नमस्कार दोस्तों, मैं अमृता अपनी चुदाई कहानी का अगला पार्ट लेके हाज़िर हू. उमीद है आपने पिछला पार्ट पढ़ लिया होगा, और आपको पसंद भी आया होगा.
पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की डाइवोर्स होने के बाद दूसरी शादी से बचने के लिए मैं दूसरे शहर में शिफ्ट हो गयी, और मैने एक लॉ फर्म खोल ली.
फिर ज़्यादा काम के चलते मैने एक 19 साल के लड़के मोनू को कुक रख लिया. फिर एक दिन मैने उसको मेरा नाम लेके मूठ मारते देखा. उसका 7 इंच का लंड देख कर मैं हैरान हुई और गरम हो गयी. फिर मैने फिंगरिंग की और सो गयी.
अगले दिन नाश्ता करके मैं किचन में बर्तन रखने गयी. तभी मुझसे एक स्पून नीचे गिर गया. मैं स्पून उठाने नीचे झुकी, तो टाँगों के बीच से मेरी नज़र मोनू पर पड़ी. वो मेरी गांद को देख रहा था.
मैने पंत-शर्ट पहनी थी, और मेरी पंत टाइट थी, जिसकी वजह से गांद की शेप सॉफ नज़र आ रही थी. तभी मैने उसके लंड की तरफ देखा, जो उसके पाजामे में खड़ा हुआ सॉफ दिख रहा था. अब आयेज-
उसका लंड देख कर मेरे जिस्म में एक करेंट सा दौड़ गया. मेरी प्यासी छूट उसके लंड को आवाज़े देने लग गयी, लेकिन मैने अपने आप पर कंट्रोल किया, और स्पून उठा कर वॉशबेसिन में रख दिया. फिर जब मैने मोनू की तरफ देखा, तो वो दूसरी तरफ घूम गया. ज़ाहिर है की वो मुझसे अपना खड़ा हुआ लंड च्छूपा रहा था. उसके बाद मैं ऑफीस चली गयी.
मेरे पास गाड़ी है, तो मैं खुद ड्राइव करके ऑफीस जाती हू. रास्ते में मेरे दिमाग़ में उसके लंड के ही ख़याल आ रहे थे. मेरा दिल कह रहा था की, “अमृता कब तक खुद से अपनी छूट की प्यास बुझती रहेगी? लंड तगड़ा है लौंदे का, और उसको यहाँ कोई जानता भी नही. इसलिए चढ़ जेया उसपे और मज़ा ले.”
लेकिन मेरा दिमाग़ कह रहा था, “नही अमृता. वो जवान लड़का है. बाहर कहीं भी मूह खोल सकता है. और वैसे भी वो एक नौकर है. तू एक लॉयर है. इतने स्मार्ट लड़के तुझ पर ट्राइ करते है. और तू एक नौकर से चूड़ेगी?”
दिल और दिमाग़ की कशमकश में मैं अपने ऑफीस पहुँच गयी. फिर मैने काम पर ध्यान लगाया. सारा दिन के काम में शाम कब हो गयी, मुझे पता ही नही चला. फिर मैं घर के लिए निकल गयी.
घर पहुँची, तो मोनू ने दरवाज़ा खोला. उसको देखते ही दिल-दिमाग़ की जुंग फिर से शुरू हो गयी. मैं अपने रूम में गयी, फ्रेश हुई, और नाइट सूट पहन कर बाहर आ गयी. मोनू ने मुझे डिन्नर के लिए पूछा तो मैने उसको डिन्नर परोसने को बोल दिया.
फिर उसने खाना लगाया जिसको खा कर रूह खुश हो गयी. मैने नोटीस किया की जब मैं खाना खा रही थी, तब वो मेरी तरफ ही देख रहा था. जब मेरी नज़र उस पर पड़ती, तो वो ध्यान इधर-उधर कर लेता. शायद वो हमेशा से ही मेरी तरफ देखता था, लेकिन मुझे अब पता चला था, जब मैने मूठ मारते हुए उसके मूह से मेरा नाम सुना था.
फिर मैं खाना खा कर अपने रूम में चली गयी. मैं बिस्तर पर तो लेट गयी, लेकिन मुझे नींद नही आ रही थी. मेरे मॅन में मोनू और उसके लंड के ही ख़याल चल रहे थे. मैं उसके लंड के दीदार करने के लिए तड़प रही थी. मैने फिंगरिंग भी कर ली, लेकिन मेरा मॅन शांत नही हुआ.
फिर फाइनली हार कर मैं उठी, और कमरे से बाहर निकली. मैं मोनू के कमरे की तरफ जाने लगी, ये उमीद करते हुए की उसके लंबे लंड के दर्शन मुझे दोबारा से हो जाएँगे.
उसके कमरे के बाहर पहुच कर जब मैने अंदर झाँका, तो मेरी इक्चा पूरी हो गयी. वो लंड हाथ में लेके उसकी धीरे-धीरे हिला रहा था. उसके हाथ में मोबाइल फोन था, जिसमे वो मेरी ही फोटो देख रहा था.
मैने देखा की जो फोटो उसके पास थी, वो उसने चुपके से ली हुई थी. शायद किचन में खड़े-खड़े उसने लेली होगी. उस फोटो में मैने पंत-शर्ट पहनी थी, और मेरी गांद बहुत बड़ी लग रही थी.
फिर मेरा ध्यान उसके लंड पर गया. मेरी आँखें चमक उठी, और मेरी छूट गीली होने लगी. मेरे मूह से पानी आने लगा और मेरा मॅन उसके लंड को मूह में लेने का होने लगा.
मेरा हाथ अपने आप ही मेरी गीली छूट पर चला गया, और मैं कपड़ों के उपर से उसको दबाने और रगड़ने लगी. मुझे बहुत मज़ा आने लगा. अब उधर वो अपने लंड को हिला रहा था, और इधर मैं अपनी छूट को रग़ाद रही थी.
रगड़ते-रगड़ते मैं बिल्कुल मस्त हो गयी. मैं अपने चरम पर पहुँच गयी, और मेरी आँखें अपने आप बंद हो गयी. मैं किसी और ही दुनिया में पहुँच गयी. तभी मेरी टाँगें काँपने लगी, और मेरी छूट ने पानी छ्चोढ़ दिया. मेरे मूह से आ आ की आवाज़े निकालने लगी.
2-3 मिनिट बाद जब मैने आँखें खोली, तो मोनू दरवाज़े की दूसरी और खड़ा था, और मेरी तरफ देख रहा था. मैं उसको देख कर घबरा गयी. मुझे समझ नही आ रहा था की अब क्या होगा, और मैं उसको क्या बोलूँगी.
उधर मोनू सवालिया नज़रों से मेरी तरफ देख रहा था. फिर मैने दिमाग़ लगाया, और सारी बात उस पर डालने की सोची. मैने दरवाज़ा खोला, और ज़ोर से बोली-
मैं: मोनू ये क्या हरकत कर रहे हो तुम?
मोनू तोड़ा घबरा कर बोला: क्या हुआ दीदी?
मैं: दीदी बुलाते हो ना तुम मुझे? और मेरी फोटो मोबाइल में देख कर ये क्या कर रहे थे? मैने तुम्हे घर में रखा, काम दिया, और तुम ये सब!
मोनू कुछ नही बोल रहा था, और चुप-छाप सब सुने जेया रहा था. मुझे लगा की उसने मुझे कुछ करते हुए नही देखा, और मैं बच के निकल जौंगी. लेकिन ऐसा नही था. फिर मैने उसको उंगली दिखाई और बोली-
मैं: आज तो तुम्हे छ्चोढ़ देती हू. लेकिन ऐसी हरकत अगर दोबारा हुई, तो काम से निकाल दूँगी.
ये बोल कर मैं मूडी, और अपने कमरे में जाने लगी. तभी पीछे से मोनू ने मेरा हाथ पकड़ा, और मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं घूम कर उसकी बाहों में आ गयी. मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गयी. फिर मोनू बोला-
मोनू: दीदी, आपको पसंद आया ना मेरा लोड्ा?
मैं घबरा गयी और बोली: क्या मतलब? छ्चोड़ो मुझे तुम.
दोस्तों आज की कहानी यहीं तक. आयेज की कहानी अगले पार्ट में. फीडबॅक देने के लिए