.

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