एक मा के अपने पति के भाई के साथ रोमॅन्स की कहानी

हेलो दोस्तों, मैं आपका दोस्त मनीष आप सभी का मेरी मम्मी की इस तीसरी सेक्स कहानी के 3र्ड पार्ट में स्वागत करता हूँ. तो दोस्तों जैसा आपने पहले दोनो पार्ट में पढ़ा की टॉ जी इलाज के लिए शहर आए थे, और हमारे घर रुके हुए थे.

टॉ जी की सर्जरी हुई थी, और फिसियोतेरपी भी चल रही थी. रात को पापा फिसियोतेरपी में मदद करते और दिन में जब पापा ऑफीस जाते, तो पापा ने मम्मी को टॉ जी की मदद करने को कहा था.

जैसा आपने पार्ट 2 में पढ़ा, की मम्मी टॉ जी की बातों से इंप्रेस तो हो ही गयी थी, और एक दिन चलते वक़्त जब मम्मी टॉ जी को सहारा दे रही थी. तभी टॉ जी ने जान-बूझ कर बॅलेन्स बिगड़ने का नाटक किया, और गिरने के बहाने मम्मी के गरम शरीर को हाथ लगाया. अब आयेज.

टॉ जी और मम्मी को दोनो को एक-दूसरे के स्पर्श के कारण शायद दोनो के अंदर कांवासना जागी थी. दोनो एक-दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे. मम्मी टॉ जी को देख कर नीचे मूह कर लेती, और शरमाती.

तो मम्मी की ऐसी हरकते देख कर टॉ जी अपने मूह पे उंगलियों से टॉ मार कर अपना मर्दाना अंदाज़ मम्मी को दिखाते. पापा इस सब से अंजान थे. इसलिए उन्होने उन दोनो की तरफ ज़्यादा ध्यान नही दिया.

लेकिन मैने दोपहर में ये सब देख लिया था. इसलिए मैं उन दोनो पर नज़र रख रहा था. पर उन दोनो को लग रहा था, की उनकी ये शरारती हरकते कोई नही देख रहा था.

दूसरे दिन जब पापा ऑफीस गये. तब घर पर मैं, टॉ जी, और मम्मी ही थे. मुझे पता था आज कुछ ना कुछ होने वाला था. इसलिए मैं भी चौकन्ना था. दोनो का एक-दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुराना और इशारे करना चालू ही था. तभी मम्मी ने मुझे ग्रोसरी लाने के बहाने बाहर भेज दिया.

मैं जानता था ये मम्मी और टॉ जी का प्लान था. इसलिए मैं बाहर जेया कर घर के पीछे की साइड आ गया जहा से हमारे घर के बेडरूम के अंदर देखा जेया सकता था.

फिर मैने अंदर झाँक कर देखा. मैने देखा टॉ जी ने मम्मी को अपनी गोदी में बिताया था, और अपने हाथो से मम्मी के बाल खोले थे. टॉ जी मम्मी के बालों में उनका हाथ घुमा रहे थे, और मम्मी के साथ कुछ बात कर रहे थे, जिसे सुन कर मम्मी बस शर्मा कर मुस्कुरा रही थी.

तभी मैने तोड़ा ध्यान देकर सुनने की कोशिश की. टॉ जी मम्मी से कह रहे थे-

टॉ जी: रजनी तुम बहुत सुंदर हो. मैं तुमसे प्यार करने लगा हू.

मम्मी ये सुन कर शर्मा रही थी, और टॉ जी से कहने लगी: अब मैं क्या बतौ. मुझे भी आप आचे लगने लगे है. पर…

टॉ जी: पर क्या रजनी? मैं जानता हू तुम क्या सोच रही हो. तुम संजय के बारे में सोच रही हो ना? उसको मैं नही पता लगने दूँगा, और तुम उसके बारे में क्या सोच रही हो? वो कहा तुम्हे खुश रखता है? तुम्हारी जैसी कामुक औरत मेरी बीवी होती तो…

मम्मी: तो क्या?

टॉ जी: अगर तुम मेरी बीवी होती ना रजनी, तो मैं दिन-रात तुमको ही चिपके रहता. तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करता. तुम्हे इतना प्यार देता, इतना प्यार देता, की तुम तक जाती मेरा प्यार पा कर. मुझे तुम्हे अपना प्यार देना है रजनी. मैं तुमसे बहुत प्यार करने लगा हू. ई लोवे योउ रजनी.

मम्मी: मैं भी आपको पसंद करने लगी हू. ई लोवे योउ टू.

ऐसा सुनते ही टॉ जी ने अपने होंठ मम्मी के होंठो पर रख दिए, और उन्हे चूमना शुरू किया. टॉ जी मम्मी के होंठो का सारा रस्स पी रहे थे, जैसे मधु मक्खी फूलों से रस्स पी लेती है.

टॉ जी ने मम्मी की सारी का पल्लू हटा दिया, और मम्मी के ब्लाउस पर अपना मूह घुसने लगे. वो एक-दूं भूखे जानवर की तरह मम्मी पर टूट पड़े थे. उन्होने मम्मी को बेड पर गिरा दिया, और मम्मी के उपर आ कर मम्मी के ब्लाउस के उपर अपना मूह दबा रहे थे.

टॉ जी ने फाटाक से अपनी बनियान निकाल दी, और अब मम्मी ने टॉ जी को नीचे लिटाया, और उनके उपर आ कर टॉ जी की जांघों पर बैठी. बाद में नीचे झुक कर टॉ जी के छाती के बालों पर हाथ घुमा रही थी, और टॉ जी की छाती पर चूम रही थी. टॉ जी को बड़ा आनंद आ रहा था.

तभी मेरे फोन की घंटी बाजी, और दोनो को होश आया की उन्हे कोई देख रहा था. दोनो संभले और खिड़की की तरफ देख रहे थे. तभी मैं चुपके से सामने के दरवाज़े की तरफ आया, और बेल बजा दी, ताकि उन्हे लगे की फोन की आवाज़ सामने से आई थी.

थोड़ी देर बाद मम्मी ने दरवाज़ा खोला. मैने देखा मम्मी के बाल अब भी खुले थे और मम्मी बाल बाँध रही थी. टॉ जी उनके कमरे में ही थे, और उन्होने अभी तक बनियान नही पहनी थी.

उनके मूह को देख कर मैं समझ गया की उनको मेरा ग़लत टाइम पे आना अछा नही लगा, और लगेगा भी कैसे, जब वो उनकी शिकार को दबोच के शिकार करने ही वाले थे. तभी उनके हाथो से उनकी शिकार चली गयी. फिर मम्मी ने मुझसे पूछा-

मम्मी: बेटा तूने समान तो लाया ही नही.

मैने मम्मी से झूठ कहा की दुकान बंद थी. तब टॉ जी और मम्मी को एक-दूसरे को देख कर थोड़े परेशन हुए की शायद मैने उनको देख लिया. पर मैं ऐसे बिहेव कर रहा था की मैने कुछ नही देखा.

थोड़ी देर बाद पापा घर पर आए. पापा को कहा पता था की उनकी पीठ पीछे उनकी बीवी और उनका बड़ा भाई ये सब कर रहे थे. इसलिए वो दोनो के साथ नॉर्मल बात कर रहे थे.

तभी टॉ जी ने पापा से कहा: संजय अब मुझे आचे से चलना आ रहा है. बहू मेरी बहुत सेवा करती है, जब तू घर पर नही होता तब ( और मम्मी की तरफ देख कर मुस्कुराए. मम्मी शर्मा कर नीचे देख रही थी).

टॉ जी: तूने और बहू ने मेरी बहुत सेवा की है. इसलिए मैं जल्दी ठीक हो गया हू. मैं सोच रहा हू अगले हफ्ते गाओं वापस लौट जाता हू.

पापा: थोड़े दिन और आराम कीजिए भैसाहब. फिर चले जाना.

टॉ जी: नही गाओं में भी बहुत काम पड़े है. अब ठीक लग रहा है, तो चला जाता हू.

ये सुन कर मुझे लगा की मम्मी दुखी होंगी, की टॉ जी उनसे डोर जेया रहे थे. पर मम्मी तो खुश थी. मुझे ये समझ नही आ रहा था, की टॉ जी और मम्मी का प्लान क्या था.

अब देखते है आयेज क्या होता है. क्या टॉ जी मम्मी को छोड़ने में सफल हो पाते है. या फिरसे कोई अड़चन आ जाती है. जानने के लिए पार्ट 4 का वेट कीजिए. आपको कहानी कैसी लगी, और मम्मी के बारे में बात करने के लिए मुझे गूगले छत या गमाल कीजिए .

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