चोदू चौकीदार की फ्री चुदाई स्टोरी

दोस्तो, यह कहानी मेरे एक मित्र ने मुझे बताई थी, जिस आदमी की कहानी है, मैं फिर निजी तौर पर उससे मिल कर भी आया क्योंकि जो मैंने सुना था उसे बिना देखे तो एतबार भी नहीं किया जा सकता था. मैंने सारा किस्सा उसके मुँह से सुना, उसको बताया कि मैं तुम्हारे इस तजुर्बे पे एक कहानी लिख कर नेट पे डालूँगा.
वो बोला- अरे साहब, ये भी कोई कहानी है, कौन पढ़ेगा इसे!
मैंने कहा- तुम इसकी चिंता मत करो, मुझे सब कुछ डीटेल में बताओ.

फिर उसने जो बताया, लीजिये आप कहानी पढ़िये और आप भी जान जाएंगे कि ये सारा माजरा क्या है. कहानी को मैं अपने तरीके से लिख रहा हूँ.

मेरा नाम जय प्रकाश है, हरियाणा का रहने वाला हूँ, एक छोटे से गाँव में रहता हूँ. पढ़ाई लिखाई में शुरू से ही कमजोर रहा हूँ इस लिए दसवीं भी पास नहीं कर पाया. सारा दिन गाँव के लड़कों के साथ घूमना फिरना. जब 20 का हो गया और खेती बाड़ी के काम में भी दिल न लगा तो मैंने घर में कह दिया कि मैं तो शहर जा कर कोई नौकरी कर लूँगा.
घर वालों के विरोध के बावजूद मैं पहले दिल्ली गया, मगर वहाँ मुझे कोई खास काम नहीं मिला, अब मेरे जैसे अनपढ़, अंगूठा छाप, जाट बुद्धि को क्या काम मिल सकता था.

 

मगर मेरे एक गाँव वाले ने मुझे गुड़गाँव के एक बहुत बड़ी सोसाइटी में चौकीदार की नौकरी के लिए सिफ़ारिश करवा कर मेरी नौकरी का जुगाड़ कर दिया.
जब मैं वहाँ पहुंचा तो देखा, 15 मंज़िली इमारत थी, पूरी बिल्डिंग में फ्लैट ही फ्लैट थे. मैं वहाँ पहुंचा तो मुझे वहाँ के एक मैनेजर ने सारा काम समझा दिया और मेरे को और आदमी से मिलवाया, वो भी वहाँ चौकीदार था. रामकृपा यादव उर्फ रामू काका, उम्र होगी कोई 50 बरस. वो वहाँ अकेले ही रहते थे, तो मुझे उन्होंने अपने ही क्वाटर में जगह दे दी. जगह क्या थी, बस एक छोटा सा कमरा, साथ में एक गुसलखाना, कमरे में ही एक तरफ छोटा सा रसोई का जुगाड़ सा कर रखा था. पहले एक बिस्तर लगा था, मेरे आने पे दो बिस्तर लगा लिए थे.

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रात को हम दोनों की ड्यूटी होती थी, सुबह आकर हम अपने कमरे में सो जाते थे.

थोड़ी ही दिनों में मेरी और रामू काका की अच्छी दोस्ती हो गई. मैं उन्हें ताऊ कहता था.

एक दिन दोपहर को हम लोग अपने कमरे में ही बैठे थे, तभी वहाँ एक औरत आई. गीता रानी. वो वहाँ 2-4 फ्लैटस में झाड़ू पोंछा किया करती थी.
रामू काका बड़े खुश हो कर उससे मिले. बाद में पता चला, दोनों का आपस में टांका भिड़ा था. वैसे तो गीता रानी शादीशुदा थी, बच्चों वाली थी, मगर कभी कभी रामू काका के पास आ जाती थी, और दोनों को फ्री की चुदाई मिल जाती थी, दोनों की अपनी अपनी ठर्क मिट जाती थी.

 

उस दिन गीता आई तो रामू काका से मिल कर मेरी तरफ देख कर बोली- ये लड़का कौन है?
रामू काका ने कहा- अरे नया लड़का आया है, मेरे साथ ही काम करता है और यहीं पर ही रहता है.

खैर रामू काका और गीता ने मिल कर खाना बनाया, खाया हम तीनों ने, क्योंकि मुझे खाना पकाना नहीं आता था. खाना खा कर रामू काका ने मुझे कहा- अरे सुन तू तो नौजवान है, जा थोड़ी देर बाहर घूम आ!
मैं उनका इशारा समझ गया और बाहर आ गया.

रामू काका ने दरवाजा बंद कर लिया. मैं आ कर अपनी ड्यूटी रूम पर आ कर बैठ गया. कोई एक घंटे बाद मेरे मोबाइल पर रामू काका का फोन आया, तो मैं वापिस अपने क्वाटर में आ गया.
अंदर आया तो सारा क्वाटर गर्म हवा से भर पड़ा था. गीता अभी भी चादर ओढ़े बिस्तर पे लेटी थी.

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मैंने आकर कमरे के दरवाजे खिड़कियाँ खोले तो कमरे में ताज़ी हवा आई और कमरे में ताज़गी आई.

मैंने देखा गीता मुझे बड़ा ध्यान से देख रही थी. फिर उसने रामू काका से कहा- ये लड़का क्या हमेशा तुम्हारे साथ ही रहेगा?
रामू काका ने कहा- हाँ, अब तो यहीं रहेगा.
फिर गीता बोली- तो फिर तो हमे पहले की तरह खुल्ला टाइम तो नहीं मिलेगा.

मैंने कहा- मुझे तो ताऊ ने फोन करके बुलाया था, आप कहो तो मैं चला जाता हूँ.
गीता ने अपने बदन पे ली हुई चादर उतारी और बड़ी बेशर्मी से कामुकता से भरी अदा से मेरे सामने ही अपना ब्लाउज़ पहनने लगी.

उस दिन मैंने पहली बार उसकी नंगी छाती देखी. रामू काका ने मुझे देखा और मुझे आँख मार कर मुस्कुरा दिये.
गीता चली गई.

बाद में रामू काका ने मुझे कहा- लगता है गीता तुझ पे रीझ गई है.
मैंने कहा- तो? वो तो थारी माशूक है.
रामू काका बोले- अरे घंटे की माशूक है, साली लंड की यार है, इसके खसम से कुछ बनता नहीं है, तो मेरे पास आ जाती है.
मैंने कहा- मगर वो तो मुझसे भी बहुत बड़ी है, मैं तो अभी 21 का हूँ, और ये तो 40 के आस पास होगी.

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