फॅमिली सेक्स स्टोरी का अगला पार्ट-
चुदाई अभी भी जारी थी. मुझे परम सुख की प्राप्ति हो रही थी. मम्मी ने अपने बाल अपने हाथो में पकड़े हुए थे. उनकी पीठ सॉफ-सॉफ दिखाई दे रही थी और बहुत मस्त लग रही थी.
अब इतनी आवाज़ से दीदी भी उठ गयी थी. उन्होने देखा मम्मी चुदाई कर रही थी मज़े से. जब मम्मी पूरा लंड अंदर लेती तब वो अपने हिप्स को रौंद-रौंद रोटेट करती जिससे मुझे काफ़ी मज़ा आता. इस समय तक मम्मी एक बार झाड़ चुके थी, और मैं अभी तक लेता ही था तो मैं उठा और मम्मी को अपनी साइड को खीच लिया.
अब मैं खड़ा हो चुका था, और मम्मी डॉगी स्टाइल में थी. दीदी फिर मम्मी के पास गयी और उनका फेस दीदी ने अपनी छूट में रख दिया. मैं मम्मी के साथ सेक्स कर रहा था और वो दीदी को प्लीज़ कर रहे थे. अब मेरा भी होने वाला था. मुझे मम्मी के रूम में आए 2 घंटे से उपर हो चुके थे, और दीदी और मम्मी के साथ करते हुए करीब एक घंटा 45 मिनिट्स हो चुके थे.
मैने अपना लंड निकाला. वो दोनो अपने-अपने घुटनो में बैठी और मैने अपना माल उनके फेस में डाल दिया. तीनो बेड में लेते हुए थे और हाँफ रहे थे. उन दोनो ने एक-दूसरे के फेस से मेरे वीर्या सॉफ किया.
मुझे मम्मी से पूछना था की उस दिन रूम में रवि के साथ क्या हुआ था. पर दीदी थी तो मैं ये टॉपिक उनके सामने नही लाना चाहता था. यही सोच रहा था और सोच रहा था की एक-दो रौंद और हो जाए. मैने देखा ये दोनो मुझे कड्ड्ल करके सो गये थे. फिर मैं भी सो गया.
सुबह 6 बजे थे, डोरबेल रिंग हुई. मेरी नींद टूटी. मैने देखा दोनो सोए हुए थे. नींद में दोनो क्यूट लग रहे थे. फिर डोरबेल की आवाज़ दोबारा आई. मेरा लंड खड़ा था और ये दोनो नंगी सोई थी. मैने शॉर्ट्स डाले और सोचने लगा इतनी सुबह-सुबह कौन आया होगा.
डोर ओपन करने से पहले मैने इनके रूम का डोर बंद किया, और फ्रंट डोर ओपन किया तो देखा वो सुमन आंटी थी और निघट्य पहनी हुई थी. फिर मुझे याद आया रिया की शादी के बाद से जब भी बंटी अंकल नही होते थे आंटी हमारे साथ रहती थी.
मैने आंटी को अंदर बुलाया. मैने उपर से कुछ नही पहना था और नीचे शॉर्ट्स और निक्कर पहना था. पर मॉर्निंग बोनेर के वजह से मेरे लंड का आकार दिखाई दे रहा था. ये सुमन आंटी ने देख लिया था.
सुमन: बेटा, तेरे अंकल और पापा तो है नही यहाँ. सुबह तेरे अंकल को कॉल किया तो बोले वो एक हफ्ते में आ जाएँगे.
मैं: अछा, हा पापा बोल रहे थे की उनको आने में एक मंत लगेगा.
सुमन: तेरे अंकल भी एक मंत रुकने वाले थे, पर तेरे पापा ने माना कर दिया.
मैं: लेकिन वो गये कहाँ है? आपको कुछ आइडिया है?
सुमन: बेटा, ये बात तो तेरी मम्मी ही आचे से बता सकती है.
मैं: आप यहाँ आराम से बैठो, मैं अपने लिए छाई बना के लाता हू.
मैं छाई बनाने को जेया रहा था. तभी आंटी की नज़र मम्मी के रूम में गयी जिसमे मैने बाहर से कुण्डी मारी थी.
सुमन: बेटा, तेरी मम्मी भी गयी है क्या? तेरे अंकल ने तो बोला की वो दोनो ही गये है.
फिर मुझे याद आया की मैने मम्मी के रूम लॉक किया था.
मैं: वो मम्मी दीदी के रूम में सो रहे है. मम्मी को अकेले सोने की आदत नही.
सुमन: हा, मैं आचे से जानती हू उसकी आदत.
लास्ट बात उन्होने हल्के से बोली. मैने उनकी बात को सुना अनसुना कर दिया. अब बात तो मुझे पहले से ही पता थी. यार मुझे एक दर्र था की वो दीदी के रूम में ना चली जाए. पर मैं वहाँ खड़े हो उनके उपर नज़र भी नही रख सकता था.
मैं छाई बनाने को चला आया. मैं सोच रहा था, कलपद हो गया ये तो. कहाँ मैं सपने देखा था की जब तीनो घर में रहेंगे, नंगे रहेंगे, कभी भी किसी को भी छोड़ दूँगा दोनो में से. ये तो रूम टॉप फ्लोर में था, यहाँ कम ही लोग आते थे. एक मॅन किया की सुमन आंटी को भी जाय्न करवा लू, बुत आइडिया बॅकफाइर कर गया.
दोस्तों जब लॉड लगने होते है, वो लग ही जाते है. मैने ये सोचा की आंटी अगर दीदी के रूम में गयी और उनको वहाँ कोई ना दिखे तो मम्मी के रूम में जा सकती थी. पर ये नही सोचा की अंदर से मम्मी या दीदी भी तो बाहर आ सकती थी, और उनको आंटी आई थी, थोड़ी ना पता था.
वो तो डोर नॉक करेंगी तो डोर आंटी खोल लेंगी, और यही हुआ. मैं छाई लेके गया तो मम्मी के रूम का डोर ओपन था. दीदी नंगी खड़ी थी. आंटी शॉक में पहले मुझे देखा, फिर दीदी को, और अंदर जाके मम्मी को जो बेड में नंगी सोई थी.
दूसरी तरफ एक हवेली में चौदह लोग बैठे थे. उनमे से दो लोग बंटी अंकल और पापा थे.
65 साल वाले माले: बेटे, तूने आने में बहुत देर कर दी.
69 साल वाले माले (गुस्से में): लेकिन सेयेल तू आया ही क्यूँ यहाँ? किसने बुलाया इस घटिया इंसान को?
43 साल वाली फीमेल: पापा, मैने बुलाया भाई को. मा की आखरी इच्छा थी मरने से पहले एक बार इनको देखना चाहती थी.
55 साल वाली फीमेल: पहले बच्चो को यहाँ से जाने दो, फिर बात कर लेना आचे से. बच्चो अपने-अपने रूम में जाओ.
3 अर्ली 20स वाले बच्चे अपने-अपने रूम में गये. तीनो में से एक लड़की पीछे मूड के देखी. ऐसा लगा वो पापा को कुछ बोलना चाह रही थी. पर बिना बोले चले गयी. वो लड़की लिषा थी. बाकियों के नाम भी धीरे-धीरे आपको पता चल जाएँगे.
69 साल के माले: मैं इसको एक फूटी कौड़ी नही दूँगा. इससे बोलो की चला जाए.
पापा: मुझे भी आप लोगों से कुछ नही चाहिए. ये तो मा की आखरी इच्छा थी की मैं एक महीना यहाँ रुक के जौ.
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