हवस भारी मा की चुदाई के प्लान की हॉट कहानी

ही फ्रेंड्स, ई’म निखिल फ्रॉम मुंबई. आंड तीस इस मी फर्स्ट स्टोरी इन देसी कहानी. चलिए अब स्टोरी स्टार्ट करते है. फ्रेंड्स मेरी हिन्दी थोड़ी कमज़ोर है इसीलिए कही ग़लत हो गया तो ज़रूर माफ़ करना.

हम मुंबई के एक एरिया में रहते है और हम घर में 5 मेंबर्ज़ रहते थे. वो है पापा, मम्मी, मैं और मेरे दो दीदी. डीडियों की शादी हो गयी थी, इसीलिए वो दोनो अपने-अपने हज़्बेंड के साथ अलग स्टेट में सेटल्ड है.

अब हम घर पे सिर्फ़ 3 लोग बच गये मैं, मों आंड दाद. मेरे पापा एक गवर्नमेंट सर्वेंट है, और उनकी ड्यूटी ऐसी है, की हर 8-10 मंत्स में ट्रान्स्फर होते रहते है. इसीलिए घर में मैं और मम्मी ही रहते थे.

पापा महीने में 2 या 3 बार घर आते थे. मैं 1स्ट्रीट एअर के एग्ज़ॅम की तैयारी कर रहा था. इसीलिए घर में रह कर पढ़ाई करता था. मेरे पास मोबाइल नही था. मुझे ग़मे खेलनी और फ्रेंड्स के साथ बात करनी होती थी, तो मैं मम्मी का मोबाइल ही उसे करता था.

मैने पापा और मम्मी को बहुत बार पूछा था मोबाइल के लिए. लेकिन उन्होने कहा की 1स्ट्रीट एअर पास करने के बाद नया मोबाइल लेलो, और तब तक मत पूछो. इसीलिए मैं भी चुप था. आप सोच रहे होंगे ये मोबाइल के बारे में इतना क्यू बोल रहा है. लेकिन ये कहानी में मोबाइल का ही मैं टॉपिक है, इसीलिए मोबाइल के बारे में इतना बोलना पद रहा है.

ये स्टोरी की हेरोयिन मेरी मम्मी है. उसका नाम सरिता है. मम्मी कलर में वाइट है. ये कहानी तब घाटी थी जब मम्मी की आगे 47-48 होगी. मेरी मम्मी का फिगर है 36-34-40.

हा फ्रेंड्स, बहुत फिट है मम्मी का फिगर. वो मोटी तो नही है, लेकिन बूब्स और गांद ज़्यादा ही बड़ी है. मम्मी घर में सॉफ्ट मेटीरियल कॉटन की सारी पहनती है, और किसी मॅरेज ओर फंक्षन में सिल्क की सारी पहनती है. इसके अलावा सलवार-कमीज़, निघट्य, ऐसे कपड़े मम्मी कभी नही पहनती.

मेरी मम्मी की एक फ्रेंड थी उसका नाम रीता था. वो हमारी नेबर थी. मम्मी और उसकी बहुत क्लोज़ फ्रेंडशिप थी. मम्मी आंटी के घर जाती थी, और आंटी हमारे घर आती थी, और बहुत देर तक दोनो बातें करते थे.

रोज़ वो दोनो मिल कर बहुत बातें करते थे. इतने में आंटी के कोई रिलेटिव की शादी थी देल्ही में, इसीलिए आंटी और उसका परिवार देल्ही निकल गये. आंटी ने मम्मी को बताया था, की रिटर्न आने में उनको 15 दिन लगेंगे लगभग. इसीलिए मम्मी उदास थी.

ऐसे दिन जेया रहे थे. एक दिन मम्मी मार्केट जेया रही थी. मैं मेरे रूम में पढ़ाई कर रहा था. तब मम्मी बोली-

मम्मी: बेटा तू पढ़ाई करते रहना, मैं तोड़ा बेज़ार जाके कुछ वेजिटेबल्स लेके आती हू.

मैने हा बोला और मम्मी घर से निकल गयी. फिर मैं डोर लॉक करके अंदर आ गया. मैने अंदर आते ही टेबल पर देखा तो मम्मी मोबाइल छोढ़ कर गयी थी और मैं भी खुश हो गया, क्यूंकी ग़मे खेलने को मोबाइल मिल गया था.

मैं मोबाइल लेकर मेरे रूम में गया. फिर मोबाइल ओं किया ग़मे खेलने के लिए. इतने में Wहत्साप्प का स्टेटस देखने को Wहत्साप्प ओं किया, तब मैने देखा उसमे रीता आंटी और मम्मी के मेसेजस थे. मेरी तब तक मम्मी के बारे में कोई गंदी नज़र नही थी, और मैं मम्मी को गंदी नज़र से देखता भी नही था.

उन दोनो की छत पढ़ने के बाद मम्मी के बारे में मेरे दिमाग़ में भी कुछ अलग ही घूमने लगा. तो चलिए फ्रेंड्स देखते है क्या थी उन दोनो की छत में.

रीता: ही.

मम्मी: ही.

रीता: कैसी है?

मम्मी: ऐसी ही हू, तू कैसी है?

रीता: हा बढ़िया.

मम्मी: तू तो बढ़िया ही रहती है, बगल में ही रहता है तेरा पति.

रीता: ह्म यार, नही सुनता है वो मेरी बात, और रोज़ 2 बार तो करता ही है.

मम्मी: तुम चुप हो जाओ रीता, मेरा दिमाग़ खराब मत करो.

रीता: क्यूँ क्या हुआ?

मम्मी: फिर क्या, इधर मैं रोज़ बैंगन डाल के शांत करती हू, और तू उधर मज़ा कर रही है.

रीता: तो क्या हुआ, तू भी करले ना.

मम्मी: कैसे करू? पता है ना तुझे मेरे पति घर में कब रहते है, और घर आए तो भी कुछ नही करेगा.

रीता: ह्म, इसीलिए मैने तुझे कितनी बार कहा है, लेकिन तू नही मान रही है मेरी बात.

मम्मी: कों सी बात? वही डॉक्टर की बोल रही है ना तू?

रीता: ह्म, एक बार जाके देखो, कुछ नही होगा.

मम्मी: नही-नही, मुझे ये सब नही चलेगा.

रीता: अर्रे सुन सरिता, तुम एक बार उसको पता लो. बाद में तुम कभी नही छ्चोढोगी उसको.

मम्मी: क्या? ऐसा क्या है उसमे?

रीता: हा पूछो कैसा है, उसके पास चीज़ ऐसी है. बहुत मोटा और लंबा लंड है उसका. एक बार तेरी छूट में गया, तो देख मज़ा बाद में.

मम्मी: तू तो बहुत बिगड़ गयी है. कितनी बार गयी थी डॉक्टर के पास?

रीता: मेरा छ्चोढ़, मैं तो बहुत बार गयी हू. लेकिन मेरे पति को डाउट आने लगा, इसीलिए मैने उसके वाहा जाना स्टॉप कर दिया. इसीलिए बोल रही हू, तू ट्राइ कर.

मम्मी: अछा ये तो बता कैसे ट्राइ करना है?

रीता: पेशेंट बन कर जाओ, और खुद ट्राइ करके परता लो. हा एक बात, उसको बड़ी गांद वाली औरत ज़्यादा पसंद है. वो मुझे छोड़ते वक़्त बोला था. मुझे अभी तक याद है. तेरी गांद तो कमाल की है. वो तुझे बहुत छोड़ेगा. लेकिन तू कोशिश करके पत्ता ले उसको.

मम्मी ( मम्मी आंटी की बात सुन कर हस्ती है): हाहहाहा.

रीता: सरिता कितने दिन तू बैंगन डालती है. तेरा पति भी नही रहता तेरे साथ. उसको पता भी नही चलेगा. इसीलिए बोल रही हू डॉक्टर ही करेक्ट है तुझे. क्यूंकी किसी को डाउट भी नही आता, अगर तुम डॉक्टर के गये हो तो. इलाज के लिए गयी है ऐसा सोचते है लोग भी.

मम्मी को भी आंटी की बातें सही लगी.

मम्मी: चलो ठीक है रीता. कल जाके ट्राइ करती हू. क्या करता है तेरा डॉक्टर देखते है.

तब चाटिंग एंड होती है.

मेरा तो उन दोनो की चाटिंग पढ़ने के बाद लंड खड़ा हो गया था. मैं झट से बाथरूम जाके फर्स्ट टाइम मम्मी की ब्रा और पनटी सूंघने लगा, और पनटी चाटने लगा.

फाइनली मैं मास्टरबेट करके वापस रूम में आके पढ़ाई करने लगा. मैं रोज़ मूठ मारता था, लेकिन आज फर्स्ट टाइम मम्मी को सोच के और मम्मी की ब्रा और पनटी में मूठ मारी थी. इतना मज़ा आया, फ्रेंड्स पूछो मत.

नेक्स्ट दे मॉर्निंग मैने नाश्ता किया. फिर पढ़ाई करने रूम में बैठा था. तब मम्मी बोली-

मम्मी: निखिल बाहर मत जेया आज.

निखिल: क्यूँ मा?

मम्मी: हॉस्पिटल जाना है बेटा.

मुझे पता था मम्मी हॉस्पिटल क्यूँ जेया रही थी, लेकिन फिर भी मैने पूछा-

निखिल: क्यूँ मा, क्या हुआ है आपको?

मम्मी: कुछ नही बेटा, थोड़ी उदास लग रही हू इसीलिए.

मैने हा बोला, और मम्मी नहाने गयी. फिर मम्मी ने लाइट ब्लू कलर की ब्लाउस पहनी थी अंदर, येल्लो कलर का पेटिकोट, और लाइट ब्लू कलर की कॉटन सारी. सारी फ्लवर प्रिंटेड थी. बाहर धूप ज़्यादा थी, इसीलिए मम्मी ने फेस कवर करने के लिए एक रुमाल( स्कार्फ) बाँध लिया, और हाथ में एक प्लैइन वाइट कलर का हॅंडकरचीफ लिया.

मम्मी कभी घर से बाहर निकलती है, तो उसके हाथ में एक हॅंडकरचीफ रहता ही है. फिर हम दोनो घर से निकल गये. चलते-चलते ही हम आंटी ने जो बताया था, उस क्लिनिक पर पहुँच गये. वो क्लिनिक हमारी नेक्स्ट कॉलोनी में था.

वो छ्होटा सा क्लिनिक था. बाहर पेशेंट को वेट करने को एक रूम और अंदर डॉक्टर की कॅबिन थी. हम क्लिनिक के अंदर गये. क्लिनिक टोटली खाली था, और अंदर कोई नही था. मैने जाके अंदर डॉक्टर की कॅबिन में देखा तो वाहा भी कोई नही था.

वाहा सिर्फ़ एक बेड था, जहा डॉक्टर पेशेंट का चेकप करते है, और एक टेबल एक डॉक्टर की चेर थी. टेबल की आयेज दो चेर्स थी. मैं फिर आके मम्मी के पास बैठ गया. मैं और मम्मी डॉक्टर आने का वेट कर रहे थे.

15 मिनिट के बाद एक 35-40 आगे का आदमी आया, और हमे देखते हुए अंदर डॉक्टर की कॅबिन में गया. अंदर जाते ही उन्होने आवाज़ दी-

डॉक्टर: अंदर आइए.

तब हमे पता चला वही डॉक्टर था. डॉक्टर तो बहुत हॅंडसम था. फिर हम दोनो अंदर गये. डॉक्टर ने हमे बैठने को कहा. मैं और मम्मी दोनो जाने चेर पर बैठ गये.

फिर डॉक्टर ने हमे देखते ही पूछा: जी बोलिए क्या प्राब्लम है?

मम्मी: डॉक्टर साब मुझे दो दिन से बहुत पाईं हो रही है पेट में. और मैं बहुत उदास फील कर रही हू.

डॉक्टर: अछा, फिर ज्या प्राब्लम है?

मम्मी: डॉक्टर थोड़ी बुकर आने जैसा लग रहा है.

( मुझे सब पता था मम्मी आक्टिंग कर रही थी. उनके इधर आने के इरादे ही अलग हे, फिर भी मैं चुप बैयटा था)

ड्र: चलिए चेक करते है.

डॉक्टर ने मम्मी को टेबल पर लेटने को कहा, और मम्मी जाके टेबल पर लेट गयी. मम्मी ने फेस कवर कर लिया था और दुपट्टा ओपन करके मेरे हाथ में दे दिया.

फिर डॉक्टर ने मम्मी का ब्प चेक किया और बोला-

डॉक्टर: ब्प तो नॉर्मल है.

(मैं मॅन में ही हास रहा था, और सोच रहा था, की सब नॉर्मल है, लेकिन छूट गरम है. तुम वाहा चेक करोगे तो इलाज ठीक होगा.)

डॉक्टर: मेडम शुगर है क्या आपको?

मम्मी: नही डॉक्टर.

डॉक्टर ने फिर स्टेतस्कोप लिया मम्मी की हार्टबीट चेक करने को. उसने वो मम्मी के बूब्स पर रखा और 2-3 बार बूब्स पर और बूब्स की साइड पर दबाया स्टेतस्कोप से. फिर डॉक्टर ने स्टेतस्कोप को मम्मी क्स पेट पर रखा और दबाने लगा.

ड्र: यहा पाईं है?

मम्मी: तोड़ा नीचे.

ड्र: यहा?

मम्मी: और तोड़ा नीचे डॉक्टर.

अब स्टेतस्कोप मम्मी की नाभि के नीचे था.

ड्र: यहा?

मम्मी: हा डॉक्टर साब.

डॉक्टर स्टेतस्कोप छ्चोढ़ के मम्मी के पेट को हाथ से दबा-दबा के चेक करने लगा. 2-3 मिनिट्स उसने पेट दबाया, फिर डॉक्टर ने मम्मी को बोला-

डॉक्टर: मेडम आपको फुड इन्फेक्षन हो गया लगता है. इसीलिए कुछ मेडिसिन लिख कर देता हू, ले लीजिएगा.

मम्मी ने हा बोला, और टेबल से उठने लगी. इतने में डॉक्टर ने बोला-

ड्र.: उठो मत मेडम, इंजेक्षन लगा देता हू.

मम्मी: इंजेक्षन?

ड्र: हा.

मम्मी: नही डॉक्टर, इंजेक्षन से मुझे दर्र लगता है. टॅब्लेट्स डेडॉ बस.

ड्र: नही मेडम, इंजेक्षन ज़रूरी है.

ऐसा बोल कर डॉक्टर ने कर्टन डाल दिया, और मुझे अंदर का सीन कुछ भी नही दिख रहा था. लेकिन मैं उन दोनो की बात ठीक से सुनता रहा.

ड्र: पेटिकोट ढीला करके लेतो.

मम्मी: हाथ में लगा दो ना डॉक्टर साब

ड्र: हाथ में लगाया तो दो दिन हाथ उठने को नही होगा. आपको पाईं ज़्यादा होती है हाथ में, इसीलिए कमर पे लेलो.

फिर 2 मिनिट तक कोई आवाज़ नही आ रही थी अंदर से. मैं सोच रहा था, की क्या हो रहा था अंदर. इतने में एयाया एयाया सस्स्स्स्सस्स सस्स्स्सस्स ऐसी आवाज़ आई मम्मी की. मैं समझ गया, की डॉक्टर ने इंजेक्षन लगा दिया था मम्मी को.

फिर डॉक्टर कर्टन खोल के बाहर आ गया. डॉक्टर ने आके चेर पर बैठ के कुछ मेडिसिन्स लिखी. उतने में मम्मी सारी ठीक करते हुए कर्टन से बाहर आ गयी. डॉक्टर ने मम्मी को प्रिस्क्रिप्षन लेटर दिया, और टाइम तो टाइम मेडिसिन लेने को कहा. फिर हम घर आ गये.

ऐसे ही दिन जेया रहे थे. मैं रोज़ मम्मी के कपड़े में मूठ मारता था. कभी-कभी पेटिकोट और सारी को मेरे लंड पे लगा के रग़ाद लेता था. इसमे मम्मी की कॉटन की सारी बहुत सॉफ्ट होती थी. वो सारी को लंड से रगड़ने में बहुत मज़ा आता था मुझे.

फिर मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया. मैं और मम्मी हॉस्पिटल जाके 4 दिन हो गये थे. इसके बारे में मम्मी ने आंटी को बताया होगा, लेकिन ये मुझे जानने के लिए मम्मी का मोबाइल लेना था.

उसमे उन दोनो की छत देख के तो पता चलना था, की दोनो ने क्या डिसकस किया था. फिर मैं मम्मी को ढूँढने लगा घर में. मम्मी किचन में काम कर रही थी. मैने मम्मी को बोला-

निखिल: मम्मी मैं मेरे फ्रेंड किशोर के घर जाके आता हू.

मम्मी: क्यूँ? खाना खा के जाना.

निखिल: नही मा, मैं बाद में खाता हू, कुछ नोट्स लेने है.

मम्मी: ठीक है, जल्दी आना

निखिल: जी मा. मम्मी मैं तुम्हारा मोबाइल लेके जाता हू.

मम्मी: क्यूँ बेटा?

निखिल: नेट से नोट्स डाउनलोड करने है ना इसलिए.

मम्मी: ठीक है बेटा ले जेया, और जल्दी आजा.

मम्मी को पता नही था, की उसके और रीता आंटी के मेसेजस मैने देखे थे. इसीलिए उन्होने मुझे मोबाइल लेके जाने को हा बोल दी थी. फिर मैं मोबाइल लेके घर से निकला, और एक पार्क में जाके बैठ गया.

उसके बाद Wहत्साप्प ओपन करके रीता आंटी और मम्मी की चाटिंग पर क्लिक किया. उफ़फ्फ़! आप ही देखो दोस्तों अब कैसी थी उन दोनो की छत.

मम्मी: ही रीता.

रीता: ही सरिता, कैसी हो?

मम्मी: ठीक हू.

रीता: क्या हुआ? गयी थी क्या डॉक्टर के पास?

मम्मी: हा कल गयी थी.

रीता: क्या हुआ? क्या किया डॉक्टर ने?

मम्मी: तेरी बात सुन कर कुछ नही करना अब आयेज.

रीता: अर्रे हुआ क्या, बता ना?

मम्मी: आचे आदमी है वो डॉक्टर. उसका नाम खराब करने वाली है तू.

रीता: देख सरिता हुआ क्या है, वो बता पहले.

मम्मी: कुछ नही हुआ, और उसने कुछ नही किया.

रीता: मतलब तुझे कुछ नही किया डॉक्टर ने?

मम्मी: हा.

रीता: अकेली गयी थी?

मम्मी: नही निखिल और मैं गये थे.

रीता: क्या? मेंटल है क्या तू? अकेली जाना था ना. तेरे साथ तेरे बेटा होगा, तो वो क्या करेगा तुझे.

मम्मी: दर्र लगता है मुझे, इसीलिए उसको लेके गयी थी.

रीता: आओ छ्चोढो, क्या हुआ डॉक्टर के साथ वो तो बता.

मम्मी: कुछ नही यार, पेट में दर्द बोला था मैने. डॉक्टर ने चेकप किया, और एक इंजेक्षन लगाया. बस इतना ही हुआ.

रीता: इंजेक्षन कहा लगाया?

मम्मी: कमर पे.

रीता: अछा. इंजेक्षन लगते वक़्त सारी कितनी नीचे की थी?

मम्मी: सिर्फ़ थोड़ी.

रीता: पागल है तू पक्का.

मम्मी: क्यूँ.

रीता: इंजेक्षन लगते वक़्त तो सारी पेटिकोट नीचे करके तेरी बड़ी गांद के दर्शन करवाने थे ना. तेरी गांद देख के वो कुछ ना कुछ तो करता था.

मम्मी: वो सॉरी रीता मुझे समझ में नही आया, की क्या करू.

रीता: पागल है तू. सुनो सरिता, अब तेरी उमर देखो. ऐसे ही 1 या 2 बरस में 50 की हो जाएगी. अभी मेरी बात ठीक से सुनो, फिर डॉक्टर के पास जाओ. कुछ भी करो, और उसको पत्ता लो. और तेरे अंदर की आग को डॉक्टर के लंड से शांत कर लो.

मम्मी: चलो देखते है. नेक्स्ट वीक हज़्बेंड आने वाले है, उनके जाने के बाद जाती हू.

रीता: हा सुनो और एक बात. इस बार निखिल को छ्चोढ़ के जाना.

मम्मी: ठीक है.

फिर छत एंड होती है मम्मी और आंटी की. मुझे आंटी के उपर बहुत गुस्सा आ रहा था, क्यूंकी आंटी मुझे छ्चोढ़ कर जाने को बोल रही थी मम्मी को. फिर मैं घर आके खाना खा के सो गया.

कैसे लगी दोस्तों मेरी पहली स्टोरी? आयेज क्या होता है, ये कहानी मैं नेक्स्ट पार्ट में लिखूंगा. तब तक आप ये स्टोरी के कॉमेंट्स मुझे मेरे हणगौट पर भेज सकते है. मेरी हणगौट ई’द है:

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