Hindi Porn Kahani हरामी बलमा

मैं नंदिनी, उमर 18 देसी साल, 12 क्लास में पढ़ती हूँ. मेरे पिता जी बिज़्नेसमॅन हैं और काफ़ी अमीर हैं. घर में मा के अलावा एक छ्होटा भाई है जो कि बस 10 साल का है. मेरी मा उमा देवी की उमर 38 साल की है और वो एक भरपूर सेक्सी औरत है. पिताजी, राम शर्मा सारा दिन पैसे बनाने में लगे रहते हैं और उनके दोस्त मा के साथ खूब मौज कर लेते हैं. मेरा छ्होटा भाई राजू पड़ोस के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने चला जाता है, पापा दुकान पर और मैं पढ़ने लग जाती हूँ तो मा पापा के दोस्तों से चुदाई करवाती है. एक दिन बारिश हो रही थी और राजू खेलने नहीं गया. वो मुझे परेशान कर रहा था तो मैं उसस्की शिकायत करने मा के कमरे में चली गयी.

कमरा बंद था. मैं डोर खोलने ही लगी थी कि मुझे मा की चीख सुनाई पड़ी.”उईईइ धीरे से करो असलम भाई, अब फाड़ ही डालो गे मेरी चूत को?एक तो आपका है ही इतना मोटा और दूसरा आप ऐसे चोद रहे है के जैसे मैं कहीं भागी जा रही हूँ. केयी बारी सोचती हूँ के आपकी पत्नी कितनी खुशकिस्मत है जिस्सको रोज़ आपका लंड मिलता है चोदने के लिए. हमारे तो शर्मा साहिब हफ्ते में एक बार चोदने के लिए लंड खड़ा करते हैं और वो भी 4 इंच का. भाई मुझे तो आप जैसा 8 इंच का ही संतुष्ट करता है. है असलम भाई, अब पेल दो सारा, भाईजान कैसा ज़ालिम लंड है आपका. काश मैं आपकी बीवी बन के रह सकती!”

मैं ठिठक गयी और डोर में से झाँकने लगी. मा पलंग पर टाँगें खोल कर पैर अप्पर उठा कर नंगी लेटी हुई थी और असलम अंकल मा की जांघों के बीच खड़े हो कर अपने मोटे काले लंड को मा की चूत में पेल रहे थे. मेरी मा बहुत गोरी है और उसस्के चूतड़ काफ़ी भारी हैं और चूची भी बहुत बड़ी है. मुझे तो चक्कर आने लगे. असलम अंकल अपनी गांद आगे पीच्छे करते हुए मा को चोद रहे थे और झुक कर मा की चुचि चूस रहे थे. कमरे में वासना का तूफान उमड़ रहा था. मा बेशर्मी से बकने लगी, ” ज़ोर से चोद असलम भाई, मस्त कर दे मुझे”

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मुझ से अब और नहीं देखा जा रहा था. मेरे जिस्म में एक आग जलने लगी, मेरी चूत में खलबली मचने लगी. मेरी चूत में एक अजीब सी खुजली होने लगी, दिल धक धक करने लगा और मेरी पॅंटी मेरी चूत से निकलने वाले जूस से भीग गयी. मुझे चुदाई के बारे पता तो था लेकिन आज पहली बार अपनी ही मा को चुदते देखा था और वो भी असलम अंकल के साथ जो कि मा को बाजी कह कर पुकारते थे. मैं अपने कमरे में भाग गयी. राजू वहाँ खेल रहा था.

थोड़ी देर में बारिश रुकी और बाहर का डोर खुला और असलम अंकल चले गये. तभी राज शर्मा जिसे प्यार से सब राजा कहते थे , गली का एक लड़का जो कि राजू के साथ खेलता था, राजू को बुलाने आया. राजा मेरी उमर का होगा या फिर एक दो साल छ्होटा. जब उसने मुझे देखा तो मेरी छातियाँ उतेज्ना वश उप्पेर नीचे हो रही थी. राजा की नज़र बरबस मेरी उभरी हुई चुचि पर चली गयी. जिस तरह वो मुझे देख रहा था लगता था कि मुझे अपनी आँखों से नंगी कर रहा हो. मेरी नज़र भी उसकी पॅंट के सामने वाले हिस्से पर चली गयी, जहाँ से उभार साफ दिखाई दे रहा था. उसने अपने लंड को पॅंट के उप्पेर से मसल दिया और बोला” राजू को बाहर भेजना ज़रा. हमे को क्रिकेट खेलने जाना है.” मैने भी उसको पटाने के लिए बहाना ढूंड लिया और मुस्कुराती हुई बोली,” तुम मेरा एक काम करोगे क्या? मेरे रूम का बल्ब फ्यूज़ हो गया है, तुम प्लीज़ चेंज कर देना, राजा भैया!” पहले तो वो खुश हुआ लेकिन जब मैने उसको भैया बोला तो उसका मूह लटक गया.

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“हां क्यो नहीं नंदिनी, मैं कुच्छ ही देर में आता हूं. अगर और भी काम हुआ तो कर दूँगा,” कहते हुए राजा मेरे भाई को ले कर चला गया. अब मैने राजा को पटाने की स्कीम बना डाली. सब से पहले तो मा को बाज़ार भेज दिया. फिर अपनी कमीज़ उतार कर नीचे से ब्रा उतार डाली और उप्पेर से पारदर्शी कुरती पहन ली. मेरी कुरती से मेरी चुचि सॉफ झलक रही थी. पतला सा कपड़ा भी मेरी चुचि को स्पर्श करता तो बहुत उतेज्ना से भर जाता मेरा बदन. उतेज़ित हो कर मैने अपनी चुचि को ज़ोर से भीच लिया और मेरा बदन मस्ती से भर उठा. फिर मैने सलवार उतार कर एक निकर पहन ली जिससे मेरी टाँगों का अधिक हिस्सा दिख रहा था. उसके नीचे मेने पॅंटी नहीं पहनी थी. चूत गरम हो रही थी और चूत की फाँकें फूली हुई थी. मैं राजा का इंतज़ार करने लगी.

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