हेलो दोस्तों, मेरा नाम सीमा है. मैं अभी 30 साल की हू. मेरा बदन दूध सा गोरा और गड्राई हुई जवानी है. मेरी कातिलाना फिगर लोगों पर कहर ढा देती है.
मेरी शादी को 10 साल हो चुके है. मेरे दो बच्चे है, और दोनो स्कूल में पढ़ते है. मेरे पति बिज़्नेस करते है, और बिज़्नेस के सिलसिले में ज़्यादातर बाहर रहते है. मैं मुंबई में अपने बच्चो के साथ रहती हू. यहाँ हमारा एक बहुत अछा फ्लॅट है.
मैं एक स्कूल में टीचर हू. बच्चो को स्कूल छ्चोढने के लिए एक ड्राइवर रखा हुआ है, जो बच्चो को स्कूल ले जाता है, और ले आता है. मैं भी उनके साथ ही स्कूल चली जाती हू.
बात कुछ दीनो पहले की है. स्कूल के प्रिन्सिपल सिर की बेटी का जनमदिन था. तब उन्होने सारे टीचर्स को अपने घर पर पार्टी में इन्वाइट किया था. पार्टी रात को थी, तो मैं अकेले नही जाना चाहती थी. फिर मेरे पति बोले की मैं ड्राइवर के साथ चली जौ.
मैं अपने बच्चो को भी ले जाना चाहती थी, पर बच्चे बोले की उन्हे नही जाना था. तब मैं ड्राइवर के साथ अकेली ही चली गयी.
मैं उसे दिन चमकती सितारों वाली ब्लॅक सारी पहनी हुई थी, जिसके भीतर से मेरी नाभि दिख रही थी. मैं उस दिन बहुत ही सुंदर लग रही थी. मेरा ड्राइवर श्याम मुझे बार-बार घूर कर देख रहा था. मैं पीछे की सीट पर बैठी थी, और वो मुझे साइड मिरर से घूर रहा था.
इसी तरह मैं उस दिन पार्टी में पहुँची. पार्टी में सारे माले टीचर्स और खुद प्रिन्सिपल सिर मुझे देख कर फ्लॅट थे. बार-बार वो लोग मेरे पास आने का बहाना ढूँढ रहे थे, और मुझसे बातें करते. मैं भी सभी से हस्स के बातें कर रही थी.
लगभग सारे टीचर शादी-शुदा थे, और अपनी बीवियों के साथ थे. इसलिए किसी की हिम्मत नही हो रही थी, की मुझे टच करे. पर वो लोग किसी ना किसी बहाने से मुझसे टकरा ही जाते.
मैं भी उस दिन काफ़ी शरारती हो गयी थी. सभी से हस्स कर बातें करती, और मज़ा ले रही थी. इसी तरह रात के 1:00 बाज गये, और पार्टी ख़तम हुई. मैं अपने ड्राइवर के साथ निकल गयी.
ड्राइवर मुझे अभी भी देख कर घूर रहा था. सुनसान रात थी, हम आधे डोर सफ़र कर चुके थे, की तभी हमारी कार खराब हुई. ड्राइवर ने कार को साइड में किया, और गाड़ी से उतार कर गाड़ी को देखने लगा.
जब तक ड्राइवर कार को ठीक कर रहा था, मैं उतार कर रात की ठंडी-ठंडी हवा का आनंद लेने लगी. हवा के झोंके मेरी सारी के पल्लू को उड़ा रहे थे. ड्राइवर मुझे तिरछी नज़रों से घूर रहा था. मैं भी उसे देख कर मुस्कुरा रही थी.
अचानक एक तेज़ हवा का झोंका चला, और मेरे बाल मेरे मूह पर लटक गये, और मेरी सारी पूरी तरह से उडद गयी. इसकी वजह से मेरे स्टअंन और मेरी नाभि सफेद चाँद की रोशनी में चमकने लगी. ड्राइवर खड़ा हो कर मेरी सफेद नाभि को देखने लगा. मैं बाल और सारी को ठीक की.
मैं ड्राइवर को देखी. हम दोनो की नज़रें मिल गयी. वो शर्मा कर फिर से गाड़ी ठीक करने लगा. मैं वैसे ही खड़ी रही और बहुत ही मधुर स्वर में बोली-
मैं: गाड़ी ठीक होने में और कितना समय लगेगा श्याम?
श्याम की उमर लगभग 35 वर्ष थी. वो शादी-शुदा था, और गाओं से आया था. उसकी बीवी बच्चे गाओं में रहते है. श्याम काँपते हुए तिरछी नज़रों से मुझे घूरते हुए बोला-
श्याम: बस मेंसाब्, थोड़ी देर में ठीक हो जाएगी.
मैं मुस्कुराते हुए उसकी तरफ आयेज बढ़ी और बोली: मैं कुछ मदद कर डू क्या?
ये बोलकर उसके पास जैसे ही गयी, मैं लड़खड़ा कर गिरने लगी. तभी उसने मुझे अपनी बाहों में थाम लिया. उसका एक हाथ मेरी गोरी नाभि पर और दूसरा हाथ मेरी नंगी पीठ पर गया. मेरी स्टअंन उसके सीने से चिपक गये थे. मेरी गरम साँस उसके चेहरे को गरम कर रही थी.
मैं शरम से नीचे देख रही थी, और वो मुझे लगातार घूर रहा था. जब थोड़ी देर तक ऐसे ही वो मुझे पकड़े रहा, तब मैने उसकी आँखों में देखने की हिम्मत की. वो मुझे कांवासना की नज़रों से देख रहा था. ऐसा लग रहा था की अभी वो मुझे खा जाएगा.
जब हम दोनो की नज़रें मिली, तो वो घबराते हुए मुझे सीधा खड़ा किया.
फिर वो बोला: सॉरी में साब, ग़लती हो गयी (वो काँपते हुए स्वर में बोल रहा था).
मैं उसके कंधे पर हाथ रख दी और बोली: कोई बात नही श्याम, तुमने तो मेरी मदद की है. इसमे सॉरी की कोई बात नही है.
मेरे हाथ उसके बदन से टच होते ही वो काँप रहा था. वो काँपते हुए स्वर में ही बोला-
श्याम: में साब, चलिए गाड़ी ठीक हो गयी है.
हम दोनो जाने के लिए मुड़े, तो एक बार फिर से टकरा गये, और वो मुझे सॉरी बोलते हुए, जेया कर जल्दी से गाड़ी में बैठ कर गाड़ी स्टार्ट कर दिया. बाहर की ठंडी हवा और सुनसान अंधेरी रात मेरे जिस्म में एक अजीब सा नशा पैदा कर दी थी. ये अकेला मर्द मुझे ना जाने क्यूँ अपना सा लगने लगा था.
गाड़ी घर की तरफ चल दी. मैं उससे काफ़ी मादकता भारी आवाज़ में बात कर रही थी. वो भी मुझसे बात करते हुए काँप रहा था. मैं उसकी बीवी के बारे में पूच रही थी.
मैं काफ़ी मधुर स्वर में बोली: श्याम तुम्हे तुम्हारी बीवी की याद नही आती क्या?
तब श्याम ने काफ़ी पतले स्वर में बोला: आती है में साब, रोज़ रात को उसे याद करता हू. जैसे-तैसे करके रात काट-ती है.
मैं इस बार काफ़ी कामुक आवाज़ में बोली: तुम्हारी रात तो बहुत ही तकलीफ़ में गुज़रती होगी श्याम. तुम ठहरे गाओं के, तुम्हे तो रोज़ अपने बीवी के साथ ही रहने की आदत होगी. यहाँ अकेले ना जाने कैसे रहते होगे तुम?
ये बोलते हुए मैं अपने हाथ को उसके कंधे पर रख दी थी. और उसे एक सहानुभूति अनुभव हो रही थी. वो काँप रहा था. उसने कार को साइड में लगाया, और मेरी तरफ कामुक नज़रों से देखते हुए बोला-
श्याम: क्या बतौ में साब, आप लोग तो अपने पति और बच्चो के साथ घर पर रहते हो. हम ड्राइवर की अकेली रात कैसे काट-ती है ये आप लोग नही समझ सकते.
ये बात को श्याम ने काफ़ी कोमलता से कही थी. मैं उसकी तरफ कोमल नेत्रों से देख रही थी, और अब अपने हाथ को उसके कंधे से हटा कर उसके गालों को सहलाते हुए, बालों में उलझ गयी. मैं धीरे-धीरे उसके करीब आ रही थी. वो भी धीरे-धीरे मेरे करीब आ रहा था. हम दोनो की साँसे टकराने लगी थी.
मैं उसकी आँखों में देखते हुए बोली: श्याम क्या तुम मुझे आज रात अपनी बीवी स्वीकार करोगे?
इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. कहानी की फीडबॅक कॉमेंट करके दे.