एक नयेपन का अहसास

ek nayepan ka ahsaas आज मैं आप लोगों को अपनी सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ।
मेरा नाम विनोद है और मेरी उम्र ३६ साल है। मेरी पत्नी का नाम सुषमा है और उसकी उम्र ३४ साल है। हमारी शादी १४ साल पहले हुई थी और हमारे २ बच्चे हैं। बड़ा लड़का १२ साल और छोटी बेटी ७ साल की है।
हमारी ज़िन्दगी और यौन-जीवन आज से ३ साल पहले तक वैसे ही चल रही थी, जैसे कि एक आम मध्यवर्ग के परिवार की चलती है। पिछले ११ सालों में हम लोग सेक्स बस एक ज़रूरत के हिसाब से करते थे। उसमें कोई रोमांच नहीं था, कि हमें सेक्स करने में और मज़ा नहीं आ रहा था।
फिर हमें लगा कि इस तरह तो हम दूर होते जाएँगे, हमने इसमें कुछ नयापन लाने की सोची। उस दिन से हम लोगों ने साथ में ब्लू-फिल्म देखनी शुरु की और गन्दी बातें करनी भी शुरु की। पहले मेरी पत्नी लंड-चूत जैसे शब्द बोलने में भी कतराती थी, पर धीरे-धीरे वह ये बातें आराम से बोलने लगी। उस दिन से हमने अपने यौन-जीवन में एक नयापन का अहसास किया और हमें मज़ा भी आने लगा।
सुषमा भी पहले से उलट खुलकर सेक्स करने लगी। पहले जिन सब कामों के लिए वह मना किया करती थी अब वे सारे काम वह ख़ुद ही करवाने-करने लगी। जैसे कि मुँह में लौड़ा लेना, और गांड मरवाना, मेरा वीर्य चेहरे पर लेना, उसे इन कामों में अब बड़ा मज़ा आने लगा था।
मैं आप लोगों को अपनी बीवी के बारे में थोड़ा बताता चलूँ। उसकी उम्र ३४ साल है, गोरा बदन, दूध की तरह, उसकी फ़िगर भी ३७-२९-३८ है और उसका क़द ५’ ५” है। मैंने कई बार लोगों को उसे टेढ़ी नज़रों से देखते हुए देखा है, तब मुझे बड़ा ही अजीब सा महसूस होता है, उन लोगों पर गुस्सा भी नहीं आता।
एक दिन मैंने सुषमा से वेबकॅम पर सेक्स करने की बात की पर उसने मना कर दिया, लेकिन जब मैंने उससे कहा कि हम लोग अपना चेहरा नहीं दिखाएँगे तो वह मान गई। उस दिन से मैं ऐसे युगल की खोज में जुट गया जो हमारी तरह सोचते हों और एक दिन हमें ऐसा ही एक युगल मिल गया। हम लोगों ने शनिवार रात का समय तय किया कॅम पर सेक्स करने के लिए।
शनिवार रात जब बच्चे सो गए तो रात को ११ बजे, तय समयानुसार हम लोग इन्टरनेट पर मिले। दूसरा युगल था, ललित ३७, और रश्मि ३३। वे भी हमारी तरह एक मध्यमवर्गीय परिवार से थे और सेक्स में नयापन चाहते थे। तो हम लोगों ने नेट से चैट शुरु की और धीरे-धीरे सेक्स की बातें करने लगे। जहाँ मैं रश्मि के नंगे शरीर को देखने के लिए उतावला था वहीं सुषमा भी ललित का लंड देखने के लिए उतावली दिख रही थी। पर वह अपने चेहरे से ज़ाहिर नहीं कर रही थी। हमने जब उन लोगों से चैट करी तो उन लोगों ने बताया कि वह लोग फोन सेक्स और अदला-बदली करना चाहते है। हम लोगों ने कहा- हम अभी सोचेंगे।
उस दिन सुषमा ने गुलाबी रंग की नाईटी पहन रखी थी और उसके अन्दर काले रंग की कच्छी और ब्रा। और मैंने काली हाफ पैंट पहन रखी थी। उधर रश्मि ने सलवार कमीज़ और ललित ने पाजामा पहना हुआ था।
जैसे-जैसे चैट की बात आगे बढ़ी, हम लोगों ने एक-दूसरे को कपड़े उतार देने के लिए कहा। उधर रश्मि ने अपनी सलवार कमीज़ उतार दी और वह केवल लाल ब्रा और लाल कच्छी में थी। इधर सुषमा ने उसको देखते हुए अपनी नाईटी उतार दी और अपनी ब्रा-कच्छी भी उतार दी। उधर ललित और रश्मि अपने सारे कपड़े उतार कर पूर्णतः नग्न हो चुके थे। उनकी देखा-देखी में इधर हम भी नंगे हो गए।
आज हमें एक नए प्रकार का आनन्द मिल रहा था। रश्मि के ख़ूबसूरत बद़न, उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ देखकर, उसकी बिना बालों की गुलाबी चूत देखकर मेरा लंड तो फुँफकारे मार रहा था। उधर ललित का लंड देखकर सुषमा की भी यही हालत थी। ललित का लंड मेरे बराबर ही था पर मेरे से थोड़ा मोटा होगा। वैसे मेरा लंड भी ख़ूब मोटा-तगड़ा है, पर उसका मेरे से थोड़ा अधिक मोटा लगा। जब हम लोग नंगे हुए तो ललित ने कहा क्यों ना फोन सेक्स करें। तो हम भी राज़ी हो गए। पिर ललित ने हमें फोन किया और हम लोग स्पीकर ऑन करके बातें करने लगे। फिर हम लोगों ने खुल्लम-खुल्ला चूत-लंड की बातें शुरु कर दीं। सुषमा मेरा लंड चूसने लगी। अब हम लोग टाईप नहीं कर रहे थे। बस फोन पर ही बातें करके कैमरे के सामने आनन्द का आदान-प्रदान कर रहे थे।
अब मैंने सुषमा की चूत को रश्मि की चूत समझ कर चाटना शुरु कर दिया, और आज मुझे वही चूत चाटने में अलग प्रकार का आनन्द आ रहा था। कुछ देर चाटने के बाद सुषमा मेरे मुँह में ही झड़ गई। आज जितना मज़ा हमें सेक्स करने में आ रहा था, उतना पहले कभी नहीं आया था। अब मैंने और ललित ने अपनी बीवियों को घोड़ी बना कर चोदना शुरु कर दिया था और फोन पर ही गन्दी-गन्दी बातें कर रहे थे। अब हम लोगों के चेहरे भी एक-दूसरे के सामने थे। इसलिए मज़ा दुगुना हो गया था।
२०-२५ मिनट चोदने के बाद मैंने और ललित ने अपना सारा वीर्य अपनी बीवियों के मँह में डाल दिया। आज हमने महसूस किया कि जितना मज़ा हमे आज आया, उतना मज़ा पहले कभी नहीं आया। उस दिन का कार्यक्रम खत्म करके हमलोग सो गए। दूसरे दिन ललित का फोन मेरे पास आया और उसने हमसे बीवियों के अदला-बदली के बारे में पूछा। मैंने उससे कहा कि मैं सुषमा से बात करके बताऊँगा। उसने मुझे बताया कि रश्मि को मेरा लण्ड बहुत पसन्द आया और उसे सुषमा की गाँड बहुत पसन्द आई। यह सब बातें सुनकर मेरा लंड फिर खड़ा हो गया।
मैं फिर से सुषमा की चुदाई करने चल पड़ा। उस समय वह बाथरूम में कपड़े धो रही थी। मैंने वहीं जाकर उसकी नाईटी ऊपर उठाकर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। वह इसके लिए तैयार नहीं थी, इसलिए ना-नुकर करने लगी. पर मेरी हरक़तों ने उसे भी उत्तेजित कर दिया और वह मस्त होकर चुदवाने लगी। मैंने इसी उत्तेजना में उससे अदला-बदली के बारें में बात की। ललित और रश्मि के साथ उस समय उसने कुछ जवाब नहीं दिया, और पूरी ताक़त से चुदाई में जुट गई। मैंने महसूस किया कि आज वह और अधिक मज़े से चुदवा रही है। फिर थोड़ी ही देर में वो झड़ गई।
उसने पलट कर मेरा लंड अपने मुँह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह ज़ोरों से चूसने लगी। उसकी इस हरक़त से मैं भी थोड़ी ही देर में उसके मुँह में ही झड़ गया। मैंने उससे फिर अदला-बदली के बारे में पूछा तो उसने कुछ कहा तो नहीं पर हल्के से मुस्कुरा दी। यह मेरे लिए हरी झंडी थी। मैंने फटाफट ललित को फोन करके बता दिया कि हमलोग तैयार हैं और मैंने उससे जगह और समय भी तय करने को कह दिया।
हमलोगों ने अगले शनिवार की योजना तय की और हम लोग बेसब्री से शनिवार की प्रतीक्षा करने लगे। इस बीच हम लोग कभी-कभी फोन सेक्स भी कर लेते थे। उस शनिवार को हम लोगों ने अपने बच्चों को उनकी नानी के घर भेज दिया। मैं एक बोतल वोदका लेकर घर आ गया था दोपहर में ही।
शाम को हम लोग तैयार होकर ललित और रश्मि की प्रतीक्षा करने लगे। मैंने ढीली टी-शर्ट और लोअर पहन लिया। मैंने अन्दर से कुछ नहीं पहना था। सुषमा ने गुलाबी रंग की सेक्सी सी साड़ी पहन रखी थी, जिसमें वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। ठीक ७ बजे ललित और रश्मि आ गए। हम लोग आपस में बहुत गर्मजोशी से मिले। जैसे एक दूसरे को काफी पहले से जानते हों। हमारी बीवियाँ थोड़ा सा झिझक रहीं थीं, लेकिन मैंने और ललित ने माहौल को सँभालने की पूरी कोशिश की।
मैंने ललित को कपड़े बदलने को कहा, जिससे हम आराम से बातें करने लगे। रश्मि ने भी हरे रंग की साड़ी पहन रखी थी, और बहुत ही सुन्दर लग रही थी। मेरा लंड तो उसको देखकर ही आपे से बाहर हो चला था। शायद उसने भी मेरी हालत पहचान ली थी। थोड़ी ही देर में ललित भी कपड़े बदल कर आ गया। उसने शॉर्टस और शर्ट पहन रखी थी और वह भी बारबार सुषमा को देखने की कोशिश कर रहा था। मुझे लगा उसने भी अन्दर से कुछ नहीं पहन रखा था।
मैं तब तक वोदका की बोतल, लिम्का और ४ गिलास ले आया और पैग बनाने लगा। हम लोग बातें करते-करते वोदका की बोतल खतम करने लगे। हम लोग पहले बातें करने में थोड़ा शरमा रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे पैग खत्म हो रहे थे हमलोग आपस में खुलते जा रहे थे। अब मैं आप लोगों को यह कहानी एक एकांकी की तरह सुनाता हूँ कि हम आगे कैसे बढ़े।
———————————————————————————————————————दृश्य – 1 (ड्राईंग रूम में वोदका पीते हुए)
ललित – सुषमा तुम्हारी चूत किस रंग की है?
(सुषमा शरमा जाती है है और कुछ नहीं बोलती, बस धीरे-धीरे मुस्कुरा देती है।)
विनोद – यार उसी रंग की होगी जैसी रश्मि भाभी की है, वैसे सुषमा की चूत एकदम चिकनी है और गुलाबी रंग की है। रश्मि भाभी की चूत कैसी है।
ललित – रश्मि की चूत भी एकदम मक्खन की तरह है और एकदम लाल। तुम चाहो तो देख सकते हो। (रश्मि यह सुनकर शरमा जाती है।)
(हमलोग और वोदका पीने लगते हैं, मैं जानबूझ कर बीवियों के पैग बड़े और अपने पैग छोटे बना रहा था।)
विनोद – चलो यार, थोड़ा नाश्ता कर लेते हैं।
ललित – आज तो हम चूत और मम्मों का ही भोजन करेंगे।
विनोद – यह ठीक है रश्मिजी आपके मम्मे दिखाओ ना।
रश्मि – पहले अपना लंड तो दिखलाओ।
सुषमा – चलो हम लोग बेडरूम में चलते हैं।
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दृश्य – 2 (बेडरूम – हाथ में अन्तिम पैग) ललित, रश्मि, मैं और सुषमा चारों बिस्तर पर हैं
ललित – विनोद टीवी ऑन कर दो ना यार, कोई फिल्म है तो लगा दो। (उसने मेरी ओर देखकर आँख मारी, और मैं उसका इशारा समझ गया था।)
फिल्म चलाते ही उसमें ब्लू-फिल्म शुरु होती है। हम लोग मूड में थे इसलिए कोई कुछ नहीं बोला और फिल्म देखनी शुरू कर दी। बिस्तर पर पहले मैं लेटा था, फिर रश्मि, उसके बाद सुषमा और फिर ललित। हमारा बिस्तर काफी बड़ा था पर अगर चार लोग उसमें लेटे तो एक दूसरे से छू जाते ही। हमारा शरीर भी एक-दूसरे से छू रहा था। मुझे रश्मि की टाँग लग रही थी, वही हाल ललित का भी था। सामने ब्लू फिल्म चल रही थी, जिसमें २ लड़के और २ लड़कियाँ थीं, पहले लड़के ने लड़की के मुँह में अपना लंड डाल रखा था और दूसरी लड़की उसकी चूत चाट रही थी, दूसरा लड़का दूसरी लड़की की चूत चाट रहा था।
यह सब देखकर और रश्मि का स्पर्श पाकर मेरा लौड़ा एकदम कड़क हो गया था और वह पूरी तरह खड़ा हो चुका था, यही हालत ललित की भी थी। हम दोनों ने फिर रश्मि और सुषमा की तरफ करवट कर ली और उनके थो़ड़ा और समीप आ गए जिससे मेरा लंड रश्मि की टाँग को छूने लगा, और ललित ने भी लगभग ऐसा ही किया। रश्मि और सुषमा के चेहरे भी लाल हो चुके थे, शायद यह हमारा पहला अनुभव था इसलिए काफी अच्छा लग रहा था। धीरे-धीरे मैंने रश्मि के मम्मों पर हाथ रख दिया और उन्हें सहलाने लगा। ललित भी सुषमा का पेट और टाँगें सहला रहा था। ब्लू-फिल्म की मादक आवाज़ों ने कुछ और भी मज़ा पैदा कर दिया था।
हम दोनों ने धीर-धीरे उन दोनों की साड़ी ऊपर कर दी। दूधिया रोशनी में उन दोनों की टाँगें और जाँघें ऐसी चमक रहीं थीं कि वहाँ आँखें नहीं ठहर पा रहीं थीं। यह कह पाना मुश्किल था कि दोनों में से कौन अधिक गोरी थी। रश्मि ने लाल रंग की कच्छी पहन रखी थी। साथ में हम गन्दी बातें भी कर रहे थे, जो बड़ी मस्त लग रही थीं। सुषमा ने काली कच्छी पहन रखी थी। रश्मि की कच्छी नीचे से गीली थी, जिससे लगता था वह पूरे मज़े में है, वही हाल सुषमा का भी था।
ललित – यार विनोद तेरी बीवी साली बड़ी मस्त है, इसकी चूत क्या फूली हुई लग रही है ऊपर से।
विनोद – हाँ यार तेरा माल भी बड़ा मस्त लग रहा है, सोचता हूँ खा जाऊँ।
ललित – चल यार दोनों को नंगा कर देते हैं (उसने सुषमा के कपड़े उतारने शुरु कर दिए।)
उसको देखकर मैंने भी रश्मि के कपड़े उतारने शुरु कर दिए।
सुषमा – अरे तुम दोनों भी तो नंगे हो जाओ, या ऐसे ही पड़े रहोगे?
फिर देखते ही देखते हम चारों नंगे हो गए। ट्यूबलाईट की रोशनी में हम चारों के बदन ऐसे चमक रहे थे कि पूछिए मत, शायद ऐसा मज़ा पहले कभी नहीं आया मुझे।
ललित – मैं तो सुषमा की चूत चाटूँगा! (और उसने सुषमा की चूत चाटनी शुरु कर दी।)
विनोद – मैं भी रश्मि की चूत ही चाटूँगा! (और मैंने भी रश्मि की चूत चाटनी शुरु कर दी।
रश्मि – चाटो राजा चाटो, ज़ोर से चाटो… आज बहुत मज़ा आ रहा है… आआआ… उउअअमममममम… खा जाओ आआहहहाहा…
सुषमा – ज़ोर से चाटो… आआहहहह… उम्म्म्म्म्ममममम आहहाहाहाहाह- आऊचच्च्च वाऊ
क़रीब २०-२५ मिनट तक चूसने के बाद रश्मि ने मुझे बालों से पकड़ कर ज़ोर से अपनी चूत पर चिपका लिया। मुझे लगा कि वह झड़ने वाली है और थोड़ी ही देर में ही वह मेरे मुँह में झड़ गई। उसने मेरा मुँह पूरा भिगो दिया था। ऐसा लग रहा था कि मैं मुँह धोकर आया हूँ। फिर हम दोनों ललित और सुषमा को देखने लगे। सुषमा भी बस अब झड़ने ही वाली थी और देखते ही देखते वह भी ललित के मुँह में झड़ गई, वह दृश्य बड़ा ही मस्त था जब वह झड़ रही थी। मैंने आगे बढ़कर उसके होंठों को चूम लिया।
फिर हम चारों एक दूसरे के होंठ चूमने लगे। मैंने कस-कस कर रश्मि के होंठों को चूसना शुरु कर दिया। कुछ देर चूसने के बाद मैंने रश्मि को बिस्तर के पीछे दीवार से लगा दिया और उसके मुँह में अपना लंड डाल दिया। अब वह हिल नहीं सकती थी, और मैं उसके मुँह में ही धक्के मारने लगा। वहीं ललित ने सुषमा को बिस्तर पर लिटा कर उसके मुँह में अपना लंड डाल कर झटके मारने शुरु कर दिए। मैंने ध्यान दिया तो मुझे ललित का लंड बड़ा मस्त लगा।
ललित – विनोद मज़ा आ रहा है ना?
विनोद – हाँ यार, ऐसा मज़ा तो पहले कभी नहीं आया। यार दोनों एक ही साथ झड़ेंगे।
ललित – “आज इन बहन की लौड़ियों को मस्त करके छोड़ेंगे, हर तरह से जैसे ब्लू-फिल्मों में देखा करते हैं।
विनोद – हाँ आज सारी हसरतें जो सिर्फ हम सोचते थे वह पूरी करेंगे।
क़रीब २०-२५ मिनट बाद बातें करते-करते हम झड़ने लगे और मैंने अपना सारा माल रश्मि के मुँह में डाल दिया। वहीं ललित ने भी अपना पूरा माल सुषमा के मुँह में उड़ेल दिया था। वे दोनों बाथरूम में जाने लगे, मुँह साफ करने के लिए, पर हमने उन्हें रोक दिया। मैंने रश्मि को कहा कि वह अपने मुँह का सारा माल सुषमा के मुँह में डाल दे, जैसे ब्लू-फिल्मों में करते हैं। शायद नशे में होने के कारण या मज़े की वज़ह से सुषमा ने भी अपना मुँह खोल दिया और रश्मि ने अपने मुँह का सारा माल सुषमा के मुँह में डाल दिया। फिर हमने सुषमा को कहा कि वह अपने मुँह का सारा माल रश्मि के चेहरे पर गिराए। सुषमा ने वैसा ही किया। फिर मैंने और ललित ने वह सारा माल उन दोनों के चेहरे पर से पोंछ दिया। उसके बाद रश्मि और सुषमा ने हम दोनों को चूम लिया और एक बार फिर हम लोगों के होंठ एक दूसरे से जुड़ गए। हम इन बातों की बस कल्पना ही करते थे, पर आज करके कुछ अच्छा और थोड़ा अजीब सा लग रहा था, शायद पहली बार करने के कारण।
उसके बाद हमने एक-दूसरे को साफ करके दुबारा ब्लू-फिल्म देखने में लग गए। इस बार दोनों लड़कों ने अपना लंड एक लड़की की चूत और गाँड में डाल रक्खा था और दूसरी लड़की एक लड़के को चूम रही थी और कभी-कभी नीचे वाला लड़का उसकी चूत भी चाट लेता था। यह सब देख ललित बोला।
ललित – यार क्या मस्त चुदाई हो रही है, सुषमा तुम्हारा क्या ख्याल है इस बारे में?
सुषमा – अरे हम तो कितने भी लंड ले लेंगे, तुम डालने वाले बनो।
पहली बार सुषमा के मुँह से लंड शब्द सुनने के बाद ललित कुछ अधिक ही उत्तेजित हो गया और वह रश्मि और सुषमा के बीच बैठ गया और दोनों की जाँघें सहलाने लगा। मैं भी जाकर उन लोगों के पास बैठ गया।
विनोद – यार ललित तु्म्हारी बीवी बड़ा मस्त लंड चूसती है।
रश्मि – तुम भी तो बड़ी मस्त चूत चाटते हो।
हम लोग इसी तरह की बातें करने लगे। रश्मि मेरा और सुषमा विनोद का लंड सहला रही थी। अब तक हमारे लंड पूरी तरह खड़े हो चुके थे और हम चुदाई के लिए पूरी तरह से तैयार थे। अचानक ललित मेरा लंड पकड़ते हुए बोला – यार विनोद तेरा लंड तो बड़ा मस्त है, सुषमा तू तो बहुत खुश रहती होगी।
इसकी इस हरक़त का मुझे अंदाज़ा नहीं था, पर उसकी इस हरक़त की वज़ह से मेरे शरीर में नई झुरझुरी दौड़ गई और मेरा लंड और भी कड़ा हो गया।
विनोद – हाँ पर तुम्हारा लंड भी बड़ा मस्त है यार, भाभी की चूत तो निहाल हो जाती होगी।
ललित – वो तो तुम रश्मि से ही पूछ लो।
रश्मि – लंड में क्या रखा है, कौन कितना मज़ा दे पाता है बात इस पर निर्भर करती है।
सुषमा – रश्मि, चलो एक-एक पैग और बना लाते हैं।
रश्मि – हाँ चलो।
उनके जाने के बाद मेरा भी मन ललित का लंड पकड़ने का हुआ, और मैंने उसके लंड पर हाथ रख दिया। मुझे थोड़ा अजीब सा महसूस हुआ कि मैंने कोई गरम चीज़ पकड़ ली हो, लेकिन मुझे बहुत अच्छा लगा।
ललित – ज़ोर से पकड़ो यार। (और वह भी मेरा लंड पकड़ लेता है और मुट्ठ मारने लगता है। मैं भी उसका मुट्ठ मारना शुरू कर देता हूँ। हमारे लंड और भी कड़े हो गए।)
विनोद – यार जब हमारी बीवियाँ इसे मुँह में लेतीं होंगी तो उन्हें कैसा लगता होगा?
ललित – हम भी लेकर देख लेते हैं।
विनोद – बीवियाँ देखेंगी तो क्या सोचेंगी?
तब तक रश्मि और सुषमा आ जाती हैं और हम सामान्य होकर बैठ जाते हैं। पैग पीने के बाद हम लोग फिर ब्लू-फिल्म देखने लग जाते हैं, साथ ही एक-दूसरे को चूमना भी शुरु कर देते हैं।
मैंने रश्मि को सीधा लिटाकर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। मुझे अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ी और मेरा लंड उसकी चूत में जड़ तक घुस गया। वहीं दूसरी तरफ ललित , ने भी सुषमा को घोड़ी बना कर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। हम लोग इस स्थिति में लेटे थे कि सुषमा का मुँह रश्मि के मुँह के ऊपर आ रहा था और वो दोनों आसानी से एक-दूसरे को चूम सकतीं थीं। मैं भी कभी-कभी धक्के मारते हुए सुषमा को चूम लेता था। वहीं ललित भी रश्मि को चूम लेता था। बीच-बीच में बड़ा ही मस्त दृश्य उपस्थित होता था। रश्मि और सुषमा की आहहहह… उम्म्मम्म… आउउच्चचच की आवाज़ें आ रहीं थीं। क़रीब आधा घंटा चोदने के बाद जब हमें लगा कि अब हम झड़ने वाले हैं तो मैंने ललित को आँख मार दी, शायद वह मेरी बात समझ गया था।
तब तक रश्मि और सुषमा भी झड़ चुकीं थीं। हम दोनों ने उन्हें सीधा लिटाकर उनके मुँह की तरफ मुट्ठ मारनी शुरु कर दी। वे हमारा मतलब समझ कर थोड़ी आनाकानी करने लगीं, पर हम उनके ऊपर बैठे थे तो वे उठ नहीं सकतीं थीं। कुछ ही देर में हमने अपना सारा माल उनके मुँह पर उड़ेल दिया और पस्त होकर लेट गए। उनका पूरा मुँह हमारे वीर्य से भर गया था। तभी वे दोनों उठीं और हमें कस के पकड़ कर हमें चूमने लगीं। अब हमारा ही वीर्य हमारे मुँह में था। पहले-पहले थोड़ा सा अजीब सा लगा पर जब उन दोनों ने हमें नहीं छोड़ा तो हमें भी अच्छा लगने लगा। फिर हम लोगों ने बाथरूम में जाकर स्वयं को साफ किया।
हम लोग वापिस बिस्तर पर आकार आराम से बैठे, तब तक थोड़ी-थोड़ी भूख लग आई थी, तो मैंने सुषमा को कहा कि थोड़ा नाश्ते का प्रबन्ध कर ले। तो रश्मि और सुषमा दोनों किचन में चली गईं और थोड़ी देर में वह गरमा-गरम नाश्ता ले आई। हमलोग नाश्ता करने लगे। हम लोग नंगे ही बैठे थे और टीवी पर ब्लू-फिल्म चल रही थी। लगभग आधा घंटा बैठने के बाद हम लोग दोबारा गरम होने लगे थे। तब सुषमा बोली, मैं बर्तनों को किचन में रख आती हूँ, और वह किचन में बर्तन लेकर चली गई।। तब तक मैंने रश्मि को अपने पास खींच कर उसे अपने ऊपर बिठा लिया था और अपना लंड ठीक करके उसकी चूत के दरवाजे पर सटा दिया। रश्मि थोड़ा ऊपर उठकर फिर उसपर बैठ गई थी और हिलने लगी थी। तभी मुझे भारीपन का अहसास हुआ। जबतक मैं कुछ समझ पाता, ललित ने अपना लंड रश्मि की गाँड में टिका दिया था, अब रश्मि में दो लण्ड घुसे हुए थे और ललित धक्के पर धक्के मारने लगा था। मैंने धक्के मारने शुरु नहीं किए थे क्योंकि ललित के धक्कों से मेरा लंड अपने-आप ही अन्दर बाहर हो रहा था। तबतक सुषमा भी आ चुकी थी।
सुषमा – अरे, रश्मि ने २-२ लंड ले लिए।
रश्मि – नहीं यार, ये पीछे से इन्होंने डाल दिया।
ललित – क्यों, तुम्हें मज़ा नहीं आ रहा है क्या?
विनोद – मुझे तो मस्त मज़ा आ रहा है।
सुषमा हमारे सामने बैठकर ललित के होंठ चूसने लगी और रश्मि मेरे होंठ चूस रही थी। थोड़ी देर चोदने के बाद :
ललित – पार्टी बदली जाए?
विनोद – क्यों नहीं।
और वह रश्मि की गाँड से हटकर सुषमा को अपने ऊपर बिठा लेता है, और चूत में लंड डाल देता है। कुछ देर वैसे ही चोदने के बाद मैंने अपना लंड निकाला और सुषमा की चूत में डालने लगा। उसे थोड़ा दर्द हुआ पर थोड़ी कोशिश के बाद हम दोनों के लंड उसकी चूत में थे। ऐसा हमने उसी फिल्म में देखा था। उसकी चूत ऐसी टाईट लग रही थी कि बस पूछिए मत और नीचे से ललित के लंड का एहसास जो बिल्कुल लकड़ी की तरह कड़क था। एक अजब सा अहसास हो रहा था। पहली बार मेरा लंड किसी दूसरे के लंड के साथ टकरा रहा था। थोड़ी देर में हमने फिर पार्टी बदल ली। इस बार मैंने रश्मि की गाँड में लंड डाला तो ललित बोला – क्यों ना इस बार गाँड में लंड डालें। तब मैंने इसका लंड रश्मि की चूत में से बाहर निकाल कर रश्मि की गाँड में सटा दिया। ललित का लंड काफी कड़क लग रहा था। हमने दोनों लंड रश्मि की गाँड में डालने की कोशिश की, उसे दर्द भी बहुत हुआ पर थोड़ी कोशिश के बाद दोनों लंड उसकी गाँड में थे। वैसे चोदने में बहुत ही मज़ा आ रहा था। करीब २०-२५ मिनट बाद हमलोग उसकी गाँड मे ही झड़ गए। अब तक हमारे लंडों की हालत ऐसी हो चुकी थी कि वो दुबारा खड़े होने की हालत में नहीं थे।
हम लोग सुषमा और रश्मि को छोड़ कर ड्राईंग रूम में आ गए थे।
विनोद – यार दिल भर गया पर मन नहीं भरा।
ललित – हाँ यार, अभी तो और चोदने का मन कर रहा है।
विनोद – पर यह लंड पता नहीं कब तक खड़े होंगे।
ललित – एक तरीका है इन्हें खड़ा करने का।
विनोद – कौन सा तरीका?
तब विनोद ने मेरा लंड अपने हाथों में ले लिया और उसे सहलाने लगा। उसके ऐसा करने से मेरा लंड फिर हल्के-हल्के खड़ा होने लगा था। मैंने भी उसका लंड पकड़ कर ऐसा ही किया, पर वो पहले वाली बात नहीं आ रही थी। तभी ललित ने कुछ ऐसा किया कि मेरा लंड पहले से भी अधिक कड़क हो गया। उसने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया था, उसकी ऐसी हरक़त की मुझे उम्मीद नहीं थी, पर मेरा लंड एकदम से कड़क हो चुका था। मुझे ना जाने क्या हुआ कि मैंने भी उसका लंड अपने मुँह में डाल लिया और जैसा कि मुझे लगता था, उसका लंड भी कुछ ही देर में पूरी तरह टाईट हो चुका था। बड़ा ही मस्त लग रहा था उसका लण्ड।

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