गुस्साए स्टूडेंट ने टीचर की चुदाई की

हेलो दोस्तों, मैं नेहा अपनी सेक्स स्टोरी का नेक्स्ट पार्ट लेके आई हू. उमीद है आ सब ने मेरी कहानी का पिछला पार्ट पढ़ लिया होगा. जिन्होने पिछला पार्ट अभी तक नही पढ़ा है, वो उसको ज़रूर पढ़ ले.

पिछले पार्ट में आप सब ने पढ़ा की मेरी टीचर की सरकारी नौकरी लग गयी थी. फिर हमारे हेडमास्टर ने मुझे ट्रैनिंग के लिए शहर के एक कॉलेज भेजा, जहाँ मैने एंपी के बेटे संजय अवस्थी को थप्पड़ मार दिया.

बाद में मुझे पता चला की वो एंपी का बेटा था. कॉलेज प्रिन्सिपल ने जब बताया की उसका बाप मेरी जॉब खा जाएगा, तो मैं कुछ भी करने को रेडी थी जॉब बचाने के लिए. फिर संजय ने मुझे असेंब्ली में सब के सामने उससे माफी माँगने को कहा. अब आयेज-

अगली सुबा मैं टाइम पर कॉलेज असेंब्ली में पहुँच गयी. वहाँ संजय भी था. उसने मुझे स्टेज पर जाने का इशारा किया. मैं जल्दी से स्टेज पर गयी, और बोली-

मैं: स्टूडेंट्स, इंसान ग़लतियों का पुतला है. सब से ग़लती होती है. मुझसे भी हुई. लेकिन असली इंसान वो है, जो ग़लती करके उसको आक्सेप्ट करे, और उसकी माफी माँग ले. तो संजय बेटा, कल मैने क्लास के सामने जो तुम्हे थप्पड़ मारा, वो मेरी ग़लती थी. आज पुर कॉलेज के सामने मैं तुमसे अपनी ग़लती के लिए माफी मांगती हू. ई होप आप मुझे माफ़ कर दोगे.

मेरी ये बातें सुन कर सब तालियाँ बजाने लगे. फिर मैं स्टेज से नीचे आ गयी. उसके थोड़ी देर बाद जब मैं क्लास में गयी, तो वहाँ सिर्फ़ संजय बैठा था. मैने उसको देखा और पूछा-

मैं: बाकी सब कहाँ है?

संजय: वो नही है, सिर्फ़ मैं हू. और अभी तुम्हारा हिसाब बाकी है.

मैं: लेकिन मैने माफी माँग ली ना सब के सामने.

संजय: माफी तो माँग ली, लेकिन तुम्हारी बेइज़्ज़ती नही हुई. तुमने तो उल्टा तालियाँ बटोर ली. मुझ पर सब हास्से थे तुम्हारे थप्पड़ की वजह से, और मुझे एंबॅरसमेंट हुई थी. तुम्हे भी जब तक वैसा ही फील नही होता, मैं तुम्हे माफ़ नही करूँगा.

मुझे गुस्सा तो बहुत आया उसपे. लेकिन किसी भी ऐसी-वैसी हरकत से मेरी जॉब जेया सकती थी. इसलिए मैने उससे कहा-

मैं: तो अब क्या करना है.

संजय: अपने कपड़े उतरो.

मैं: क्या! ये क्या बकवास है.

संजय: अगर नौकरी बचानी है तो अपने कपड़े उतरो.

अब मुझे समझ नही आया की मैं क्या करू. ना कहने का तो ऑप्षन ही नही था मेरे पास. फिर मैने सोचा की आस-पास कोई नही था, तो कोई देखेगा भी नही. ये सोच कर मैं अपने कपड़े उतारने लगी.

मैने वाइट लेगैंग्स के साथ ब्लू कमीज़ पहना था. साथ में दुपट्टा था. सबसे पहले मैने दुपट्टा टेबल पर रखा. फिर मैने अपना शर्ट उतरा. अब उपर से मैं वाइट ब्रा में थी. मेरे बूब्स ब्रा में काससे हुए थे, और मस्त क्लीवेज बन रही थी. संजय बड़े ध्यान से मुझे देख रहा था.

फिर मैने अपनी लेगैंग्स निकली. अब मैं ब्रा-पनटी में थी. वो मुझे उपर से नीचे देख रहा था. फिर मैने बोला-

मैं: अब ठीक है?

संजय: अभी 2 कपड़े बाकी है.

फिर मैने धीरे-धीरे ब्रा और पनटी भी उतार दिए. मैं उसके सामने पूरी नंगी थी. अपने बूब्स को मैने अपनी बाजुओ से च्छूपा रखा था. टाँगों को जोड़ कर मैने छूट च्छुपाई हुई थी. मेरी आँखें नीचे थी, और मुझे बहुत बुरा लग रहा था.

तभी संजय मेरे पास आया. वो बिल्कुल मेरे करीब आके खड़ा हो गया और बोला-

संजय: देखा, अगर तुम खुद पर कंट्रोल रखती, तो आज तुम्हे ज़लील ना होना पड़ता. अब तुम्हे देख कर मुझसे कंट्रोल नही हो रहा.

जब तक मैं उसकी बात को समझ पाती, उसने मुझे खींच कर अपनी बाहों में भर लिया, और पीछे दीवार के साथ लगा लिया. मैने उसकी तरफ देखा, तो उसने मेरे होंठो से होंठ लगा दिए. अब वो पागलों की तरह मेरे होंठ चूसने लगा.

मैने उसको अपने से डोर करने की कोशिश की, लेकिन नही कर पाई. फिर वो किस करते हुए एक हाथ मेरी छूट पर ले गया, और उसको सहलाने लगा. इससे मेरे शरीर में कंपन्न होने लगा. तभी मेरे दिमाग़ में आया की अगर माना किया तो नौकरी जेया सकती थी, इसलिए मैने खुद को उसके हवाले कर दिया.

जब उसने देखा की मैने उसको हटाना बंद कर दिया, तो उसने मेरे होंठ छ्चोढे, और नीचे अपने घुटनो पर बैठ गया. उसने मेरी छूट पर हाथ फेरा, और उस पर अपना मूह लगा लिया. मैं बिल्कुल कुवारि थी, कभी किसी को किस भी नही किया था. जब वो छूट चाटने लगा, तो मेरे जिस्म में अजीब सी लहरें उठने लगी.

कुछ देर उसके चाटने पर मेरी छूट से पानी निकल गया. वो मेरा सारा पानी पी गया. फिर उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराया. मुझे समझ नही आया की वो क्यूँ मुस्कुरा रहा था.

उसके बाद उसने मुझे टीचर टेबल पर बिताया, और मेरी टाँगें खोल ली. फिर उसने अपनी पंत और अंडरवेर नीचे किए, तो उसका मोटा और लंबा लंड बाहर आ गया. मैने आज से पहले कभी किसी मर्द का लंड नही देखा था. उसको देख कर मुझे काफ़ी हैरानी हुई की इतना बड़ा होता है लड़कों का.

फिर संजय ने अपना लंड मेरी छूट पर रखा, और रगड़ने लगा. मेरी सिसकियाँ निकालने लगी. मुझे दर्र भी लग रहा था की इसमे दर्द होगा. उसके बाद संजय ने ज़ोर का धक्का मारा, और लंड मेरी छूट को चीरता हुआ आधा अंदर चला गया. मैं चिल्लाई, लेकिन संजय धक्के पे धक्का मारता गया. कुछ ही सेकेंड्स में उसका पूरा लंड मेरी छूट में समा गया.

मुझे बहुत दर्द हो रहा था. पूरा लंड अंदर घुसने के बाद संजय मेरे करीब आया, और मेरे कान में कहा-

संजय: दर्द हुआ ना? ऐसा ही दर्द मुझे भी हुआ था उस दिन.

फिर संजय लंड अंदर-बाहर करके मुझे छोड़ने लगा. पहले-पहले तो मुझे दर्द होता रहा. लेकिन फिर धीरे-धीरे मज़ा आने लगा. मैं आ आ करके चुड्ती रही, और वो मुझे छोड़ता गया. तकरीबन 15 मिनिट वो मशीन की तरह मेरी छूट में धक्के मारता रहा. फिर वो रुका और लंड बाहर निकाल कर बोला-

संजय: जल्दी नीचे बैठ.

मैं जल्दी से घुटनो के बाल उसके सामने बैठ गयी. फिर उसने लंड मेरे मूह में डाल दिया, और मूह की चुदाई करने लगा. कुछ ही पॅलो में उसने मेरे मूह को अपने माल से भर दिया. मुझे घिंन आ रही थी अब. फिर उसने लंड बाहर निकाला, और बोला-

संजय: माल बाहर नही आना चाहिया.

मैं उसका सारा माल निगल गयी. फिर उसने कपड़े पहने और जाते हुए बोला-

संजय: अब तुम्हारी सॉरी मैने आक्सेप्ट कर ली. बस एक चीज़ रह गयी.

मैं: क्या?

उसने मेरे मूह पर थप्पड़ मारा, और बोला: ये बाकी रह गया था.

फिर वो चला गया. मैने भी अपने कपड़े पहने, और वहाँ से आ गयी. अगले दिन मैं वहाँ से घर वापस आ गयी, और इस सब को भूल कर अपनी लाइफ दोबारा जीने लगी.

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