गंदी नज़र वाले दामाद की सेक्सी कहानी

अमन और रेखा घर पहुँचे तो बरसी की कुछ तैयारी नही हुई थी. सुनीता वाइट सूट में फोटो के सामने फूल और कुछ अगरबत्ती लगा रही थी. बगल में पंडित बैठे पूजा की तैयारी कर रहे थे, और एक-एक करके सभी समान का नाम लेकर उन सब को उनके पास रखने को कह रहे थे.

तभी अमन और रेखा ठीक उनके सामने थे. रेखा को तो ये देख कर उसकी आँखों में आँसू ही आ गये. लेकिन वही अमन की आँखों में सुनीता की गुलाबी पनटी छाई थी, जो सुनीता के झुकने के कारण सॉफ-सॉफ दिख रही थी.

एक नौकर की नज़र अमन और रेखा पे पड़ी, तो वो जल्दी से भाग कर उनके पास आ कर उनके समान को लेकर उनके कमरे की तरफ ले गया. तभी सुनीता भी खड़ी होके, उदासी भरे चेहरे के साथ रेखा के गले लग गयी.

अमन पैर छूने के लिए नीचे झुका ही था, की उसको रोकते हुए उसको अपनी बाहों में भर लिया. अमन की च्चती से सुनीता के बूब्स बिल्कुल डब से गये थे. फिर वो दोनो भी तैयार होके नीचे हॉल में आ कर पूजा में बैठ गये.

पूजा करीब 2-3 घंटे चली, और पुर घर में दुआ देने के बाद पंडित जी भी अपनी दक्षिणा लेके चले गये. सुनीता की आँखें अभी भी नाम थी, जिसको बार-बार रेखा कम करने की कोशिश करे जेया रही थी.

लेकिन वही सुनीता के सामने अमन बैठा था, और उसकी नज़र सुनीता के बूब्स पे थी. उसके वाइट सूट से सॉफ-सॉफ उसकी ब्रा का वो कला रंग दिखाई दे रहा था.

सुनीता: तुम दोनो तक गये होंगे. चलो पहले कुछ खा लो, फिर तोड़ा आराम कर लेना. नंदू जाओ, कुछ खाने को बना दो.

आयेज कुछ बात-वात होने लगी, तब तक नंदू ने सभी के लिए खाना टेबल पे लगा दिया. फिर खाना ख़तम करने के बाद अमन और रेखा रूम में जाके रेस्ट करने लगे. खाना खाने के बाद तो रेखा को नींद ही आ गयी.

वैसे नींद आ ही जाती, क्यूंकी कल से सोई भी कहा थी. वही बगल में अमन फोन में रील देखने लगा. रील देखते-देखते अमन का फोन भी डेड होने पे आ गया.

चार्जिंग पर लगाने के बाद कमरे से बाहर तोड़ा घूमने की सोच लेकर वो बाहर गार्डेन में आया.

गार्डेन में कोई नही था, और ना ही पुर घर में. “मम्मी जी” आवाज़ लगते-लगते अमन नंदू के क्वॉर्टर तक पहुँचा. वाहा खिड़की से देखा तो नंदू किसी को घोड़ी बना के पीछे से उसकी गांद में धक्के पे धक्का मारे जेया रहा था.

खिड़की से नंदू का फेस तो दिख रहा था. लेकिन जिसको छोड़ रहा था, वो नही दिखी. नंदू की पत्नी का सोच कर अमन वाहा से चुप-छाप निकला, और बाहर दुकान से एक सिगरेट लेकर वही गार्डेन में आ कर पीने लगा.

लेकिन उसकी नज़र नंदू के कमरे पे थी. जैसे ही अमन की सिगरेट ख़तम हुई, वैसे ही नंदू के गाते से एक औरत बाहर आई, जिसको देख कर अमन का मूह खुला रह गया. वो औरत सुनीता थी, जिसको देख कर अमन को अपनी आँखों पे भरोसा नही हुआ की नंदू जिसकी गांद मार रहा था, वो सुनीता ही थी.

लेकिन फिर भी पूरी तरह से कन्फर्म करने के लिए वो नंदू के कमरे की तरफ गया. नंदू के कमरे के पास पहुँचा तो नंदू तभी कमरे से बाहर आया, और उसके हाथ में टाला भी था.

अमन: तो नंदू, तुम यहा अकेले रहते हो तो तुम्हारी बीवी बच्चे सब?

नंदू: जी मालिक हमारी मेररिया तो कोन्ो दूसरे लड़का के संग भाग गयी.

अमन: तो तुम्हारे घर वाले सब?

नंदू: मालिक उः सब तो गाओं में है. बापू खेती-बाड़ी में, और अम्मा वही घर की देख-रेख.

अमन: वैसे मम्मी जी अभी यहा क्यूँ आई थी?

नंदू ( घबराते हुए): वो, वो, व्प मालिक सब हिसाब लेने आई थी आज का.

अमन: अछा ठीक है. वैसे अभी कहा चल दिए?

नंदू: वो मालिक बाज़ार सब्ज़ी लाने.

अमन: अछा ठीक, फिर जाओ.

नंदू जल्दी से अपनी जान बचाते-बचाते गाते पे टाला लगाए बिना ही वाहा से निकल गया. नंदू के वाहा से चले जाने के बाद अमन ने गाते खोला, और कमरे के अंदर घुसा.

उसने देखा बिस्तेर पर कॉंडम के डिब्बे पड़े हुए थे. ज़मीन पे वीर्या से भरा कॉंडम फेंका हुआ था. कमरे में तोड़ा और इधर-उधर देखने के बाद देखा तो कुछ नंगी लड़कियों की फोटोस भी पड़ी हुई थी.

वाहा से निकल कर अमन सुनीता से मिलने के लिए घर में वापस आया. देखा तो वो किचन में थी. फिर अमन उसके पास गया.

सुनीता: ओह अमन बेटा, नीचे जाओ, तोड़ा और आराम कर लो.

अमन: वो तो कर ही लूँगा. वैसे मम्मी जी, आप नंदू के कमरे से आई थी. कुछ काम था नंदू से?

सुनीता ( घबराते हुए): नही बेटा, वो, वो तो बस मैं ये कहने गयी थी, की आज घर में मेरी बेटी और दामाद जी आए है. तो कुछ बेज़ार से ले आ रात के लिए.

अमन: वैसे मम्मी जी, आपको घर में अकेले अजीब नही लगता पापा जी के गुज़रने के बाद?

सुनीता: बेटा वो तो होना ही था. वैसे भी मेरी शादी 18 साल की उमर और उनकी 32 साल की उमर में हुई थी. तो इस हिसाब से मुझे अकेले रहना ही था.

अमन: एक बात पूचु मम्मी जी, बुरा तो नही मानोगे?

सुनीता: तुम्हे मैं अपनी बेटी का पति नही, अपना बेटा ही मानती हू. पूछो क्या पूछना है?

अमन: अपनी शादी के बाद आप सच में कितने सालों तक शादी के सुख का आनंद ले पाई थी?

सुनीता: आज मेरे 2 बच्चे होते. रेखा को तो जानम देने के बाद जैसे तुम्हारे पापा जी का दूं ही ख़तम हो गया. एक रात उनका खड़ा करके चरम-सुख के रास्ते में ही थी की उनका दूं टूट गया.

अमन: तो इसलिए, नंदू का सहारा लेती है?

सुनीता: बेटा 18 साल की उमर से शादी हुई. उस उमर में धन-दौलत का सुख था. वो तो पूरा मिला, लेकिन जैसे ही 25-26 के योवां में आई, तो धन-दौलत के अलावा भी कुछ छाईए था, जो मुझे नही मिला. तो अब तुझसे ही मैं पूछती हू. अगर रेखा नही देगी, तो तू बाहर किसी रंडी को या पड़ोस की आंटी भाभी को छोड़ने के लिए पटाएगा या नही?

अमन: और अगर मैं ये काहु की मुझे रेखा की भी चाहिए और आंटी की भी तो?

सुनीता: वो तो उस औरत पे है, की उसको करना है या नही.

अमन: तो मम्मी जी, और औरत अपने आप को ही समझ लो. तो क्या आप?

सुनीता: तुझे तो मैं बेटा मानती हू अमन. तेरे साथ मैं कैसे?

अमन: वो आप से है, की आप मुझे क्या मानती हो? लेकिन मैं इतना प्रॉमिस कर सकता हू, अगर एक बार मम्मी जी आपने मुझे अपने बेटे से बाय्फ्रेंड मान लिया, तो नंदू जैसो की ज़रूरत नही पड़ने दूँगा.

सुनीता अपना जवाब देती. लेकिन तभी रेखा भी नीचे आ कर मम्मी-मम्मी आवाज़ लगाने लगी थी. और किचन में आके रात के प्रोग्राम के बारे में पूच कर रात के खाने की तैयारी करने लगी.

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