कहानी जिसमे एक बाप अपनी ही बेटियों को चोद्ता है

चुननी और मुन्नी दो बहने है. चुननी की उमर 20 साल है, और मुन्नी 18 साल की है. कमाल जो दोनो का बाप है, करीब 46 साल का है. चुननी और मुन्नी दिखने में गुलाब की पंखुड़ियों जैसी है. उनका गोरा-गोरा बदन और बड़े-बड़े बूब्स है. लेकिन चुननी के बूब्स मुन्नी से बड़े है.

चुननी काफ़ी होशियार है, इसलिए वो अपने बाप की हालत को समझ सकती थी. और उधर कमाल भी चुननी के जिस्म में अपनी बीवी को देखता था. दरअसल मुन्नी को जानम देते ही वो चल बसी थी.

और उसके काफ़ी सालों बाद जब चुननी बड़ी हुई, तो उसको ये बात समझ आई, और उसने घर के साथ-साथ अपने बाप का भी ख़याल रखना शुरू किया. वो दिन में बेटी का, और रात (कभी-कभी दिन भी) में अपने बाप के लिए उनकी पत्नी का फ़र्ज़ निभाती.

रात को मुन्नी के सो जाने के बाद चुननी अपने बाप के कमरे में उनके साथ सोने आ जाती थी. एक रात हब मुन्नी सो गयी थी, तो चुननी धीरे से रूम से बाहर आई, और जल्दी से अपने पापा के रूम में घुस गयी.

कमाल: तूने आज ज़्यादा देर नही कर दी?

चुननी: वो मुन्नी सो ही नही रही थी.

कमाल अपने ककचे के अंदर से लंबा लंड निकाल कर बोला-

कमाल: इसको भी तेरे बिना नींद कहा आएगी. चल अब जल्दी से आजा.

चुननी ने प्यारी सी स्माइल दी, और कमाल के उपर कूद पड़ी. कमाल ने भी उसको गोद में उठा कर उसकी गांद में लंबा लंड डाल कर दीवार से चिपका दिया, और चुदाई शुरू कर दी. थोड़ी देर धक्का देते-देते-

चुननी: मेरा गला सूख रहा है. प्यास सी लग रही है.

कमाल: थोड़ी देर और रुक जा, प्यास बुझा दूँगा.

चुननी: पानी वाली प्यास लगी है! चलो किचन में.

फिर कमाल चुननी को गोद में ही छोड़ते-छोड़ते किचन में ले आया. किचन में आके चुननी नीचे उतरी, तभी कमाल ने फ्रिड्ज खोल के चुननी को झुका के गांद मारना शुरू कर दिया.

चुननी: पानी तो पीने दो पापा यार.

कमाल थोड़ी देर के लिए उसकी गांद से लंड निकाल कर वही बैठ गया. फिर चुननी ने बॉटल रख कर फ्रिड्ज बंद किया. तभी पीछे से मुन्नी की आवाज़ आई-

मुन्नी: दीदी, तुम कहा हो?

मुन्नी की आवाज़ सुन कर कमाल और चुननी घबरा गये. तभी मुन्नी की नज़र किचन में खड़ी चुननी पे गयी, और उसकी तरफ आने लगी. कमाल वही पर लेट गया. मुन्नी उसके पास आ गयी, और उसकी हालत देख कर बोली-

मुन्नी: दीदी आप नंगी क्यू खड़ी हो किचन में?

चुननी (तोड़ा घबराते हुए): वो, वो मैं पानी पीने आई थी.

मुन्नी: वो भी नंगी?

चुननी: अर्रे नींद में मुझे याद ही नही रहा की मैने नीचे कुछ नही पहना.

मुन्नी: अपनी प्राइवेट चीज़ च्छूपा के रखो. अगर पापा देख लेते तो?

नीचे से कमाल चुननी के पैरों को चूम रहा था.

चुननी (मॅन में “देखेगा क्या, देख ही रहे है”): अर्रे पापा तो सो रहे होंगे अभी.

और मुन्नी भी अपनी पाजामी उतारने लगी. ये देख कर चुननी बोली-

चुननी: तू अपनी पाजामी क्यूँ उतार रही है?

ये सुन कर कमाल नीचे से ही साइड से मुन्नी को देखने लगा.

मुन्नी: मैने नीचे कक़ची पहनी है. तुम ये पाजामी पहन लेना, और रूम में आ जाना.

चुननी: अर्रे मैं आ ही रही हू. तू चल.

कमाल नीचे से उसके पैरों में पिंच करने लगता है. चुननी पैर हटा लेती है, और मुन्नी पाजामी रख कर रूम को जाने लगती है. कमाल मुन्नी को जाते हुए उसकी मटकती गांद देख के पागल सा हो जाता है.

मुन्नी के जाते ही कमाल खड़ा होता है, और अपना खड़ा लंड चुननी की गांद को झुका कर डाल देता है. फिर वो उसकी ज़ोरदार चुदाई करने लगता है.

चुननी: आराम से पापा, आज आप बहुत ज़्यादा दूं लगा रहे हो.

कमाल: अर्रे बस, आज एक और खिली गांद देख के जोश बढ़ गया है.

चुननी: मेरी गांद तो हमेशा खिली रहती है.

कमाल: साली तेरी बात नही कर रहा मैं. मैं तो मुन्नी की बात कर रहा हू.

चुननी (कमाल को धक्का देकर): वाह, 2 साल से मेरी गांद मार रहे हो. मॅन नही भरा?

कमाल (तोड़ा सेनटी हो कर): पीछे से मुन्नी की गांद बिल्कुल तेरी मा जैसी है इसलिए.

चुननी (वो भी तोड़ा सेनटी हो गयी): अछा!

कमाल: हा चुननी.

चुननी: मेरी गांद मारने से पहले भी यही बोला था ना?

कमाल: मैने ऐसा बोला था?

चुननी: अगर तुमने मेरी गांद को छ्चोढ़ के मुन्नी की गांद मारी ना, तो देख लेना.

फिर कमाल और तेज़ी से धक्के मारने लगा. और आख़िर झटके के साथ ही लंड का सारा पानी गांद में ही छ्चोढ़ दिया. चुननी कमाल के होंठो को किस करके बोली-

चुननी: चलो अब सो जाओ, कल मिलते है.

लेकिन कमाल के आँखों के सामने मुन्नी की गांद ही घूम रही थी. फिर रात के करीब 2 बजे मुन्नी के नाम की मूठ मार के कमाल सो गये.

मॉर्निंग टाइम-

कमाल उठा, और फ्रेश हो कर खाने की टेबल पे आ कर बैठ गया. चुननी भी आई, और कमाल को खाना देने लगी. कमाल ने चुननी का हाथ पकड़ कर लंड पे रख दिया.

चुननी भी उपर से ही लंड मसालने लगी, और देखते-देखते लंड खड़ा हो गया. फिर कमाल ने लंड निकाल कर चुननी के हाथो में दे दिया.

चुननी भी वही झुक कर लंड चूसने लगी, और उपर कमाल ब्रेकफास्ट करने लगा. करीब 5 मिनिट बाद कमाल का खाना ख़तम हुआ, और नीचे से चुननी का ब्लोवजोब.

कमाल ने सारा रास ज़मीन पे गिरा दिया, और चुननी उसको चाटने लगी. तभी मुन्नी भी अपने रूम से बाहर निकली, और चुननी को फ्लोर से चाट-ते हुए देख कर उसके पास आई.

मुन्नी: दीदी आप क्या चाट रही हो?

कमाल (मज़े लेते हुए): रस्स.

मुन्नी: कॉन्सा रस्स दीदी चाट रहे हो आप?

चुननी जल्दी से खड़ी हो गयी.

चुननी: अर्रे कुछ नही, बस ऐसे ही था. तू यहा कहा खड़ी है? फ्रेश हो जाके. कॉलेज नही जाना क्या तुझे?

मुन्नी: हा दीदी, आज तो इंपॉर्टेंट भी है.

चुननी: देख, भुलक्कड़, जेया जल्दी फ्रेश हो जाके.

और मुन्नी जल्दी से फ्रेश होने भाग गयी. वही कमाल ने ऑफीस जाने से पहले चुननी के बूब्स पकड़ कर अपने करीब खींचा, और उसके होंठो को चूमने लगा.

चुननी: तुम्हे काम नही है कुछ और?

कमाल: और वाला काम ही तो कर रहा हू.

चुननी (कमाल से अलग हो कर): जाओ अभी.

कमाल: अर्रे बस तोड़ा सा बच गया.

चुननी: बचा कुछ सब रात को. जाओ अभी.

फिर कमाल ऑफीस के लिए निकल गया. चुननी अब पीछे मूड कर देखी, तो मुन्नी सामने ही खड़ी थी. ये देख कर चुननी दर्र गयी. उसके मॅन में ख़याल आने लगे, की कही मुन्नी ने सब कुछ देख तो नही लिया.

मुन्नी: दीदी, आप पापा को बचा कुछ रात को पूरा करने को कह रहे थे?

ये सुन कर चुननी की जान में जान आई.

चुननी: अर्रे पापा रात भर काम करते है ना. फिर भी तोड़ा काम रह गया था, वही टेन्षन ले रहे था. वही मैं बोली, की बचा हुआ काम रात में कर लेना अब.

मुन्नी: हा, वो तो है.

चुननी: तू अभी तक रेडी नही हुई.

मुन्नी: मैं जेया रही थी. तभी आपकी और पापा की बात सुन कर रुक गयी.

चुननी: जेया अब जल्दी. मैं नाश्ता रेडी करती हू

मुन्नी: ठीक.

फिर चुननी किचन में चली गयी, और मुन्नी बातरूम में. बातरूम में घुस कर मुन्नी एक-एक करके अपने कपड़े उतारने लगती है, और जब पूरी नंगी हो जाती है, तो अपने उपर पानी डाल कर पूरी बॉडी पर साबुन लगा लेती है.

फिर वो अपने बूब्स को मसालने लगती है. उसके बाद धीरे-धीरे अपने हाथ को अपनी छूट पर ले-जेया कर रगड़ने लगती है. रगड़ते-रगड़ते उसकी छूट गरम हो जाती है, और उसके ख़याल में लंड लेने की चाहत आने लगती है.

तभी उसकी आँखों के सामने कमाल (उसका बाप) का कक्चा लटका मिलता है. उसको वो झट से अपने मूह के पास ला कर सूंघने लगती है, और उस ककचे को अपनी छूट पर रगड़ने लगती है, और पूरी मदहोशी में खो जाती है बातरूम में.

उसकी आवाज़ों से बातरूम भर जाता है. उसकी साँसे फूलने लगती है. फिर धीरे से वो अपनी बीच की उंगली को लंड समझ कर अपनी छूट में डाल लेती. साथ साथ उसके मूह से सिसकने की आवाज़े भी निकालने लगती है.

आख़िर में मुन्नी की छूट से गरम-गरम पानी निकल कर उसके बाप के ककचे पर गिर जाता है. जब उसको होश आता है, तभी उसको बाहर से चुननी की आवाज़ सुनाई देती है.

चुननी: कितना टाइम लगेगा मुन्नी?

मुन्नी: दीदी बस आ रही हू बाहर.

फिर मुन्नी जल्दी से फ्रेश हो कर बाहर निकलती है, और जल्दी-जल्दी ब्रेकफास्ट करके कॉलेज के लिए निकल जाती है. मुन्नी के कॉलेज जाने के बाद चुननी बातरूम में नहाने चली जाती है.

बातरूम में घुसते ही उसको कमाल (उसका बाप) का कक्चा नीचे गिरा मिलता है.

वो कच्चा उठा कर देखती है, तो उसको सब समझ आ जाता है, की मुन्नी इतना टाइम क्यू लगा रही थी बातरूम में.

तो बे कंटिन्यूड…

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