गांव की देसी भाभी की मालिश और चुदाई

दोस्तो, मेरा नाम शिवा है और अभी मेरी उम्र 22 साल है. मैं फर्रुखाबाद जिले का रहने वाला हूँ. मेरा कद 5 फुट 7 इंच का है और मैं एक गोरे रंग का सुडौल जवान हूँ.

यह बात उस समय की है, जब मैं 12वीं की पढ़ाई कर रहा था. मेरे गाँव में एक मेरी भाभी रहती हैं. उनका नाम साधना था. वैसे तो उनकी उम्र 32-33 की होगी, मगर उनके शरीर की बनावट और गठाव ऐसा है कि कोई भी उन्हें देखकर यही कहेगा कि उनकी उम्र 23-24 साल की है.

भाभी के मेरे घर वालों से बड़े अच्छे सम्बंध हैं, इसलिए मेरा अक्सर उनके घर आना जाना होता रहता है. उनकी शादी को कई साल हो गए, पर अब तक उनके कोई बच्चा नहीं है.

एक दिन भाभी मेरे घर आईं और उन्होंने कहा- शिवा, मुझे कल मंदिर जाना है और तुम्हारे भैया घर पर नहीं हैं. क्या तुम मुझे मंदिर ले चलोगे?
मैंने हाँ कर दी.
यह मन्दिर शहर से काफी दूर था.

दूसरे दिन सुबह उनका फोन आया और भाभी ने कहा कि शिवा भूलना मत … ठीक 8 बजे तक आ जाना.
मैं ठीक 8 बजे बाइक लेकर उनके घर पहुंच गया. मैंने दरवाजा खटकाया, तो भाभी बाहर आ गईं.

मैं तो अपनी देसी भाभी को देखकर अपने होश खो बैठा. लाल साड़ी में क्या मस्त माल लग रही थीं. मैं उन्हें एकटक देखता रह गया.
तभी उन्होंने कहा- क्या हुआ शिवा?
मैंने कहा- कुछ नहीं चलें?
भाभी ने कहा- हां चलो.

वे लपक कर मेरे साथ बाइक पर बैठ गईं और हम लोग चल पड़े.

मेरे मन में आज उनको लेकर कामुक विचार आने लगे. मैं उनके बारे में सोचने लगा कि भाभी को कैसे चोदा जाए. भाभी का स्पर्श भी मुझे इस समय मिल रहा था. ये सब महसूस करके और सोचकर मेरा लंड खड़ा होने लगा.

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तभी भाभी ने कहा- क्या सोच रहे हो … बाइक इतनी धीरे क्यों चला रहे हो?
मैंने कहा- भाभी मैं सोच रहा था कि आप बहुत सुंदर हो. लाल साड़ी आप पर कितनी फबती है.
उन्होंने हंसते हुए कहा- अच्छा … तो ये सोच रहे हो.
मैं हंस दिया.

उस दिन हम लोग बातें करते हुए मंदिर पहुंचे, वहां पूजा की और हम लोग वापस चल पड़े.
रास्ते में मैंने कहा- भाभी, चलो कहीं बैठ कर खाना खा लेते हैं.

हम लोग एक रेस्टोरेंट में गए, वहां लंच किया और शाम को 4 बजे तक वापस आ गए.
लेकिन दोस्तो … बार बार भाभी के बारे में सोच कर मेरा लंड खड़ा हो रहा था.

आखिर में मैंने उनके नाम की मुठ मारी और अपने लंड को शांत किया. उस दिन मैं सारी रात नहीं सोया. मेरी आँखों में बार बार भाभी का गदराया बदन घूम रहा था. मैं उन्हें चोदने की सोच कर बड़ा बेताब होने लगा था.

दूसरे दिन मैं उनके घर गया और मैंने देखा कि भाभी नहाने जा रही थीं. इस वक्त मैंने उन्हें देखा, तो वे पेटीकोट ब्लाउज में थीं. मैंने भाभी को इस अवस्था में पहली बार देखा था. उन्हें देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया और लगा कि अभी पकड़ कर भाभी को चोद दूँ.

भाभी के 34 साइज़ के मम्मों का उभार देखकर मेरे मुँह से दबी हुई आवाज निकल गई- वाऊ … क्या मस्त फिगर है.
तभी भाभी ने तौलिया से मम्मों को ढकते हुए कहा- क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- सॉरी भाभी … मैं चलता हूँ.
भाभी- तुम बैठो, मैं अभी दस मिनट में आती हूँ.

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लेकिन मैं नहीं रुका और भाभी के बाथरूम में जाते ही मैं घर चला आया. घर जाकर मैंने सीधे उनके नाम की मुठ मारी … तब मुझे कुछ चैन मिला. अब तो मेरी बेचैनी और बढ़ गयी थी.

तभी भाभी का फोन आया और कहा- तुम अचानक चले क्यों गए?
मैंने कहा- कुछ नहीं … बस ऐसे ही. आप व्यस्त थीं. तो मैंने सोचा कि बाद में आ जाऊंगा.
भाभी ने पूछा- अरे मैं व्यस्त नहीं थी, बस नहाने जा रही थी. तुमको कोई काम था क्या?
मैंने कहा- नहीं भाभी मैं तो बस यूं ही आया था. मेरा मन नहीं लग रहा था, तो सोचा कि आपके पास जाकर कुछ बात करके समय बिताऊं.
भाभी- अरे तो तुम रुकते तो!

फिर हमने फोन से बात करनी चालू कर दीं. भाभी मुझे खूब बात करती थीं.
उन्होंने कहा- मैं भी सारे दिन बोर होती रहती हूँ. तुमसे बात करके मेरा भी टाइम पास हो जाता है.
इससे मुझे उनसे बात करने का बहाना मिल गया था. अब जब भी दिन में खाली समय मिलता, तो भाभी से बात करने लगता.

एक दिन भाभी ने मुझसे पूछा- शिवा यार … अपनी गर्लफ्रेंड से तो मिलवाओ?
मैंने कहा- नहीं भाभी … मैं अभी इन चक्करों में नहीं पड़ा हूँ.
भाभी हंस कर बोलीं- इन चक्करों में पड़ा नहीं जाता, खुद ब खुद चक्कर पड़ जाते हैं.
मैं उनकी इस बात पर हंस दिया.

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