एक अजीब सी इच्छा

मेरा नाम मोहित है। मेरी बीबी का नाम है मोहिनी। हमारी शादी को आज लगभग 5 साल हो रहे हैं। हमारी शादीशुदा जिन्दगी बहुत ही शानदार चल रही है। मेरे मन में भी एक अजीब सी इच्छा पैदा होने लगी है कि मैं अपनी खूबसूरत बीवी को किसी काले या देहाती आदमी से चुदवाऊं और मैं देखूं। इस बारे में सोच कर ही मुझे अजीब सी सनसनी का अहसाह होने लगता है। हालाकि मेरी बीबी बहुत ही पतिव्रता है। मेरे अलावा वो किसी के बारे में नहीं सोचती लेकिन कहते हैं कि औरत के मन को कोई नहीं समझ सकता। उसके मन की गहराईयों में क्या राज छुपा है उसको जानना बहुत ही कठिन है।
लेकिन मैंने सोच लिया था कि मैं अपनी बीबी के मन को टटोलूंगा। क्या वो भी अन्य मर्दों के बारे में सोच कर रोमांचित होती है।
एक दिन जब मैं उसकी चुदाई कर रहा था मैंने उससे पूछा-
“अगर मेरा लंड और मोटा होता तो कितना मजा आता न..”
वह नाराज होकर बोली-“मुझे नहीं पता…..आपका भी तो मोटा है..”
“अच्छा मैंने सुना है कि काले लोगों का लंड बहुत ही मोटा और कड़ा होता है और वो गोरी लड़कियों को बहुत कसके चोदते हैं……तुमको काले लोग कैसे लगते हैं?”
“उफ् हो….आप भी न….पता नहीं क्या-क्या पूछते रहते हैं?…मुझे नहीं पता…”-वह इठलाकर बोली।
उसके इठलाने में एक शरारत थी।यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
मुझे लगा कि काम बन सकता है।
“क्या तुम किसी काले आदमी से अपनी बुर चुदवाना चाहती हो?….”-इतना कहकर मैंने कसकर धक्का मारा।
“उई मां……..आप खुद क्यों नहीं काले आदमियों की तरह चोद देते…..”
उसकी ये बात सुनकर मुझे जोश आ गया।
कस-कस कर उसको चोदने लगा।
आज बहुत दिनों बाद मैंने देखा कि मेरी बीबी 5 धक्कों में ही झड़कर मुझसे चिपक गई।
यानि काले लौड़े के बारे में सोचकर उसकी बुर पानी छोड़ बैठी थी।
अगले कुछ दिनों में मैने अपनी बीबी को पूरी तरह से खोल दिया।
मैंने उससे कहा कि चुदते वक्त वो किसी भी अन्य मर्द के बारे में सोचा करे।
तब उसने मुझे एक दिन ये राज बताया कि वो ज्यादातर हमारे पड़ोसी शेखावत के बारे में सोचकर झड़ती थी।
उसने मुझे ये बात भी बताई कि एक दिन उसने पेशाब करते हुए शेखावत का काला-काला भयानक लौड़ा देखा था।
तभी से उसकी बुर में झुरझुरी सी दौड़ने लगी थी। उस दिन उसने शेखावत के बारे में सोचकर बुर में उँगली भी डाल कर किया था।
अब हम दोनों चोदाई करते हुए यही बात करते और चोदाई का मजा लेते।
अब बस उसे पटाना था और घर तक लाना था।
एक दिन मैंने उसे बोला- कभी बैठ कर पैग लगाते हैं।
वो बोला- इस शनिवार को बैठते हैं।
मेरे मन की और मेरी बीवी की इच्छा अब बस पूरी होने वाली थी। अब हम दोनों शनिवार का इन्तज़ार करने लगे।
शनिवार को सुबह ही मेरी बीवी ने मुझे बोला- आज तबीयत से तैयार होने वाली हूँ और मुझे काफ़ी समय लगेगा।
उसने पूरी वैक्सिंग करी और चूत को हेयर रिमूवर से साफ़ किया।
शाम को वह हमारा पड़ोसी आ गया और हम दोनों इसके लिये पहले से तैयार थे। मैंने एक शॉर्ट और टीशर्ट पहनी थी ओर मेरी बीवी ने एक टॉप जिसका गला बहुत खुला था और इसके साथ उसने एक टाईट कैप्री पहनी थी जिसमें उसके कूल्हे एक दम गोल-गोल नजर आ रहे थे। टॉप के नीचे उसने ब्रा नहीं पहनी थी। उस के 38-सी कप के स्तन एक दम मस्त लग रहे थे और तने हुए चुचूक गजब ढा रहे थे।
जब वह कोल्ड ड्रिंक देने आई तो हम दोनों उसे देख़ते ही रह गये। जैसे ही उसने झुक कर सामान रखा हमारा पड़ोसी मेरी पत्नी के वक्ष देख़ने लगा। यह देख़ कर हम दोनों मुस्करा दिये क्योंकि आज रात वह हम दोनों को खुश करने वाला था। फिर मैंने ड्रिन्क ग्लास में डाला और उसे दिया। मैंने जानबूझ कर उसके पैग बड़े बनाए ओर दो पैग में वह सुरुर में आ गया।
अब हम दोनों हिंदी सेक्सी कहानियाँ के अश्लील चुटकले सुनाने लगे।
इतने में मोहिनी भी वहीं आ गई और हमारे साथ बैठ कर बातें करने लगी। मोहिनी बोली- मुझे भी चुटकले सुनना हैं।
तो मैंने एक चुटकला सुनाया जो इस तरह से था :
राम लाल : ठाकुर साहब, ग़ब्बर ने बहू की इज्जत लूट ली है।
ठाकुर : तो मैं क्या करुँ?
रामलाल : बहू मोहिनी पूछ रही है कि बब्बर से बदला लेना है या पेमेन्ट?
इस दौरान जब हम सब हंस रहे थे तो शेखावत मोहिनी के स्तन और चुचूक देख रह था।
और इस तरह से हमारी अश्लील बातचीत आगे चलने लगी। हम धीरे धीरे पूरी तरह से व्यस्क चुटकले सुनाने लगे।
मैंने शेखावत से पूछा- क्या कभी तुमने भाभी के अलावा किसी और से चोदाई किया है?
वो बोला- मन तो बहुत करता है पर किया नहीं है।
मैंने पूछा- किसी पर तुम्हारा दिल आया है?
तो वो बोला- आप नाराज नहीं होना ! मुझे मोहिनी भाभी बहुत सैक्सी लगती है।
मैंने बोला- तुम्हारी नजरें ही बता रही हैं क्योंकि तुम इसके स्तनों को ही घूरते जा रहे हो।
वो बोला- इनकी गाण्ड तो और भी चोदासी लगती है। मै तो अपनी बीवी को चोदते हुए भी इनके बारे में सोचते हुए चोदता हूँ।
यह सुन कर मोहिनी हंसने लगी और बोली- तो क्या मैं इतनी मस्त हूँ?
तो हम दोनों एक साथ बोले- हाँ।यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
मैंने पूछा- शेखावत सच में इसे चोदना चाहते हो क्या?
वो बोला- अगर मौका मिले तो अभी पटक के चोद डालूं।
मैं बोला- आज तुम मेरे सामने ही चोद लो !
वो बोला- तुम अपने सामने चोदने दोगे?
मैं बोला- मैं भी तो चोदूंगा।
यह सब सुन कर मोहिनी भी जोश में आ गई थी। अब हम तीनों अपने बैडरूम की तरफ़ चल दिए। मोहिनी ऐसे मटक कर चल रही थी कि हम दोनों के लण्ड ख़ड़े हो गये। जैसे ही हम बैडरूम में पहुँचे, मोहिनी ने बैड पर लेट कर एक जोरदार अंगड़ाई ली और उसके स्तन एक दम ख़ड़े हो ग़ये। शेखावत आगे बढ़ा और दोनों कबूतरों को पकड़ कर मसलने लगा। वह जोर से आह आह करने लगी और मैं अपने लण्ड को पकड़ कर दबाने लगा।
शेखावत ने मोहिनी का टॉप उतार दिया और दोनों कबूतर बाहर आ गये। शेखावत ने एक चूची को पकड़ लिया और मसलने लगा। मैंने चुचूक को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। अब हम दोनों के बीच में मोहिनी थी और हम दोनों उसके स्तनों से ख़ेल रहे थे। उसने हमारे लण्ड पकड़ लिये और हिलाने लगी। अब हमने मिल कर उसे पूरा नंगा कर दिया और खुद भी नंगे हो गये। अब कमरे में एक चूत और दो लण्ड थे एक गोरा और दूसरा काला-काला मूसल जैसा।
शेखावत- मैं तो मोहिनी की चूत को पहले चूसूंगा फिर फाड़ूगा।
और मोहिनी ने टांगें खोल कर उसे बुलाया। वो उसकी टांगें उठा कर चूत को चाटने लगा और मोहिनी की सिसकारियां निकलने लगी। वह भी उसे जोर से चूसने को कह रही थी और क्यों ना कहे, उसे आज मनचाहा दिलदार मिला था जो उसे चोदने वाला था।
शेखावत भी पूरी जोर से चूत चाटे जा रहा था। उसने दोनों हाथों से चूत को फ़ैला रख़ा था और पूरी जीभ अन्दर पेल रहा था। मोहिनी ने उस के सिर को दोनों हाथों से पकड़ कर चूत पर दबा दिया और वो बोल रही थी- चूसो मेरे जानू और जोर से चूसो !
और इसको सुनकर शेखावत भी पूरा दम लगा कर चूसे जा रहा था। अब चूत में से पानी टपकने लगा था और चपर-चपर की आवाज भी आने लगी थी। मैं बड़े गौर से मोहिनी को चूत चटवाते हुए देख रहा था। वह बहुत सैक्सी लग रही थी।
अब मैंने आगे बढ़कर उसे अपना लण्ड पकड़ा दिया और उसे चूसने को बोला। उसने मेरे लण्ड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। अब कमरे में हमारी सिसकारियाँ निकल रही थी। मोहिनी ने अचानक मेरे लण्ड को चूसना बन्द करके जोर जोर से सिसकारियाँ भरने लगी और शेखावत के सर को जोर से चूत पर दबा दिया। वोह बोलने लगी- चूस जा इस चूत को ! चूस जा ! निकाल दे मेरा पानी ! मजा आ रहा है ! आ रहा है ! और जोर से चूस ! और जोर से।यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
शेखावत को भी जोश आ गया और पूरी जीभ अन्दर डाल कर चूसने लगा। इतने में मोहिनी ने चूत को उछालना शूरु कर दिया और आअह्ह्ह,औह्हह, आआअह्ह्ह्ह्ह करने लगी। और फिर थोड़ी ही देर में उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरु कर दिया। शेखावत मजे ले ले कर चूत का पानी पीने लग़ा। मोहिनी की भी सिसकारियाँ तेज होती जा रही थी और फिर वह प्यार से शेखावत के सर पर हाथ फेरने लगी। अब मैंने शेखावत को बोला- बहुत हो गया चूसना ! अब जरा इस चूत को चोदना शुरु करो।
वह बोला- इसके लिए तो मैं कब से तड़प रहा हूँ।
फिर वह मोहिनी की टांगों के बीच आ गया और अपने लण्ड को मोहिनी की चूत पर फ़ेरने लगा। मोहिनी ने भी दोनों टांगें फैला दी ताकि वह आराम से उसे चोद सके। अब शेखावत ने लण्ड को चूत पर रख कर एक जोरदार धक्का लगाया तो उस का आठ इन्च का लण्ड पूरा अन्दर तक घुस गया और मोहिनी जोर से बोली- फ़ाड दी मेरी भैन चोद !
यह सुन कर शेखावत को और जोश आ गया और उसने एक बार फिर लण्ड को बाहर निकाल कर पूरे जोर से पूरा लण्ड अन्दर पेल दिया। इस बार मोहिनी ने बोला- मजा आ गया मेरी जान ! और पेलो जोर से पेलो।
मैं मोहिनी को इस तरह से चुदते देख कर जोश से भर गया और बोला- आज इसकी चूत को फ़ाड दो और खूब दम लगा कर चोदो।
मैंने फिर से अपने लण्ड को मोहिनी के मुँह में डाल दिया।
अब वह मेरे लण्ड को चूस रही थी और उधर से उसकी चूत में शेखावत लण्ड पेले जा रहा था। मैं दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को मसल रहा था।।
थोड़ी देर जब शेखावत ने चोद लिया तो मैंने बोला- तुम इसे अपना लण्ड चुसाओ, मैं तब तक चूत का स्वाद लेता हूँ।
अब हम दोनों ने पोजीशन बदल ली। मैंने चूत में अपना लण्ड डाल दिया और शेखावत ने अपना लण्ड मोहिनी के मुँह में दे दिया। बड़ा लण्ड देख कर वह भी उसे जोश से चाटने लगी। शेखावत का लण्ड किसी ने पहली बार चूसा था और वह हवा में उड़ने लगा। उसके मुँह से आवाजें आने लगी- वाह मेरी जान, आज पहली बार इस लण्ड को किसी ने चूसा है, मेरी बीवी तो चूसती ही नहीं है, आह्ह्ह्ह, आह्ह्ह्ह्ह्ह, वाह्ह्ह्ह्ह्ह, हो हो !
और मोहिनी ने उसे और जोर से चूसना शुरु कर दिया। यह सब देख कर मैंने भी चूत को जोर से चोदना शुरु कर दिया। इधर मोहिनी की चूत से पानी निकलने लगा और चूत में चिकनाई और बढ़ गई, इसके साथ ही फच फच की आवाज भी आनी शुरु हो गई। अब मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को पकड़ रखा था और चोदे जा रहा था। जबकि शेखावत ने उसके सिर को पकड़ कर मुँह को चोदना शुरु कर दिया।
मैंने शेखावत को बोला- तुम इसकी चूत में आ जाओ और मैं थोड़ी देर तुम लोगों को देखता हूँ।
शेखावत ने फिर से चूत पर मोर्चा जमा लिया और उसकी दोनों टागों को कन्धे पर रख लिया। दोनों हाथों से उसकी चूचियों को पकड़ कर जोर जोर से चोदने लगा। मोहिनी भी नीचे से गाण्ड उठा उठा कर साथ दे रही थी।यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
अब दोनों के मुँह से आवाजें आने लगी- आऽऽ चोदो ! और जोर से चोदो ! फाड़ दो इस चूत को ! वह भी बोल रहा था- आज इस चूत का तो मैं बैन्ड बजा दूंगा।
और फिर मोहिनी बोलने लगी- मैं झड़ने वाली हूँ, आईईईई, आह्ह्ह्ह्ह, और और और आह्ह्ह्ह्ह आईईईईई !
और फिर उसने कस कर शेखावत को पकड़ लिया। शेखावत अभी भी उसे पूरा जोर लगा कर चोदे जा रहा था। इतने में शेखावत की आवाज भी आने लगी- मैं खाली हो रहा हूँ, मेरा छुटने वाला है।
और मोहिनी ने उसे और कस कर पकड़ लिया और फिर शेखावत भी उस से चिपक गया और हांफने लगा। उसके लण्ड ने मोहिनी की चूत में अपना माल छोड़ दिया जो चूत से रिस कर बिस्तर पर गिरने लगा। अब तक मैं अपने लण्ड को सहला रहा था और ख़डा हो गया और बोला- अब इस चूत का पानी मैं निकालता हूँ।
शेखावत बोला- मैं इन मस्त चूचियों से दूध निकालता हूँ।
अब शेखावत ने एक चूची को मुँह में लेकर चूसना शुरु कर दिया और दूसरे हाथ से दूसरी चूची को मसलने लगा। मोहिनी ने एक हाथ से उसके लण्ड को हिलाना शुरु कर दिया।मैंने मोहिनी की चूत में अपना लण्ड डाल कर अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया। फिर से कमरे में चूत से फच फच की आवाज आने लगी और माहौल और सैक्सी हो गया। कुछ ही देर में शेखावत का लण्ड फिर से खड़ा हो गया।
मैं जोर जोर से मोहिनी को चोद रहा था। अब मोहिनी, मैं और शेखावत एक साथ ही झड़ने वाले थे और वह क्षण शीघ्र ही आ गया जब हम तीनों ने बोलना शुरु किया- मैं झड़ने वाला हूँ ! और तीनों कि रफ़्तार तेज हो गई। इसके साथ ही शेखावत ने मोहिनी की गाण्ड में अपना वीर्य छोड दिया मैंने भी मोहिनी की चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया। मोहिनी पहले ही झड़ना शुरू हो चुकी थी। मैंने कस कर मोहिनी को पकड लिया और शेखावत मोहिनी की पीठ से चिपक गया।
तीनो ही हांफ़ रहे थे और एक जोरदार चुदाई से तीनों के चेहरे चमक रहे थे।
थोड़ी देर बाद ही हम तीनों फिर से एक और चुदाई के लिये तैयार थे। अब मै नीचे लेटा और मेरे लण्ड पर मोहिनी मेरी तरफ मुँह करके अपनी चूत ख़ोल कर बैठ गई। फिर मैंने उसे अपनी तरफ झुका लिया जिससे उसकी गाण्ड ऊपर की तरफ निकल आई। शेखावत ने फिर से अपने लण्ड को मोहिनी की गाण्ड में डालने की तैयारी कर ली।
उसने अपने लण्ड पर तेल लगाया और अपनी अन्गुलियों पर तेल लगा कर मोहिनी की गाण्ड में पेल दी और वह जैसे ही आगे हुई, मेरा लण्ड उसकी चूत में पूरा घुस गया। शेखावत ने अपने लण्ड को मोहिनी की गाण्ड पर टिकाया और जोर से धक्का मारा। उसका लण्ड आधे तक गाण्ड में घुस गया और वह चिल्लाने लगी।
शेखावत ने हाथ आगे बढ़ा कर उसके दोनों स्तन पकड़ लिये और मसलने लगा। मैं उसके होठों को चूस रहा था। अब शेखावत ने एक और जोर से धक्का मारा और इसके साथ ही पूरा लण्ड अन्दर तक पेल दिया।
अब हमने मिल कर चोदना शुरु कर दिया और एक बार फिर से मोहिनी की सुख भरी सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगी। इस बार हमने पाँच मिनट तक ऐसे ही चोदा और फिर हमने अपनी पोजीशन बदल ली।यह कहानी आप हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर पढ़ रहे हैं
अब शेखावत चूत में लण्ड घुसा रहा था तो मै गाण्ड की मरम्मत कर रहा था।
और फिर कुछ ही देर में मोहिनी ने बोलना शुरु किया- आज चोद डालो इस चूत को और गाण्ड को ! मजे आ गये ! जोर से चोदो ! और जोर से !
इतना सुनते ही हम दोनों की स्पीड बढ़ गई। और हम जोर जोर से चोदने लगे।
मोहिनी की सिसकारियाँ निकलने लगी और वह और बोलने लगी- और तेज ! तेज-तेज !
इधर चूत और गाण्ड दोनों से ही आवाज आ रही थी- फ़्च, फ़च, फ़च !
और इसके साथ ही मोहिनी ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया और हमने अपने धक्को की रफ्तार और तेज कर दी ताकि हम भी एक साथ ही खाली हो जायें। अब मेरे चिल्लाने की बारी थी, आह निकला, आह निकला !
इतने में शेखावत की भी आवाज आई- मेरा भी निकला !
और हम दोनों ने अपना वीर्य छोड़ना शुरू कर दिया। मैंने मोहिनी की गाण्ड में सारा वीर्य छोड़ दिया और शेखावत ने चूत में।
तीनों के चेहरे पर सन्तोष झलक रहा था

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