हाय राम… इतना मोटा लंड

बहुत ही खूबसूरत जैसे कोई अप्सरा ! शरीर का एक एक अंग जैसे किसी सांचे में ढाला गया हो। जो एक बार देखे तो बस उसी का होकर रह जाए। गोरा-चिट्टा रंग, लम्बा कद, दिल को हिला देने वाली मस्त मस्त चूचियाँ, पतली कमर और फिर शानदार गोल गोल गाण्ड जैसे भगवान ने दो चिकने घड़े लगा दिए हों। नीलिमा नाम है उसका।

बात तब की है जब मेरी तबादला दिल्ली से करनाल हरियाणा में हो गया। करनाल मेरा देखा-भाला शहर था। मेरे कुछ मित्र भी पहले से ही यहाँ रहते थे। मैं कुछ दिन वहाँ गेस्टहाउस में रहा और फिर एक किराए का कमरा ले लिया। आपको बता दूँ करनाल में मेरे भाई की ससुराल भी है। भाभी के घर वालों ने बहुत जोर लगाया कि मैं उनके घर पर रुक जाऊँ पर मुझे यह ठीक नहीं लगा क्योंकि मेरी जॉब घूमने फिरने की थी और फिर मेरा आने-जाने और खाने-पीने का कोई वक्त नहीं था।

आखिर कमरा लेने के बाद जिन्दगी अपनी गति से चलने लगी। जैसे कि आपको पता ही है कि दिल्ली में तो मेरे मज़े थे। मस्त चूत चोदने को मिल रही थी। मज़ा ही मज़ा था। पर जब से करनाल आया था चूत के दर्शन ही नहीं हुए थे। एक बार मेरे एक दोस्त चूत का इंतजाम किया भी पर वो मुझे पसंद नहीं आई क्योंकि रंडी चोदना मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं। अपनी तो सोच है कि शिकार करके खाने में मज़ा ही कुछ और है।

ऐसे ही एक महीने से ज्यादा गुज़र गया। अब मुझ से रहा नहीं जा रहा था और मेरी आँखें अब सिर्फ और सिर्फ चूत की तलाश में रहती। तभी मेरी भाभी अपने मायके में आई तो उसने मुझे भी बुला लिया। मैं जाना तो नहीं चाहता था पर फिर जब उसने ज्यादा जिद की तो मैं शाम को चला गया।

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मैंने जाकर घण्टी बजाई तो उस क़यामत ने दरवाज़ा खोला जिसका नाम नीलिमा है। उसको देखा तो मैं देखता ही रह गया। नीलिमा ने मुझे दो बार अंदर आने को कहा पर मैं तो जैसे किसी जादू में बंध गया था बस एकटक उसी को देख रहा था। उसकी मोहक हँसी से मैं जैसे स्वपन से बाहर आया। वो मेरी तरफ देख कर हँस रही थी। मैं झेंप गया। मेरी भी हँसी छूट गई।

मैं पहले भी भाभी के मायके आया था पर मैंने इस क़यामत को पहले कभी नहीं देखा था। वो बिल्कुल अनजान थी मेरे लिए।

वो मुझे बैठा कर अंदर चली गई और मैं बैठा सोचता रहा कि आखिर यह है कौन?

तभी भाभी और उसकी मम्मी आई और फिर बातों का सिलसिला चल निकला। कुछ देर बाद वो चाय नाश्ता लेकर कर दुबारा आई। जैसे ही मेरी उससे नज़र मिली मेरी हँसी छूट गई तो जवाब में वो भी हल्के से मुस्कुरा दी। कुछ देर बाद मौका मिलने पर मैंने उसके बारे में भाभी से पूछा तो उसने बताया कि वो उसके चाचा के लड़के की पत्नी है। मैंने तारीफ की और बात आगे चली तो उसने बताया कि वो तनहा है क्योंकि उसका पति करीब एक साल से इटली गया हुआ है और वही काम करता है।

करनाल आने के बाद पहली बार किसी के लिए दिल की धड़कनें तेज हुई थी। भाभी ने मुझे रात को अपने घर पर ही रोक लिया। रात को खाना खाने के बाद सब लोग बैठ कर बातें करने लगे तो नीलिमा भी हमारे पास आ कर बैठ गई। फिर जो हँसी मजाक शुरू हुआ तो समय का पता ही नहीं लगा। नीलिमा की खिलखिलाती हँसी हर बार मेरे दिल के तारों को झंझोड़ देती। मन में बार बार उसके पति के लिए गाली निकल रही थी कि इतनी खूबसूरत बीवी को छोड़ कर वो इटली क्या माँ चुदवाने गया है?

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जैसे मैं नीलिमा की तरफ आकर्षित हो रहा था तो मुझे वो भी अपनी तरफ आकर्षित होती महसूस हुई क्योंकि अब हमारी नजरें एक दूसरे से बार बार टकरा रही थी, यह मेरे लिए शुभ संकेत था।

रात को बातें करते करते कब सो गए समय का पता ही नहीं चला। सुबह नीलिमा ने ही गर्मागर्म चाय के साथ गुड मोर्निंग बोला। जैसे ही मेरी नज़र नीलिमा से मिली तो उसने भी एक मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा। दिल की तड़प अब इतनी बढ़ गई थी कि दिल कर रहा था कि अभी बिस्तर पर खींच लूँ और चोद डालूँ पर अभी आम कच्चा था।

चाय देकर नीलिमा चली गई और मैं दरवाजे की तरफ देखता ही रह गया। जब वो जा रही थी तो मेरी नज़र उसके मटकते कूल्हों और बलखाती कमर से हट ही नहीं पाई।

करीब आधे घंटे के बाद नीलिमा एक बार फिर मेरे कमरे में आई और साफ़ तौलिया देकर बोली- नहा लो, नाश्ता तैयार है।

जब वो कह कर जाने लगी तो मैंने थोड़ा आगे बढ़ने की सोची और नीलिमा की तारीफ करते हुए कह ही दिया- नीलिमा…. तुम बहुत खूबसूरत हो !

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