एक घर की चुदाई कहानी – 1

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और मस्त कहानी लेकर हाजिर हूँ

मेरे घर मे मैं, मेरी मा, मेरी वाइफ और मेरी सिस्टर है, मेरी सिस्टर की शादी हो चुकी है और वो अपनी ससुराल मे रहती है.मैं अपनी मा और पत्नी के साथ यहाँ हयदेराबाद मे रहता हूँ,

मेरी उम्र 28 साल की है और मेरी पत्नी 24 की है, मेरी सास और मेरी साली अभी भी बनारस के पास एक गाओं मे रहते है, और साल मे 2-3 महीने हमारे यहाँ बिताती है, सच पूछो तो दोस्तो मेरे घर एक स्वर्ग है, जहाँ किसी भी तरह की कोई मनाही नही, मैं आप को सुरू से ही ये सारी बातें बताता हूँ.

ये बातें मेरे बचपन की है, घर पर मेरी मा, मेरी दीदी और मैं सब साथ रहते थे, मेरी उमर करीब 18-19 के आस पास थी, मेरी लंबाई 5’7” की है, मेरी दीदी की उमर 18 साल की थी, उसकी स्पोर्ट्स मे रूचि थी और वो स्टेडियम जाती थी, मेरी मा टीचर है, उसकी उमर 37-38 की होगी, मगर देखने मे किसी भी हालत मे 31-32 से ज़यादा की नही लगती थी, मा और दीदी एकदम गोरी है, मा मोटी तो नही लेकिन भरे शरीर वाली थी और चूतर उनके चलने पर हिलते थे,

उनकी शादी बहुत जल्दी हो गयी थी, मेरी मा बहुत सुंदर और हस्मुख है, वो जिंदगी का हर मज़ा लेने मे विस्वाश रखती है, हालाँकि वो सबसे नही खुलती है पर मैने उसे कभी किसी बात पे गुस्साते हुए नही देखा. ये बात उस समय की है जब मैं 9थ मे था और हर चीज़ के बारे मे मेरी जिग्यासा बढ़ रही थी स्पेशली सेक्स के बारे मे, मेरे स्कूल के दोस्त अक्सर लड़की पटा कर मस्त रहते थे उन्ही मे से दो तीन दोस्तो ने अपने परिवार के साथ सेक्स की बाते भी बताई तो मुझे बड़ा अज़ीब लगा, मैने मा को कभी उस नज़र से नही देखा था पर इन्सब बातों को सुन-सुन कर मेरे मन मे भी जिग्यासा बढ़ने लगी और मैने अपनी मा को ध्यान से देखने लगा, चूँकि गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही थी और मैं हमेशा घर पर ही रहता था.

घर मे मैं मा के साथ ही सोता था और दीदी अपने कमरे मे सोती थी, मा मुझे बहुत प्यार करती थी, मा, दीदी और मैं आपस मे थोड़ा खुले हुए थे, हालाँकि सेक्स एंजाय करने की कोई बात तो नही होती थी पर मा कभी किसी चीज़ का बुरा नही मानती थी और बड़े प्यार से मुझे और दीदी को कोई भी बात

समझाती थी, कई बार अक्सर उत्तेजना की वजह से जब मेरा लंड खड़ा हो जाता था और मा की नज़र उस पर पड़ती तो मुझे देख कर धीरे से मुस्कुरा देती और मेरे लंड की तरफ इशारा करके पूछती कोई परेशानी तो नही है, मैं कहता “नही” तो वो कहती कोई बात नही, तो मैं भी मुस्कुरा देता, वो खुद कभी-कभी हम दोनो के सामने बिना शरमाये एक पैर बेड पर रख कर साड़ी थोड़ा उठा देती और उंड़र हाथ डाल कर अपनी बुर खुजलाने लगती, नहाते समय या हमारे सामने कपड़े

बदलते वक़्त अगर उसका नंगा बदन दिखाई दे रहा हो तो भी कभी भी शरीर को ढँकने या छुपाने की ज़्यादा कोशिस नही की, ऐसा नही था कि वो जान बुझ कर दिखाने की कोशिश करती हो, क्यों कि इन्सब के बाद भी मैने उसकी या दीदी की नंगी बुर नही देखी थी, बस वो हमेशा हमे नॉर्मल रहने को कहती और खुद भी वैसे ही रहती थी. धीरे धीरे मैं मा के और करीब आने की कोशिस करने लगा, और हिम्मत कर के मा से उस वक़्त सटने की कोशिश करता जब मेरा लंड खड़ा होता,

मेरा खड़ा लंड कई बार मा के बदन से टच होता पर मा कुछ नही बोलती थी, इसी तरह एक बार मा किचन मे काम कर रही थी और मा की हिलती हुई चूतर देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया, मैने ने अपनी किस्मेत आज़माने की सोची और भूख लगने का बहाना करते हुए किचन मे पहुँच गया, और मा से बोला “मा भूख लगी है कुछ खाने को दो” और ये कहते हुए मा से पीछे से चिपक गया, मेरा लंड उस समय पूरा खड़ा था और मैने अपनी कमर पूरी तरह मा

के चूतर से सटा रखी थी जिसके कारण मेरा लंड मा की चूतरों के बीच थोड़ा सा घुस गया था, मा हंसते हुए बोली “क्या बात है आज तो मेरे बेटे को बहुत भूख लगी है”, “हां मा, बहुत ज़यादा, जल्दी से मुझे कुछ दो” और मैने मा को और ज़ोर से पीछे से पकड़ लिया और उनके पेट पर अपने हाथो को कस कर दबा दिया, कस कर दबाने की वज़ह से मा ने अपनी चूतर थोरी पीछे की जिससे मेरा लंड थोड़ा और मा की चूतर के बीच मे घुस गया, उत्तेजना की वज़ह से

मेरा लंड झटके लेने लगा पर मैं वैसे ही चिपका रहा और मा ने हंसते हुए मेरी तरफ देखा पर बोली कुछ नही. फिर मा ने जल्दी से मेरा खाना लगया और थाली हाथ मे लेकर वरामदे मे आगाई, मैं भी उसके पीछे पीछे आगेया, खाना खाते हुए मैने देखा तो मा मुझे और मेरे लंड को देख कर धीरे धीरे हंस रही थी, जब मैने खाना खा लिया तो मा बोली कि अब तू जाकर आराम कर मैं काम कर के आती हूँ,

पर मुझे आराम कहाँ था मैं तो कमरे मे आ कर आगे का प्लान बनाने लगा कि कैसे मा को चोदा जाए, क्योंकि आज की घटना के बाद मुझे पूरा विसवॉश था कि अगर मैं कुछ करता भी हूँ तो मा अगर मेरा साथ नही देगी तो भी कम से कम नाराज़ नही हो गी, फिर ये ही हरकत मैने 5-6 बार की और मा कुछ नही बोली तो मेरी हिम्मत बढ़ी. एक रात खाना खाने के बाद मैं कमरे मे आकर लाइट ऑफ कर के सोने का नाटक करने लगा, थोरी देर बाद मा आई और मुझे सोता हुआ

देख कर थोरी देर कमरे मे कपड़े और समान ठीक किया और फिर मेरे बगल मे आकर सो गई, करीब एक घन्ते के बाद जब मुझे विसवॉश हो गया कि मा अब सो गयी होगी तो मैं धीरे से मा की ओर सरक गया और धीमे धीमे अपना हाथ मा के चूतरो पर रख कर मा को देखा जब मा ने कोई हरकत नही की तो मैं उनके चूतरो को सहलाने लगा और उनकी साड़ी के उपर से ही दोनो चूतरों और गांद को हाथ से धीमे धीमे दबाने लगा. जब उसके बाद भी मा ने कोई हरकत

नही की तो मेरी हिम्मत थोड़ा और बढ़ी और मैने मा की सारी को हल्के हल्के उपर खिचना सुरू किया, उपर करते करते जब सारी चूतरों तक पहुच गई तो मैने अपना हाथ मा की चूतरो और गांद के उपर रख कर थोड़ी देर मा को देखने लगा, पर मा ने कोई हरकत नही की, फिर मैं अपना हाथ उनकी गांद के छेद से धीरे धीरे आगे की ओर करने लगा, पर मा की दोनो जंघे आपस मे सटी हुई थी जिससे मैं उन्हे खोल नही पा रहा था, फिर मैने अपनी दो उंगलिया आगे की ओर बढ़ाई तो मेरी साँस ही रुक गई,

मेरी उंगलिया मा की बुर के उपर पहुँच गई थी, फिर मैं धीरे धीरे अपनी उंगलियो से मा की बुर सहलाने लगा, मा की बुर पर बाल महसूस हो रहा था, चूँकि मेरे लंड पर भी झांते थी तो मैं समझ गया कि ये मा की झांते है, इतनी हरकत के बाद भी मा कुछ नही कर रही थी तो मैने धीरे से अपनी पूरी हथेली मा की बुर पर रख दी और बुर के दोनो होंठो को एक एक कर के छूने लगा, तभी मुझे महसूस हुआ कि मा की बुर से कुछ मुलायम सा चमड़े का टुकड़ा लटक रहा है,

जब मैने उसे हल्के से खींचा तो पता चला कि वो मा की बुर की पूरी लंबाई के बराबर यानी उपर से नीचे तक की लंबाई मे बाहर की तरफ निकला हुआ था, और जबरदस्त मुलायम था.

उस समय मेरा लंड इतना टाइट हो गया था कि लगा जैसे फॅट जाएगा, मैं धीरे से उठ कर बैठ गया और अपनी सॉर्ट्स उतार कर लंड को मा के चूतर से सटाने की कोशिश करने लगा पर कर नही पाया तो मैं एक हाथ से मा की बुर मे उंगली डाल कर बाहर निकले चमड़े को सहलाता रहा और

दूसरे हाथ से मुट्ठी मारने लगा, 2-3 मीं. मे ही मैं झर गया पर जब तक मैं अपना गाढ़ा गाढ़ा जूस रोक पाता वो मा के चूतरों पर पूरा गिर चुका था, ये देख का मैं बहुत डर गया और चुपचाप सॉर्ट्स पहेन कर, मा को वैसा ही छोड़ कर सो गया. सुबह जब मैं उठा तो देखा कि मा रोज की तरह अपना काम कर रही थी और दीदी हॉकी की प्रॅक्टीस जो सुबह 6 बजे ही शुरू हो जाती थी, जा चुकी थी, मैं डरते डरते बाथरूम की तरफ जाने लगा तो मा ने कहा आज चाइ

नही माँगी तूने, तो मैने बात टालते हुए कहा कि “हां पी रहा हूँ, पेसाब कर के आता हूँ”, जब मैं बाथरूम से वापस आया तो मा देखा मा वारमदे मे बैठी सब्जी काट रही थी और वही पर मेरी चाइ रखी हुई थी, मैं चुपचाप बैठ कर चाइ पीने लगा तो मा मेरी तरफ देख कर हंसते हुए बोली कि “आज बड़ी देर तक सोता रहा हां मा नीद नही खुली” तो मा बोली “एक काम किया कर आज से रात को और जल्दी सो जाया कर” ये कह को वो हंसते हुए किचन मे चली गयी.

जब मैने देखा कि मा कल रात के बारे मे कुछ भी नही बोली तो मैं खुश हो गया, उस दिन पूरे दिन मैने कुछ भी नही किया, मैने शोच रखा था कि अब मैं रात को ही सब कुछ करूँगा जब तक या तो मा मुझसे चुदाई के लिए तैयार ना हो या मुझे डाँट नही देती. रात को मैं खाना खा कर जल्दी से रूम मे आकर सोने का नाटक करने लगा, थोरी देर मे मा भी दीदी के साथ आगाई, उस दिन मा बहुत जल्दी काम ख़त्म कर के आगाई थी, खैर मैं मा के सोने का इंतजार

करने लगा, थोरी ही देर मे दीदी के जाने के बाद मा धीरे से बेड पर आकर लेट गई, करीब एक घन्ते तक लेटे रहने के बाद मैने धीरे से आँखे खोली और मा की तरफ सरक गया, थोरी देर मे जब मेने वारमदे की हल्की रोशनी मे मा को देखा तो चौंक पड़ा, मा ने आज सारी की जगह नाइटी पहेन रखी थी और उन्होने अपना एक पैर थोड़ा आगे की तरफ कर रखा था, फिर मैने सोचा कि अगर ये किस्मेत से हुआ तो अच्छा है और अगर मा जानबूझ कर ये कर रही है तो मा जल्दी ही चुद जाएगी.

उस रात मेरी हिम्मत थोरी बढ़ी हुई थी, थोरी देर नाइटी के उपर से मा का चूतर सहलाने के बाद मैने धीरे से मा की नाइटी का सामने का बटन खोल दिया और उसे कमर तक पूरा हटा दिया, और धीरे से मा के चूतरो को सहलाने लगा, मैं जाँघो को भी सहला रहा थे, मा की चूतर और जंघे इतनी मुलायम थे कि मैं विसवॉश नही कर पा रहा था, फिर मैने अपना हाथ उनकी जाँघो के बीच डाला तो मैं हैरान रह गया,

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मा की बुर एकदम चिकनी थी, उनकी बुर पर बाल का नामोनिशान नही था, उनकी बुर बहुत फूली हुई थी और बुर के दोनो होंठ फैले हुए थे शायद एक जाँघ आगे करने के कारण, उनकी बुर से निकला हुआ चंदा लटक रहा था (मेरे कई दोस्तों ने उसके बारे मे बताया थे कि उनकी घर की औरतो की बुर से भी ये निकलता है और उन्हे इसपर बड़ा नाज़ होता है). मैं तो उत्तेजना की वज़ह से पागल हो रहा था, मैने लेटे लेटे ही अपना सॉर्ट्स

निकाल दिया और मा की तरफ थोड़ा और सरक गया जिससे मेरा लंड मा की चूतर से टच करने लगा, थोरी देर तक चुप रहने के बाद जब मैने देखा कि मा कोई हरकत नही कर रही है तो मेरी हिम्मत और बढ़ी, मैं लेटे लेटे ही मा की बुर को सहलाने का पूरा मज़ा लेने लगा, थोरी ही देर मे मुझे लगा कि मा की बुर से कुछ चिकना चिकना पानी निकल रहा है, ओह्ह्ह क्या खुश्बू थी उसकी, मेरा लंड फूल कर फटने की इस्थिति मे हो गया, मैं अपना लंड मा के चूतरो, गांद

के छेद, उनकी जाँघो पर धीमे धीमे रगड़ने लगा, तभी मुझे एक आइडिया आया कि क्यो ना आज थोड़ा और बढ़ कर मा की बुर से अपना लंड टच कराऊ, जब मैं ने अपनी कमर को आगे खिसका कर मा की जाँघो से सटाया तो लगा जैसे करेंट फैल गया हो, मुझे झड़ने का जबर्दश्त मन कर रहा था पर मैने सोचा कि एक बार मा की बुर मे लंड डाल कर उनकी बुर के पानी से चिकना कर लूँगा और फिर बाहर निकाल मूठ मार लूँगा, ये सोच कर मैने अपनी कमर थोड़ा उपर

उठाया और अपना लंड मा की बुर से लटके च्मडो को उंगलियों से फैलाते हुए उनके छेद पर रखा तो मा की बुर से निकलते हुए चिकना पानी मेरे सूपदे पर लिपट गया और थोड़ा कोशिस करने पर मेरा सुपाडा मा की बुर के छेद मे घुस गया, जैसे ही सूपड़ा अंदर गया उफ़फ्फ़ मा की बुर की गर्मी मुझे महसूस हुई और जब तक मैं अपना लंड बाहर निकालता मेरे लंड से वीर्य का फौहारा मा की बुर मे पिचकारी की तरह निकलने लगा मैं घबरा तो गया पर ज़यादा हिलने से डर रहा था कि

कहीं मा जाग ना जाए. जब तक मैं धीमे से अपना लंड मा की बुर से निकालता तब तक मेरे लंड का पानी मा की बुर मे पूरा खाली हो चुक्का था और लंड निकालते वक़्त वीर्य की गाढ़ी धारा मा की गांद के छेद पर बहने लगी, मुझे लगा अब तो मैं पक्का पिटुँगा मा से और डर के मारे जल्दी से सॉर्ट्स पहेन कर सो गया, मुझे नीद नही आ रही थी, पर मैं कब सो गया पता ही नही चला, अगले दिन उठा तो देखा कि हमेशा की तरह मा सफाई कर रही थी पर दीदी स्टेडियम नही गई थी,

मुझे देखते ही मा ने दीदी से कहा “वीना, जा चाइ गरम करके भाई को देदे, और मुझे प्यार से वहीं बैठने के लिए कहा. मैने चोरी से मा की ओर देखा तो मा मुझे देख कर पूछी आज नीद कैसे आई, मैने कहा कि “अच्छी”, तो मा हँसने लगी और मेरी पैंट की ओर देख कर बोली कि “अब तू रात मे सोते समय थोरे ढीले कपड़े पहना कर, हाफ़पैंट पहेन कर नही सोते है, अब तू बड़ा हो रहा है, देख मैं और वीनू भी ढीले कपड़े पहेन कर सोते है, मैं ये सुन कर बड़ा खुश हुआ कि मा ने मुझे डांटा नही.

उस दिन मुझे पूरा विसवॉश हो गया था कि अब मा मुझे रात मे पूरे मज़े लेने से मना नही करेगी भले ही दिन मे चुदाई के बारे मे खुल कर कोई बात ना करे. अब तो मैं बस रात का ही इंतजार करता था, खैर उस रात फिर जब मैं सोने के लिए कमरे मे गया तो मुझे मा की ढीले कपड़े पहनने वाली बाद याद आई पर मेरे पास कोई बड़ी सॉर्ट्स नही थी, फिर मैने आलमरी मे से एक पुरानी लूँगी निकाली और अंडरवेर उतार कर पहेन लिया और सोने का नाटक करने लगा, तभी मेरे

मन मे मा की सुबह वाली बात चेक करने का विचार आया, और मैने अपनी लूँगी का सामने वाला हिस्सा थोड़ा खोल दिया जिससे मेरा लंड खड़ा हो कर बाहर निकल गया, और अपने हाथो को अपनी आँखो पर इस तरह रखा कि मुझे मा दिखाई दे. थोरी ही देर मे मा कमरे मे आई और नाइटी पहन कर बेड पर आने और लाइट ऑफ करने के लिए मूडी और मेरे लंड को देखते ही रुक गई, थोरी देर वैसे ही मेरे लंड को जो की पूरे 6” लंबा और 1.5”

मोटा था, देखती रही, फिर पता नही क्यों उसने ट्यूबलाइज्ट बंद करके CFळ नाइट बल्ब जला दिया, और बेड पर लेट गई, वो मेरे लंड को बड़े प्यार से देख रही थी पर मेरे लंड को उसने छुआ नही, फिर दूसरी तरफ करवट बदल कर एक पैर को कल की तरह आगे फैला कर लेट गई, मुझे पक्का विसवॉश था कि आज मा जानबूझ कर नाइबल्ब ऑन की है ताकि मैं कुछ और हरकत करू. आधे एक घंटे के बाद जब मैं मा की ओर सरका तो लूँगी की गाँठ रगड़ से अपने आप ही खुल गई और मैं

नंगे ही अपने खड़े लंड को लेकर मा की तरफ सरक गया और नाइटी खोल कर कमर तक हटा दिया, उस रात मैने पहली बार मा के चूतर, गांद और बुर को देख रहा था, मेरी खुशी का ठिकाना नही था, मैं झुक कर मा की जाँघो और चूतर के पास अपना चेहरा लेजा कर बुर को देखने की कोशिश करने लगा, मुझे अपनी आँखो पर विसवॉश नही हो रहा था कि कोई चीज़ इतनी मुलायम, चिकनी और सुंदर हो सकती है, मा की बुर से बहुत अच्छी सी भीनी भीनी खुश्बू आराही थी, मैं एकदम मदहोश होता जा रहा था,

क्रमशः……………………

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और मस्त कहानी लेकर हाजिर हूँ अब आगे…….. पता नही कैसे मैं अपने आप ही मा की बुर को नाक से सटा कर सूंघने लगा, उफ्फ…बुर से निकले हुए चंदे के दोनो पत्ते किसी गुलाब की पंखुड़ी से लग रहे थे, मा की बुर का छेद थोड़ा लाल था और गंद का छेद काफ़ी टाइट दिख रहा था, पर सब मिला कर उनकी पूरी चूतर और जंघे बहुत मुलायम थी, मैने उसी तरह कुछ देर सूंघने के बाद मा की बुर के दोनो पत्तो को मूह मे भर लिया और चूसने लगा, उनकी बुर से बेहद चिकना लेकिन नमकीन पानी निकलने लगा, मैं भी आज चुदाई के मज़े लेना चाहता था,

फिर मैने मा की बुर से निकलते हुए पानी को अपने कड़े सुपाडे पर लपेटा और धीरे से मा की बुर मे डालने की कोशिस करने लगा. पर पता नही कैसे आज मेरा लंड बड़ी आसानी से मा की बुर के छेद मे घुस गया, मैं वैसे ही थोड़ी देर रुका रहा फिर मैने लंड को अंदर डालना शुरू किया, दो तीन प्रयासो मे मेरा लंड मा की बुर मे घुस गया ओह क्या मज़ा रहा था, मा की बुर काफ़ी गरम थी और मेरे लंड को चारो ओर से जकड़े हुए थी, थोड़ी देर उसी तरह रहने के बाद मैने लंड को अंदर बाहर करना

शुरू किया ओह जन्नत का मज़ा मिल रहा था, 4-5 मिनट अंदर बाहर करते ही मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मैने अपनी स्पीड और तेज़ कर दी और अपना गाढ़ा गाढ़ा वीर्या मा की बुर मे उडील दिया, और थोरी देर तक उसी तरह मा से चिपका हुआ लेटा रहा की अभी आराम से सो जाउन्गा, पर पता नही कैसे आँख लग गई और मैं वैसे ही सो गया, सुबह जब उठा तो देखा मेरी लूँगी की गाँठ लगी हुई है और एक पतली चादर मेरी कमर तक उधाई हुई है, मैं समझ गया कि ये काम

मा ने किया पर कब और कैसे खैर जब मैं बाहर निकला तो दीदी स्टेडियम जा चुकी थी और मा किचन मे थी, मुझे देखते ही वो मेरी और अपनी चाइ लेकर मेरे पास आई और देते हुए बोली “आजकल तू बड़ी गहरी नीद मे सोता है और अपने कपड़ो का ध्यान भी नही रखता है, सुबह तेरी लूँगी जाने कैसे खुल गई थी, और तू वैसे ही मुझ से चिपक कर सो रहा था” और हँसने लगी.

तो मैने कहा “तो ठीक है ना मा, इसी बहाने तुम मेरा ध्यान रख लेती हो” पर इसके आगे की कोई बात मा ने नही की तो मैने भी नही कहा, मैने सोचा जब रात मे सब कुछ ठीक हो रहा है तो मज़े लो बाकी बाद मे देखेंगे, और मैं उठ कर फ्रेश होने चला गया, मा भी काम करने चली गयी. इसी तरह 8-10 दिन बीत गये और मैं मा की चुदाई के मज़े लेता रहा और मा भी कुछ खुलने लगी थी मैं भी रात को मा की नाइटी उपर से नीचे तक पूरा खोल कर उसे पूरा नंगा कर देता, फिर थोड़ी देर उसकी गांद और चाटने के बाद उसकी चुचियों को और पेट के नीचे वाले हिस्से

को पकड़ कर पूरा ज़ोर लगा कर लंड अंदर डाल कर चुदाई करता और झड़ने के बाद मा की बुर से लंड बिना बाहर निकले हुए उसकी चुचियों को पकड़ कर सो जाता था, मा भी सुबह कमरे से बाहर जाते समय मुझे नंगा ही छ्चोड़ देती और दरवाज़ा चिपका देती ताकि दीदी अंदर ना आजाए और दीदी के जाने के बाद नहाते वक़्त बाथरूम का दरवाजा नही बंद करती और हमेशा दिन मे भी नाइटी पहने रहती जिसमे से उनका पूरा शरीर लगभग दिखाई पड़ता था पर मैं कुछ ज़्यादा ही करना चाहता था.

10-12 दिन बाद रात को जब मैं बेड पर गया तो मेरे दिमाग़ मे यही सब बाते घूम रही थी कि कैसे मा को दिन मे चुदाई के लिए तैयार किया जाए खैर मैं अपना लंड लूँगी से बाहर निकाल कर लेट गया थोरी देर मे मा कमरे मे आई और थोड़ा समान ठीक करने के बाद नाइट बल्ब ऑन कर के लेट गई, लेटने से पहले उन्होने मेरे माथे पर किस किया और मुस्कुरा कर सो गयी, अब तक मैं ये जान चुका था कि मा को सब पता है और वो जागी रहती है पर चूँकि वो कुछ नही कहती और

चुपचाप मज़े लेती थी तो मैं भी मस्त हो कर मज़े लेता, अब तो मैं मा के लेटने के 4-5 मीं बाद ही शुरू हो जाता और नाइटी खोल कर हटा देता, 5 मीं के बाद मैने फिर अपनी लूँगी खोल कर मा की नाइटी को पूरा उतार दिया, थोरी देर तक मा की गांद और बुर को चाटने और खेलने के बाद जब मैने लंड को मा के चूतरो से रगरना शुरू किया चूँकि मा आज थोड़ा सा पेट के बल लेटी हुई थी, तो मेरे मन मे एक आइडिया आया कि क्यो ना आज मा की गांद मे लंड डाला जाए.

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और ये सोचतेही मैं उत्तेजना से और भर गया, और मैं मा के चूटरो को हाथो से थोड़ा खोलते हुए उनकी गांद के छेद को चाटने लगा, मुझे महसूस हुआ कि मा की बुर और गांद का छेद खुल और बंद हो रहा था और बुर से पानी निकल रहा था, थोरी देर चाटने के बाद मैं उंगली से गांद के छेद को खोलने लगा फिर सूपदे पर मा की बुर का पानी लगाया और थोड़ा सा पानी उनकी गांद के छेद पर भी लगाया और छेद पर सूपड़ा रख कर उसकी कमर को पकड़ कर अंदर डालने

की कोशिश करने लगा पर उनकी गांद का छेद बुर के छेद से काफ़ी टाइट था, थोरी कोशिश करने पर सूपड़ा तो अंदर घुस गया पर मैं लंड पूरा अंदर नही डाल पा रहा था, तो मैं थोड़ा रुक उसकी चूतरों को हाथों से फैलाते हुए फिर से लंड अंदर डालना शुरू किया पर पता नही क्यों मेरे लंड मे जलन होने लगी, मैने लंड बाहर निकाल लिया और नाइट बल्ब की रोशनी मे देखा तो मेरे सूपदे के पास से जो चंदा सटा था वो एक तरफ से फॅट गया था और

वहीं से जलन हो रही थी, (मेरे दोस्तो ने बताया तो था कि चुदाई के बाद लंड का टांका टूट जाता है और सूपड़ा पूरा बाहर निकल जाता है), अब जलन के मारे मैं चुदाई नही कर पा रहा था और मारे उत्तेजना के मैं बिना झरे रह भी नही सकता था, मैं उत्तेजना के मारे लंड को हाथ मे पकड़ कर मा के सरीर पर रगड़ने लगा, मेरे दिमाग़ मे कुछ भी नही सूझ रहा था मैं तो बस झरना चाहता था, तभी मेरे मन मे मा के मूह मे लंड डालने का विचार आया और मैने अपना लंड

मा के चेहरे से रगड़ने के लिए बेड से नीचे उतर कर मा के चेहरे के पास खड़ा हो गया.

और लंड हाथ मे पकड़ कर सूपड़ा मा के गालों और होंठो से धीमे धीमे रगड़ने लगा, मैं बस उत्तेजना की वज़ह से पागल हो रहा था, अगर उस वक़्त मा उठ भी जाती तो भी मैं नही रुक पाता, फिर मैं मा के होंठो से सुपारे को सटाते हुए मूठ मारने लगा पर उनके मूह पर झरने की हिम्मत नही हुई और मैं वहाँ से हट कर उनकी गांद और बुर के छेड़ पे लंड रख कर मूठ

मारने लगा, मैं तेज़ी से मूठ मार रहा था और थोरी देर मे मा की गांद के और बुर के छेद पर उपर से ही पूरा वीर्य पिचकारी की तरह छोड़ने लगा, मा की पूरी बुर, चूतर और गांद मेरे वीर्य से भर गई थी और पूरा गाढ़ा पानी उनकी जाँघो पर भी बहने लगा. जब मेरी उत्तेजना शांत हुई तो मेने लंड मे तेज़ जलन महसूस की, मैने देखा कि मेरा लंड पूरा छिल गया था और चंदे पर सूजन आ गई थी, मैं ये देख कर परेशान हो गया और मा को उसी तरह छोड़ कर चुपचाप सो

गया जब सुबह उठा तो मैने देखा कि मेरे लंड का चमड़ा काफ़ी सूज गया था और छिला हुआ था, मैं बाहर निकला तो मा किचन से निकल रही थी और मुझे देखते ही वापस चाइ लेकर चली आई, पर मेरा मूह उतरा हुआ था मा मुझे देख कर मुस्कुराइ पर मैं कुछ नही बोला, मा थोरी देर बैठने के बाद काम करने चली गई और मैं नहाने, नहाते वक़्त मैं सोच रहा था कि अब तो बस चुदाई बंद ही करनी परेगी, लंड को देख कर मुझे रोना आ रहा था.

तभी मुझे एक आइडिया आया कि क्यो ना मा को ही लंड दिखा कर उनसे इलाज़ पूछा जाए और हो सकता है इशी बहाने मा मुझसे दिन मे भी खुल जाए, मैं तुलिया लपेटे बाहर निकला और बेडरूम मे जा कर मा को आवाज़ दी तो मा रूम मे आई और पूछा “क्या हुआ बेटा”, मैने कहा “मा मेरे पेशाब वाली जगह मे दर्द हो रहा है, सूज भी गया है” तो मा ने मुझे ऐसे देखा जैसे कह रही हो ये तो एक दिन होना ही था और बोली “बेटा तोलिया खोलो मैं देखु”, और बाहर वारमदे मे दिन की रोशनी मे आ गई,

मैं भी बाहर आ गया और उनके पास खड़ा हो कर तौलिया खोल दिया, मेरा लंड वाक़ई मे सूज का मोटा हो गया था, जब मा ने लंड को देखा तो धीमे से मुस्कुराते हुए मुझसे पूछा कि “इसके साथ क्या कर रहा था” मैं ने बड़े भोलेपन से “कुछ नही इसमे से ब्लड भी निकल रहा है,

तो मा मेरे लंड को हाथ मे लेकर चंदा पीछे करने लगी तो मुझे दर्द होने लगा, तो मा ने कहा ओह ये तो छिल गया है लग रहा है रगड़ लगी है और चंदा पीछे कर के सूपड़ा देखने लगी,

फिर बोली “अच्छा मैं इसपर बोरोलीन लगा देती हूँ पर तू इसे खुला ही रहने दे और अभी कुछ पहनने की ज़रूरत नही है, बस मैं ही तो हूँ तू ऐसे ही रह ले और ये कह कर मा कमरे से बोरोलीन लेने चली गई, मैं उनकी चूतरो को हिलते हुए देख रहा था तभी वो बोरोलीन लेकर आ गई और मेरे लंड को हाथ मे लेकर सूपदे पर लगाने लगी, जिस की वज़ह से मेरा लंड खड़ा होने लगा और करीब 6” लंबा हो गया, सूजन की वज़ह से वो और मोटा लग रहा था, ये देख कर मा

मेरे चूतर पर थप्पड़ मारते हुए बोली “ये क्या कर रहा है” मैं बोला “मा ये अपने आप हो गया है मैने नही किया है” तो मा बोली कि “अच्छा ये भी अपने आप हो गया है और रगड़ भी अपने आप ही लग गई है, सच बता ये रगड़ कैसे लगी,” मैं हँसने लगा तो मा खुद ही बोली “बेटा ये बहुत नाज़ुक आंग होता है, इसकी बड़ी संभाल कर देखभाल करनी पड़ती है, जब तू बड़ा हो जाएगा शादी के लायक तब तुझे इसकी इंपोर्टेन्स पता चलेगी”

मा बोलती जा रही थी और सूपदे और लंड पर बोरोलीन लगाती जा रही थी, मेरा हाथ मा के कंधे पर था और खड़े होने की वजह से मुझे नाइटी के खुले भाग से मा की बड़ी बड़ी चुचि आधे से ज़्यादा दिखाई पड़ रही थी, मैं अपने हाथो को मा की चुचि की तरफ बढ़ाते हुए बोला “क्यो मा शादी के बाद ऐसा क्या होता है कि इसकी इतनी ज़रूरत पड़ती है” ये सुन कर मा ने मुस्कुराते हुए मुझे देखा और बोली “ये तो शादी के बाद ही पता चलेगा

तो मैं थोड़ा और मज़े लेते हुए मा से पूछा “मा क्या तुम औरतो की भी ये इंपॉर्टेंट होती है” “ये क्या” मा ने कहा, तो मैं हंसते हुए बोला “अरे यही जो तुमने मेरा हाथ मे पकड़ा हुआ है” तो मा मुझे देख कर मुस्कुराते हुए बोली “मेरा ऐसा नही है” तो मैने धीरे से उनकी नाइटी का उपर वाला बटन खोल दिया जिससे उनकी चुचियाँ बाहर निकल गयीं और धीमे से लंड को उससे सटाते हुए पूछा “तो फिर कैसा है

पर मा कुछ नही बोली, मेरा लंड उत्तेजना मे और टाइट हुआ जा रहा था और खींचाव के कारण सूपदे के टाँके वाली जगह पे दर्द होने लगा, मैं बोला “ओह्ह मा ये तो बहुत दर्द कर रहा है” तो मा बोली “बेटा रगड़ की वजह से तेरे सूपदे का टांका खुल गया है, और उपर से तूने ही तो इसे फूला रखा है, चल मैने क्रीम लगा दी है, 7-8 दिन मे ठीक हो जाएगा और ये कह कर मा सूपदे को सहलाने लगी, मैने ध्यान से देखा तो मा का भी चेहरा उत्तेजना की वजह से लाल हो

गया था और उसकी चुचियाँ और निपल एकदम खड़े हो गये थे, मैने सोचा ये मौका अच्छा है मा को और गरम कर देता हूँ तो मा शायद खुल जाए, ये सोच कर मैं बोला “मा ये टांका क्या होता है और मेरा कैसे खुल गया” मा भी थोड़ा खुलने लगी और बोली “बेटा ये जो चंदा है ना ये सुपाडे के पीछे वाले हिस्से से चिपका रहता है, तूने ज़रूर इसे तेज़ रगड़ दिया होगा तो मैं मा की निपल छूते हुए बोला “पहले ये बताओ कि इसे नीचे कैसे करूँ बहुत दर्द हो रहा है” तो

मा मेरे चूतरों पर चिकोटी काटते हुए पूछी “पहले कैसे करता था” तो मैं हँसने लगा और मा की चुचियो पर हाथ से दबाव बढ़ाते हुए कहा “वो तो बस ऐसे ही …. इसीलिए आजकल कुछ ज़्यादा ही रगड़ रहा है, तेरी वज़ह से मुझे भी परेशानी होने लगी है” मा ने चुचियो पर बिना ध्यान देते हुए कहा, “तो तुम बताओ ना कि क्या करू” मैने कहा और अपनी कमर थोड़ा और आगे बढ़ा दी जिससे मेरा लंड मा की दोनो चुचियो के बीच मे घुस गया और अपनी उंगलियो के बीच निपल को फँसा लिया तो मा “बोली ये क्या कर रहा है” मैं शरारत से हंसते हुए बोला “मा तुम्हारी चुचि बड़ी मुलायम है” पर मा हंसते हुए उठने लगी जिससे मेरा लंड उनकी चुचियो मे दब गया और मेरे सुपाडे पर लगा क्रीम उनकी चुचियों पर भी लग गया, तो मा अपनी चुचियों को हाथो से फैलाते हुए मुझे दिखा कर बोली “ये देख तेरा क्रीम मेरी चुचियों मे लग रहा है चल अभी खाना बनाना है, देर हो रही है, बाद मे बताउंगी” और किचन मे से

समान ला कर वही वारमदे मे चौकी पर बैठ कर काम करने लगी, उसकी चुचियाँ वैसे ही खुली हुई थी. पर मेरे दिमाग़ मे तो मा को दीदी के आने से पहले नंगा करने का प्लान चल रहा था, ये सोच कर मैं भी मा के बगल मे ही उसकी तरफ मूह कर के चौकी पर बैठ गया, मैने अपना एक पैर मोड़ कर मा की जाँघो पर रख दिया, मेरा लंड उस समय एकदम टाइट था, मा ने मुस्कुराते हुए मुझे देखा और सब्जी काटने लगी,

मैं मा के सामने ही अपने लंड को हाथ मे लेकर सहलाने लगा जिससे सूपड़ा और फूल गया था, मा बोली “ये क्या कर रहा है” तो मैने कहा “मा बहुत खुजली हो रही है”, फिर मा कुछ नही बोली और अपना काम करने लगी, मैं जानबूझ कर लंड मा के सामने कर के सहला रहा था, मैने देखा मा का ध्यान भी मेरे सुपाडे पे ही था, और वो बार बार अपनी जाँघो को फैला रही थी चूँकि नाइटी का आगे का भाग खुला हुआ था जिससे मुझे कई बार उसकी बुर दिखाई दी, मैं समझ

गया कि मा एकदम गरम हो गयी है मैं उसे और उत्तेजित करने के लिए हिम्मत बढ़ाते हुए एकदम खुल कर बात करने लगा और बोला “मा तुम कह रही हो कि मेरा लंड ठीक होने मे 7-8 दिन लगेंगे और तब तक मुझे ऐसे ही लंड खुला रखना पड़ेगा,” तो मा बोली “हां खुला रखेगा तो घाव जल्दी सूखेगा और आराम भी मिलेगा लेकिन मा खुला होने की वजह से मेरा लंड पूरा तने जा रहा है जिससे चमड़ा खिचने के कारण दर्द हो रहा है और खुजली भी बहुत हो रही है”

दोस्तो ये पार्ट यही ख़तम होता है फिर मिलेंगे इस कहानी के अगले भाग के साथ आपका दोस्त राज शर्मा

क्रमशः…………………………………………………


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