होली में रंग लगाने के बहाने सगे देवर ने मेरी कसके ठुकाई की

हेल्लो दोस्तों, मैं आप सभी का में बहुत बहुत स्वागत करती हूँ। मेरा नाम राधा है। मैं पिछले कई सालों से की नियमित पाठिका रहीं हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती तब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ती हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रही हूँ। मैं उम्मीद करती हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी।

कुछ दिनों में होली आने वाली थी। मेरा इकलौता देवर अभी अमेरिका में ही था। उसे एक अच्छी स्कॉलरशिप मिल गयी थी और वो कैलीफोर्निया की एक यूनीवर्सिटी में पढ़ रहा था। सुबह से मैं उसे ५ बार फोन कर चुकी थी की वो हिंदुस्तान कब जाएगा। लेकिन होली तक वो आराम से घर पहुच गया था। आज होली थी। देवर मेरे साथ होली खेलना चाहता था।

“भाभी…आओं तुम्हारे रंग लगाता हूँ!!” मेरा देवर तेजस बोला। मेरे पति मोहल्ले में होली खेलने गये थे, इसलिए हम देवर भाभी घर पर बिलकुल अकेले थे। मेरा देवर मेरे कमरे में रंग की बाल्टी लेकर आ गया। मैंने डरकर भागने लगी। मैं दूसरे कमरे में भागी पर उसने मुझे तेजी से पकड़ लिया। आँगन में काफी पानी फर्श पर पड़ा हुआ था। जैसे ही तेजस ने मुझे पकड़ा हम दोनों फर्श पर फिसल गये और धड़ाम से गिर गये। तेजस मेरे उपर ही गिर गया और बचने के लिए मैंने उसे बाहों से दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया। मेरी साड़ी का आँचल हट गया और मेरा गहरा ब्लाउस और उसके अंदर कैद मेरे २ बड़े बड़े सफ़ेद ३६” के दूध साफ साफ़ दिख रहे थे। हम दोनों ऐसा फिसले थे की तेजस का मुंह मेरे मम्मो पर चला गया था।

मेरे चूचे उसके मुंह में लग गये। ना जाने मेरे देवर को क्या हुआ की उसने मेरे गाल पर सब जगह रंग लगा दिया और मेरे रसीले होठो को चूसने लगा। हम दोनों अंगन में गीली जमीन पर ही लेटे हुए थे और मेरा देवर तेजस जोर जोर से मेरे ओंठ पीने लगा। सायद आज होली के दिन वो मुझे चोदना चाहता था। मुझे भी अच्छा लग रहा था, इसलिए मैंने भी कुछ नही कहा और देवर के होठों का चुम्बन लेती रही। इस तरह १० मिनट हो गये और हम दोनों की गर्मी बढ़ गयी।

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“भाभी…आज मुझे तुम्हारी चूत चाहिए। आज होली है देखो मना मत करना!!” मेरा देवर बोला

अंदर से मेरा भी चुदने का मन कर रह था।

“देवर जी..तुम मुझे चोद लो लेकिन कहीं तुम्हारे भैया ना देख ले!!” मैंने कहा

तेजस भागकर गया और दरवाजा बंद कर आया। अब हम दोनों के बीच में कोई नही था। देवर की आँखों में सिर्फ और सिर्फ वासना भरी हुई थी। आज होली के दिन वो मेरी चूत के साथ अपने लौड़े से होली खेलना चाहता था। देवर से एक बड़ी सी बाल्टी में नीला रंग घोला और मेरे उपर डाल दी। फिर मैंने भी ऐसा ही किया। मैंने भी पूरी १ बाल्टी देवर पर डाल दी। हम दोनों के चेहरे बिल्कल नीले और बंदर जैसे हो गये थे। देवर से मुझे आँगन में ही पकड़ लिया और मेरे रसीले होठो पर किस करने लगा। मेरे होठ भी गहरे नीले रंग में रंग गये थे। हम दोनों आंगन में खड़े थे और देवर ने मेरी पतली सेक्सी कमर को पकड़ रखा था और मेरे होठो को चूसे जा रहा था। इधर मुझे भी बहुत मजा मिल रहा था।

धीरे धीरे मेरे देवर तेजस ने मेरी गीली साड़ी निकाल दी। अब मैं सिर्फ ब्लाउस पेटीकोट में आ गयी थी। देवर ने मुझे कसकर पकड़ लिया और सीने से लगा लिया। वो मेरे जिस्म को हर जगह छूने लगा जैसे मैंने उसकी औरत हूँ।

“भाभी…आज मैं तुमको कसके चोदूंगा.” देवर बोला

“देवर जी..आज आपको फुल छूट है। तुम मुझे आज कसके चोद लो!!” मैंने कहा

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उसके बाद देवर ने मेरे चेहरे की ठुड्डी को पकड़ लिया और १५ मिनट तक मेरे रसीले होठ चूसता रहा। दोस्तों आज मैं एक गैर मर्द से चुदने वाली थी। रोज अपने पति का लंड खाती थी पर आज देवर का लंड खाने वाली थी। देवर के हाथ मेरे ब्लाउस पर पहुच गये थे और वो मेरे कसे कसे दूध दबा रहा था। मेरे रसीले होठ जो की अभी होली के रंग से नीले हो गये थे उसे चूस रहा था। मुझे भी बहुत आनंद आ रहा था। मेरा देवर मेरे होठो को बिना रुके चूसे ही जा रहा था। हम दोनों घर के आंगन में खड़े होकर ही रोमांस कर रहे थे। देवर के हाथ मेरे कसे कसे दूध को दबा रहे थे। मैं “..हाईईईईई.. उउउहह.. आआअहह”बोलकर चीख रही थी। मैंने देवर के गले में अपने दोनों हाथ डाल दिए थे और हम दोनों ही आँखें बंदकर एक दूसरे के होठ चूस रहे थे।

देवर के हाथ मेरी चूचियों को ब्लाउस के उपर से ही दबा रहे थे। बड़ा मजा आ रहा था दोस्तों। बड़ी देर तक देवर मेरे नीले रंग में रंगे होठ चूसता रहा और मजा लेता रहा। फिर उसने मुझे आंगन के फर्श पर लिटा दिया और मेरे भीगे ब्लाउस की बटन खोलने लगा। मेरा कजेला तो धकर धकर कर रहा था। आखिर देवर ने मेरा ब्लाउस खोल दिया और ब्रा भी निकाल दी। मेरे २ बेहद खूबसूरत गोरे गोरे मम्मो देवर के सामने थे। उसे मस्ती सूझी। उसने अपनी पैंट की जेब से एक हरे रंग की पुडिया निकाली और फाड़ने लगा।

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