गर्म सेक्स कहानी मेरी दीदी की

नमस्ते दोस्तो, यह हॉट सेक्स स्टोरी मेरी बहन की 2 लड़कों के साथ सेक्स की सच्ची कहानी है। पात्रों के नाम गोपनीयता के कारण बदल रहा हूँ।
हम लोग दिल्ली में किराये के एक फ्लैट में रहते थे। मेरी बहन का नाम नाम छाया है। उसका रंग गोरा है। उसकी उम्र 25 साल थी. उसका एम. बी. ए. जल्दी ही खत्म हुआ था।

छाया दीदी की बॉडी बहुत आकर्षित करने वाली है। गान्ड बड़ी और बूब्स चलते समय छलछलाते हैं जिससे सभी लड़के उसको देखते रहते हैं।

मेरी उम्र 22 साल थी जब मैंने काफी दिनों तक उन लड़कों से दीदी की चुदाई देखी थी। मुझे कभी भी छाया दीदी के बॉयफ्रेंड से कोई प्रॉब्लम नहीं थी। लेकिन मैं हमेशा चाहता था कि उनका किसी एक लड़के से ईमानदारी से रिश्ता निभे। लेकिन छाया दीदी को ब्रांडेड कपड़े और घूमने का बहुत शौक होने के कारण 2 या 3 बॉयफ्रेंड के साथ अलग अलग डेट करती थी।

मेरी भी एक गर्लफ्रेंड थी। मैं अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बहुत खुश था और छाया को भी एक बॉयफ्रेंड के साथ रिलेशन में कहता था. लेकिन वो मेरी कभी नहीं सुनती थी।

दीदी की एम. बी. ए. करने के दौरान उनकी मुलाकात हर्ष भैया से हुई जो एक बार दीदी के कॉलेज में गेस्ट के रूप में किसी फंक्शन के दौरान आये थे। हर्ष भैया का अपना व्यवसाय था। उनको दीदी के कॉलेज में स्पीच देने के लिए आमंत्रित किया गया था।

हर्ष भैया लगभग 35 साल के आस पास थे। दीदी से लगभग 10 साल बड़े थे। हर्ष भैया से दीदी की काफी अच्छी दोस्ती हो गयी। हर्ष भैया ने दीदी को अपना ऑफिस दिखाने के लिए आमंत्रित किया।
इस तरह कुछ ही महीनों में हर्ष भैया ने दीदी को प्रोपोज़ किया। वो दोनों एक दूसरे से प्यार भी करने लगे।

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छाया दीदी ने हर्ष भैया के बारे में मुझे बताया और मुझसे मिलवाया। हर्ष भैया और मैं भी अच्छे दोस्त बन गए। हर्ष भैया और दीदी कभी रात को पार्टी में जाने के कारण दीदी को काफी लेट छोड़ने आते थे।

एक गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड में शारीरिक सम्बन्ध बनना आम बात होती है इसलिए मुझे इससे कोई प्रॉब्लम नहीं थी। दीदी कभी कभी हर्ष भैया के साथ फ्लैट में मेरे बगल वाले कमरे में रहते थे।

एक दिन मेरे कमरे का बाथरूम काम नहीं कर रहा था तो मैं छाया दीदी का बाथरूम इस्तेमाल करने के लिए गया। उस समय रात के लगभग 1 बज रहा होगा। मैं अभी बाथरूम में ही था कि छाया दीदी ने अपनी वाली चाभी से गेट खोला और हर्ष भैया के साथ कमरे में आई. आते ही भैया ने दीदी को किस करते हुए बेड पर गिरा दिया और अपनी पैंट खोलकर अपना लण्ड बाहर निकाल दिया।

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अगर मैं बाहर आया तो दोनों लोगो को शर्मिंदगी होगी। मैंने सोचा कि कुछ ही घण्टों में सुबह हो जायेगी और हर्ष भैया जब जाएंगे तो दीदी भी उनको नीचे तक छोड़ने जाएगी तो चुपके से बाहर निकल जाऊंगा। तब तक यही छुपा रहता हूं।

हर्ष भैया ने अपना लण्ड दीदी के मुँह में डाल दिया था। दीदी धीरे धीरे लण्ड चूस रही थी और हर्ष भैया से बात भी कर रही थी। हर्ष भैया का लण्ड थोड़ा काला और मोटा था। मेरी दीदी लम्बी और चौड़ी थी, वो पूरा लण्ड अंदर तक चूस रही थी।

दीदी ने अपने सारे कपड़े निकाल कर सोफे पर रख दिए। हर्ष भैया ने दीदी की ब्रा खोल दी। वे उनके दोनों दूधों को अपने हाथों से कसकर दबा रहे रहे थे लेकिन उनके दूध हर्ष भैया के हाथों में नहीं आ रहे थे। हर्ष दूधों को कभी हाथों से दबाता तो कभी अपने मुँह से दूधों को दबाता।
दीदी के दोनों उरोज हर्ष भैया की मुँह की लार से गीले हो चुके थे। दीदी बस हल्की हल्की सिसकारियाँ ले रही थी ‘अअअ … उम … उम्म’

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हर्ष भैया दीदी चूत को बहुत देर तक चाटते रहे। फिर कुछ तेल सा दीदी की चूत पर रगड़ दिया हर्ष ने और उल्टा लिटा दिया. फिर दीदी के पेट के नीचे तकिया रख कर की टांगों को पूरा खोल दिया। हर्ष भैया पीछे से दीदी के ऊपर चढ़ने लगे और पीछे से अपना लण्ड चूत में फंसाने लगे।

दीदी ने उनकी मदद की और चूत में लण्ड जाते ही दीदी की हल्की सी चीख निकल गई। हर्ष भैया बहुत धीरे धीरे लण्ड डाल रहे थे। हर्ष भैया दीदी के ऊपर पूरा ऊपर से लेटे चोद रहे थे।
हर्ष भैया दीदी को दस मिनट तक चोद पाए होंगे कि उनका सारा माल बाहर आ गया, उन्होंने दीदी के ऊपर सब गिरा दिया.

लेकिन दीदी का अभी पूरा नहीं हुआ था। हर्ष भैया यह बात जानते थे, वे अपनी उंगलियों को दीदी की चूत में डाल कर जोर जोर से हिलाने लगे जिससे दीदी का माल भी बेड पर गिर गया।
दीदी हर्ष से बोली- अब तुम में वो पहली जैसी बात नहीं है, बहुत जल्दी थक जाते हो।
हर्ष भैया बोले- रोज़ वियाग्रा नहीं खा सकता; नुकसान कर सकती है।

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