गर्लफ्रेंड की शादी पर उसकी बड़ी बहन चोदी

मेरा नाम प्रभात है. मेरी उमर 25 साल है. मैं दिखने में गोरा और हॅंडसम हू. मैने एक्सर्साइज़ करके अपनी अची ख़ासी बॉडी भी बना रखी है, जिसकी वजह से लड़कियाँ मेरे उपर मारती है.

पर मैं जिस लड़की से प्यार करता था, उसका नाम शिवानी था. वो दिखने में बहुत ही अची, और भोली-भाली लड़की थी. वो मेरे साथ ही मेरी कॉलेज में पढ़ती थी उसकी. उमरा भी लगभग मेरी जितनी ही थी, और वो दिखाने में गोरी-चित्ति और बहुत ही ज़्यादा सुंदर थी.

हम लोग देल्ही में रहते है. मैं और शिवानी दोनो कॉलेज के फर्स्ट एअर में मिले थे, और उसी वक़्त से दोस्त बने. उसके बाद हमने साथ में समय बिताना शुरू किया, और हमारे बीच सब कुछ होने लगा.

हम दोनो ने लगभग फाइनल एअर तक जाम कर मज़े किए, और उसके बाद शिवानी की शादी होने लगी, और शादी की तारीख आज ही थी. मैं उसकी शादी को लेकर बहुत ज़्यादा टेन्षन में था, क्यूंकी अब मेरे पास कोई और दोस्त थी भी नही. मैं अकेला हो गया था.

शिवानी की शादी किसी बड़े से मॅरेज हॉल में थी, तो मैं उस दिन शाम को गिफ्ट के साथ वहाँ पहुँच गया था. वहाँ पहुचने के बाद मैं शिवानी से मिला. उसके बाद मैने वहाँ पर एक बहुत ही खूबसूरत शादी-शुदा लड़की को देखा. उसकी शकल शिवानी की तरह ही दिख रही थी, परंतु वो दिखने में शिवानी से भी बहुत ज़्यादा खूबसूरत थी.

उसकी शादी हो चुकी थी. उसके साथ एक 2 साल का बच्चा भी था, और वो ल़हेंगा-चोली में इतनी ज़बरदस्त लग रही थी की मेरी नज़र तो उसे पर से हॅट ही नही रही थी.

मैं उसको लगातार घूर रहा था. तभी उसकी नज़र मुझ पे पड़ी, और उसके मुझे देखते ही ऐसा लगा जैसे वो पहचान गयी. वो मेरे तरफ स्माइल करती हुई आई, और मुझे हेलो कहा. मैने भी उसे हेलो कहा अंजान बनते हुए.

फिर उसने अपना परिचय बताया की वो साक्षी थी, शिवानी की बड़ी बेहन. फिर मुझे समझ आया साक्षी कभी-कभार बताती थी की उसकी एक बड़ी बेहन भी थी, जिसकी शादी हो चुकी थी. मैं शिवानी के होते कभी दूसरी लड़कियों की तरफ सोच ही नही पा रहा था, इसलिए इन्हे इग्नोर कर दिया था. पर अब देखने के बाद तो इस पर से नज़र ही नही हॅट रही थी.

साक्षी लगभग 28 या 29 साल की होगी, और दिखने में बहुत ही ज़्यादा गोरी सुंदर थी. उसके गाल सेब की तरह थे, और होंठ गुलाब के पंखुड़ियों के तरह. बदन भरा-पूरा, गड्राया हुआ था. मॅन कर रहा था की अभी बाहों में भर लू.

साक्षी काफ़ी मुझसे हस्स-हस्स के बातें कर रही थी. मुझे भी उससे बातें करते हुए बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा था. साक्षी ने मुझे बताया की शिवानी और साक्षी दोनो बहनो में काफ़ी अची दोस्ती थी, और वो दोनो एक-दूसरे की बातें शेर करती थी.

साक्षी मेरे बारे में बहुत ही अची तरीके से जानती थी, इसीलिए वो मुझसे इतनी खुल कर बातें कर रही थी. हम दोनो अब लगभग दोस्त ही हो गये. कुछ देर बात करने के बाद साक्षी बोली-

साक्षी: मैं थोड़ी देर में आती हू.

और वो जेया कर शादी में बिज़ी हो गयी. मैं बस उसे ही देख रहा था, और साक्षी भी मुझे बार-बार देख रही थी, और स्माइल दे रही थी. मैं बहुत ही ज़्यादा खुश था आज. आते समय मैं जितना ज़्यादा दुखी था, उतना ही ज़्यादा अब खुश था. मैने शिवानी की तरफ देखा, तो वो भी अपने पति को आज पा कर बहुत ही खुश थी.

लगभग 12:00 बजे तक शादी के सारे काम-काज ख़तम हो गये. सभी लोग सोने जाने लगे. तभी मैं तोड़ा टेरेस पर टहलने के लिए चला गया, और कुछ देर बाद मैने देखा की साक्षी भी मेरे पास आ गयी. मैं अंधेरे में उपर बैठ कर चाँद की तरफ देख रहा था. वो मेरे पास आ कर बैठी और मुझसे बोली-

साक्षी: क्या बात है मेरी बेहन के आशिक़ साहब. सोना नही है क्या ( वो हेस्ट हुए बोली)?

मैं: अब इन आँखों में नींद कहाँ.

वो मेरे कंधे पर हाथ रखी और मुझसे चिपक गयी और बोली-

साक्षी: इस तरह उदास रहोगे तो कैसे काम चलेगा? तुम दोनो ने काई साल खूब एंजाय किया. अब बेचारे उसके पति के लिए भी रहने दो.

इस बात पर हम दोनो हस्स पड़े और वो मेरे चेहरे पर हस्सी देख कर मुझसे लिपट गयी और बोली-

साक्षी: ये हुई ना बात. ऐसे ही हेस्ट रहा करो. वैसे तुम्हारे बारे में शिवानी बहुत ही ज़्यादा बातें करती थी. तुम दोनो किस तरह हमेशा होटेल रूम में जेया कर धूम मचाते थे.

मैं तोड़ा हैरान हुआ की शिवानी हमारी प्राइवेट बातें भी अपनी दीदी को बताती थी. खैर उसने मुझे बताया था की वो अपनी दीदी से काफ़ी घुली मिली थी. इसलिए वो सारी बातें शेर करती थी. मुझे भी कोई प्राब्लम नही थी. पर साक्षी सब कुछ जानती थी की हमने कितनी बार कब-कब सेक्स किया था.

साक्षी अब सब कुछ बोलने लगी तो मैं तोड़ा शर्मा रहा था. तो वो मेरे सर को अपने छ्चाटी पर रख ली. उनकी गरम चुचियों पर मेरा सर पड़ते ही आँखें बंद होने लगी, और मैं उन्हे बाहों में भरने लगा.

मैं भी उनसे बोला: आप भी तो रोज़ जीजू के साथ सेक्स करती होंगी? आपको भी तो खूब मज़ा आता होगा.

साक्षी तोड़ा मूह बनाते हुए बोली: हा, रोज़ तो नही हो पाता है. पर सेक्स अछा करते है. पर…

ये बोल कर वो चुप हो गयी.

मैं: पर क्या?

साक्षी: कुछ नही.

मैं उन्हे अपनी बाहों में और उनके चेहरे के पास अपनी चेहरा को ले गया और उनकी आँखों में देखते हुए फिर से पूछा-

मैं: पर क्या साक्षी दीदी?

उन्होने मेरे आँखों में देखते हुए कोई जवाब नही दिया. और उनका फेस अब मेरे फेस के बिल्कुल करीब था. हम दोनो के होंठ ऐसा लग रहा था की बस अब कुछ पलों में सात जाएँगे. फिर मैं भी अपनी आँखें बंद करते हुए उनके होंठो के करीब अपना होंठ ले जाने लगा. तभी साक्षी दीदी ने हमे अलग किया और बोली-

साक्षी: कोई आ जाएगा, तब बहुत बुरा होगा.

फिर मैने उन्हे बाहों में पकड़े हुए ही उनसे कहा: यहाँ कोई नही आएगा. हम दोनो अकेले है टेरेस पर. सभी लोग सो रहे है.

तब साक्षी दीदी मेरी तरफ मुस्कुराती हुई देखी और नॉटी स्माइल करके बोली: अछा बच्चे, कोई नही आएगा.

और फिर उन्होने अपनी बाहों को मेरे गले में डाला, और अपने होंठो को मेरे होंठो से लगा कर किस करना शुरू कर दिया. मुझे भी बहुत ही मज़ा आया. मैं और साक्षी दीदी एक-दूसरे के नरम होंठो को चूस रहे थे, और लंबी-लंबी साँसें ले रहे थे. हम दोनो टेरेस पर बैठे हुए थे.

तभी साक्षी दीदी मुझे नीचे लिटा दी, और वो खुद मेरे उपर आ कर मेरे होंठो को चूसने लगी. वो मेरे पुर बदन को सहलाने लगी. मैं भी उनके बड़े-बड़े नितंभो को दबा रहा था, और उनके नरम होंठो को चूस रहा था.

अब मैं उनके पुर बदन को सहलाते हुए उनकी चुचियों को चोली से बाहर निकाला, और दबाने लगा. उनकी नरम चुचियाँ मेरी मुट्ठी में आते ही मेरा लंड पूरी तरीके से तंन गया. मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा था. मैं उनकी चुचि को बहुत ही तेज़ मसालने लगा, और वो चीखने लगी.

फिर मैने अपनी पंत को तोड़ा सा नीचे खोल कर सरकया, और अपने लंड को मुट्ठी में लेकर उन्हे दे दिया. वो मेरे उपर बैठ कर अपने मूह से मेरे लंड को चाटने लगी. उनकी जीभ टच होते ही मेरा लंड 8 इंच का पूरी तरीके से बन गया.

वो मेरे लंड को लगातार मूह में अंदर-बाहर कर रही थी, और अपनी थूक से मेरे लंड को पूरी तरीके से गीली कर रही थी. फिर मैं दीदी को नीचे लिटाया और उनके ल़हेंगे को कमर तक उठा कर उनकी पनटी निकाल दी. उसके बाद उनकी टाँगों को फैला कर अपनी जीभ उनके मुलायम मालपुए जैसी छूट पर रख दी.

उनकी छूट की गर्माहट से मेरी जीभ धान्या हो गयी, और बहुत सारा रस्स निकालने लगा. उनकी छूट का रस्स और मेरी जीभ की लार दोनो को मैं बड़े ही प्यार से चाट रहा था. छूट एक-दूं गीली हो चुकी थी. फिर थोड़ी देर बाद उनकी छूट को चाटने के बाद मैं नीचे लेता, और साक्षी दीदी मेरे लंड पर बैठ गयी.

वो जैसे ही मेरे लंड पर बैठी, लंड और छूट दोनो के रस्स से गीला लंड अंदर चला गया. दीदी की तो जैसे जान निकल गयी. वो उतना चाहती थी, पर मैने उन्हे बाहों में पकड़ कर अपने लंड पर बिता कर रखा. थोड़ी देर बाद जब उन्हे राहत मिली, तो उनको छोड़ना शुरू किया. फिर वो भी लंड पर उछालने लगी.

दीदी को चुदाई में बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा था. वो इतनी तेज़ उछाल रही थी की लंड अंदर-बाहर बहुत ही तेज़ हो रहा था, और उनकी दोनो चुचियाँ उपर-नीचे हिल रही थी. मैं उनकी कमर को पकड़ के सहला रहा था, और नीचे से धक्के लगा कर छोड़ रहा था.

इसी तरह काफ़ी देर छोड़ने के बाद हम दोनो झाड़ गये, और कुछ देर एक-दूसरे की बाहों में बैठे रहे. उसके बाद साक्षी दीदी मेरे होंठो को चूमते हुए मुझसे बोली-

साक्षी: मेरी बेहन बाबूत ही ज़्यादा किस्मत वाली थी, जो उसे तुम जैसा बाय्फ्रेंड मिला. और तुम दोनो ने खूब एंजाय किया. पर खैर अब मैं भी किस्मत वाली हू अब मेरे पास भी तुम हो.

फिर दीदी ने मुझे एक-दो और किस किए, और उसके बाद उठ कर वहाँ से अपने रूम में चली गयी. मैं भी अपने रूम में जेया कर सो गया. उसके बाद सुबह सभी लोग बारात को विदा कर दिए, और फिर अब मेहमान भी अपने-अपने घर जाने लगे. मैं भी साक्षी दीदी से मिला, और उनका नंबर लिया, और उसके बाद अपने घर चला आया.

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